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गुरुवार, 28 फ़रवरी 2013

अविराम विस्तारित

अविराम का ब्लॉग :  वर्ष : 2,  अंक : 6,   फरवरी  2013  

।।हाइकु।।

सामग्री : इस अंक में डॉ. भावना कुँअर के दस हाइकु।


डॉ. भावना कुँअर




दस हाइकु 


1.
कलियाँ खिलीं
कोयल गाने लगीं
नाचे मयूर।
2.
वो मृग छौना
बहुत ही सलौना
कुलाचें भरे।
3.
लेटी थी धूप
सागर तट पर
प्यास बुझाने।
4.
धुन बनाए
ओलों की बरसात
जैसे हो साज़।
5.
बरखा रानी
फैला गई खुशबू
सोंधी मिट्टी की।
6.
हुई आहट
छाया चित्र : रोहित काम्बोज 
खोला था जब द्वार
मिला  त्यौहार।
7.
परदेस में 
जब होली मनाई
तू याद आई।
8.
पड़ी है सूनी
भैया जी की कलाई
राखी न आई।
9.
घोर तन्हाई
जब माँ याद आई
फूटी रुलाई।
10.
सुबक पड़ी
कैसी थी वो निष्ठुर
विदा की घड़ी।

  • सिडनी, आस्ट्रेलिया (ई मेल : bhawnak2002@gmail-com)

2 टिप्‍पणियां:

  1. सभी हाइकु दिल की गहराई से निकले हैं और मर्म को छूने की क्षमता रखते हैं।

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