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रविवार, 6 जुलाई 2014

गतिविधियाँ

अविराम  ब्लॉग संकलन :  वर्ष  : 3,   अंक  : 09-10 ,  मई-जून 2014 

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महादेवी वर्मा के 107वें जन्मदिन पर संगोष्ठी
कविता दायित्वबोध की सार्थक अभिव्यक्ति :  किरण अग्रवाल


कविता गहरे दायित्वबोध की सार्थक अभिव्यक्ति है। आधुनिक हिंदी कविता में भविष्य के समाज की स्पष्ट तस्वीर देखी जा सकती है। सामाजिक विसंगतियों के विरूद्ध वह आक्रोश ही व्यक्त नहीं करती बल्कि चेतना जाग्रत कर अपने सामाजिक उत्तरदायित्व का भी निर्वाह करती है। उक्त विचार प्रख्यात साहित्यकार किरण अग्रवाल ने कुमाऊँ विश्वविद्यालय के अंतर्गत रामगढ़ स्थित महादेवी वर्मा सृजन पीठ में सुप्रसिद्ध कवयित्री महादेवी वर्मा के 107वें जन्मदिन के अवसर पर ‘आधुनिक हिंदी समाज और कविता’ विषयक एक दिवसीय संगोष्ठी में बतौर मुख्य वक्ता व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि कविता सदैव अपने सामाजिक परिवेश से प्रभावित रही है। शिल्प के बंधनों से मुक्त आज की कविता वैचारिक रूप से अधिक परिपक्व है। चर्चित कवि शैलेय ने कहा कि शब्दों का अंबार लगाने से कविता नहीं बनती। कविता मनुष्य की सबसे पुरानी
भाषा है और भाषा को हम विचार से पहचानते हैं। समालोचक मदन मोहन पाण्डे ने कहा कि किसी भी भाषा की शक्ति का अंदाज बिल्कुल नए कवियों की भाषा से लगाया जा सकता है। इन कवियों की कविता में जहाँ समय को समझने की कोशिश है, वहीं उनकी कविता अपने समय को बिना किसी आकुलता के पकड़ती है।
          प्रो. नीरजा टण्डन ने कहा कि हिंदी में स्त्री-विमर्श की शुरुआत का श्रेय महादेवी वर्मा को जाता है। महादेवी की कविता का उनके गद्य से गहरा संबंध है। डॉ. अधीर कुमार ने कहा कि अधिक से अधिक को कम से कम शब्दों में कहने की प्रवृत्ति के कारण कविता लगातार संश्लिष्ट हुई है। आज की कविता में प्रतिरोध का स्वर बहुत तेज है और आने वाली कविता पूरी तरह प्रतिरोध की कविता होगी।
           
संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ कवयित्री प्रो. दिवा भट्ट ने कहा कि पुस्तकों के बजाय इंटरनेट और ब्लॉग जैसे माध्यमों के जरिए लोकप्रिय हो रही कविता भाषा और विन्यास की सीमा से परे बिल्कुल एक नए प्रयोग की तरह है जो बहुत कम शब्दों में अपनी गहरी छाप छोड़ जाती है। संगोष्ठी को प्रो. निर्मला ढैला बोरा, डॉ. ममता पंत, डॉ. तेजपाल सिंह, खेमकरण सोमन  आदि ने भी संबोधित किया। चर्चाकारों में डॉ. शुभा मटियानी, यशपाल सिंह रावत, नेहा गौड़, शालिनी मिश्रा, ललित सौल, छत्रपति पन्त, नवनी चन्द्र, पवनेश ठुकराठी, चंचल गोस्वामी, शिव प्रकाश त्रिपाठी, जितेन्द्र कुमार यादव, सुनील कुमार, ललित चंद्र जोशी आदि शामिल थे।
         कार्यक्रम के दूसरे सत्र में सर्वश्री रमेश चंद्र पंत, अनिल घिल्डियाल, जहूर आलम, डॉ. महेश बवाड़ी, दिनेश उपाध्याय, अनिल कार्की, डॉ. वेद प्रकाश ‘अंकुर’, नवीन बिष्ट, नीरज पंत, देवकी नंदन कांडपाल, श्याम सिंह कुटौला, त्रिभुवन गिरि, डॉ. शांति चंद आदि ने कविता-पाठ किया। सत्र की अध्यक्षता करते हुए कुमाऊँ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एच. एस. धामी ने कहा कि वर्ष 2005 में कुमाऊँ विश्वविद्यालय के अंतर्गत महादेवी वर्मा सृजन पीठ की स्थापना जिन उद्देश्यों को लेकर की गई थी, पीठ उस दिशा में निरंतर कार्यरत है तथा पीठ ने अपने कार्यकलापों के माध्यम से देशभर में एक विशेष पहचान बनाई है। पीठ के स्थायित्व तथा विकास के लिए जो सहयोग विश्वविद्यालय से अपेक्षित होगा, वह पीठ को निरंतर मिलता रहेगा। अपने स्वागत संबोधन में महादेवी वर्मा सृजन पीठ के निदेशक, प्रो. देव सिंह पोखरिया ने कहा कि पीठ को उत्तराखण्ड
की साहित्यिक गतिविधियों के प्रमुख केन्द्र के रूप में विकसित करने के प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि महादेवी की स्मृति में सामूहिक प्रयासों से सृजन पीठ राष्ट्रीय स्तर के साहित्यिक संस्थान के तौर पर स्थापित हो सके तो यही महादेवी जी के प्रति वास्तविक श्रद्धांजलि होगी।
           इससे पूर्व दीप प्रज्वलन और विशिष्ट अतिथियों द्वारा महादेवी जी के चित्र पर माल्यार्पण से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम का संचालन पीठ के शोध अधिकारी मोहन सिंह रावत ने किया। इस अवसर पर महेन्द्र ठकुराठी के कुमाउनी कहानी-संग्रह ‘ठुलि बरयात’ तथा युवा कवि सन्तोष कुमार तिवारी के कविता-संग्रह ‘फिलहाल सो रहा था ईश्वर’ का विमोचन गणमान्य अतिथियों ने किया। {समाचार प्रस्तुति : मोहन सिंह रावत, बर्ड्स आई व्यू, इम्पायर होटल परिसर, तल्लीताल, नैनीताल-263002 (उत्तराखण्ड)}



केन्द्रीय साहित्य अकादमी द्वारा ‘‘पं. कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ रचना संचयन’’ प्रकाशित 

 
   केन्द्रीय साहित्य अकादमी ने कालजयी साहित्यकारों की प्रतिनिधि रचनाओं को पुस्तकाकार ‘रचना संचयन’ के रूप में प्रकाशित करने की अपनी महत्वाकांक्षी योजना की इक्कीसवीं कड़ी के रूप में देश के सुप्रसिद्ध साहित्यकार पद्मश्री पं कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ के प्रतिनिधि साहित्य को ‘रचना संचयन’ के रूप में प्रस्तुत किया है। इससे पूर्व इस योजना के तहत केन्द्रीय साहित्य अकादमी गणेश शंकर ‘विद्यार्थी’, जयशंकर प्रसाद, गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर, आचार्य रामचन्द्र शुक्ल, महाकवि सूर्य कान्त त्रिपाठी ‘निराला’, भारतेंदु हरिश्चंद्र, रामधारी सिंह ‘दिनकर’, पं.महावीर प्रसाद द्विवेदी आदि के ‘रचना संचयन’ देश के विभिन्न वरिष्ठ साहित्यकारों के संपादन एवं चयन के आधार पर प्रकाशित कर चुकी है। ‘‘ पं कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ रचना संचयन’’ के संपादन एवं रचना चयन का दायित्व वरिष्ठ साहित्यकार एवं साहित्य अकादमी के पूर्व सदस्य और पूर्व प्राचार्य डॉ. योगेन्द्र नाथ शर्मा ‘अरुण’ जी को सौंपा गया था, जिसे तत्परता से उन्होंने कुशलतापूर्वक पूरी निष्ठा से संपन्न करके उक्त महत्त्वपूर्ण कार्य किया है।
     देश के प्रतिष्ठित पत्रकार एवं साहित्यकार पद्मश्री कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ को हिंदी में ‘रिपोर्ताज’ विधा का जनक माना जाता है! एक शैलीकार के रूप में उनका अति विशिष्ट स्थान रहा है। उनका जन्म सहारनपुर जिले के सुप्रसिद्ध कस्बे देवबन्द में 29 मई, 1906 को हुआ था और उन्होंने प्रमुखतः सहारनपुर को ही अपनी कर्मभूमि बनाया। देश, समाज और साहित्य-पत्रकारिता के लिए समर्पित जीवन जीते हुए वह 09 मई 1995 को परलोक सिधारे। स्वयं द्वारा आरंभ लोकप्रिय पत्रों ‘विकास’ एवं ‘नया जीवन’ के साथ ही उन्होंने कई प्रतिष्ठित एवं राष्ट्रव्यापी चर्चा में रहे पत्र-पत्रिकाओं, यथा- ज्ञानोदय, राष्ट्रधर्म, विश्वज्ञान, विश्वास,मनोरंजन, शांति आदि का संपादन भी किया। उनका लेखन संसार अब तक प्रकाशित उनकी बहुप्रशंषित लगभग दो दर्जन कृतियों में फैला हुआ है।
    पद्मश्री पं कन्हैया लाल मिश्र ‘प्रभाकर’ की लगभग सभी कृतियों से प्रतिनिधि रचनाओं को लेकर केन्द्रीय साहित्य अकादमी द्वारा प्रस्तुत ‘रचना-संचयन’ में प्रकाशित किया गया है। कुल 360 पृष्ठों के इस संचयन को संपादक डॉ. ‘अरुण’ जी ने आत्मचिंतन, संस्मरण एवं रेखाचित्र, ललित निबंध व संस्मरणात्मक निबंध, रिपोर्ताज, प्रेरक एवं प्रसंगात्मक आलेख, जीवन स्मरण एवं विविधि विधाओं शीर्षक से (लघुकथाएं, बालकथाएं, पत्रकारिता एवं युवाओं के लिए प्रेरक आलेख आदि) सात खंडों में संयोजित किया है। साथ ही अपनी 25 पृष्ठों की महत्त्वपूर्ण संपादकीय भूमिका में उन्होंने ‘प्रभाकर’ जी की साहित्य-साधना के विभिन्न पक्षों पर प्रकाश डाला है।  
      पश्चिमी उत्तरप्रदेश में जन्में और इसी भूखंड को अपनी कर्मभूमि बनाने वाले किसी साहित्यकार पर केन्द्रीय साहित्य अकादमी द्वारा इस तरह का ‘रचना संचयन’ पहली बार प्रकाशित किया गया है। इस महत्वपूर्ण ग्रन्थ से पद्मश्री ‘प्रभाकर’ जी के
पत्रकारिता एवं साहित्य को प्रदत्त योगदान को नई पीढ़ी एवं शोधकर्ताओं के लिए समझना आसान हो जायेगा। ग्रन्थ का मूल्य मात्र दो सौ रुपये रखा गया है। (समाचार सौजन्य :  डॉ योगेन्द्र नाथ शर्मा ‘अरुण’, पूर्व प्राचार्य, 74/3, न्यू नेहरु नगर, रूडकी-247667, हरिद्वार)



