आपका परिचय

गुरुवार, 24 मई 2012

अविराम के अंक

अविराम साहित्यिकी 
 (समग्र साहित्य की समकालीन  त्रैमासिक पत्रिका) 

अंक : 2 / अप्रैल-जून 2012  

प्रधान सम्पादिका : मध्यमा गुप्ता
 अंक सम्पादक : डा. उमेश महादोषी 
सम्पादन परामर्श : सुरेश सपन
 मुद्रण सहयोगी : पवन कुमार


अविराम का यह मुद्रित अंक रचनाकारों को  २५ फ़रवरी २०१२ भेज दिया है. अन्य को ०५ मार्च २०१२ तक  प्रेषित किया जायेगा। कृपया अंक प्राप्त होने की प्रतीक्षा १५ मार्च  २०१२ तक करने के बाद ही न मिलने पर पुन: प्रति भेजने का आग्रह करें। सभी रचनाकारों को दो-दो प्रतियाँ अलग-अलग डाक से भेजीं जा रही हैं। इस मुद्रित अंक में शामिल रचना सामग्री और रचनाकारों का विवरण निम्न प्रकार है-


प्रस्तुति  :  प्र. सम्पादिका मध्यमा गुप्ता का पन्ना (आवरण 2)

लघुकथा के स्तम्भ :  डॉ. श्याम सुन्दर दीप्ति(3) व सूर्यकान्त नागर (6)।

अनवरत-1 :  राम मेश्राम (8), प्रो. सुधेश व डॉ. प्रद्युम्न भल्ला (9), डॉ. सुरेश उजाला व शैलेन्द्र चाँदना (10), डॉ. गार्गीशरण मिश्र ‘मराल’ व खेमकरण सोमन (11), राजेश आनन्द ‘असीर’ व डॉ. महाश्वेता चतुर्वेदी (12) एवं डॉ. चन्द्रजीराव इंगले व कैलाश गिरि गोस्वामी (13) की काव्य रचनाएं।

सन्दर्भ : युवा पीढ़ी की मानसिकता पर टिप्पणी करती अशोक आनन व किशन लाल शर्मा (14) एवं प्रभुदयाल श्रीवास्तव व कृष्णचन्द महादेविया (15) की लघुकथाएं।
आहट :  डॉ. मिथिलेश दीक्षित एवं ज्योत्सना शर्मा की क्षणिकाएं (16)।

कथा-कहानी :  मुकेश नौटियाल की कहानी ‘दुल्ली चूड़ियारिन’ (17) एवं देवेन्द्र कुमार मिश्रा की लघु कहानी ‘अन्ना के आन्दोलन के बीच....’ (21)। 
कविता के हस्ताक्षर:  रेखा चमोली (23) एवं खदीजा खान (25)।

विमर्श :  ‘केवल लघु आकार ही लघुकथा की पठनीयता का प्रमुख आधार नहीं है’: बलराम अग्रवाल/शोभा भारती द्वारा बलराम अग्रवाल का साक्षात्कार (26)।

व्यंग्य-वाण :  ओमप्रकाश पाण्डे ‘मंजुल’ का व्यंग्यालेख (32)।

कथा प्रवाह :  पूरन मुद्गल (33), राजेन्द्र नागर ‘निरन्तर’ (34), निर्मला सिंह (35), डॉ. कमलेश मलिक (36), किशोर श्रीवास्तव व गांगेय कमल (37), मोह.मुइनुद्दीन ‘अतहर’ व सुनील कुमार चौहान (38),देवी नागरानी व गोवर्धन यादव (39) एवं सुधीर मोर्या ‘सुधीर’ (40) की लघुकथाएँ।

अनवरत-2:  विजय कुमार सत्पथी (41), शिव डोयले व निर्मला अनिल सिंह (42), मो. क़ासिम खाँन ‘तालिब’ व सुनील कुमार परीट (43),एवं डॉ. नौशाद ‘सुहैल’ दतियावी (44) की काव्य रचनाएं।

किताबें :  पसीने में नहाई कविताएं: डॉ. वेदप्रकाश अमिताभ द्वारा महावीर रंवाल्टा के काव्य संग्रह ‘आकाश तुम्हारा नहीं है’ (45) एवं हिन्दी हाइकु-संसार की प्रामाणिक झांकी: यतीश चतुर्वेदी ‘राज’ द्वारा डॉ. मिथिलेश दीक्षित सम्पादित ‘‘सदी के प्रथम दशक का हिन्दी हाइकु-काव्य’ (46) की परिचयात्मक समीक्षाएं।

