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मंगलवार, 26 मार्च 2013

अविराम विस्तारित

अविराम का ब्लॉग :  वर्ष : 2,  अंक : 7,  मार्च  2013  

।।तांका।।


सामग्री : इस अंक में डॉ. उर्मिला अग्रवाल के दस तांका ।


डॉ. उर्मिला अग्रवाल




{डॉ. उर्मिला जी का ‘मुस्काने दो दोस्ती को’ तांका संग्रह 2012 में प्रकाशित हुआ। विभिन्न विषयों पर लिखे इस संग्रह के तांकाओं में से कुछ तांका प्रस्तुत हैं अविराम के पाठकों के लिए।}


दस तांका 

1.
सूरज लाया
गठरी भर धूप
हुआ निराश
खरीदार न मिला
गर्मी के मौसम में
2.
समेट लिया
छाया चित्र : रोहित काम्बोज 

दिनकर ने जब
किरण-जाल
निर्द्वन्द्व हो विचरी
चाँदनी धरा पर
3.
टपक गई
ओस की एक बूंद
अधरों पर
झूमने लग गया
मन में खिला फूल
4.
तेरी यादों से
सरगोशियाँ होतीं
मेरे आज की
और महक जाती
मेरी तनहाइयाँ
5.
खूब मिली थी
शोहरत गीतों को
कहाँ था वह
जिसके लिए हम
गीत लिखते रहे
6.
ऐसे मनाया
मृत्यु का महोत्सव
धारण किया
बेवफ़ाई से बुना
उपेक्षा का कफ़न
7.
भीष्म तुमने
ताकत के जोर से
ब्याही गांधारी
अंधे धृतराष्ट्र से
कैसे भूले शकुनि
8.
पहनकर
पैरों में पायलिया
नाच रही है
पिंजरे में चिड़िया
जैसे घर की रानी
9.
रेखा चित्र : बी मोहन नेगी 

तुम न सुनो
तो सूरज क्या करे
वो तो आता है
रोज़-रोज लेकर
रोशनी का संदेश
10.
दिल का हाल
बताएँगे ज़रूर
अभी तनिक
बह जाने दो आँसू 
मुस्काने दो दोस्ती को

  • 15, शिवपुरी, मेरठ-250001 (उ.प्र.)

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