शोषण के विरुद्ध रचनात्मक हथियार है लघुकथा : सतीश राठी


‘शेर ने बकरी से पूछा मांस खाएगी? बकरी ने कहा, हुजूर मेरा बच जाये यही बहुत है।’ स्व. रामनारायण उपाध्याय की इस लघुकथा को सुनाते हुए वरिष्ठ लघुकथाकार सतीश राठी ने इंडियन सोसायटी ऑफ औथर्स की लघुकथा संगोष्ठी मे विशेष अतिथि पद से कहा कि समकालीन लघुकथा उत्पीडन, अत्याचार और शोषण के विरुद्ध रचनात्मक हथियार सिद्ध हुई है, जो उसकी निरन्तर लोकप्रियता कि सबसे बड़ी वजह है। श्री राठी ने उक्त विचार इस अयोजन में सुरेश शर्मा, वेद हिमांशु, संध्या भराडे, ज्योती जैन और चंद्रसायता के लघुकथा पाठ के पश्चात व्यक्त किए। इस अवसर पर ज्योती जैन ने कहा कि आज कि लघुकथाएं समाज की दोहरी नैतिकता पर प्रहार करती है और समाज की बदलती हुई जीवान शैली को अपने केन्द्र मे रखती है। अयोजन अवसर पर के. एस. रावत, श्री गुप्ता, नन्दलाल भारती, शारदा गुप्ता और राजश्री हिमांशु साहित नगर के अनेक रचनाकार उपस्थित थे। संचालन एवम आभार प्रदर्शन ज्योती जैन ने किया। (समाचार प्रस्तुति : वेद हिमांशु, इन्दौर)





रतलाम में प्रो. शैलेन्द्रकुमार शर्मा खांपा रत्न सम्मानोपाधि से विभूषित


उज्जैन। विक्रम विश्वविद्यालय के कुलानुशासक एवं प्रसिद्ध समालोचक प्रो. शैलेन्द्रकुमार शर्मा को उनकी सुदीर्घ साहित्यिक साधना, हिन्दी एवं मालवी भाषा के व्यापक प्रसार एवं संवर्धन एवं संस्कृति के क्षेत्र में किए महत्वपूर्ण योगदान और के लिए किए गए उल्लेखनीय कार्यों के लिए हल्ला गुल्ला साहित्य मंच, रतलाम द्वारा खांपा रत्न सम्मानोपाधि से अलंकृत किया गया। उन्हें यह सम्मानोपाधि रतलाम में आयोजित 10वें अ. भा. खांपा सम्मेलन अर्पित की गई। इस सम्मान के अन्तर्गत उन्हें प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिह्न एवं अंगवस्त्र अर्पित किए गए। उन्हें मुख्त अतिथि इप्का लैब के उपाध्यक्ष श्री दिनेश सियाल, समाजसेवी श्री दिनेश पाटीदार, संस्थापक व्यंग्यकार संजय जोशी सजग, संयोजक अलक्षेन्द्र व्यास, जुझारसिंह भाटी आदि ने सम्मानित किया। इस आयोजन में देश के सैंकड़ों साहित्यकार एवं संस्कृतिकर्मी उपस्थित थे।
     प्रो.शर्मा आलोचना, लोकसंस्कृति, रंगकर्म, राजभाषा हिन्दी एवं देवनागरी लिपि से जुड़े शोध लेखन एवं नवाचार में विगत ढाई दशकों से निरंतर सक्रिय हैं। उनके द्वारा लिखित एवं सम्पादित पच्चीस से अधिक ग्रंथ एवं आठ सौ से अधिक आलेख एवं समीक्षाएँ प्रकाशित हुई हैं। उनके ग्रंथों में प्रमुख रूप से शामिल हैं- शब्द शक्ति संबंधी भारतीय और पाश्चात्य अवधारणा, देवनागरी विमर्श, हिन्दी भाषा संरचना, अवंती क्षेत्र और सिंहस्थ महापर्व, मालवा का लोकनाट्य माच एवं अन्य विधाएँ, मालवी भाषा और साहित्य, मालवसुत पं. सूर्यनारायण व्यास,आचार्य नित्यानन्द शास्त्री और रामकथा कल्पलता, हरियाले आँचल का हरकारा.-हरीश निगम, मालव मनोहर आदि। प्रो.शर्मा को देश-विदेश की अनेक संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया गया है। प्रो. शर्मा को खांपा रत्न सम्मानोपाधि से अलंकृत किए जाने पर म.प्र. लेखक संघ के अध्यक्ष प्रो. हरीश प्रधान, विक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.जवाहरलाल कौल, पूर्व कुलपति प्रो.रामराजेश मिश्र, पूर्व कुलपति प्रो.टी.आर. थापक, कुलसचिव डॉ.बी.एल. बुनकर, विद्यार्थी कल्याण संकायाध्यक्ष डॉ.राकेश ढंड, इतिहासविद् डॉ.श्यामसुन्दर निगम, साहित्यकार श्री बालकवि बैरागी, डॉ.भगवतीलाल राजपुरोहित, डॉ.शिव चौरसिया, डॉ.प्रमोद त्रिवेदी, प्रो.प्रेमलता चुटैल, प्रो.गीता नायक, डॉ.जगदीशचन्द्र शर्मा, प्रभुलाल चौधरी, अशोक वक्त, डॉ.अरुण वर्मा, डॉ. जफर मेहमूद, प्रो. बी.एल. आच्छा, डॉ. देवेन्द्र जोशी, डॉ. तेजसिंह गौड़, डॉ.सुरेन्द्र शक्तावत, श्री युगल बैरागी, श्री नरेन्द्र श्रीवास्तव श्नवनीतश्, श्रीराम दवे, श्री राधेश्याम पाठक उत्तम, श्री रामसिंह यादव, श्री ललित शर्मा, डॉ.राजेश रावल सुशील, डॉ.अनिल जूनवाल, डॉ.अजय शर्मा, संदीप सृजन, संतोष सुपेकर, डॉ.प्रभाकर शर्मा, राजेन्द्र देवधरे श्दर्पणश्, राजेन्द्र नागर निरंतर, अक्षय अमेरिया, डॉ.मुकेश व्यास, श्री श्याम निर्मल आदि ने बधाई दी। (समाचार प्रस्तुति : डॉ. अनिल जूनवाल, संयोजक, राजभाषा संघर्ष समिति, उज्जैन, मोबा. 09827273668)





भगवान अटलानी के कहानी संग्रह का विमोचन


   
 जयपुर 15 अप्रेल। हिन्दी और सिंधी के वरिष्ठ सहित्यकार भगवान अटलानी के सिंधी कहानी संग्रह “जीअरी मखि” का विमोचन मंगलवार को हुआ। देश विदेश से आये लगभग पच्चीस हज़ार प्रतिनिधियों की उपस्थिति में चैत्र माह मेले के दौरान अमरापुरा स्थान में प्रेम प्रकाश आश्रम के महामंडलेश्वर स्वामी भगत प्रकाश जी और महाराष्ट्र् सिंधी साहित्य अकादमी के अध्यक्ष डा. दयाल आशा ने पुस्तक का विमोचन किया। पुस्तक में नौ कहानियंा शामिल की गई हैं।
     अब तक भगवान अटलानी की कुल 23 पुस्तकें प्रकाशित हो रही चुकी हैं। उन्हें राजस्थान साहित्य अकादमी तथा राजस्थान सिंधी अकादमी के सर्वोच्च सम्मान क्रमशः मीरा पुरस्कार व सामी पुरस्कार मिल चुके हैं। अटलानी राजस्थान सिंधी अकादमी के अध्यक्ष रहे हैैं। (समाचार सौजन्य: भगवान अटलानी, डी-183, मालवीय नगर, जयपुर, राज.)



