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मंगलवार, 20 अगस्त 2013

गतिविधियाँ

अविराम  ब्लॉग संकलन :  वर्ष  : 2,   अंक  : 9-10 ,  मई-जून 2013 



जीवन के यथार्थ की अभिव्यक्ति है कविता : अरुण कमल

‘‘कविता जीवन के यथार्थ की सशक्त अभिव्यक्ति है। शिल्प के बंधनों से मुक्त आज की कविता वैचारिक रूप से अधिक परिपक्व है। पुस्तकों के बजाय इंटरनेट और ब्लॉग जैसे माध्यमों के जरिए लोकप्रिय हो रही कविता भाषा और विन्यास की सीमा से परे एक बिल्कुल नए प्रयोग की तरह है, जो बहुत कम शब्दों में अपनी गहरी छाप छोड़ जाती है।....’’ उक्त विचार विगत दिनों महादेवी वर्मा सृजन पीठ द्वारा आयोजित ‘21वीं सदी की हिन्दी कविता’ विषयक महादेवी वर्मा स्मृति व्याख्यान देते हुए कवि-आलोचक अरुण कमल ने कही। इस अवसर पर कविता पाठ की अध्यक्षता करते कवि मंगलेश डबराल ने कहा, ‘‘आधुनिक कविता में भविष्य की स्पष्ट तश्वीर देखी जा सकती है। अब कविता सिर्फ कविता के लिए नहीं बल्कि गहरे दायित्वबोध की अभिव्यक्ति है।’’ केन्द्रीय साहित्य अकादमी के सहयोग से आयोजित इस समारोह में अकादमी के उपसचिव ब्रजेन्द्र त्रिपाठी ने कहा कि अकादमी भविष्य में उत्तराखंड के विभिन्न स्थानों पर ऐसे आयोजन करेगी। पीठ के निदेशक प्रो. देव सिंह पोखरिया ने बताया कि पीठ अपने वार्षिक कलेण्डर के अनुसार कई प्रमुख साहित्यकारों के जन्म दिन पर ऐसे साहित्यक आयोजन करेगी। इस अवसर पर प्रो. पोखरिया जी के कविता संग्रह ‘नीलकण्ठ’ का विमोचन भी किया गया। काव्य पाठ करने वालों में किरण अग्रवाल, स्वाति मेकलानी, रमेश ऋषिकल्प, रेखा चमोली, हेमंत कुकरेती, रमेश चंद्र पंत, नवीन विष्ट, रा. अच्युतन, त्रिभुवनगिरि, जगतसिंह विष्ट आदि प्रमुख थे। (समाचार सौजन्य: मोहन सिंह रावत, नैनीताल)



सुरेश शर्मा की लघुकथाएं सोद्देश्य हैं :  डॉ. जवाहर चौधरी

गत दिनों लघुकथा मेंच, इन्दौर द्वारा आयाजित समारोह में सुप्रसिद्ध लघुकथाकार सुरेश शर्मा के लघुकथा संग्रह ‘अंधे बहरे लोग’ का लोकार्पण हुआ। इस अवसर पर मुख्यअतिथि सुप्रसिद्ध व्यंग्कार डॉ. जवाहर चौधरी ने कहा कि संग्रह की लघुकथाएं सोद्देश्य हैं और पाठक की चेतना को झकझोरने में समर्थ हैं। 
       सुप्रसिद्ध कवि-कथाकार वेद हिमांशु जी ने विस्तार से चर्चा करते हुए लघुकथाओं में लेखकीय सरोकारों को रेखांकित किया। राकेश शर्मा ने कहा कि लघुकथा में कम शब्दों में अधिक कहने की सामर्थ्य होनी चाहिए। सुरेश शर्मा की लघुकथाएं इस कसौटी पर खरी उतरती हैं। 
        समारोह के अध्यक्ष लब्ध प्रतिष्ठित साहित्यकार सूर्यकांत नागर ने कहा कि शर्माजी की लघुकथाओं में व्यंग्य के साथ मानवीय करुणा की अंतर्धारा प्रवाहित हाती है। संचालन प्रभु त्रिवेदी, संयोजन संजीव शर्मा व राजीव शर्मा ने किया। सभी अतिथियों का आभार हरेराम बाजपेयी ने व्यक्त किया। (समाचार सौजन्य: संजीव शर्मा, राजीव शर्मा)



नेपाल में सम्मानित हुए डॉ. यायावर




नेपाल की राजधानी काठमांडू में सम्पन्न अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दी साहित्य कला मंच भारत के वार्षिक आयोजन में अनेक कार्यक्रमों के मध्य डॉ.रामसनेही लाल शर्मा ‘यायावर’ को सुलभ इंटरनेशनल, नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित ‘शब्द-साधना सम्मान’ प्रदान किया गया। 
    इस समारोह में डