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रविवार, 30 सितंबर 2018

गतिविधियाँ

अविराम  ब्लॉग संकलन,  वर्ष  :  08,   अंक  :  01-02,   सितम्बर-अक्टूबर 2018 

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इस अंक में गतिविधियों की क्रमिक सूची


01. सुधीर विद्यार्थी का मुजफ्फरनगर में जगह-जगह अभिनंदन
02. वातायन सम्मान समारोह-2018
03. मॉरीशस में हुआ नागरी संगम पत्रिका के विश्व हिंदी सम्मेलन विशेषांक का विमोचन
04. शरयू राशिनकर की कृति विमोचित
05. मॉरीशस में हुआ विश्वरागिनी स्मारिका के विश्व हिंदी सम्मेलन विशेषांक का विमोचन
06. संस्कार व संवेदना मानव समाज की रीढ़ हैं - के. के. यादव
07. राजकुमार जैन राजन को नेपाल में मिला अंतरराष्ट्रीय साहित्य सम्मान
08. स्व.पन्नालाल जी नामदेव स्मृति में ‘कवि सम्मेलन’ का आयोजन



 मुजफ्फरनगर में सुधीर विद्यार्थी का अभिनंदन


मुज़फ्फरनगर।  मुजफ्फरनगर में साहित्य जगत की दृष्टि से बहुत ही विख्यात और मशहूर शख्सियत के आगमन से खुशनुमा माहौल बहुत ही खुशगवार रहा। साहित्य जगत के भीष्म पितामह कहे जाने वाले प्रसिद्ध साहित्यकार सुधीर विद्यार्थी मुजफ्फरनगर के एक कार्यक्रम में पधारे तथा विस्तृत रूप से अपना व्याख्यान दिया। जानसठ रोड स्थित एस ड़ी इंजीनियरिंग कॉलेज, मुजफ्फरनगर में
स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का योगदान गोष्टी पर अपना व्याख्यान देते हुए उन्होंने कहा कि इस जनपद का इतिहास बहुत ही गौरवशाली है तथा यहाँ की गौरव गाथा कुछ ना कुछ नया करने को उद्वेलित करती है। उन्होंने खतौली के पंडित सुंदर लाल का जिक्र करते हुए कहा कि इतिहास के पन्नों में उनका नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखा हुआ है तथा यह देश सदैव
उनका ऋणी आभारी रहेगा। स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन में उनकी भूमिका उनके योगदान को कभी भी नकारा नहीं जा सकेगा, हालांकि इतिहासकारों ने इतिहास को लिखते वक्त उनके साथ इंसाफ नहीं किया। फिर भी सचाई छिप नहीं सकती जो हकीकत है, वह हकीकत ही रहेंगी। इस अवसर पर एस पी ट्रेफ़िक बजरंग बली चौरसिया ने जिले के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यहाँ के लोगों को यहाँ के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के बलिदान को याद रखते हुए उनके लिए कुछ ना कुछ करते रहना चाहिए, यही
उनके लिए सच्ची श्रद्धांजलि होगी। जेल अधीक्षक अरुण कुमार सक्सेना ने कहा कि इस जिले का इतिहास बहुत ही गौरवशाली है। यहाँ के महापुरुषों ने स्वतंत्रता संग्राम में बढ़-चढ़कर भाग लिया तथा अपनी कुर्बानी दी। उनके योगदान को लिपिबद्ध होने के साथ-साथ सार्वजनिक स्थानों पर उनके नाम पर कोई स्मारक या मूर्ति की स्थापना होनी चाहिए। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी किसी एक की नहीं बल्कि पूरे राष्ट्र की धरोहर होती है। उन्होंने
कहा कि आज का दिन बहुत ही महत्वपूर्ण है कि जिले में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को लेकर कई किताबें लिखने वाले साहित्यकार सुधीर विद्यार्थी हमारे बीच हैं। यह हमारे लिए बहुत ही गौरव की बात है। बाद में सुधीर विद्यार्थी का कई जगह पर अलग-अलग स्वागत अभिनंदन किया गया तथा उनके द्वारा लिखी गई किताबों की चर्चा व सराहना भी की गई। कार्यक्रम का आयोजन विद्यालक्ष्मी चौरिटेबल ट्रस्ट तथा एचडी चौरिटेबल सोसाइटी द्वारा किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रजवलित कर किया गया। कार्यक्रम की महत्ता पर प्रकाश डॉ. अ. कीर्तिवर्धन अध्यक्ष विद्यालक्ष्मी चौरिटेबल ट्रस्ट द्वारा डाला गया। डॉ. प्रदीप जैन, श्री तरूण गोयल तथा श्री मधुर नागवान ने विभिन्न स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के योगदान पर प्रकाश डाला। एस डी इंजीनियरिंग कॉलेज के निदेशक डॉ. एस एन चौहान ने सभी अतिथियों तथा ट्रस्ट के संचालकों का धन्यवाद ज्ञापित करते हुये इस प्रकार के कार्यक्रम बार-बार आयोजित करने और अपने सहयोग के आश्वासन के साथ सबका धन्यवाद किया। कार्यक्रम का कुशल  संचालन प्रगति मैडम द्वारा किया गया। इस दौरान देवराज पंवार, नादिर राणा, बब्लू शर्मा, मुकुल दुआ, निधीष राज गर्ग, प्रोफेसर आर एम तिवारी, अमरीश गोयल, सुनील शर्मा, निरंजन सिंह, महेन्द्र आचार्य, राजेश जी, सतीश जी आदि नगर के अनेक गणमान्य, शिक्षक व छात्र उपस्थित रहे। (समाचार प्रस्तुति: डॉ. अ. कीर्तिवर्धन)