मालवी जाजम की ग्रीष्म फुहार गोष्ठी आयोजित


   लोकभाषा मालवी के संरक्षण एवं संवर्धन के लिये प्रतिबद्ध संस्था मालवी जाजम द्वारा (25 मई को ) ग्रीष्म फुहार रचना की संगोष्ठी आयोजित की गई, जिसमे मालवी के वरिष्ठ कवियों ने अपनी रचनाओं में ग्रीष्म ऋतु को केन्द्र में रखकर पर्यावरण सम्बंधी रचनाएं प्रस्तुत कर काव्य फुहारून से श्रोताओं को भिगो दिया।
     मालवी जाजम के सूत्रधार कविवर नरहरि पटेल ने मीठी उलाहना देता गीत ‘ओ म्हारा राम जी, एक असाड़ काम करी ने  दो सावन करी दीजो/गरीबना की बस्ती मे सुख साधन करी दीजो’ प्रस्तुत किया तो वेद हिमांशु ने अपने मर्म स्पर्शी ग्रीष्म नवगीत को जीवन की तल्ख सच्चाई को कुछ इस तरह परिभाषित किया- ‘सुधियों की नदियों मे पसरी ऊब की रेत, मर गई मछलियाँ पानी समेत, ये कैसे आये उदास सूखे  कछार से दिन, काटे नहीं कटते ये चुभन भरे दिन, बिखर गयी जैसे सारे आंगन आलपिन’।
ग्रीष्म फुहार की इस अभिनव काव्य संगोष्ठी ने सर्व श्री संतोष जोशी, हरमोहन नेमा, विजय विश्वकर्मा, मुकेश इन्दोरी, राज सांदोलिया आदि ने भी अपनी मालवी रचनाएं प्रस्तुत की। (समाचार प्रस्तुति : वेद हिमांशु, इन्दौर)





केदार शोध पीठ, बांदा में  उद्भ्रांत का एकल काव्यपाठ


बांदा। विगत केदार शोध पीठ न्यास, सिविल लाइन्स बांदा के सभागार में वरिष्ठ कवि उदभ्रांत का एकल काव्यपाठ का आयोजन किया गया जिसमें नगर एवं आसपास के जनपदों के कई रचनाकार उदभ्रांत एवं उनकी कविताओं को सुनने के लिए आये, इस अवसर पर बोलते हुये उदभ्रांत ने केदारजी से जुडे़ हुये कई संस्मरण यहां पर सुनायें, केदार जी के जीवन काल में कई बार उदभ्रांत यहां आ चुके थे। न्यास की सक्रियताओं की सराहना करते हुये कहा कि हिन्दी में अपने आप में यह अकेला न्यास है, जो किसी अपने रचनाकार को लेकर इतनी शिद्दत के साथ जुड़कर कार्य कर रहा है। न्यास द्वारा केदार जी के अप्रकाशित साहित्य के प्रकाशन के कार्य को भी देखा, जो न्यास द्वारा 10 पुस्तकों के रुप में अब तक प्रकाशित कराया जा चुका है, इसके लिए न्यास के सचिव की सराहना की। 
इस अवसर पर उदभ्रांत जी ने अपनी कई चर्चित कविताओं का काव्य पाठ किया जिनमें बकरामंडी, सुअर, घर, पान का बीडा, आगरे का पेठा, तवायफ़, आवारा कुत्ते, जोकर, बचपन, आत्महत्या, मोमबत्ती, सीता रसोई, ब्लैकहोल मुख्य रुप से श्रोताओं के द्वारा सराही गई। इस अवसर पर उदभ्रांत ने हाल में ‘प्रेरणा’, ‘हमारा भारत’ पत्रिका में प्रकाशित उपन्यास ‘नक्सल’ की चर्चा की, इस चर्चित उपन्यास की पृष्ठभूमि पर बात करते हुये उन्होंने यह भी बताया कि यह उनके द्वारा क्यों लिखा गया, नक्सलियों के प्रति सरकारी रवैये की चर्चा की। 
इस आयोजन की अध्यक्षता डॉ. रामगोपाल गुप्त ने की और संचालन चन्द्रपाल कश्यप ने किया। आयोजन के अन्त में न्यास के सचिव एवं समकालीन हिन्दी कविता के महत्वपूर्ण कवि नरेन्द्र पुण्डरीक ने सभी के प्रति आभार प्रकट किया। (समाचार प्रस्तुति : चन्द्रपाल कश्यप, केदार शोध पीठ, बांदा)