सम्भावना :  दो सम्भावनाशील कवि- अमर कुमार चंद्रा एवं रजनीश त्रिपाठी (47)।

चिट्ठियाँ:  अविराम के गत अंक पर प्रतिक्रियाएं (48)।

गतिविधियाँ :  संक्षिप्त साहित्यिक समाचार (50)।

प्राप्ति स्वीकार :  त्रैमास में प्राप्त विविध प्रकाशनों की सूचना (52)।


इस अंक की साफ्ट (पीडीऍफ़) प्रति ई मेल (umeshmahadoshi@gmail.com) अथवा  (aviramsahityaki@gmail.com)  से मंगायी जा सकती है।

इस अंक के पाठक अंक की रचनाओं पर इस विवरण के नीचे टिप्पणी कालम में अपनी प्रतिक्रिया स्वयं पोस्ट कर सकते हैं। कृपया संतुलित प्रतिक्रियाओं के अलावा कोई अन्य सूचना पोस्ट न करें। 


6 टिप्‍पणियां:

  1. अप्रैल-जून 2012 अंक पर प्रतिक्रियायें
    भगवान अटलानी, डी-183, मालवीय नगर, जयपुर-302017 (राज.)
    .....‘अविराम‘ का अंक 2/अप्रैल-जून 2012 अं यथासमय मिल गया था।....पत्रिका को स्तरीय बनाये रखें। मेरी अनन्त शुभकामनाएं।

    अमृतलाल मदान, 1150/11, प्रोफेसर कॉलोनी, कैथल-136027 (हरि.)
    .....अविराम निरन्तर मिलती रही है एवं मुझे आपकी एवं आपकी टीम की जिजीविषा से चकित भी खूब करती रही है। आज के विकट समय में 52-54 पृष्ठों की एक समग्र पत्रिका निकालते रहना आप सबकी साहित्यिक-प्रतिबद्धता को दर्शाता है।...अप्रैल-जून 2012 अंक में विमर्श (बलराम अग्रवाल), कथा-प्रवाह (विशेष पूरन मुद्गल), व्यंग्य वाण (ओम प्रकाश मंजुल), लगभग सभी ग़ज़लें एवं कविताएं एवं लघुकथा के सतंभ की सभी लघुकथाएं संवेदन एवं चयन की दृष्टि से प्रशंसनीय बन पड़ी हैं। पुस्तकों की समीक्षा भी पर्याप्त रूप से न्याय करती प्रतीत हुई।....

    हितेश व्यास, 1-मारुति कॉलोनी, पंकज होटल के पीछे, नयापुरा, कोटा-324001 (राज.)
    .....छप्पन पृष्ठीय लघु कलेवर में आपने साहित्य के छप्पन भोग परोस दिये हैं। अभी अभी जीमकर उठा हूँ। डॉ. श्याम सुन्दर दीप्ति की लघुकथा ‘मां की जरूरत’ में जरूरत होते हुए भी मां को इस्तेमाल न करना दिखाया गया है। परन्तु इनकी ‘स्वागत’ लघुकथा क्रान्तिकारी है, कल्पना का साहस अनुकरणीय है। काश! सभी कल्पनाएं अपने अफसरों को ऐसा सबक सिखा पाती। सूर्यकांत नागर की ‘नई पौध’ लघुकथा नई पीढ़ी के नये सोच और नये पतन को दर्शाती है। राम मेश्राम की ग़ज़लें जीवन्त और क्रान्तिधर्मी हैं। उनका यह शेर उनकर समस्त ग़ज़लों पर चस्पाँ है- ‘चोट दे गहरी, चाहे लगे सौ साल में; जिन्दगी भर दंश शब्दों का कसकना चाहिए’। डॉ. प्रद्युम्न भल्ला की ग़ज़लों में संभावनाएं हैं, डॉ. सुरेश उजाला का दसवां हाइकु शेष नौ पर भारी है-‘भावों ने चूमे/गीत ग़ज़ल बन/शब्दों के होंठ’। राजेश आनन्द असीर की ये प्रार्थना ईश्वर सुन ले- ‘तू ही रख बस लाज मेरी अब मेरे मौला, इक मिसरा तुझसे लासानी माँग रहा हूँ।’ डॉ. महाश्वेता चतुर्वेदी का ये शेर आशावादी है, ‘कितनी ही आँखें दिखाएं हादिसे, हम नहीं छोड़ेंगे अपना हौसला’। किशन लाल शर्मा की लघुकथा ‘कलयुग की मां’ शीर्षक के अनुरूप कलयुगी सुझाव देती है। प्रभुदयाल श्रीवास्तव ने लघुकथा ‘हवा का रुख’ में ईश्वर के आधुनिकीकरण को रेखांकित किया है। ज्योत्सना शर्मा की क्षणिका ‘पीर’ में महाकाव्यत्व है। मुकेश नौटियाल ने यद्यपि शब्द ज्यादा खर्च किये हैं पर कहानी ‘दुल्ली चूड़ियारिन’ के रूप में एक साहसी अविस्मरणीय सकारात्मक किरदार दिया है। देवेन्द्र कुमार मिश्रा की कहानी ‘अन्ना के आन्दोलन के बीच’ एक स्थूल शीर्षक की सूक्ष्म कथा है। रेखा चमोली ने कविता ‘आओ हमारे साथ’ में पहाड़ का औपचारिक इस्तेमाल न करके सृजनात्मक विस्फोट किया है। ‘ब्रेक के बाद’ कविता में ईश्वर के नींद में चले जाने की अद्भुत कल्पना है और कविता ‘बस एक दिन’ में स्त्री स्वातन्त्रय का मौलिक उद्घोष है। बलराम अग्रवाल की शोभा भारती से बातचीत में बलराम के उत्तर लघुकथा का संविधान रचते हैं। हर लघुकथाकार को गीता की तरह इसे रखना चाहिए। पूरन मुद्गल की लघुकथा ‘बाहर भीतर’ में अन्तर्द्वन्द्व श्लाघनीय है। उनकी लघुकथा ‘अविश्वास’ शीर्षक के विपरीत विश्वासी है। राजेन्द्र नागर ‘निरन्तर’ की लघुकथा ‘और नारे लगते रहे’ में व्यावहारिकता है। लघुकथा ‘औकात’ शीर्षक को सिद्ध करने वाली है। निर्मला सिंह की लघुकथा ‘नाटक’ उनके लिए उदाहरण है, जो सकारात्मक कथाओं का अभाव बतलाते हैं। डॉ. कमलेश मलिक की लघुकथा ‘पड़ोसी’ में कथनी-करनी का अन्तराल व्यक्त है। किशोर श्रीवास्तव की लघुकथा ‘माहौल’ पढ़कर ऐसी ही सोच वाली हसन जमाल की कहानी का स्मरण हो आया। बधाई। गांगेय कमल की ‘तने का बोझ’ एक बोध कथा होते हुए भी सत्य के निकट है। गोवर्धन यादव ने ‘छोटी सी चिड़िया’ में आज के दफ्तरों का क्लोजअप लिया है।