वातायन सम्मान समारोह-2018 संपन्न

      29 जून 2018, लंदन के नेहरू केंद्र-लंदन। यह वर्ष हिंदी भाषा के वैश्वीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण है क्योंकि इस वर्ष भारत एवं मॉरिशस सरकार द्वारा 11वें विश्व हिंदी सम्मलन का आयोजन होने जा रहा है। वाणी फाउंडेशन के संरक्षण में ब्रिटेन की तीन संस्थायें - यू.के हिंदी समिति, वातायन रू पोएट्री ऑन साउथ बैंक एवं कृति यूके-हिंदी महोत्सव-2018 का आयोजन ब्रिटेन के चार शहरों में बड़ी धूमधाम से किया, जो एक प्रयास था भाषा और संस्कृति के विद्वानों और प्रतिष्ठित कलाकारों को हिंदी के विद्यार्थियों और युवाओं से जोड़ने का। अकादमिक सत्रों में गंभीर चर्चाओं, काव्य गोष्ठियों, पुस्तकों के विमोचन, पुस्तक-प्रदर्शनियों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों, हिंदी के छोटे बड़े विद्यार्थियों के कविता पाठ के अतिरिक्त इस आयोजन का एक महत्वपूर्ण अंग रहा फ्रेडरिकपिनकॉटयू.केअवॉर्ड-2014 से सम्मानित, वातायन: पोएट्री ऑन साउथबैंक द्वारा हिंदी और संस्कृति की विभूतियों को सम्मानित करना।
       नेहरु केंद्र-लंदन के सह-निदेशक, श्री ब्रिज किशोर गोहेर के औपचारिक स्वागत भाषण एवं डॉ निखिल कौशिक,फिल्मकार, कवि एवं पेशे से नेत्र-सर्जन, की वंदना के पश्चात, वातायन की अध्यक्ष एवं अकैडमी की निदेशक, मीरा
कौशिक, ने वातायन के विषय में जानकारी दी। विशेष अतिथियों- श्री वीरेंद्र शर्मा, पार्षद, भारतीय उच्चायोग-लंदन के हिंदी अधिकारी, श्री तरुण  कुमार एवं श्री अरुण माहेश्वरी, वाणी प्रकाशन के अध्यक्ष- ने वातायन की संस्थापक दिव्या माथुर की सहायता से अंतर्राष्ट्रीय वातायन कविता पुरस्कार वितरित किए। कार्यक्रम का संचालन किया पद्मभूषण डॉ. मोटूरि सत्यनारायण पुरस्कार से सम्मानित और यूके हिंदी-समिति के डॉ. पदमेश गुप्त ने, जो हिंदी समारोह-2018 के आयोजक भी हैं। श्री यतीन्द्र मोहन मिश्र (वातायन कविता सम्मान), डॉ कुसुम अंसल (अंतर्राष्ट्रीय वातायन शिखर सम्मान), श्री कृष्ण कुमार गौड़ (अंतर्राष्ट्रीय वातायन संस्कृति-सम्मान) और श्रीमती सरोज शर्मा (अंतर्राष्ट्रीय वातायन विशेष सम्मान) से सुशोभित किया गया। स्थानीय लेखिकाओं- श्रीमती कादम्बरी मेहरा, अरुण सब्बरवाल, तिथि दानी ढोबले और इंदु बरोट ने प्रशस्ति-पत्र पढ़े। 
      महोत्सव की निदेशक एवं वाणी प्रकाशन-दिल्ली की अदिति माहेश्वरी ने अपनी नई पुस्तक, प्रवासी लेखन: नई ज़मीन नया आसमान, प्रतिष्ठित लेखक श्री अनिल जोशी, जो फिजी में चांसरी के प्रमुख एवं द्वितीय सचिव (हिंदी); श्री वीरेंद्र शर्मा, डॉ निखिल कौशिक, डॉ पद्मेश गुप्त एवं दिव्या माथुर को भेंट की। श्री कृष्णकुमार गौड़ के उदगार के पश्चात, सम्मानित कवियों- श्री यतीन्द्र मोहन मिश्र एवं डॉ कुसुम अंसल ने अपनी कुछ लोकप्रिय रचनाएँ सुनाईं, जिन्हें श्रोताओं ने करतल ध्वनि से सराहा और भारत से पधारे कवि शशांक प्रभाकर एवं डॉ. शम्भू मनहर ने भी कविता पाठ किया। 
      वातायन की कोषाध्यक्ष एवं लेखिका शिखा वार्ष्णेय ने ज्ञापन प्रस्तुत किया और श्रोताओं को शानदार जलपान के लिए आमंत्रित किया। स्थानीय कवियों, मीडिया-कर्मियों एवं कलाकारों के अतिरिक्त इस कार्यक्रम में उपस्थित थे डॉ. शाम मनोहर पांडे, डॉ. अचला शर्मा, परवेज़ आलम, कृष्ण कुंजरू, उषा राजे सक्सेना, अरुणा अजितसरिया, सरोज श्रीवास्तव, एवं भारत से पधारे बहुत से लेखक, जिनमें शामिल थीं नीलिमा डालमिया आधार, लेखिका मंजु लोधा। (समाचार प्रस्तुति  : दिव्या माथुर)