शिलांग में राष्ट्रीय हिंदी विकास सम्मेलन का भव्य आयोजन

    पूर्वोत्तर हिंदी अकादमी के तत्वावधान में दिनांक 30 मई 2014 से 1 जून 2014 तक श्री राजस्थान विश्राम भवन, लुकियर रोड, गाड़ीखाना, शिलांग में राष्ट्रीय हिंदी विकास सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। इस तरह का आयोजन अकादमी द्वारा प्रतिवर्ष मई महीने में सन् 2008 से किया जा रहा है। इसके पूर्व 2002 में भी अखिल भारतीय लेखक शिविर का आयोजन किया गया था।
उद्घाटन सत्र :  दिनांक 30 मई को इस सम्मेलन का उद्घाटन मुख्य अतिथि श्री जी. एल. अग्रवाल, वरिष्ठ पत्रकार एवं प्रधान संपादक पूर्वांचल प्रहरी, गुवाहाटी ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस सत्र में मुख्य अतिथि के अतिरिक्त अति विशिष्ट अतिथि के रूप में श्री अतुल कुमार माथुर, भारतीय पुलिस सेवा, भूतपूर्व निदेशक उत्तर पूर्वी पुलिस अकादमी, उमियम, जिला रिभोई, विशिष्ट अतिथि के रूप में वैश्य परिवार मासिक पत्रिका के प्रधान संपादक श्री श्रीहरि वाणी, कानपुर, स्थानीय समाजसेवी एवं अकादमी के संरक्षक श्री ओंमप्रकाश जी अग्रवाल, पूर्वाेत्तर हिंदी अकादमी के अध्यक्ष श्री बिमल बजाज, संरक्षक श्री किशन टिबरीवाल, प्रबंध निदेशक, होटल पोलो टावर लि., शिलांग मंच पर उपस्थित थे। इस सत्र को दौरान अकादमी द्वारा प्रकाशित पत्रिका पूर्वाेत्तर वार्ता एवं शुभ तारिका के डा. महाराज कृष्ण जैन विशेषांक सहित वैश्य परिवार पत्रिका, पावन छाया पुस्तक, वैश्य शिरोमणि भामाशाह तथा डा. महाराज कृष्ण जैन की रचनाओं का नूतन संग्रह गुरु नमन का लोकार्पण मंचस्थ अतिथियों ने किया। इस सत्र का सफल संचालन किया डॉ. अरुणा कुमारी उपाध्याय ने। सम्मेलन के संयोजक डा. अकेलाभाइ ने अपने स्वागत भाषण में इस समारोह तथा पुरस्कारों का पूरा विवरण प्रस्तुत किया। इस संत्र का आरंभ में कुमारी लानुला जमीरस सुश्री सुष्मिता दास, कुमारी अर्पिता चक्रवर्ती एवं साथियों ने स्वागत गीत तथा सरस्वती वंदना प्रस्तुत किया। इस सत्र के अति विशिष्ट अतिथि श्री अतुल कुमार माथुर ने अपने बीज भाषण में अकादमी की गतिविधियों से लोगों को अवगत कराते
हुए कहा कि हिंदीतर प्रदेशों में हिंदी का प्रचार-प्रसार करना अत्यंत कठिन कार्य है और इस कठिन कार्य को पूर्वाेत्तर हिंदी अकादमी सक्रिय रूप से विगत 24 वर्षों से कर रही है। यह अकादमी सिर्फ हिंदी का प्रचार ही नहीं करती बल्कि पुस्तक प्रकाशन, विद्यालयों में गांधी शिक्षा देने आदि का कार्य भी कर रही है। इस अकादमी के हर प्रयास को सफल एवं उचित कहा जाएगा। श्री जी. एल अग्रवाल ने अपने वक्तव्य में कहा कि अकादमी का कार्य निसन्देह सराहनीय है। हिंदी प्रेमियों को सम्मानित करना और पूर्वाेत्तर भारत में हिंदी का प्रचार प्रसार करना यह अत्यंत सराहनीय है। असम तथा पूर्वाेत्तर भारत आठों राज्यों में पत्रकारिता की दशा और दिशा की चर्चा करते हुए कहा कि पूर्वांचल प्रहरी विगत 26 वर्षों से पूर्वाेत्तर क्षेत्र में हिंदी पत्रकारिता कर रहा है। उन्होंने ने आयोजन समिति को आश्वासन दिया कि इस तरह का समारोह यदि गुवाहाटी में आयोजित किया जाता है तो हमारी तरफ से पूरा आर्थिक सहयोग प्रदान किया जाएगा। श्री ओमप्रकाश अग्रवाल, श्री श्रीहरि वाणी, श्री किशन जी टिबरीवाल ने भी अपने अपने विचार रखे और अकादमी के प्रयासों की सराहना की। इस सत्र का समापन अकादमी के अध्यक्ष श्री बिमल जी बजाज के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
काव्य संध्या :  शाम 6-30 बजे से काव्य संध्या का आयोजन कानपुर उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ कवि एवं साहित्यकार डा. रामस्वरूप सिंह चन्देल की अध्यक्षता में किया गया। इस सत्र का संचालन श्री अजय कुलश्रेष्ठ और श्रीमती रश्मि कुलश्रेष्ठ ने किया। इस सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में मंच पर श्री अतुल कुमार माथुर, भारतीय पुलिस सेवा, भूतपूर्व निदेशक उत्तर पूर्वी पुलिस अकादमी, उमियम, जिला रिभोई उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में नेपाली भाषा के कवि एवं चित्रकार श्री विक्रमवीर थापा, साहित्य अकादेमी पुरस्कार विजेता और खासी विभाग की प्रो. स्ट्रीमलेट डखार मंच पर उपस्थित रहे। सर्वश्री नयन कुमार राठी, डा. सतीशचन्द्र शर्मा सुशांधु, केवलकृष्ण पाठक, सूर्य नारायण सूर्य, राधेश्याम चौबे, केदारनाथ सविता, किसान दीवान, अजय कुलश्रेष्ठ, चंद्रप्रकाश पोद्दार, रमेश चौरसिया राही, संजय अग्रवाल, श्रीप्रकाश सिंह, विशाल के. सी. बलजीत सिंह, कुमारी आईनाम इरिंग, श्रीमती मालविका रायमेधी दास, सलमा जमाल, डा. अनीता पण्डा, श्रीमती सरिता शर्मा, कुमारी मिलीरानी पाल, कुमारी मोर्जूम लोई, कुमारी गुम्पी ङूसो, श्रीमती बन्टी आशा काकति चालिहा, श्रीमती रश्मि कुलश्रेष्ठ और श्रीमती हरकीरत हीर आदि ने काव्य-पाठ किया। आभार एवं धन्यवाद ज्ञापन संयोजक डा. अकेलाभाइ ने किया। डा. अरुणा उपाध्याय और डा. अनीता पण्डा ने मंचस्थ कवियों का स्वागत फुलाम गामोछा पहना कर किया।
हिंदी संगोष्ठी :  दिनांक 31 मई 2014 को पूर्वाह्न 10.30 बजे से केन्द्रीय हिंदी संस्थान की क्षेत्रीय निदेशिका प्रो. अपर्णा सारस्वत की अध्यक्षता में पूर्वाेत्तर भारत में हिंदी-दशा और दिशा विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें देश के विभिन्न राज्यों से आये 9 प्रतिभागियों ने अपने-अपने आलेख पढ़े। इस सत्र का संचालन राजीव गांधी विश्वविद्यालय की हिंदी अधिकारी कुमारी गुम्पी ङुसो ने किया। मुख्य अतिथि के रूप में असम राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, गुवाहाटी के मंत्रि डा. क्षीरदा कुमार शइकीया, अति विशिष्ट अतिथि के रूप में पावरग्रीड कारपोरेशन के उप महा-प्रबंधक श्री उत्पल शर्मा, विशिष्ट अतिथि के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार श्रीमती सलमा जमाल और प्रेरणा भारती साप्ताहिक समाचार पत्र की संपादिका श्रीमती सीमा कुमार मंच पर उपस्थित थे। श्रीमती मालविका रायमेधा दास, कुमारी ययमुना तायेंग, श्री संजय अग्रवालस श्री हरिमोहन नेमा हरि, श्रीमती बन्ती आशा काकति चालिहा, श्रीमती सलमा जमाल, श्री किसान दीवान, कुमारी भारती लालुंग, कुमारी लानुला जमीर आदि विद्वानों ने अपने-अपने आलेख प्रस्तुत किये। अपने अध्यक्षीय भाषण में डा. सारस्वत ने कहा कि हिंदी का विकास राष्ट्र का विकास है। इस भाषा के विकास के लिए हम सभी को प्रयत्न करना चाहिए। राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के लिए हिंदी का विकास आवश्यक है।  इस संत्र के लिए डा. अकेलाभाइ ने आभार व्यक्त किया।
     अखिल भारतीय लेखक सम्मान समारोह: दोपहर 3-30 बजे से अखिल भारतीय लेखक सम्मान समारोह के मुख्य अतिथि रूप के रूप में श्री अतुल कुमार माथुर, विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. क्षीरदा कुमार शइकीया, श्री कुंज बिहारी अजमेरा, श्री पवन बावरी, श्री पुरुषोत्तमदास चोखानी, अकादमी के अध्यक्ष श्री बिमल बजाज मंच पर उपस्थित थे। इस सत्र का सफल संचालन डॉ. अरुणा उपाध्याय ने किया। इस सत्र में सर्व श्री नयन कुमार राठी, हरिमोहन नेमा हरि (इंदौर), रमेश चौरसिया राही, राधेश्याम चौबे, केवलकृष्ण पाठक (बिलासपुर), डा. रामस्वरूप सिंह चन्देल, अजय कुलश्रेष्ठ, रश्मि कुलश्रेष्ठ, सुरेन्द्र जायसवाल (कानपुर), डा. सतीशचन्द्र शर्मा सुधांशु (बदायूँ), कुमारी मिलीरानी पाल, गुम्पी ङुसो, मोर्जूम लोई (अरुणाचल प्रदेश), किसान दीवान (छतीसगढ़), सीमा जैन (पंजाब), सूर्यनारायण गुप्ता सूर्य, केदारनाथ सविता, मञ्जरी पाण्डेय (उत्तर प्रदेश),
बलजीत सिंह (हरियाणा), कुमारी रानी तिवारी, सलमा जमाल (म. प्र.), श्रीप्रकाश सिंह, विशाल के. सी. (मेघालय), श्रीमती बंती आशा काकति चालिहा, सोमित्रम (असम) को डॉ. महाराज कृष्ण जैन स्मृति सम्मान प्रदान किया गया। आस वर्ष का श्री केशरदेव गिनिया देवी बजाज स्मृति सम्मान सर्वश्री संजय अगवाल (सिक्किम), बिमल कुमार मिश्र, श्रीमती मालविका रायमेधी दास, श्रीमती सीमा कुमार (असम), कुमारी लानुला जमीर (नागालैण्ड) को प्रदान किया गया। श्री जीवनराम मुंगी देवी गोयनका स्मृति सम्मान 2014, श्रीमती हरकीरत हीर, डा. संतोष कुमार (असम), डा. अनीता पण्डा (मेघालय) को तथा श्री जे. एन. बावरी स्मृति सम्मान 2014, श्रीमती सरिता शर्मा, श्री चन्द्रप्रकाश पोद्दार (असम) को उनके समस्त लेखन एवं साहित्यधर्मिता के लिए प्रदान किया गया। पूर्वाेत्तर हिंदी अकादमी को सहयोग देने तथा हिंदी के क्षेत्र में अत्यंत सराहनीय योगदान के लिए डा. क्षीरदा कुमार शइकीया, श्री जी. एल. अग्रवाल (असम) तथा श्री श्रीहरि वाणी (उ. प्र.) को मानपत्र से सम्मानित किया गया।
नृत्य एवं संगीत समागम :  सायं 6-30 बजे से सांस्कृतिक संध्या का आयोजन संगीत नाटक अकादेमी, नई दिल्ली के सहयोग से किया गया। इस नृत्य एवं संगीत समागम में भरतनाट्यम् असम प्रदेश का लोकप्रिय बिहु लोक नृत्य, मणिपुरी लोकनृत्य, नेपाली लोक नृत्य, पंजाबी लोकनृत्य, अरुणातल प्रदेश का लोक नृत्य, आधुनिक गीतों पर आधारित नृत्य, असमीया लोकगीत, भजन, आधुनिक गीत आदि विभिन्न कलाकारों ने प्रस्तुत किया। इस संगीत और नृत्य के रंगारंग कार्यक्रम में सिंह स्टार डांस इंसिच्यूट, नॉर्थ इस्ट डान्स अकादमी, कुमारी गरीयसी, दरथी ठाकुरिया, कुमारी गुम्पी ङुसो, मोर्जूम लोई, कुमारी ज्योत्स्ना शर्मा, उत्पल शर्मा, श्रीमती रमा चोरसिया, श्रीमती श्याम कुमारी चौरसिया, श्री किसान दीवान, श्री श्रीहरि वाणी, कुमारी लानुला जमीर, श्रीमती रश्मि कुलश्रेष्ठ, श्री सुखदेव सिंह, कुमारी रोमा सिन्हा आदि कलाकारों का सराहनीय योगदान रहा। 
पर्यटन एवं वनभोज :  रविवार 1 जून 2014 को कुल प्रतिभागी लेखकों ने बस द्वारा मतिलांग पार्क, मौसमाई
गुफा, थांगखरांग पार्क आदि स्थानों  का भ्रमण किया। बस का सफर काफी मनोरंजक था। महिला प्रतिभागियों ने रास्ते भर गीत और संगीत से इस यात्रा को सुखद और मनोरंजन-पूर्ण बना दिया। जिन लोगों ने पहली बार इस सम्मेलन में आये उनके लिए यह पर्यटन कौतूहल भरा था और सभी अपने-अपने कैमरे में क़ैद करने की कोशिश कर रहे थे। दोपहर के भोजन का आनंद सभी लेखकों ने बांगलादेश की सीमा पर लिया और रूपातिल्ली नदी को देख कर आन्नदित हुए। लेखक जब थाँगख्रांग पार्क पहुँचे तभी बरसात शुरू हो गयी। इस तरह चेरापूँजी की बरसात का आनन्द भी लेखको ने खूब उठाया।
     इस सम्मेलन के आयोजन में केशरदेव गिनिया देवी बजाज चौरिटेबुल ट्रस्ट, जीवनराम मुंगी देवी गोयनका पब्लिक चौरिटेबुल ट्रस्ट, जे. एन. बावरी ट्रस्ट, महाबीर जनकल्याण निधि, मेसर्स केशरीचंद जयसुखलाल, कहानी लेखन महाविद्यालय, श्री पुरुषोत्तम दास चोखानी और श्री ओमप्रकाश अग्रवाल के सहयोग और समर्थन के लिए आयोजन समिति ने आभार प्रकट करते हुए अपनी कृतज्ञता व्यक्त की। (समाचार प्रस्तुति : आयोजन समिति की ओर से अकेलाभाई, अकादमी सचिव)