    सालिग्राम सिंह ‘अशान्त’, एस.पी.कोठी के पीछे, एस.डी.ओ.रोड, हाजीपुर, वैशाली-844101 (बिहार)
    .....‘अविराम साहित्यिकी’ आपके सम्पादन में उत्तरोत्तर प्रगति-पथ पर अग्रसर हो रही है। मेरी शुभकामनाएँ पत्रिका और पत्रिका-परिवार के साथ हैं।.....

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  2. अप्रैल-जून 2012 अंक पर कुछ और प्रतिक्रियायें

    डॉ. रामसनेही लाल शर्मा ‘यायावर’, 86, तिलक नगर, बाईपास रोड, फ़िरोज़ाबाद-283203 (उ.प्र.)
    .....लघुकथा आज की अत्यन्त लोकप्रिय व समयानुकूल विधा है। आपने श्रेष्ठ, युगीन यथार्थ का चित्रण करने में सक्षम मानवीय संवेदनाओं को उकेरने वाली प्रभावी लघुकथायें प्रस्तुत की हैं। ‘स्वागत’ जहाँ नारी चेतना के आत्मविश्वास की कथा है, वहीं ‘नई पौध’ में युवा पीढ़ी की संस्कारहीनता का नग्न चित्र है। ‘माँ की जरूरत’ रिश्तों के भीतर की तरलता को वाणी देती है। कविताओं में रा मेश्राम और प्रद्युम्न भल्ला की गजलें ठीक लगीं। ‘दुल्ली चुड़ियारिन’ भावपूर्ण कहानी है। कुल मिलाकर अंक पठनीय एवं संग्रहणीय है।....

    डॉ. किशन तिवारी, 34, सेक्टर-9ए, साकेत नगर, भोपाल-462024
    ...... अविराम साहित्यिकी प्राप्त हुई। पत्रिका का प्रकाशन और सामग्री दोनों ही बहुत सुन्दर हैं। पत्रिका समाज के तमाम उन पहलुओं पर दृष्टिपात करती है, जो जो आज के दस कठिन दौर में महत्वपूर्ण हैं।....

    राजेन्द्र बहादुर सिंह ‘राजन’, ग्राम-फत्तेपुर, पो.-बेनीकामा, जिला: रायबरेली-229402 (उ.प्र.)
    ...... अविराम का अप्रैल-जून 2012 अंक प्राप्त हुआ। इस लघु पत्रिका में आपने गद्य-पद्य की प्रायः सभी विधाओं की सशक्त, स्तरीय सामग्री देकर गागर में सागर भर दिया है। साधुवाद।.....

