आपका परिचय

बुधवार, 21 दिसंबर 2011

61. डा. सतीश दुबे

 डा. सतीश दुबे






जन्म : 12 नवम्बर 1940, इन्दौर (म. प्र.) में। 
शिक्षा :  एम.ए. (हिन्दी व समाजशास्त्र) तथा पी-एच.डी.।
लेखन/प्रकाशन/योगदान :  डा. सतीश दुबे साहब ने यद्यपि उपन्यास, कहानी एवं हाइकू आदि में भी पर्याप्त लेखन किया है और प्रतिष्ठा अर्जित की, तदापि लघुकथा के क्षेत्र में उनका योगदान अविस्मरणीय है। डा. दुबे जी लघुकथा आन्दोलन के उन अग्रेताओं में से हैं, जिन्होंने लघुकथा-लेखन और उसके मापदण्डों के निर्धारण का कार्य तो किया ही, अपने आलेखों के माध्यम से लघुकथा को समुचित दिशा देने एवं लघुकथाकारों का मार्गदर्शन भी किया है। नये लघुकथाकारों एवं लघुकथा को आगे बढ़ाने वाले तमाम प्रयासों को उत्साहित करने में भी उनकी भूमिका अग्रणी रही है। लघुकथा की पहली सम्पूर्ण एवं समर्पित पत्रिका ‘लघु आघात’ के वह प्रधान सम्पादक रहे। सिसकता उजास, भीड़ में खोया आदमी, राजा भी लाचार है, प्रेक्षाग्रह, समकालीन सौ लघुकथाएं, बूंद से समुद्र तक जैसे महत्वपूर्ण लघुकथा संग्रहों के साथ समाजशास्त्रीय परिप्रेक्ष्य में प्रेमचन्द साहित्य (शोध ग्रन्थ), कुर्राटी, डेरा-बस्ती का सफरनामा (दोनों उपन्यास), वैसाखियों पर टिके चेहरे, साबजी, जो आग है, लखमी संग सत्रह घंटे, धुंध के बिरुद्ध (सभी कहानी संग्रह), शब्द वेधी, मालवी हाइकु (दोनों हाइकु संग्रह), थोड़ा लिखा बहुत समझना (पत्र संग्रह), बालोपयोगी एक तथा प्रौढ़ नवसाक्षरोपयोगी पाँच कहानी संग्रह और एंकांकी उनकी हिन्दी में प्रकाशित कृतियां हैं। आखरी सच्च (श्री श्यामसुंदर अग्रवाल द्वारा पंजाबी में चुनिन्दा अनूदित लघुकथाओं का संग्रह), डॉ. सतीश दुबे ह्यांच्या निवड़क लघुत्तम कथा (श्रीमती श्रीति राशिनकर द्वारा मराठी में अनूदित लघुकथाओं का संग्रह) एवं करोड़रज्जु (श्री रोहितश्याम चतुर्वेदी ‘शलभ’ द्वारा गुजराती में अनूदित लघुकथाओं का गुज.साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत संग्रह) प्रान्तीय भाषाओं में अनूदित-प्रकाशित कृतियां हैं। आपकी कृतियों ‘प्रेक्षाग्रह’ व ‘राजा भी लाचार है’ (स्नातकोत्तर स्तर पर); ‘कुर्राटी’, ‘बूंद से समुद्र तक’,‘डेरा-बस्ती का सफरनामा’, ‘लखमी संग सत्रह घंटे’ (एम.फिल. स्तर पर) पर शोध-प्रबन्ध लिखे गये हैं। तीन शोधार्थियों को दुबे साहब के साहित्य पर शोध कार्य हेतु पी-एच.डी. की उपाधि प्राप्त हुई है। सी.बी.एस.ई. के पाठ्यक्रम हेतु निधा्ररित पुस्तक में आपकी लघुकथाएं ‘योद्धा’, ‘अन्तिम सत्य’ व ‘फूल’ शामिल हैं। उपन्यास ‘डेरा-बस्ती का सफरनामा’ पर फिल्म का निर्माण हुआ है।
सम्मान :  डा. सतीश दुबे जी को उनकी साहित्य सेवा (विशेषतः लघुकथा के क्षेत्र में) एवं रचनात्मकता के लिए ‘नर्मदाप्रसाद खरे’, ‘भवभूति मिश्र’ पुरस्कार, ‘जो आग है’ कहानी संग्रह पर निर्मल पुरस्कार, लघुकथा संग्रह ‘प्रेक्षाग्रह’ पर डा. परमेश्वर गोयल सम्मान, प्रौढ़ नवसाक्षरोपयोगी कहानी संग्रह ‘भरोसे का भैंस’ को भारत शासन द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार साहित अनेक महत्वपूर्ण पुरस्कारों एवं सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है।
सम्पर्क :  766, सुदामा नगर, इन्दौर-452009 (म.प्र.)
फोन :  0731 2482314/ मोबा. 09617597211, 09406852341


अविराम में आपकी रचनाओं का प्रकाशन   

मुद्रित प्रारूप :   सितम्बर 2011 अंक में तीन लघुकथाएँ- पेशे की जात, खुशुनुमा सुबह और स्वागत सामग्री।
 
ब्लॉग प्रारूप (अविराम विस्तारित) : नवम्बर 2011 अंक में एक लघुकथा- साया।
                                                           दिसंबर  2011 अंक में एक लघुकथा- रिश्ताई नेहबंध।


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