कार्टून का विश्वकीर्तिमान




व्यंग्य चित्रकार डॉ. देवेन्द्र शर्मा को देश विदेश की पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित उनके सर्वाधिक सामयिक कार्टून सांख्या (55167) के विश्वकीर्तिमान के लिये अमेरिका का ‘गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रेकॉर्ड्स’ सम्मान प्रदान किया गया। 
      जानकारी देते हुये श्री वेद हिमांशु ने बताया कि मध्य प्रदेश के सर्वप्रथम ट्रेड सेंटर व्यवसायिक कार्टूनिस्ट, देवेन्द्र शर्मा कार्टून विषय पर पी.एच.डी. की उपाधि प्राप्त हैं। वे इस विधा के पत्रकारिता के अंतर्गत अध्यापन के सिलसिले में माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविध्यालय से भी संबद्ध रहे हैं। (समाचार प्रस्तुति :  वेद हिमांशु, इन्दौर)




नरेश कुमार ‘उदास’ को श्रेष्ठ कृति पुरस्कार





जम्मु-कश्मीर साहित्य अकादमी ने वर्ष 2012 के लिए वरिष्ठ साहित्यकार श्री नरेश कुमार ‘उदास’ को श्रेष्ठ कृति सम्मान देने की घोषणा की है। यह सम्मान उन्हें वर्ष 2012 में प्रकाशित उनकी हिन्दी में लिखित कहानी संकलन ‘माँ गाँव नहीं छोड़ना चाहती’ के लिए दिया जाएगा। इस सम्मान के अन्तर्गत इक्यावन हजार रूपये की राशि के साथ-साथ एक शॉल एक स्मृति चिह्न तथा प्रशस्ति पत्र दिया जायेगा। यह सम्मान समारोह निकट भविष्य में जम्मु-कश्मीर की राजधानी श्री नगर में आयोजित होगा। इस समारोह में प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री उमर अब्दुला स्वयं उपस्थित रहकर रचनाकार को अपने करकमलों से सम्मानित करेंगे।
           श्री नरेश कुमार बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं। उन्होंने कविता, कहानी, तथा लघुकथा में अपनी विशिष्ठ पहचान बनाई है। अब तक इन सभी विधाओं में उनकी 14 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। इससे पूर्व केन्द्रीय सरकार अहिंदी भाषा प्रदेशों के रचनाकारों को हिंदी में उत्कृष्ट लेखन कार्य के लिए सम्मानित करने की नीति के तहत उन्हें भी सम्मानित कर चुकी है। इनकी चुनी हुई रचनाओं के अनुवाद अंग्रेजी, पंजाबी, उड़िया तथा डोगरी भाषा में प्रकाशित हो चके हैं। वे ‘निर्झर’ साहित्य मंच पालमपुर(हिमाचल प्रदेश) के संस्थापक है। रचनाकार को बधाई। ( समाचार प्रस्तुति : राधेश्याम ‘भारतीय’, नसीब विहार कालोनी, घरौंडा करनाल 132114, मो- 09315382236)





सुरभि कहानी कार्यशाला का आयोजन 




दिनांक 29.06.14 को नांगलोईए दिल्ली में सुरभि कहानी कार्यशाला में अंजू शर्माए मृदुला शुक्लाए राजीव तनेजाए वंदना गुप्ताए सुनीता शानूए शोभा रस्तोगी ने कहानी पाठ किया।  अध्यक्षता की.. वरिष्ठ साहित्यकार.. सुभाष नीरव ने।   विशिष्ट अतिथि रहे . युवा साहित्यकार  विवेक मिश्र।  वाचित कहनियों पर सार्थक चर्चा हुई । प्रश्नकाल का दौर भी चला  एन बी टी के डा ललित्य ललितए वरिष्ठ साहित्य्कार प्रेमचंद सहजवालाए अनुवादिका अमृता बेरा ने अपने विचार रखे।  
         कार्यक्रम में जाह्न्वी सुमन, बल्जीत, आनंद द्विवेदी, विनोद पाराशर, निवेदिता मिश्रा झा, प्रमोद कुमार, डॉ भोज कुमार मुखी, बलजीत कुमार, वीके बॉस, संजू तनेजा, विशाखा शर्मा, देवान्या शर्मा आदि ने शिरकत की।  संचालन किया शोभा रस्तोगी ने।  आयोजक थे राजीव तनेजा। (समाचार प्रस्तुति : शोभा रस्तोगी )




हम सब साथ साथ की रोचक फेसबुक मैत्री संगोष्ठी

     यहां बुद्ध पूर्णिमा के शुभ अवसर पर सुरभि संगोष्ठी के सभागार में हम सब साथ साथ पत्रिका द्वारा प्रथम क्रियेशन एवं सुरभि संगोष्ठी के साथ मिलकर तृतीय फेसबुक मैत्री संगोष्ठी का रोचक, मनोरंजक एवं ज्ञानवर्द्धक आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ सर्वश्री किशोर श्रीवास्तव, पूनम माटिया, संगीता शर्मा एवं निवेदिता मिश्रा के भाईचारे गीत ‘‘इंसान का इंसान से हो भाईचारा, यही पैग़ाम हमारा...‘‘ के साथ हुआ तत्पश्चात दिल्ली एनसीआर व दूरदराज क्षेत्रों के अनेक फेसबुक मित्रों ने फेसबुक की वर्चुवल दुनिया से निकलकर रियल दुनिया में आकर अपने खटटे-मीठे अनुभव मित्रों के साथ साझा किये। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथियों में शामिल सर्वश्री विनोद बब्बर (संपादक-राष्ट्रकिंकर), डा.सरोजिनी प्रीतम (प्रसिद्ध व्यंग्यकार), विजय गुरदासपुरी (प्रसिद्ध ग़ज़ल गायक) एवं श्रीमती रेखा बब्बल (फिल्म/धारावाहिक लेखिका व निर्माता, मुंबई) ने भी फेसबुक के अपने रोचक अनुभव व रचनायें सुनाकर
श्रोताओं को ताली बजाने पर मज़बूर किया। इस अवसर पर एक प्रतियोगिता के माध्यम से चुनी गई पांच प्रतिभागियों (संजना तिवारी, आंध्रा, पूनम माटिया, निवेदिता मिश्रा, राम के. भारद्वाज दिल्ली एवं जगत शर्मा, दतिया) को स्मृति चिन्ह व प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। निर्णायक मंडल में शामिल थे, सर्वश्री ओम प्रकाश यति, अनिल मीत एवं डा. पूरन सिंह। श्री यति ने भी फेसबुक के अपने श्रेष्ठ अनुभव अपनी बेहतरीन शायरी के साथ साझा किये। इस अवसर पर सर्वश्री डा. दीपक, कामदेव शर्मा, मनीष मधुकर, विनोद पाराशर, विमलेन्दु सागर, नागेन्द्र, सोमा बिस्वास, अलका, संगीता शर्मा, नवीन द्विवेदी, असलम बेताब, चंद्रसेन, अविनाश वाचस्पति, रमेश, मधुबाला, सुजीत शौकीन, डा. के. चौधरी एवं शशि श्रीवास्तव आदि ने भी अपने रोचक व मनोरंजक विचार गद्य एवं पद्य में प्रस्तुत किये और श्रोताओं की वाहवाही बटोरी। संगोष्ठी में फेसबुक की अन्य जो चर्चित हस्तियां
मॉजूद रहीं उनमें सर्वश्री भानु शर्मा, संजू तनेजा, कमला सिंह जीनत, रचना आभा, मनीषा जोशी, सखी सिंह, भुवनेश सिंघल, दीपक गोस्वामी, रामश्याम हसीन, राघवेन्द्र अवस्थी, बबली वशिष्ठ, पीके बास, अंजू चौधरी, नीलिमा शर्मा, अखिलेश द्विवेदी, प्रतीक, शशि कुमार तिवारी,, मंजू लता, अमित कुमार, शीतल आहूजा रेणु बाला एवं दिव्या आदि के नाम विशेष उल्लेखनीय हैं। समस्त कार्यक्रम के सुंदर संयोजन एवं छायांकन में श्री राजीव तनेजा (सुरभि संगठन) एवं व्यवस्था को बेहतरीन अंजाम तक पहुंचान में श्री पंकज प्रथम (प्रथम क्रियेशन) की प्रभावशाली भूमिका रही। 4 घंटे से भी अधिक समय तक चले इस पूरे कार्यक्रम के बीच हंसी के फव्वारे छूटते रहे और श्रोतागण अपनी कुर्सियों से चिपके बैठे रहे। कार्यक्रम के सफल संचालन एवं हास्य की फुहारें छोड़ने का जिम्मा उठाया था हम सब साथ साथ के कार्यकारी संपादक श्री किशोर श्रीवास्तव ने। (समाचार सौजन्य : शशि श्रीवास्तव, संपादक- हम सब साथ साथ पत्रिका एवं पंकज त्यागी, नई दिल्ली)

अविराम के अंक

अविराम साहित्यिकी 
(समग्र साहित्य की समकालीन त्रैमासिक पत्रिका)