    मनोज अबोध, एफ-1/7, ग्राउन्ड फ्लोर, सेक्टर-11, रोहिणी, नई दिल्ली-110085
    ......रुड़की जैसी जगप्रसिद्ध पा्रैद्योगिक एवं साहित्यिक नगरी से गागर में सागर स्वरूपी श्रेष्ठ साहित्यिक पत्रिका के प्रकाशन हेतु बधाई स्वीकारें! निसन्देह शीर्षक वाक्य को सार्थक करते हुए पत्रिका समग्र को समाहित किए हुए है। यह उत्तरेत्तर विकास बिंदु का स्पर्श करे, ऐयी कामना है।.....

    कन्हैयालाल अग्रवाल ‘आदाब’, 89, गवालियर रोड, नौलक्खा, आगरा-282001 (उ.प्र.)
    .....ग़ज़ल, कविता, दोहे, लघुकथा, कहानी सबको समेटे हुए छोटे कलेवर में यह प्रशंसनीय प्रयास है। शोभा भारती द्वारा बलराम अग्रवाल से लघुकथा सम्बन्धी साक्षात्कार नवोदित लघुकथा लेखकों का मार्गदर्शन करेगा। इस विधा का इतिहास और उसके नये पुराने लेखकों सबकी पूरी जानकारी इसमें है।......

    ज़मीर दरवेश, ई-13/1, ग़ज़लकदा, लक्ष्मी विहार, हिमगिरि कॉलोनी, मुरादाबाद-244001 (उ.प्र.)
    अप्रैल-जून 2012 की अविराम देखने का सुअवसर प्राप्त हुआ। बहुत अच्छी पत्रिका है, बधाई।....

    गांगेय कमल, शिवपुरी, जगजीतपुर, कनखल-249408, हरिद्वार (उत्तराखंड)
    .....अंक-2 प्राप्त हुआ, पूर्व की भांति रुचिकर साहित्यिक लेख, कविताएं, लघुकथाएं एवं कथाएं आदि ‘छोटा पैकेट-बड़ा माल’ को सार्थक करता हुआ। लघुकथा के बिषय में श्री बलराम अग्रवाल का साक्षात्कार, मुकेश नौटियाल की मर्मस्पर्शी ‘दुल्ली चूड़ियारिन’ कथा विशेष रुचिकर लगे, इसके लिए बधाई।....

    गुरुप्रीत सिंह, बगीचा रायसिंह नगर-335051, जिला श्रीगंगानगर (राजस्थान)
    .....प्रस्तुत अंक में डॉ. श्याम सुन्दर दीप्ति की ‘स्वागत’ लघुकथा एक सकारात्मक रचना है। अशोक आनन की ‘अपमान’, मुकेश नौटियाल की ‘दुल्ली चुड़ियारिन’, देवेन्द्र मिश्रा की ‘अन्ना के...’, निर्मला सिंह की ‘नाटक’ अच्छी लगी तो काव्य में अमर कुमार चन्द्रा, निर्मला अनिल सिंह, विजय सत्पथी, रेखा चमोली एवं खेमकरण ‘सोमन’ की रचनाएँ उत्तम हैं।...

    मो. कासिम खान ‘तालिब’, 14, अमीर कम्पाउण्ड, बीएनपी रोड, देवास (म.प्र.)
    .....पत्रिका में गीत, ग़ज़ल, हाइकु, कविता, लघुकथा सभी कुछ सराहनीय है। राजेरूा आनन्द ‘असीर’ और मुकेश नौटियाल की रचनाओं ने काफी प्रभावित किया। पत्रिका की विशेषता यह है कि रचनाओं में मिसप्रिंट नहीं है।...

    विवेक सत्यांशु, 14/12, शिवनगर कालोनी, अल्लापुर, इलाहाबाद-211006 (उ.प्र.)
    .....यह अंक भी आपने अच्छा निकाला है, स्थापित नामों के बजाय नये हस्ताक्षर को मौका देकर बहुत बड़ा काम कर रहे हैं।...

    धर्मेन्द्र गुप्त ‘साहिल’, के-3/10ए, माँ शीतला भवन, गाय घाट, वाराणसी-221001 (उ.प्र.)
    .....पत्रिका पढ़ने को आद्योपांत पढ़ने के बाद मैं यह कह समता हूँ कि आपकी सम्पादकीय दृष्टि पैनी है। रचना चयन बहुत ईमानदारी से किया गया है। लघुकथाएँ, कविताएँ, समीक्षाएँ एवं अन्य स्तम्भ प्रभावपूर्ण हैं। मध्यमा गुप्ता जी की आर्थिक आधार को लेकर चिन्ता समीचीन है। लघुपत्रिकाएँ दीर्घजीवी हों, इसके लिये आर्थिक कोष एवं विज्ञापन अति आवश्यक है। रचनाकारों से अर्थ सहयोग एक सीमा तक प्राप्त हो सकता है। सभी रचनाकार आर्थिक रूप से सशक्त नहीं होते।....