मॉरीशस में हुआ नागरी संगम पत्रिका के विश्व हिंदी सम्मेलन विशेषांक का विमोचन

(जोड़ लिपि के रूप में देवनागरी लिपि की भूमिका पर विद्वानों ने विचार वक्तव्य किए)

      मॉरीशस में भारत सरकार, विदेश मंत्रालय और मॉरीशस सरकार द्वारा आयोजित ग्यारहवें विश्व हिंदी सम्मेलन के अवसर पर नागरी लिपि परिषद, नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित एवं  वरिष्ठ साहित्यकार डॉ हरिसिंह पाल द्वारा संपादित नागरी संगम पत्रिका के विश्व हिंदी सम्मेलन विशेषांक का लोकार्पण मॉरीशस स्थित स्वामी विवेकानंद अंतर्राष्ट्रीय सभागार में हुआ। पत्रिका के विशेषांक का लोकार्पण पद्मश्री डॉ श्यामसिंह शशि, नई दिल्ली, डॉ. सुरेश चंद्र शुक्ल शरद आलोक, ओस्लो, नॉर्वे, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के पूर्व कुलपति प्रो जी गोपीनाथन, विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के कुलानुशासक प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा, केनेडा के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ रत्नाकर नाराले, कालिकट की प्रो मालती गोपीनाथन आदि ने किया। इस अवसर पर संबोधित करते हुए पद्मश्री डॉ. श्यामसिंह शशि ने कहा कि हिंदी और देवनागरी लिपि ने अनेक देशों में बसे भारतवंशियों को एकता के सूत्र में बांधा है। यह विशेषांक विश्व लिपि देवनागरी के संवर्धन और विकास के लिए महत्वपूर्ण सिद्ध होगा। विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के कुलानुशासक प्रो. शैलेंद्र कुमार शर्मा ने कहा कि आचार्य विनोबा भावे की प्रेरणा से संस्थापित नागरी लिपि परिषद द्वारा दुनिया की अनेक भाषाओं के लिए जोड़ लिपि के रूप में  देवनागरी लिपि के प्रयोग की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किए जा रहे हैं। देवनागरी लिपि सदियों से सांस्कृतिक और भावात्मक एकता के लिए महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। देश दुनिया की भाषाओं को परस्पर निकट लाने के लिए उनकी अपनी लिपियों के साथ सार्वजनिक लिपि के रूप में विश्व लिपि देवनागरी का प्रयोग किया जाना चाहिए। 
      इस अवसर पर लोकार्पण मंच पर भाषाविद् प्रो त्रिभुवननाथ शुक्ल, जबलपुर, इग्नू के कुलसचिव डॉ जितेंद्र श्रीवास्तव, मेरठ विश्वविद्यालय के प्रो. नवीनचंद्र लोहानी, जेएनयू के प्रो सुधीरप्रताप सिंह सहित अनेक देशों के विद्वान एवं साहित्यकारों ने भी विचार व्यक्त किए। लोकार्पण मंच की संयोजक महात्मा गांधी संस्थान, मॉरीशस की डॉ. अलका धनपत ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया। (समाचार प्रस्तुति : प्रो. शैलेन्द्रकुमार शर्मा )





शरयू राशिनकर की कृति विमोचित

(तीन माह के पड़पोते ने किया इक्यासी वर्षीय पड़नानि की पुस्तक का लोकार्पण)                                                                                                                       
                                     
      इंदौर। कशीदाकारी, हस्तकला और रंगोली की वरीष्ठ कलाकार शरयू राशिनकर के पोते श्रेयस के विवाह के अवसर पर शरयूजी द्वारा हिंदी अंग्रेजी के वर्णाक्षरों, गणितीय संकेतो जैसे आकारों को लेकर सृजित रचनात्मक रंगोली की अभिनव कृति ‘कल्पना से अल्पना’ का लोकार्पण उनके तीन माह के पड़पोते चि. श्रेष्ठ गवली द्वारा किया गया। उल्लेखनीय है कि अपनी उम्र के एक्क्यासिवंे वर्ष में भी शरयूजी नित नई रंगोलियों का मात्र सृजन ही नहीं करती वरन कशीदाकारी भी करती रहती हैं। संस्कृति पुरुष स्व.वसंत
राशिनकरजी की अर्धांगिनी शरयूजी ‘आपले वाचनालय (साहित्य, कला व् संस्कृति केंद्र)’ एवम् ‘संगीत साधना केंद्र’ के माध्यम से लंबे समय से सामाजिक एवम् रचनात्मक गतिविधियों से न केवल जुडी हुई है वरन वे अब तक अनगिनत शिष्यों को इन विविध कलाओं में पारंगत बना चुकी है। निश्चित ही यह एक अद्भुत अवसर था जहाँ इकयासी वर्षीय रचनात्मकता का लोकार्पण तीन माह के पड़पोते द्वारा किया जाकर रचनात्मकता की निरंतरता का सन्देश समाज को सकारात्मकता से संप्रेषित हुआ। लोकार्पण के पूर्व डॉ. वसुधा गाडगील ने शरयुजी की रचनात्मकता एवं कृति पर अपने विचार रखे। इस अभिनव लोकार्पण प्रसंग पर मंच पर शरयुजी की पोती श्रीया, अक्षय गवली, पोता श्रेयस एवं मेघना उपस्थित थे। श्रीति राशिनकर ने कार्यक्रम का संचालन एवं उपस्थित अतिथियों का आभार व्यक्त किया। (समाचार प्रस्तुति : संदीप राशिनकर)