खंड (वर्ष) : 3  / अंक :   / अप्रैल-जून  2014  (मुद्रित)

प्रधान सम्पादिका :  मध्यमा गुप्ता
अंक सम्पादक :  डॉ. उमेश महादोषी 
सम्पादन परामर्श :  डॉ. सुरेश सपन
मुद्रण सहयोगी :  पवन कुमार

अविराम का यह मुद्रित अंक रचनाकारों व सदस्योंको 14 मई 2014  को तथा अन्य
सभी सम्बंधित मित्रों-पाठकों को 18 मई  2014 तक भेजा जा चुका है। 10 जून  2014  तक अंक प्राप्त न होने पर सदस्य एवं अंक के रचनाकार अविलम्ब पुन: प्रति भेजने का आग्रह करें। अन्य  मित्रों को आग्रह करने पर उनके ई मेल पर पीडीऍफ़ प्रति भेजी जा सकती है। पत्रिका पूरी तरह अव्यवसायिक है, किसी भी प्रकाशित रचना एवं अन्य  सामग्री पर पारिश्रमिक नहीं  दिया जाता है। इस मुद्रित अंक में शामिल रचना सामग्री और रचनाकारों का विवरण निम्न प्रकार है- 


।।सामग्री।।

लघुकथा के स्तम्भ :

उर्मि कृष्ण (3)
सतीश राठी (6)
वेद हिमांशु (8) 

कविता अनवरत-1(काव्य रचनाएँ)
डॉ. सुधा गुप्ता व नारायण सिंह निर्दोष (10), 
भगवानदास जैन (11), 
रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’ व डॉ.नलिन (12), 
डॉ.ओम्प्रकाश भाटिया ‘अराज’ व डॉ.मिथिलेश दीक्षित (13), 
डॉ.रामसनेही लाल शर्मा ‘यायावर’ व नरेश निसार (14), 
शुभदा पाण्डेय व अवधेश (15), 
किशन स्वरूप(16), 
डॉ.महाश्वेता चतुर्वेदी व डॉ.मालिनी गौतम (17), 
प्रो. रमेश सिद्धार्थ (18), 
शिरोमणि महतो व संतोष सुपेकर (19) 

विमर्श :
साहित्य को दलित और स्त्री-विमर्श में संकुचित कर दिया गया है: डॉ.बलराम अग्रवाल से डॉ उमेश महादोषी की लघुकथा पर बातचीत (20)
आलोचक के पूर्वाग्रह बनाम आलोचना के आग्रह :  श्याम सुन्दर निगम (29)

आहट (क्षणिकाएँ) :
सुदर्शन रत्नाकर, रजनी साहू (31),
इन्द्रा किसलय, डॉ.रघुनन्दन चिले व ज्योत्सना प्रदीप (32)

कथा कहानी : 
काला समय :  डॉ.बलराम अग्रवाल (33)

कविता अनवरत-2(काव्य रचनाएँ) :
तेज राम शर्मा व डॉ.दिनेश त्रिपाठी ‘शम्श’ (37),
शिवानन्द सिंह सहयोगी व माधुरी राऊलकर(38), 
डॉ. अशोक गुलशन, रमेश नाचीज व कृष्ण कुमार त्रिवेदी (39), 
अशोक अंजुम, विजय गिरि गोस्वामी ‘काव्यदीप’ व प्रदीप पराग (40), 
सूर्यनारायण गुप्त ‘सूर्य’ व अशोक कुमार गुप्त ‘अशोक’ (41)

व्यंग्य वाण :
जगन्नाथ विश्व (42)

कथा प्रवाह (लघुकथाएँ) :
भगीरथ (44), 
डॉ. योगेन्द्र नाथ शर्मा ‘अरुण’ (45), 
माधव नागदा व प्रताप सिंह सोढ़ी (46), 
प्रद्युम्न भल्ला (47), 
राजेन्द्र परदेसी (48), 
सिद्धेश्वर व मनजीत कौर (49), 
राधेश्याम भारतीय व अहफ़ाज़ अहमद कुरैशी (50), 
पूरन सिंह (51), 
अशोक आनन, प्रेम बहादुर कुलश्रेष्ठ ‘विपिन’ व राजेन्द्र प्रसाद यादव (52)

कविता अनवरत-3 (काव्य रचनाएँ) :
रामस्वरूप मूँदड़ा व देवी नागरानी (54), 
आकांक्षा यादव, सजीवन मयंक व मो. क़ासिम खॉन ‘तालिब’ (55), 
राम नरेश ‘रमन’ व कमलेश चौरसिया (56), 
सुभाष मित्तल ‘सत्यम’ व अशोक भारती ‘देहलवी’ (57) 

प्रसंग वश :
अविनाश दत्तात्रेय ‘कस्तूरे’ (58)

किताबें (संक्षिप्त समक्षाएँ) :
हिंदी लघुकथा के महत्त्वपूर्ण पड़ावों की पड़ताल : ओमप्रकाश कश्यप द्वारा डॉ. बलराम अग्रवाल संपा. ल.सं. ‘पड़ाव और पड़ताल-2’ (59)
प्रकृति काव्य का प्रथम हिन्दी हाइकु कोश : सतीशराज पुष्करणा द्वारा डॉ.सुधा गुप्ता व डॉ.उर्मिला अग्रवाल संपा. हा. सं. ‘हिन्दी हाइकु: प्रकृति-काव्यकोश’ (63)
विश्वसनीय रंगों की कहानियाँ : डॉ. आईदानसिंह भाटी द्वारा सुश्री  पुष्पलता कश्यप के कथा संग्रह ’पंख खोलते परिंदे’ (65)
प्रेम और अवसाद की कविताएँ :  सुदर्शन रत्नाकर द्वारा अनिता ललित के काव्य संग्रह ’बूँद बूँद लम्हे’ (66) की समीक्षाएँ।

स्तम्भ :
माइक पर/उमेश महादोषी का संपादकीय (आवरण 2)
हमारे आजीवन सदस्य (28)
चिट्ठियाँ (68), 
गतिविधियाँ (70), 
प्राप्ति स्वीकार (72)


इस अंक की साफ्ट (पीडीऍफ़) प्रति ई मेल (umeshmahadoshi@gmail.com)अथवा  (aviramsahityaki@gmail.com)  से मंगायी जा सकती है।

इस अंक के पाठक अंक की रचनाओं पर इस विवरण के नीचे टिप्पणी कालम में अपनी प्रतिक्रिया स्वयं पोस्ट कर सकते हैं। कृपया संतुलित प्रतिक्रियाओं के अलावा कोई अन्य सूचना पोस्ट न करें। 

बुधवार, 2 अप्रैल 2014

ब्लॉग का मुखप्रष्ठ

अविराम  ब्लॉग संकलन :  वर्ष  : 3,   अंक  : 07- 08,  मार्च-अप्रैल 2014


प्रधान संपादिका : मध्यमा गुप्ता
संपादक :  डॉ. उमेश महादोषी (मोबाइल: 09458929004)
संपादन परामर्श :  डॉ. सुरेश सपन 
ई मेल :  aviramsahityaki@gmail.com 


शुल्क, प्रकाशन आदि संबंधी जानकारी इसी ब्लॉग के ‘अविराम का प्रकाशन’लेवल/खंड में दी गयी है।


छाया चित्र : उमेश महादोषी 
।।सामग्री।।

कृपया सम्बंधित सामग्री के पृष्ठ पर जाने के लिए स्तम्भ के साथ कोष्ठक में दिए लिंक पर क्लिक करें। 

सम्पादकीय पृष्ठ सम्पादकीय पृष्ठ } :  नई पोस्ट नहीं। 

अविराम विस्तारित :

काव्य रचनाएँ {कविता अनवरत} :  इस अंक में डॉ. योगेन्द्र नाथ शर्मा ‘अरुण’, चमेली जुगरान, भगवानदास जैन, किशन स्वरूप, अशोक अंजुम, शुभदा पाण्डेय, सजीवन मयंक, रमेश चन्द्र शर्मा ‘चन्द्र’, श्याम झँवर ‘श्याम’, अवधेश, कृष्ण कुमार त्रिवेदी, कृपाशंकर शर्मा ‘अचूक’ की काव्य रचनाएँ।

लघुकथाएँ {कथा प्रवाह} :   इस अंक में प्रताप सिंह सोढ़ी, कमलेश भारतीय, सुधा भार्गव, राधेश्याम ‘भारतीय’, बच्चन लाल बच्चन, वंदना सहाय, वाणी दवे, कृष्ण चन्द्र महादेविया, अजहर हयात, कांता देवांगन, कमलेश चौरसिया, कृष्ण मोहन ‘अम्भोज’, डॉ. शैलेष गुप्त ‘वीर’, पुष्पा चिले, श्रेयस निसाल, संजय बोरूडे की लघुकथाएं।

कहानी {कथा कहानी} :  नई पोस्ट नहीं।

क्षणिकाएँ {क्षणिकाएँ} :  इस अंक में श्री नित्यानन्द गायेन व सु श्री अनिता ललित जी की क्षणिकाएं।

हाइकु व सम्बंधित विधाएँ {हाइकु व सम्बन्धित विधाएँ} : इस अंक में श्री रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’ के हाइकु व रेखा रोहतगी के कुछ ताँका और एक ताँका कविता।

जनक व अन्य सम्बंधित छंद {जनक व अन्य सम्बन्धित छन्द} : इस अंक में डॉ. ब्रह्मजीत गौतम एवं श्री प्रदीप पराग के जनक छंद।