    विजय तन्हा, सम्पादक: प्रेरणा, पुवाँया, शाहजहाँपुर (उ.प्र.)
    .....अविराम के अंक प्राप्त होजे रहते हैं, जिसमें आपके कुशल सम्पादन का दर्शन होता है। पत्रिका में रचनाओं का चयन अच्छा है।...

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  3. अप्रैल-जून 2012 अंक पर कुछ और प्रतिक्रियायें

    रामनिहाल गुँजन, नया शीतला टोला, आरा-802301(बिहार)
    .....अप्रैल-जून 2012 अंक यथासमय प्राप्त हुआ। इसमें प्रकाशित लघुकथाएँ, ग़ज़लें, हाइकु, कविताएं, लेख व टिप्पणियां सब कुछ पठनीय है। अगला अंक और बेहतर निकलेगा, इसी आशा के साथ...

    चन्द्रसेन विराट, 121,बैकुंठधाम, कॉलौनी के पीछे, इन्दौर-452018(म.प्र.)
    .....एक विधा पर विशेषांक (लघुकथा पर विशेष सामग्री) निकालते हैं आप। यह अच्छा है। उस विधा के प्रतिनिधि हस्ताक्षर एक साथ देखने में आते हैं। विमर्श में श्री बलराम अग्रवाल का साक्षात्कार भी पठनीय है। लघुकथा मे श्री अग्रवाल का बड़ा काम है। उनसे और महत्वपूर्ण जटिल मुद्दों पर प्रश्न करना बेहतर होता। ग़ज़लकार राम मेश्राम की तेज तर्रार ग़ज़लें हैं। सूर्यकान्त नागर की तीन पठनीय लघुकथाएँ भी हैं। कुल मिलाकर सामग्री पठनीय है।
    शिवमंगल सिंह ‘मंगल’, ई-215, सेक्टर-ई, एल.डी.ए. कॉलोनी, कानपुर रोड, लखनऊ-226012(उ.प्र.)
    .....लघुकथा ‘हवा का रुख’, कहानी ‘दुल्ली चुड़ियारिन’ तथ्रर डॉ. सुरेश उजाला के हाइकु बेहद पसन्द आये। सभी सामग्री स्तरीय है। कविता के हस्ताक्षर रेखा चमोली एवं खदीजा खान को उनकी कविताओं के लिए विशेष साधुवाद।...
    डॉ.एम.आई साजिद,एन.पी.उर्दू पाइमरी स्कूल नं.4 के सामने,जिया कॉलोनी, खामगाँव-444303,जिला बुलदाना (महा.)
    ....अविराम अच्छे साहित्यकारों की रचनाओं से सजाया गया है। कहा जा सकता है कि आपने समुन्दर को कूज़े (कटोरे) में बन्द करने की कोशिश की है, जो हर तरह सराहनीय है। आपने ‘अविराम’ के तमाम पेजेज को पूरी तरह भर दिया है। कहीं कोई खाली जगह नहीं रखी, शब्द भी बहरेत बारीक हैं, फोटोज, डिजाइन इतियादी कहीं नहीं। सूचिका भी (इन्डेक्स) नहीं दि गई है। जबकि यह सब जरूरी है।(मेरी बात का बुरा मत मानियेगा) मेरे पास बहोत सारी एक से बढ़कर एक हिन्दी पत्रिकाएँ निरन्तर आती हैं, ऊनमें मेरी भी रचनाएँ भी छपती हैं। बस उसी आधार पर कह रहा हूँ।...

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  4. अप्रैल-जून 2012 अंक पर कुछ और प्रतिक्रियायें

    दिलीप सिंह ‘दीपक’, 1/111, हाउसिंग बोर्ड, सिरोही-307001 (राज.)
    ....दोनों अंको को आद्योपांत पढ़ा। अच्छे लगे। लघुकथा के स्तम्भ में डॉ. श्याम सुन्दर दीप्ति व सूर्यकान्त नागर की लघुकथायें प्रभावी हैं। अशोक आनन की ‘अपमान’, किरूान लाल रूार्मा की ‘कलयुग की माँ’, प्रभुदयाल श्रीवास्तव की ‘हवा का रुख’ त्था कृष्ण चन्द्र महादेविया की ‘समर्पण की कीमत’ आज की युवा पीढ़ी की मानसिकता की व्याख्या करती है। साधुवाद! मुकेश नौटियाल की कहानी ‘दुल्ली चुड़ियारिन‘ पहाड़ी जन-जीवन का सजीव चित्रण है। पूरन मुद्गल, राजेन्द्र नागर निरन्तर, निर्मला सिंह, डॉ. कतलेश मलिक, किशोर श्रीवास्तव, गांगेय कमल, मोह. मुइनुद्दीन ‘अतहर’, सुनील कुमार चौहान, देवी नागरानी, गोवर्धन यादव की लघुकथायें भी मन-मस्तिष्क को उद्देलित करती हैं। ‘केवल लघुकथाकार ही लघुकथा की पठनीयता का प्रमुख आधार नहीं है’ - सुश्री शोभा भारती का बलराम अग्रवाल से साक्षात्कार ज्ञानवर्द्धक है, सरस है। लघुकथा व समकालीन लघुकथा के अन्तर को प्रभावी तरीके से विभेदीत किया गया ह।। लघुकथा को समझने में यह साक्षात्कार महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह करता है।
    राम मेश्राम, डॉ. महाश्वेता चतुर्वेदी, प्रो. सुधेश व डॉ. प्रद्युम्न भल्ला की ग़ज़लें प्रभावी हैं। कविताएं स्तरीय हैं। नवीन किताबों के बारे में जानकारी समीक्षा द्वारा प्राप्त हुई।....