मॉरीशस में हुआ विश्वरागिनी स्मारिका के विश्व हिंदी सम्मेलन विशेषांक का विमोचन

      मॉरीशस में भारत सरकार, विदेश मंत्रालय और मॉरीशस सरकार द्वारा आयोजित ग्यारहवें विश्व हिंदी सम्मेलन के अवसर पर राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना, उज्जैन द्वारा प्रकाशित एवं हिंदी सेवी डॉ. प्रभु चौधरी द्वारा संपादित विश्वरागिनी स्मारिका के विश्व हिंदी सम्मेलन विशेषांक का लोकार्पण मॉरीशस स्थित स्वामी विवेकानंद अंतर्राष्ट्रीय सभागार में हुआ। स्मारिका का लोकार्पण डॉ. सुरेश चंद्र शुक्ल शरद आलोक, ओस्लो, नॉर्वे, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के पूर्व कुलपति प्रो. जी गोपीनाथन, विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के कुलानुशासक प्रो. शैलेंद्रकुमार शर्मा, डेनमार्क की साहित्यकार डॉ. अर्चना पैन्यूली, कालिकट की प्रो. मालती गोपीनाथन, डॉ. श्रुति, इलाहाबाद आदि ने किया। 
      इस अवसर पर संबोधित करते हुए नॉर्वे के डॉ. सुरेश चंद्र शुक्ल शरद आलोक ने कहा कि हिंदी और भारतीय संस्कृति ने दुनिया भर में बसे भारतवंशियों को एकता के सूत्र में बाँधा है। विश्वरागिनी का विशेषांक विश्व भाषा हिंदी के प्रसार, संवर्धन और विकास के लिए महत्वपूर्ण सिद्ध होगा। समालोचक और विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन के कुलानुशासक प्रो. शैलेंद्रकुमार शर्मा ने कहा कि भारतीय संस्कृति अनेक सहस्राब्दियों से विश्व-संस्कृति के मूलाधारों में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती आ रही है। भारतीय संस्कृति को गढ़ने में विविध शास्त्रों के साथ यहाँ की लोक-संस्कृति और लोक भाषाओं को अपनी परिव्याप्ति में सहेजती हुई हिन्दी अहम भूमिका निभा रही है। हिंदी को विश्व भाषा के रूप में प्रतिष्ठित करने में दुनिया अनेक भागों में बसे भारतवंशियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। हिंदी और भारतीय संस्कृति सदियों से भावात्मक एकता के लिए महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। देश दुनिया की संस्कृतियों और भाषाओं को परस्पर निकट लाने के लिए संपर्क भाषा हिंदी का प्रयोग होना चाहिए।
       इस अवसर पर लोकार्पण मंच पर अनेक भाषाविद्, विद्वान एवं साहित्यकारों ने भी विचार व्यक्त किए। लोकार्पण मंच की संयोजक महात्मा गांधी संस्थान, मॉरीशस की डॉ. अलका धनपत ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया। (समाचार प्रस्तुति : प्रभु चौधरी)



