आपका परिचय

सोमवार, 19 सितंबर 2011

07. बलरामअग्रवाल

बलरामअग्रवाल 

जन्म : २६ नवम्बर १९५२ बुलंदशहर (उत्तर प्रदेश) मेंशिक्षा : स्नातकोत्तर
साहित्यिक योगदान :  बलराम अग्रवाल जी लघुकथा लेखन और उस पर विचार-विमर्श की प्रक्रिया से शुरूआती दौर से ही जुड़े हुए हैं। उन्होंने न सिर्फ अच्छी लघुकथायें लिखीं, अपने उत्कृष्ट लेखों के माध्यम से जरूरी मुद्दों को भी उठाया और उनका समाधान भी प्रस्तुत किया। लघुकथा के प्रति उनका समर्पण एवं गम्भीरता उनके सम्पूर्ण लेखन में व्याप्त है। वह एक ऐसे लघुकथाकार हैं जो अपनी हर लघुकथा को लघुकथा के स्वीकृत मानकों पर कसने के बाद ही पाठकों के समक्ष लाता है। उन्होंने अपने लेखों और साक्षात्कारों के माध्यम से लघुकथा की जिन कमजोरियों को रेखांकित किया तथा जिन मुद्दों को अपनी चिन्ताओं में शामिल किया, उनके दृष्टिगत किसी प्रकार की रियायत वे अपने लघुकथाकार को भी नहीं देते। एक अच्छा रचनाकार एक अच्छा समीक्षक-समालोचक भी हो, ऐसा बहुत कम साहित्यकारों के साथ है। बलराम अग्रवाल ऐसे ही कम साहित्यकारों में से एक हैं। खास बात यह है कि उनकी रचनागत सम्वेदना और उनके व्यक्तिगत जीवन की सम्वेदना में कोई अन्तर नहीं है। अपने साहित्य में वह जिस सामाजिक दृष्टि के साथ पाठकों से रूबरू होते हैं, वह पूरी तरह उनके व्यक्तित्व से आती है। 
   बलराम अग्रवाल जी ने क्षणिका लेखन एवम क्षणिका के विधागत स्वरुप पर भी कार्य किया है। कविता पर भी उनकी मजबूत पकड़ है और  कुछ रंगमंचीय नाटकों के लिए गीत भी उन्होंने लिखे हैं।
लेखन, प्रकाशन एवं संपादन :      ‘समकालीन हिन्दी लघुकथा का मनोवैज्ञानिक अध्ययन’ उनका अप्रकाशित शोध कार्य है। ‘सरसों के फूल’(1994), ‘जुबैदा (2004)’ एवं ‘चन्ना चरनदास’ (2004) उनके चर्चित लघुकथा-संग्रह तथा दूसरा भीम (1997) बाल कहानी संग्रह है। उत्तराखंड राज्य के अनुभवों व अध्ययन पर आधारित उनकी पुस्तक 'उत्तराखंड' (2011) इस राज्य के विभिन्न पक्षों को बेहद खूबसूरती से सामने रखती हैकथा-साहित्य में अनुवाद एवं सम्पादन सम्बन्धी काफी कार्य भी उन्होंने किया है। प्रेमचन्द, भारतेन्दु हरिश्चन्द्र, प्रसाद, शरत, रविन्द्र नाथ टैगोर, बालशौरि रेड्डी आदि वरिष्ठ कथाकारों की चर्चित एवं जब्त कहानियों को खोजकर उनका सम्पादन जैसा महत्त्वपूर्ण कार्य उन्होंने गत वर्षों में किया है। इसके साथ ही अण्डमान-निकोबार की लोक-कथाओं, तेलगू एवं मलियालम की लघुकथाओं को भी अनुवाद-सम्पादन के  माध्यम से उन्होने हिन्दी के पाठकों को उपलब्ध करवाया है। वर्षों तक उन्होंने डॉ. किरण चन्द्र शर्मा जी(प्रधान संपादक) के सहयोग से लघुकथा लेखन और विमर्श की महत्वपूर्ण पत्रिका 'वर्तमान जनगाथा' का संपादन-प्रकाशन कियाआज भी उनका 'जनगाथा' ब्लॉग एक वेब पत्रिका की तरह 'वर्तमान जनगाथा' की भूमिका निभा रहा है ‘सहकार संचय’ एवं 'आलेख संवाद' के लघुकथा-विशेषांकों का अतिथि सम्पादन किया। वह हिन्दी रंग मंच से भी वर्षों सक्रिय रूप से जुड़े रहे हैं।

सम्प्रति : वर्तमान में  इन्टरनेट पर अपने विभिन्न ब्लाग्स (कथायात्रा, जनगाथा, लघुकथा-वार्ता व अपना दौर) के माध्यम से लघुकथा पर महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। 
सम्पर्क  :  एम-70 , उल्धानपुर,नवीन शाहदरा, दिल्ली-110032 
                        फोन : 08860001594
                       ई मेल :  balram.agarwal1152@gmail.com 

अविराम में आपकी रचनाओं का प्रकाशन   
मुद्रित प्रारूप : अंक : मार्च 2010/ लघुकथा के स्तम्भ में पाँच लघुकथाएँ (पृष्ठ संख्या :  4-9)/पड़ताल में एक   आलेख : लघुकथा में शब्द-प्रयोग संबंधी सावधानियाँ (पृष्ठ संख्या : 33-37)/आहट में दो क्षणिकाएं (पृष्ठ संख्या :  45)
       अंक : मार्च 2011/पड़ताल में एक   आलेख : समकालीन लघुकथा में बुजुर्गों  की दुनियां (पृष्ठ संख्या : 27 -33)
अंक : जून 2011/ पाँच क्षणिकाएं (पृष्ठ संख्या : 44)/पड़ताल में एक आलेख : क्षणिका का रचना विधान (पृष्ठ संख्या : 61 -63)
ब्लॉग प्रारूप (अविराम विस्तारित) : अक्टूबर २०११ अंक में एक लघुकथा 'हिंद फ़ौज का सूरमा' तथा दो क्षणिकाएं- 'तानाशाह, तलवार और कुत्ते' व 'प्रेम'  


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२. उपरोक्त परिचय हमें भेजे गए अथवा हमारे द्वारा विभिन्न स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर आधारित है. किसी भी त्रुटि के लिए हम क्षमा प्रार्थी हैं. त्रुटि के बारे में रचनाकार द्वारा हमें सूचित करने पर संशोधन कर दिया जायेगायदि रचनाकार अपने परिचय में कुछ अन्य सूचना शामिल करना चाहते हैं, तो इसी पोस्ट के साथ के टिपण्णी कॉलम में दर्ज कर सकते हैं। यदि किसी रचनाकार को अपने परिचय के इस प्रकाशन पर आपत्ति हो, तो हमें सूचित कर दें, हम आपका परिचय हटा देंगे
 

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