    प्रो. शामलाल कौशल, म.न.ं 975-बी/20, ग्रीन रोड, रोहतक-124001 (हरि.)
    ....पत्रिका की विभिन्न लघुकथायें, कविताएं तथा ग़ज़ले उच्चस्तरीय रहीं। डॉ. श्यामसन्दर दीप्ति की लघुकथा ‘मां की जरूरत’ मां के सम्मान हेतु उचित मार्गदशन करने वाली है। किशन लाल शर्मा की लघुकथा ‘ऐसी मांओं का पर्दाफाश करने वाली है जो अपनी फिगर को बचाये रखने की खातिर संतान ही उत्पन्न नहीं करना चाहती। पूरन मुद्गल की लघुकथा ‘बाहर भीतर’ उन लोगों पर कटाक्ष करती है, जो अपने में सुधार किये बिना परमात्मा से उनके साथ सब ठीक-ठाक करने की प्राथना करते हैं। देवी नागरानी की लघुकथा ‘भिक्षा पात्र’ का संदेश है कि बदलता हुआ वक्त दानी को भिक्षुक तथा भिक्षुक को दानी बना देता है। प्रो. सुधेश, डॉ. प्रद्युम्न भल्ला तथा डॉ. नौशाद ‘सुहैल’ दतियावी की ग़ज़ल काबिले तारीफ लगी। पत्रिका के इस अंक की अन्य रचनायें भी इसे चार चांद लगाने वाली हैं।....़

    डॉ. मिर्ज़ा हसन नासिर, जी-2,लोरपुर रेजीडेन्सी, डॉ.बैजनाथ रोड, न्यू हैदराबाद, लखनऊ-226007 (उ.प्र.)
    ....वर्तमान परिवेश तथा समकालीन सामाजिक जीवन पर आधारित लघुकथाएँ मज़ेदार हैं, व्यंग्य दमदार और अनेक कविताएँ असरदार हैं। पुस्तक समीक्षएँ सटीक हैं। बाँचकर आह्लादित एवं अभिभूत हुआ। आशा है कि यह साहित्यिक पत्रिका प्रगति-पथ पर अविराम अग्रसर होती रहेगी।...

    सनातन कुमार बाजपेयी, पुराना कछपुरा स्कूल, गढ़ा, जबलपुर-482003 (म.प्र.)
    ....गीत, ग़ज़ल, कहानी, लघुकथाओं से सजा यह अंक अच्छा बन पड़ा है। श्री अशोक आनन की लघुकथाएँ अच्छी लगीं। डॉ. मराल का बसन्त गीत प्रभावशाली है। डॉ. महाश्वेता चतुर्वेदी की ग़ज़ल अच्छी लगी। अन्य सभी सामग्री भी श्रेष्ठ है।...

    डॉ. अनिल शर्मा, म.नं.82, मुहल्ला गुजरातियान, धामपुर-246761 जिला बिजनौर(उ.प्र.)
    ....अविराम की प्रति धामपंर में श्री आर्यभूषण गर्ग जी के यहाँ देखने को मिली। सचमुच सुखद लगा। पत्रिका परिवार को बधाई। इसी नाम (अविराम) से हम धामपुर से एक साप्ताहिक पत्र निकालते थे। मैं प्रबन्ध संपादक था। अब गत 5 वर्षों से यह बंद है।...

    संतोष खरे, 7, राजेन्द्रनगर, सतना-485002 (उ.प्र.)
    ....पत्रिका का अंक-2 देखकर ज्ञात हुआ कि यह पत्रिका अभी शैशव अवस्था में है। मैं इसके विकास और प्रगति के पति अपनी शुभकामनाएयें देता हूँ। इस छोटी सी पत्रिका में आपने ढेर सारी लघुकथायें, कवितायें तथा विमर्श समेटा है।...