संस्कार व संवेदना मानव समाज की रीढ़ हैं - के. के. यादव


      ‘संस्कार और संवेदना मानव समाज की रीढ़ हैं। सामाजिक व्यवस्था के सुचारु संचालन हेतु युवा पीढ़ी में इनका संचरण जरुरी है। सोशल मीडिया के इस दौर में जहाँ हर कोई अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करने के लिए भी कट-पेस्ट का सहारा ले रहा है, वहाँ संस्कारों को बचाकर रखना जरुरी हो गया है।’ उक्त उद्गार चर्चित लेखक एवं लखनऊ (मुख्यालय) परिक्षेत्र के निदेशक डाक (सेवाएँ) श्री कृष्ण कुमार यादव ने संस्कार भारती, गोमती इकाई, लखनऊ के नटराजन पूजन एवं कला गुरु सम्मान कार्यक्रम में अध्यक्षीय उद्बोधन के रूप में व्यक्त किये। डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि युवा पीढ़ी में रचनात्मक प्रवृत्ति को विकसित करना होगा। साहित्य, कला, संगीत जैसी विधाएँ किसी भी देश की सभ्यता और संस्कृति को समुन्नत बनाती हैं। संस्कारों को सहेजने के लिए नैतिक मूल्यों की स्थापना पर भी जोर देना होगा।   
      इस अवसर पर निदेशक डाक सेवाएं श्री कृष्ण कुमार यादव ने साहित्य, कला, संगीत व नाट्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली विभूतियों को सम्मानित भी
किया। साहित्य हेतु वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. कौशलेन्द्र पांडेय, चित्रकला हेतु अमर नाथ गौड़, नाट्य के क्षेत्र में ललित सिंह पोखरिया तथा संगीत के लिए भातखण्डे संगीत विद्यापीठ की रजिस्ट्रार सुश्री मीरा माथुर को कलागुरु सम्मान से सम्मानित किया गया। 
      इंदिरानगर स्थित रानी लक्ष्मीबाई मेमोरियल स्कूल में आयोजित इस कार्यक्रम का शुभारम्भ श्री कृष्ण कुमार यादव और संस्थापक सेंट जोजफ
विद्यालय समूह श्रीमती पुष्पलता अग्रवाल ने दीप प्रज्वलन करके किया। विषय प्रवर्तन वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. किशोरी शरण शर्मा ने किया। समवेत गणेश वंदना, ध्येय गीत गायन के बाद मा. सारा, निखिल, अनादि, नारायन सिंह, आर्यन आदि ने देशभक्तिपरक रचनाएँ  प्रस्तुत करके लोगों की सराहना प्राप्त की। चर्चित गायिका संगीता श्रीवास्तव, सरोज खुल्बे, राखी अग्रवाल व् ममता त्रिपाठी ने सुबोध दुबे के निर्देशन में खूबसूरत गीतों की प्रस्तुति कर शमां बाँधा। कार्यक्रम का संचालन इकाई के अध्यक्ष ई. अखिलेश्वर नाथ पांडेय व गौरीशंकर वैश्य ‘विनम्र’ ने सभी अतिथियों का आभार किया। इस अवसर पर राज्य ललित कला एकेडमी के उपाध्यक्ष सीताराम कश्यप, शारदा पांडेय,  दुर्गेश्वर राय, रीता अग्रवाल, नीरा माथुर इत्यादि  मौजूद रहे। (समाचार प्रस्तुति : सुबोध कुमार दुबे)



