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रविवार, 30 मार्च 2014

अविराम विस्तारित

अविराम  ब्लॉग संकलन :  वर्ष  : 3,   अंक  : 07- 08, मार्च - अप्रैल 2014


।। क्षणिका ।

सामग्री : 
इस अंक में श्री नित्यानन्द गायेन व सु श्री अनिता ललित जी की क्षणिकाएं। 


नित्यानन्द गायेन 





तीन क्षणिकाएँ


01.
एक समानता है 
हम दोनों में 
एक कमजोरी है हमारी
अपने-अपने हिस्से का सच सुनकर 
अक्सर हम हो जाते हैं 
नाराज़ 
एक-दूसरे से....।।
02.
राजनीति का देखिये 
कमाल
कवि भूल गये कविता को...।
छाया चित्र : डॉ.  बलराम अग्रवाल 

03. 
वे जो लोग हैं 
जो कर रहें हैं प्रचार 
अपने मालिकों का 
उन्हें याद रखना चाहिए कि 
दास कभी...
अपनाये नही गए इनके इतिहास में।।

  • 4-38/2/बी, बी, श्री राम प्रसाद दुबे कालोनी, रोड नं. -3 

लिंगमपल्ली, हैदराबाद-500019 / मोबाइल : 09642249030 



अनिता ललित



{युवा कवयित्री अनिता ललित कविता, विशेषतः हाइकु एवं क्षणिका में एक उभरता हुआ नाम है। उनकी कविताओं का एक संग्रह ‘बूँद-बूँद लम्हे’ हाल ही में प्रकाशित हुआ है। इस संग्रह की कविताओं में अनेक रचनाओं के क्षणिका की श्रेणी में रखा जा सकता है। प्रस्तुत है उनके इस संग्रह से कुछ क्षणिकाएँ।}

छः क्षणिकाएँ

01.
तुमसे जुदा हुई...
तो कुछ मर गया था मुझमें...
जो मर गया था...
उसमें ज़िंदा तुम आज भी हो...!
02.
बचपन है...
बना लो चाहे जितना...
ऊँट घोड़ा पालकी....!
जिंदगी है....
वसूलेगी कर्ज़....
तोड़कर कमर....
हर गुज़रते साल की....!
03.
हर मोड़ पर...
छाया चित्र : उमेश महादोषी 

कोई न कोई याद आ खड़ी हुई है...।
हर याद...
ख़ुद में एक महकता फूल हुई है...!
04.
आइना तो हर दिल में होता है...
फिर क्यों भटक जाती है नज़र...
इधर उधर...
लिये हाथ में...
कोई न कोई पत्थर...?
05.
यहीं तो था...
फिर गया किधर...?
वो प्यार का एहसास....
अपने रिश्ते की साँस...
यहीं तो था... फिर गया किधर...?
06.
बिना आहट के आँखों से...
फिसल गया...
मख़मली-सा ख़्वाब,
पुकारूँ अब उसे कैसे...
न पलकों को छुआ उसने...
न दिल में ही उतर पाया....!

  • 1/16, विवेक खंड, गोमतीनगर, लखनऊ-226010, उ.प्र.

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