    डॉ. राम अवतार पाण्डेय, श्री राम भवन, के. 57/30, दारानगर, वाराणसी (उ.प्र.)
    अविराम का अंक 2 (अप्रैल जून 2012) मिला। अभिराम लगा। अन्तर्निहित सामग्री भी अच्छी लगी। साहित्य सेवा में प्रयास स्तुत्य है।....

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  5. अप्रैल-जून 2012 अंक पर कुछ और प्रतिक्रियायें

    डॉ. ए. कीर्तिवर्द्धन, विद्यालक्ष्मी निकेतन, 53, महालक्ष्मी एनक्लेब, जानसठ रोड,मुजफ्फरनगर-251001 (उ.प्र.)
    ....वर्तमान दौर में लघु पत्र-पत्रिकाओं का संपादन/प्रकाशन कठिनतर कार्य है। मगर यह जुनून ही है कि कदम रुकते नहीं। ‘‘मैं दीये में तेल की जगह अपना लहू जलाता हूँ।/जलता हूँ रात भर, सुबह को टिमटिमाता हूँ।/जानता हूँ मिट जाना है नियति मेरी/फिर भी खुश हूँ, मैं रात भर तम मिटाता हूँ।’’ जी हाँ, साहित्यकार, लघु पत्र/पत्रिका के संपादक अपना सर्वस्व लुटाकर भी समाज से बुराइयों का तम मिटाने को संकल्पबद्ध हैं. और आप भी उसमें प्रमुख हैं। आप जैसे साहित्य प्रेमियों के कारण ही हिन्दी का भविष्य उज्ज्वल है।
    अप्रैल-जून अंक मेरे सम्मुख है। ‘लघुकथा के स्तम्भ’ में अनेक सशक्त हस्ताक्षरों को पढ़ने का अवसर मिला। इसं अंक में युवा मानसिकता पर प्रस्तुति, वर्तमान का साक्ष्य है। कविता, ग़ज़ल अच्छे लगे। चित्रांकन ने पत्रिका को गरिमा प्रदान की है। विमर्श के अन्तर्गत बलराम जी को पढ़ना, लघुकथा की बारीकियों को समझना अच्छा लगा। शोभा जी ने अपने साक्षात्कार में अनेक पहलुओं को छुआ है। समाचार, पुस्तकें, पत्र-पत्रिका, चिट्ठियाँ देखने से पता चलता है कि ‘अविराम’ का फलक बहुत विशाल हो चुका है।...

    संतोष सुपेकर, 31, सुदामानगर, उज्जैन-456001 (म.प्र.)
    ....लगता है हर अंक में गागर में सागर भरने को आप प्रतिबद्ध हैं। लघुकथा के स्तम्भ के अन्तर्गत डॉ. श्यामसुन्दर दीप्ति की रचनाएँ ‘‘माँ की जरूरत’’ और ‘‘स्वागत’’ तथा सूर्यकांत नागर की ‘‘महत्वाकांक्षा’’ तथा ‘‘नई पौध’’ बंधी हुई सशक्त रचनाएँ हैं, जो एक नए यथार्थ की तीव्र अभिव्यक्ति हैं। राम मेश्राम की ग़ज़लें एवं डॉ. चन्द्राजीराव इंगले की कविता सीधे-सीधे आज के जीवन-संघर्ष को स्वर देती हैं। इस अंक में लघुकथा को लेकर सर्वाधिक सचेत सम्माननीय हस्ताक्षरों में से एक, श्री बलराम अग्रवाल का साक्षात्कार देकर आपने इस विधा के सर्जकों, आलोचकों पर महान उपकार किया है। इस साक्षात्कार से श्री अग्रवाल के चिंतन, कृतित्व तथा रचना प्रक्रिया के बारे में भी आसानी से जाना जा सकता है। अन्य लघुकथाओं में श्री सुधीर मौर्य ‘सुधीर’ की ‘‘हड़ताल का अर्थ’’ सीधी, प्रभावशाली, बेबाक रचना है।.....

    डॉ. यशोदा प्रसाद सेमल्टी,जोशी भवन, वार्ड नं.3, आनन्दनगर, ज्ञानसू-249193, उत्तरकाशी (उ.खंड)
    ....आशा है कि यह पत्रिका जल्दी ही राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं की अग्रिम पंक्ति में सम्मिलित होगी। वास्तव में आप जैसे साहित्य के साधक एवं संस्कृति के संरक्षक हिन्दी के स्वर्णिम भविष्य के लिए कार्य कर रहे हैं....। पत्रिका के छोटे स्वरूप में साहित्य की अपार सम्भावनाएँ समाहित हैं।...