राजकुमार जैन राजन को नेपाल में मिला अंतरराष्ट्रीय साहित्य सम्मान

       काठमांडू (नेपाल) : क्रान्तिधरा साहित्य अकादमी, भारतीय राजदूतावास नेपाल-भारत सहयोग मंच एवम नेपाल से प्रकाशित एक मात्र हिंदी पत्रिका ‘हिमालिनी’ द्वारा डॉ. विजय पंडित के संयोजन में नेपाल की आर्थिक नगरी बीरगंज में आयोजित तीन दिवसीय ‘नेपाल-भारत साहित्य महोत्सव’ का आयोजन 12, 13,14 अगस्त को हुआ। इस आयोजन में मुख्य अतिथि नेपाल प्रान्त-2 के मुख्यमंत्री लालबाबू राउत गद्दी, विशिष्ठ अतिथि ग्रीन केयर सोसायटी, भारत के विजय पंडित, भारतीय महावाणिज्य दूतावास प्रमुख विजय प्रधान, हिमालिनी के संपादक सच्चिदानन्द मिश्र रहे। आचार्य महाश्रमण की विदुषी शिष्या डॉ. चारित्र प्रभा जी का विशेष सानिध्य प्राप्त हुआ। कुशल संचालन हिमालिनी की संपादक डॉ. श्वेता दीप्ति ने किया। श्रीमती अनिता आर्यन नेपाल सह संयोजक के रूप में सभी अतिथियों से आत्मीयता से मिलती रही। उनका उत्साह काबिले तारीफ था।
     तीन दिवसीय इस आयोजन में भारत-नेपाल के शब्द शिल्पियों, पर्यारण संरक्षण कार्यकर्ताओं द्वारा साहित्यिक परिचर्चा, कवि सम्मेलन, संवाद, पौधरोपण, सांस्कृतिक कार्यक्रम  एवम् साहित्यकारों का सम्मान आदि आयोजित हुए। इस अवसर पर आकोला (चित्तोड़गढ़) राजस्थान, भारत के सुपरिचित साहित्यकार-पत्रकार राजकुमार जैन राजन को उनकी महनीय साहित्य सेवाओं, उत्कृष्ठ सृजन, संपादन एवम भारत व नेपाल के साहित्यकारों के मध्य हिंदी के विकास के साहित्यिक सेतु के रूप में उत्कृष्ठ कार्यों के लिए ‘नेपाल-भारत अंतरराष्ट्रीय साहित्य सम्मान’ एवम ‘नेपाल-भारत साहित्य सेतु सम्मान’ से सम्मानित किया गया। इस कार्यक्रम में राजन के काव्य संकलन ‘खोजना होगा अमृत कलश’ के काठमांडू नेपाल से प्रकाशित, श्रीमती सुमी लोहानी कृत नेपाली अनुदित संस्करण ‘खोज्नु छ अमृत कलश’ का लोकार्पण भी मंचस्थ अतिथियों द्वारा किया गया। राजन ने संकलन की प्रति नेपाल राज्य-2 के मुख्यमंत्री माननीय लालबाबू राऊत गद्दी को भेंट स्वरूप प्रदान की। (समाचार प्रस्तुति : राजकुमार जैन राजन)