माँ की स्मृतियां {माँ की स्मृतियां} :  नई पोस्ट नहीं।

बाल अविराम {बाल अविराम} :  इस अंक में पढ़िए- डॉ.महेन्द्र प्रताप पाण्डेय ‘‘नन्द’’ तथा नरेश कुमार ‘उदास’ बाल कविताएँ नन्हें बाल चित्रकारों सक्षम गम्भीर व स्तुति शर्मा के चित्रों के साथ।

हमारे सरोकार (सरोकार) : नई पोस्ट नहीं।

व्यंग्य रचनाएँ {व्यंग्य वाण} :  इस अंक में ललित नारायण उपाध्याय की व्यंग्य रचना।

संभावना {संभावना}: नई पोस्ट नहीं।

स्मरण-संस्मरण {स्मरण-संस्मरण} : नई पोस्ट नहीं।

क्षणिका विमर्श {क्षणिका विमर्श} : नई पोस्ट नहीं।

अविराम विमर्श {अविराम विमर्श}:   नई पोस्ट नहीं ।

किताबें {किताबें} : इस अंक में डॉ. बलराम अग्रवाल द्वारा सम्पादित लघुकथा संकलन "पड़ाव और पड़ताल" की श्री ओम प्रकाश कश्यप द्वारा लिखित समीक्षा। 

लघु पत्रिकाएँ {लघु पत्रिकाएँ}: नई पोस्ट नहीं।

हमारे युवा {हमारे युवा}: नई पोस्ट नहीं।

गतिविधियाँ {गतिविधियाँ}: पिछले दिनों प्राप्त साहित्यिक गतिविधियों की सूचनाएं/समाचार।

अविराम की समीक्षा (अविराम की समीक्षा) : नई पोस्ट नहीं।

अविराम के अंक {अविराम के अंक} : अविराम साहित्यकी के जनवरी-मार्च 2014 मुद्रित अंक में प्रकाशित सामग्री / रचनाकारों से सम्बंधित सूचना। 

अविराम साहित्यिकी के मुद्रित संस्करण के पाठक सदस्य (हमारे आजीवन पाठक सदस्य) : अविराम साहित्यिकी के मुद्रित संस्करण के 25  मार्च 2014 तक अद्यतन आजीवन एवं वार्षिक पाठक सदस्यों की सूची।

अविराम के रचनाकार {अविराम के रचनाकार}: नई पोस्ट नहीं।

अविराम विस्तारित

अविराम  ब्लॉग संकलन :  वर्ष  : 3,   अंक  : 07- 08,  मार्च-अप्रैल 2014



।।कविता अनवरत।।

सामग्री : इस  अंक में डॉ. योगेन्द्र नाथ शर्मा ‘अरुण’, चमेली जुगरान, भगवानदास जैन, किशन स्वरूप, अशोक अंजुम, शुभदा पाण्डेय, सजीवन मयंक, रमेश चन्द्र शर्मा ‘चन्द्र’, श्याम झँवर ‘श्याम’, अवधेश, कृष्ण कुमार त्रिवेदी, कृपाशंकर शर्मा ‘अचूक’ की काव्य रचनाएँ। 


डॉ. योगेन्द्र नाथ शर्मा ‘अरुण’



दूर चले आए अपनों से

दूर चले आए अपनों से, जीवन को बेहद उलझाया!
संदेहों को पाला  मन में, विश्वासों  को   ठुकराया!!

प्रश्नों के मरुथल में भटके,
उत्तर खोजे नहीं कभी!
उलझे रहे मीन-मेख में,
सीधी राह न चले कभी!!
तर्कों की राहों पर चल के, भाव का  धन लुटवाया!
संदेहों को पाला  मन में, विश्वासों  को   ठुकराया!!

स्नेह-दीप के उजियारों को,
रेखा चित्र :  बी मोहन नेगी 

अंधियारा  हमने समझा!
गैरों पर नित किया भरोसा,
अपनों को दुश्मन समझा!!
बने गुलाम बुद्धि के हर पल, भावों को खूब रुलाया!
संदेहों को पाला  मन में, विश्वासों  को   ठुकराया!!

आँखों के आँसू तो सूखे,
अधरों पर मुस्कानें ओढ़ी!
कृत्रिमता मन को भाई नित,
सहज भावना हमने छोड़ी!!
घुटघुट कर सो गई भावना, तर्कों को हमने अपनाया!
संदेहों को  पाला  मन में, विश्वासों  को   ठुकराया!!

  • 74/3, न्यू नेहरू नगर, रूड़की-247667, जिला हरिद्वार (उत्तराखण्ड) / मोबाइल : 09412070351



चमेली जुगरान




{कवयित्री चमेली जुगरान जी का वर्ष 2011 में प्रकाशित कविता संग्रह ‘छूटा हुआ सामान’ हमें हाल ही में पढ़ने का सुअवसर मिला। पाठकों के लिए उनके इस संग्रह से पस्तुत हैं उनकी तीन प्रतिनिधि कविताएँ।}

ऐसा तो था प्यार

हम तो चाहते हैं तुम्हें बहुत
बता रहे थे वे-

फिर बात कही कल की
याद कर हँसे खूब।
एक ने कहा-
पता है जब गिर पड़ी थीं तुम
बीच बाजार में
खुल गई थी साड़ी
दूर पड़ी चप्पल
टेढ़ी-मेढ़ी हुई ऐनक
हँसे थे सड़क पर लोग!
रेखा चित्र :  के. रविन्द्र 


बेचारी वृद्धा! दिखाई नहीं देता
घूमने आई हैं।
दूसरे ने ताना मारा

दुबारा हँसे थे घर के लोग
लेकिन इतना सुनकर
रोती रही रात भर इक नन्हीं-सी जान
क्यों न थी मैं वहाँ?
पकड़ती नानी का हाथ
जाहिर है- प्यार होता ही है ऐसा
गिरे कोई तो...
चोट खाता है कोई और!

नाथुला का फौजी
(नाथुला :  तिब्बत से जुड़ी पर्वत चोटी)

सीमान्त प्रदेश की
वो महकती शाम
याद आता है ढलकता सूरज
खिलखिलाती हँसी
खनकती सरकती चूड़ियों की झंकार
रेशमी सरसराते आंचल!

किसी की विदाई
किसी की अगुवाई
युद्ध के मँडराते बादल
फिर भी शाम थी नशीली
जाम थे हाथ में!

घर से दूर खड़ा उदास फौजी
तरसती निगाह फेरे बुदबुदाता
कितने दिनों बाद सुनी
रेखा चित्र : शशिभूषण बड़ोनी 

चूड़ियों की खनक
हँसी की उमड़ती नदी
सुनने को व्याकुल मन
लगा हम घर आ गए!

याद दिलाती हैं ये चूड़ियाँ
ममता भरे संसार की
लाल-पीले दुपट्टे
वो आँगन बिखरती धूप जहाँ
बसन्ती हवा देती थी संदेशे
आ गया बसन्त
कर ले ठिठोली।

मगर कल हमें लौट जाना है
बर्फीली चोटियाँ
करतीं जहाँ इंतजार
आती नहीं आवाज़ वहाँ से
केवल भय है उसका
खड़ा है जो सीमा पार!

बाँधना नहीं मुझे

माँ मैं अब बड़ी
हो गई हूँ-
बाँधना नहीं तुम
पिता को अभिवादन मेरा।

गर्विता हो तुम भी
हीन भावना से फिर भी
दिल जलाती हो मेरा
मानती हूँ दुलार तुम्हारा
लाया है, मुझे यहाँ तक।
रेखा चित्र :  उमेश महादोषी 

समर्थ जाना है स्वयं को
परखना है, नापना है
कहीं तुम्हारा प्रतिरूप
तो नहीं बनना मुझे!

क्या बात है माँ!
चाहकर भी तुमसे स्वतंत्र नहीं 
मुक्त करो मुझे
मैं अब बड़ी हो गई!

  • डी-31, आई.एफ.एस. अपार्टमेन्ट्स, मयूर विहार, फेस-1, दिल्ली-91 /  मोबाइल : 09868543734



भगवानदास जैन





ग़ज़ल

दुनिया के मेले में देखे हमने लासानी चेहरे।
लेकिन उनमें ज़्यादातर थे बिल्कुल बेमानी चेहरे।

ढूँढ़ रहे हैं बरसों से हम दुनिया के चिड़ियाघर में,
काश नज़र आ जाएँ यारो कुछ तो इन्सानी चेहरे।

जीहाँ-जीहाँ करने वाले अवसरवादी इस युग में,
दर-दर पर बिकते देखे हमने तो दरबानी चेहरे।
रेखा चित्र : राजेंद्र परदेसी 


अपना मुल्क है अपनी हुकूमत दुख के डेरे हैं फिर भी,
लूट रहे हैं देश को अब भी खुलकर सुल्तानी चेहरे।

बदसूरत चेहरों का जमघट शीशमहल में बैठा है,
क्या जाने कब कर दें ये पथराव की नादानी चेहरे।

जिनकी रगों में ख़ून के बदले केवल पानी बहता है,
हो जाते हैं शर्म से इक दिन वे ही पानी-पानी चेहरे।

थम जाता है वक़्त भी जिनके क़दमों की आहट पाकर,
इतिहासों में गुम हैं अब वे सारे नूरानी चेहरे।

सर्द हैं ज्यादा जर्द भी हैं कुछ गर्द में लिपटे मर्द भी हैं
क्या ही रंग-बिरंगे हैं अब के हिन्दुस्तानी चेहरे।

