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शुक्रवार, 30 मार्च 2012

अविराम विमर्श

अविराम का ब्लॉग :  वर्ष : १, अंक : ०७,  मार्च २०१२ 




शैलेन्द्र चाँदना



सत्यमेव जयते!: ‘‘कारगिल-स्मारक’’


     मैं कारगिल स्मारक हूँ। शहर के केन्द्र, घंटाघर के समीप राजपुर रोड पर स्थित गांधी पार्क के दाहिने पार्श्व भाग में खड़ा नगरवासियों से मिलने को उत्सुक रहता हूँ। वैसे तो सभी भारतवासियों से, परन्तु देहरादून शहर के नागरिकों से मेरी विशेष तौर पर यह अपील है कि कभी-कभी आकर मिल लिया करो। अच्छा लगेगा। विश्वास दिलाता हूँ आपको भी भरपूर ख़ुशी मिलेगी। मुझे तो मिलेगी ही, क्योंकि मैं तो इसी प्रतीक्षा में आँखें लगाये रहता हूँ कि कब कोई आये और मुझसे आँखें चार करे।
दृश्य छाया चित्र  :  शैलेन्द्र चांदना
    यदि प्रेमी-प्रेमिका आँखें चार करके प्रेम का इज़हार कर सकते हैं तो फिर आप और मैं क्यों  नहीं, अर्थात बहुत आसानी से कर सकते हैं। हमें तो उनकी तरह एकान्त ढँूढ़ने की भी ज़रूरत नहीं। मुझसे तो प्रेम की यह अविरल धारा सतत बह रही है, जो आपमें विराम लेगी। अतः आयें, आपका स्वागत करना मेरा परम सौभाग्य होगा। मुझ तक आकर आपको यह भी पता चल जायेगा कि मुझमें समाहित है उन वीरों का रक्त जो कारगिल-युद्ध में शहीद हो गये। आपको उन वीरों के विषय में भी जानकारी मिलेगी जिन्होंने भारतमाता की रक्षा के लिए हँसते-हँसते अपने प्राणों की आहुति दी, शत्रुओं का बहादुरी से सामना करते हुए उनको अपनी बंदूक का निशाना बनाया और जिसके लिए सीने पर गोली खाना अपनी शान समझा! ऐसे कुछ रणबाँकुरों के नाम मुझ पर अंकित हैं। वे उन सबके प्रतीक हैं जो विभिन्न युद्धों में शहीद हुए। मैं उनमें से किसी एक का बेटा, किसी का भाई या किसी एक का पिता हूँ।
    एक विशेष अनुरोध यह है कि देश की आज़ादी के लिए जिन क्रांतिकारियों, महापुरुषों और योद्धाओं ने अपने प्राण न्यौछावर किये उनको श्रद्धांजलि देने के लिए गणतंत्र दिवस (26 जनवरी), स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त), शहीद दिवस (30 जनवरी) जैसे प्रमुख दिनों में यहाँ आना और उनसे भावों के रूप में मिलना अपना गौरव समझें। ये सभी दिन हमारे देश और भारतभूमि के लिए होली, दीवाली व ईद जैसे महान पर्व हैं। यह कहना युक्तिसंगत होगा कि उपर्युक्त सभी विशेष त्यौहारों का सम्मान करना हमारा परम कर्तव्य है। 
अपनी वाणी को विराम देते हुए मैं आप सबसे प्रार्थना करना चाहता हूँ कि समीपस्थ परेड ग्राउंड में गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस पर होती परेड को देखने भी अवश्य जाया करें। जहाँ इन बहादुरों के जयघोष से सुरभित और गुंजायमान हो रहा होता है आकाश! इससे हमारे हृदय में सैनिकों के प्रति श्रद्धा और सम्मान उत्तरोत्तर बढ़ेगा।
    क्या यह संभव होगा कि आप परेड ग्राउंड में कदम से कदम मिलाकर चलते सैनिकों को देखकर तथा मुझसे हुई मुलाकात के संस्मरण घर लौटकर अपने परिवार के सदस्यों के साथ बांटें?  
जय हिन्द, जय हिन्द, जय हिन्द की सेना!
विनीत 
कृते कारगिल स्मारक


(शैलेन्द्र चाँदना)

  • 1/6-सी, मोहिनी रोड, देहरादून, उत्तराखण्ड


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