स्व.पन्नालाल जी नामदेव स्मृति में ‘कवि सम्मेलन’ का आयोजन
      टीकमगढ़। स्व.पन्नालाल जी नामदेव स्मृति पंचम सम्मान समारोह एवं साहित्यिक संस्था म.प्र.लेखक संघ जिला इकाई टीकमगढ़ के ‘कवि सम्मेलन ‘आकांक्षा’ पब्लिक स्कूल,नई चर्च के पीछे, शिवनगर कालोनी, टीकमगढ़ में आयोजित किया गया। कवि सम्मेलन में सरस्वती वंदना के उपरान्त अनेक चर्चित कवियों ने अपनी कविताएँ पढ़कर श्रोताओं का ध्यान अनेक सामाजिक समस्याओं की ओर खींचा।    
      ललितपुर से आये शायर मो. शकील ने ग़ज़ल पढ़ी- ‘‘वो साजिशें फसाद कराने में लगे हैं।/हम अम्न के चिराग़ जलाने में लगे है।’’ नदनवारा से आये गीतकार शोभाराम दांगी ने सुनाया- ‘‘बेई मिट्टी बेई खान जामें हते भौतई ज्वान।/राम, कृष्ण, गौतम, गांधी की राखें रइयों आन।’’ जतारा केे ओज युवा कवि महेन्द्र चौधरी ने पढ़ा- ‘‘देश का संविधान और कानून कहाँ खो जाता है।/जब रोटी की खातिर बेटी का सौदा हो जाता है।’’ निवाड़ी के अजय सिंह परिहार ने पढ़ा- ‘‘हिन्दू, मस्लिम, सिक्क, इसाई हर चमन खिले भारत में।/कहीं मरूँ मैं इस दुनियाँ में पर जन्म मिले भारत में।’’ अनवर खान साहिल ने पढ़ा- हाँ यकीनन है माँ मिरी हिन्दी, ऐ जो उर्दू है मेरी खाला।।
      इनके आलावा ललितपुर के.के पाठक, पलेरा के रविन्द्र यादव, गुना के
मातादीन यादव ‘अनुपम’, झाँसी से आये कवि डॉ. श्री गौरी शंकर उपाध्याय ‘सरल’, यदुकुल नंदन खरे बल्देवगढ़, कोमल चन्द्र बजाज बल्देवगढ़, रामसहाय राय रामगढ़, सियाराम अहिरवार, जी.पी.शुक्ला, शिवचरण उटमालिया, डॉ. रूखसाना सिद्दीकी, परमेश्वरीदास तिवारी अजीत श्रीवास्तव, हरिविष्णु अवस्थी, एन.डी सोनी, वीरेन्द्र चंसौरिया, सीताराम राय, व्ही.व्ही बगेरिया, आर.एस शर्मा, रामगोपाल रैकवार, बविजय मेहरा, एल.जैन, पूरचन्द्र गुप्ता, आदि ने भी अपनी रचनाएँ सुनायी। कवि सम्मेलन का संचालन कवि राजीव नामदेव ‘‘राना लिधौरी’ ने किया तथा सी.एल नामदेव ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। (समाचार प्रस्तुति : राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’)

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