  • बी-105, मंगलतीर्थ पार्क, कैनाल के पास, जशोदानगर रोड, मणिनगर (पूर्व), अहमदाबाद-382445(गुजरात)


किशन स्वरूप

ग़ज़ल

अब हकीकत से यहाँ हर शख़्स कतराने लगा
आइने का सच मुखौटे ओढ़ कर भाने लगा

हो गए सूने सभी चौपाल, पनघट और अलाव
गाँव से हर रास्ता अब शहर को जाने लगा

हर समस्या का उसी के पास हल है दोस्तो
रेखा चित्र : डॉ सुरेन्द्र वर्मा 

हर नया नेता बना, ये ढोल पिटवाने लगा

देख, ऐ बापू! तुम्हारे बन्दरों का क्या हुआ
एक है सालार जिसको मौन-व्रत भाने लगा

कान में उँगली दबाए दूसरा सरकार है
चीखते गणतंत्र की आवाज झुठलाने लगा

तीसरा कानून की मानिन्द अन्धा हो गया
जुर्म हो या जुल्म सब चंगा नज़र आने लगा

हम जहाँ से भी चले थे आ गए लेकिन कहाँ
आदमी को आदमी बौना नज़र आने लगा

  • 108/3, मंगल पांडेय नगर, मेरठ-250004 / फोन :  0121-2603523 / मोबाइल :  09837003216


अशोक अंजुम




ग़ज़ल

हादिसातों की कहानी कम नहीं
हौसलों में भी रवानी कम नहीं

मेरे बाजू हैं मुसलसल काम पर
यूँ समन्दर में भी पानी कम नहीं

साथ तेरे जो गुजारी है कभी
चार दिन की ज़िन्दगानी कम नहीं
रेखा चित्र : डॉ सुरेन्द्र वर्मा 


प्यार हमको आपसे था ही नहीं
आपकी ये सचबयानी कम नहीं

हम अँधेरों की कहानी क्यों कहें
साथ में यादें सुहानी कम नहीं

  • गली-2, चन्द्रविहार कॉलोनी, (नगला डालचंद), क्वारसी रोड बाईपास, अलीगढ़-202001(उ.प्र.)

         / मोबाइल : 09258779744


शुभदा पाण्डेय




संदूक में नदी

परिवर्तित कम होते हो तुम
क्योंकि परिवर्तित करने वाली हवा
होते ही गर्म
बन जाती है शहरी
तुम्हारे तट पर बसी सई
जाने कहाँ-कहाँ चली गई
एक झाँपी लकड़ी के संदूक से
निकल ही आती है
निकालते हुए तिलकहवा बर्तन
त्यौहारों पर
झाँकते हैं उसमें
वो छत, आँगन, ओसारे
आम, पीपल, बरगद
खेत, खलिहान, कोठिले
रेखा चित्र :  बी मोहन नेगी

कुछ चीन्हे-अचीन्हे चेहरे
पचरा गाती औरतें
आम छीलती मोती बहिन
चटक चुनरी में सिंगारो भाभी
लछुमन केवटी, पदारथ भड़भूज
खपड़हा के यदु भाई
समायी हैं इसमें
बर्तनों के साथ
नदी बनी जिन्दगी
पूछी जाती है हमेशा
अपनी गंगोत्री के साथ

(सई : एक नदी
पचरा : एक प्रकार का देवी लोकगीत)

  • असम विश्वविद्यालय, शिलचर-788011, असम / मोबाइल : 09435376047 



सजीवन मयंक




जो पड़ोस में आग लगाकर आये हैं

जो पड़ोस में आग लगाकर आये हैं
खुद अपने भी हाथ जलाकर आये हैं

कल तक सीना ताने जो चलते थे 
आज स्वयं ही नजर झुकाकर आये हैं

कल पीठ में जिसने मारा था खंजर
आज उसी को गले लगाकर आये हैं

कल तक बाहों में थे, हमको दिखे नही
वही सामने अब लहराकर आये हैं

जहां अनेंको कश्ती डूबी उसी जगह
रेखा चित्र :  उमेश महादोषी 

हम अपनी कश्ती तैराकर आये हैं

रोज शाम से ही सूरज सो जाता है
हम ही उसको सुबह जगाकर आये हैं

तेरी महफिल में न कोई दखल पड़े
हम अपने दुख दर्द छिपाकर आये हैं

  • 251, शनिचरा वार्ड-1, नरसिंह गली, होशंगाबाद-461001 (म.प्र.)



रमेश चन्द्र शर्मा ‘चन्द्र’


गीतिका

कैसे उन्हें मनाने जायें?
कैसे उनको घाव दिखायें?

रीति निभाना भी मुश्किल है
वे हमको वेवफा बतायें

कर्त्तव्यों की बलि वेदी पर
अधिकारों की मांग जतायें

कुशल पूछ आगे बढ़ जाते
रेखा चित्र :  डॉ सुरेन्द्र वर्मा 

कितनों के संग प्रीति निभायें?

लगते सबको वे उनके हैं
किस-किस के हिस्से में आयें?

कुछ लोगों के दुःख मिटाकर
वे सबके मसिहा बन जायें

हाथ हिला अभिवादन करते
हँस-मुस्का कर रीति निभायें

  • डी-4, उदय हाउसिंग सोसायटी, वैजलपुर, अहमदाबाद-380015, गुजरात



श्याम झँवर ‘श्याम’




पर्यावरण सन्देश

अपने घर में और गली में
रखें स्वच्छता जन-जीवन में

शुद्ध हवा के लिए जरूरी
वाहन कम कर दें जीवन में

वृक्ष नहीं कोई भी काटे
छाया चित्र : रितेश गुप्ता 

कसम, सभी खाएं जीवन में

वृक्ष लगाएं, फूल-उगाएं
सुन्दरता पाएं जीवन में

झरने, फूल, पहाड़, वृक्ष हैं
तोहफे कुदरत के जीवन में

  • 581, सेक्टर 14/2 विकास नगर, नीमच-458441 (म.प्र.) मोबाइल :  09407423981



अवधेश




आपको जयगीत नूतन वर्ष हो!

तिमिर पर आरूढ़ ज्योर्तिकर्ष हो
ज्ञान वारिधि में विमल आमर्ष हो
आपके शुभगीत हम गाते रहें
आपको शुभगीत नूतनवर्ष हो

विहंग जब बोलें सुकंठ सम्हालकर
मिलें जब प्रिय-प्रियतमा भुज डालकर
आपके मुद मान का स्वागत करें
आपके शुभमान जीवन ज्ञान पर
आपको जब प्राप्त नव उत्कर्ष हो
स्नेहमय, जीवनव्रती संघर्ष हो
आपके प्रिय गीत हम गाते रहें
छाया चित्र : ज्योत्सना शर्मा 

आपको प्रियगीत, नूतनवर्ष हो

राष्ट्रवट सुखदा फले फलता रहे
चेतना की छाँह प्रिय मिलता रहे
खो न जायें हम प्रमादी बन यहाँ
भावना के गीत से समता रहे
आपको जब नेहदीपक यश मिले
जीवनी में सदा ही अपयश धुले
आपके जयगीत हम गाते रहें
आपको जयगीत नूतन वर्ष हो

आपके मुदगीत हम गाते रहें
आपको मुदगीत नूतनवर्ष हो

  • 2, ब्रह्मपुरी, सीतापुर-261001 (उ.प्र.)




कृष्ण कुमार त्रिवेदी




ग़ज़ल

रोको शायर की कलम, अब न लिखे ऐसी ग़ज़ल
न जमीं जाये खिसक, न फलक जाये दहल

गर्द-ए-आइना को अब न हटाओ लोगो,
राज खुल जायेगा, है कौन असल कौन नकल।

शास्त्र पर बैठ के मत समझो है दरख्त अपना,
गजर बजते ही तेरा, छूट जाये अपना दखल।
रेखा चित्र :  सिद्धेश्वर 


मैं हूँ मदहोश, संभाले रहो मुझको साकी,
जाम लवरेज है, रोको कहीं जाये न मचल।

वो शमां और थी, जो जलती थी तेरे खातिर,
शीशा-ए-कैद में है हुस्न, रे पागल तू संभल।

तेरे जज्बातों की, कौन करे कद्र यहां,
तोड़ दो कलम को और कागजों को डालो मसल। 

  • श्री ऑफसैट प्रिण्टर्स, राजेन्द्र नगर, रामपुरा, जालौन, उ. प्र.



कृपाशंकर शर्मा ‘अचूक’

ग़ज़ल

कभी बरबाद कर बैठे, कभी आबाद कर बैठे
ज़रा से होश में आए, तुम्हें फिर याद कर बैठे

हमें मारा कहाँ खंजर से, बस नज़रों से है मारा
सुनेगा कौन कहाँ अब मेरी, किसे फरियाद कर बैठे

जो दिन भर चाँद बनके, चाँदनी देते रहे मुझको
रेखा चित्र :  मनीषा सक्सेना 

मुहब्बत तेरी खुशबू छोड़ खुद बरबाद कर बैठे

बना मेहमान रक्खा है, तुझे इस दिल के दर्पन में
मिली जब-जब भी फुर्सत, साथ तो संवाद कर बैठे

शुरू से अन्त तक कहते रहे, दुनियाँ में क्या रक्खा
इसी दुनियाँ में अपनी जिन्दगी आबाद कर बैठे

अभी तक जिसको मैंने अपनी आँखों से नहीं देखा
वो सूरत अजब और अचूक होगी याद कर बैठे

  • 38-ए, विजयनगर, करतारपुरा, जयपुर-302006, राज.