आपका परिचय

मंगलवार, 12 जुलाई 2011

अंक : 1/ जनवरी 1990
प्रधान सम्पादिका : मध्यमा गुप्ता/सम्पादन-परामर्श : डा. उमेश महादोषी एवं सुरेश सपन/संयोजक : संजय शुक्ला
इस अंक में शामिल रचना सामग्री और रचनाकारों का विवरण निम्न प्रकार है-

  • प्रस्तुति : प्रधान सम्पादिका श्रीमती मध्यमा गुप्ता का अविराम के बारे में जानकारी देता हुआ स्तम्भ (पृष्ठ : 4)।
  • सन्दर्भ : साम्प्रदायिकता पर शमशेर बहादुर सिंह (साभार/पृष्ठ : 5), हेमन्त दोषी (पृष्ठ : 6), डा. ऋषभ देव शर्मा देवराज (पृष्ठ : 7), सिद्धेश्वर (पृष्ठ : 7) और डा. उमेश महादोषी (पृष्ठ : 8) की कविताएं।
  • प्रतिनिधि हस्ताक्षर : प्रो. संजय कुमार पंकज एवं उनकी कविताएं (पृष्ठ : 9)।
  • बातचीत : दुरूहता किसी भी विधा का सहज चरित्र नहीं होता/नई कविता पर नारायण सिंह निर्दोष का साक्षात्कार मध्यमा गुप्ता द्वारा़ (पृष्ठ : 11)।
  • दस्तक : युवा कवि मूलचन्द्र चित्रांश (पृष्ट : 13)।
  • परिक्रमा : ‘काव्य की बदली हुई परम्परा और आम आदमी’ विषय पर सिद्धेश्वर द्वारा प्रस्तुत परिचर्चा/सहभागी- सर्वश्री अवधेश अमन, एम.टी.खान, डा. रामपूजन तिवारी. अशोक मनोरम, शरद रंजन शरद, बिन्देश्वर प्रसाद गुप्ता एवं सिद्धेश्वर (पृष्ठ : 14)।
  • अनवरत : राजकुमार सोनी (पृष्ठ : 17), अनिरुद्ध प्रसाद विमल (पृष्ठ : 17), कल्पना सिंह (पृष्ठ : 17), संजय शुक्ला (पृष्ठ : 18), रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’ (पृष्ठ : 18), निशा व्यास (पृष्ठ : 19), अजय कुमार (पृष्ठ : 19), माणिक घोषाल (पृष्ठ : 20), शिव कुमार शिव (पृष्ठ : 20), सतीश राज पुष्करणा (पृष्ठ : 21), रामकृष्ण विकलेश (पृष्ठ : 21), सुरेन्द्र प्रसाद वर्मा (पृष्ठ : 22), नेमपाल प्रजापति (पृष्ठ : 22), मिथिलेश गुप्ता (पृष्ठ : 22), एवं श्री भोपाल सिंह पौलस्त्य (पृष्ठ : 23) की कविताएं।
  • क्षणिकाएं : नारायण सिंह निर्दोष, पुष्कर राय जोशी, डा. पंकज परिमल, प्रशान्त उपाध्याय एवं मुकेश रावल की क्षणिकाएं (पृष्ठ : 23)
  • पड़ताल : आज की कविता : चरित्र और प्रवृत्तियाँ/ विक्रम सोनी (पृष्ठ : 24), कविता का आलम्ब/डा. पंकज परिमल (पृष्ठ : 26)
  • किताबें : राधेश्याम बन्धु के काव्य संग्रह ‘प्यास के हिरन’ की अभिमेष द्वारा आलोचनात्मक समीक्षा (पृष्ठ : 27) एवं अन्य पुस्तकों की प्राप्ति सूचना (पृष्ठ : 29)।
  • अधिकृत पन्ना : सुरेश सपन का स्तम्भ (पृष्ठ : 30)।



इस अंक की किसी भी प्रकार की प्रति उपलब्ध नहीं है,अतः पाठक/रचनाकार बन्धु किसी प्रकार का अनुरोध न भेजें।

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