    मदन मोहन उपेन्द्र, ए-10, शान्तिनगर, मथुरा (उ.प्र.)
    ....इस अंक में श्री सूर्यकांत नागर की तीन लघुकथायें एवं सर्वश्री मेश्राम, डॉ. सुधेश एवं श्री असीर की ग़ज़लें, डॉ. मिथिलेश दीक्षित की क्षणिकायें प्रभावी एवं संग्रहणीय लगी। आपका श्रमशील सम्पादन एवं लगनशीलता ही पत्रिका को दस्तावेजी बना रही है।...

    ज्ञानेन्द्र साज, 17/212, जयगंज, अलीगढ़-202001 (उ.प्र.)
    .....छोटी सी पत्रिका में भरपूर सामग्री, वह भी स्तरीय परोसकर अंक को महत्वपूर्ण बना दिया है। यही आपका संपादन कौशल है।...

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  6. अप्रैल-जून 2012 अंक पर कुछ और प्रतिक्रियायें

    रामस्वरूप मूंदड़ा, पथ 6 द 489, रजत कॉलोनी, बून्दी-323001 (राज.)
    .....द्वितीय अंक ही इतना सशक्त लगा कि किसी भी पुरानी पत्रिका से तुलना की जा सकती है। जाने-पहचाने कवि व कहानीकारों से भरा पूरा परिवार मौजूद था। हां, नये कलमकार भी थे, उनके लिए भी पगडंडी तो जरूरी ही है। काव्य की हर विधा प लघुकथायें पसंद आई।...

    मुखराम माकड़ ‘माहिर’, विश्वकर्मा विद्यानिकेतन, रावतसर, जिला हनुमानगढ़ (राज.)
    .....आपका साहित्य अनुष्ठान अनवरत चलता रहे, यही हार्दिक कामना है।....

    सत्य शुचि, साकेतनगर, ब्यावर-305901 (राज.)
    ....अविराम के अंक बराबर मिल रहे हैं। अंको में यदा-कदा उत्कृष्ट सामग्री पाकर प्रशन्नता महसूस करता हूँ। आपका प्रयास सराहनीय है।....

    अनिल द्विवेदी ‘तपन’, ‘दुलारे निकुँज’, सिपाही ठाकुर, कन्नौज-209725 (उ.प्र.)
    .....पत्रिका ने अपने छोटे से कलेवर में गागर में सागर भरने का कार्य किया है। आपका प्रयास उत्तरोत्तर निखार ला रहा है।...

    दुर्गाचरण मिश्र, ‘रामायणम्’, 248 सी-1, इन्दिरा नगर, कानपुर-208026 (उ.प्र.)
    .....लघु कलेवर में यथेष्ट स्तरीय प्रचुर पठनीय सामग्री अपने अंतस में संजोए पत्रिका का प्रथम दर्शन शोभन लगा। लघुकथाएं, कथा-कहानी, ज्ञणिकाएं, हास्य-व्यंग्य, गीत-ग़ज़ल, हाइकु आदि विविध पिधाओं पर सशक्त हस्ताक्षरों की रचनाएं एक से बढ़कर एक हैं। नवांकुरों को प्रोत्साहित करता सम्भावना स्तम्भ एवं अन्य स्थाई स्तम्भ सराहनीय हैं।....

    प्रदीप गर्ग पराग,1785, सेक्टर-16, फरीदाबाद (हरि.)
    .....अविराम पत्रिका साहित्य की विभिन्न विधाओं पर समग्र उच्चकाटि की सामग्री प्रस्तुत कर रही है। प्रस्तुतीकरण आकर्षक मनभावन है।...

    इन्दिरा किसलय, 58/101, बल्लालेश्वर अपार्ट, रेणुका विहार, रामेश्वरी रिंग रोड, नागपुर-440027(महा.)
    .....शिव डोयले की क्षणिकाओं (कविता) ने प्रभावित किया। कथ्य और शिल्प दोनों कसौटियों पर। प्रभुदयाल श्रीवास्तव, कृष्णचन्द्र महादेविया एवं गोवर्द्धन यादव अच्छे लगे। बलराम अग्रवाल जी का साक्षात्कार ‘अविराम’ की उपलब्धि बन गया। काव्य प्रस्तुतियों के संग रेखांकन; सौन्छर्य को द्विगुणित करता है।...

    ओमप्रकाश पाण्डेय ‘मंजुल’, कामायनी, कायस्थान, पूरनपुर-262122, जिला-पीलीभीत (उ.प्र.)
    .....अंक अच्छा है। सारी सामग्री श्रेष्ठ है। लघुकथाएँ अति सशक्त हैं। ‘माँ’ पर लिखी गयी लघुकथाएँ मार्मिक भी हैं, सामयिक तो हैं ही। काव्यपक्ष भी सशक्त, सरस और मर्मस्पर्शी है।....

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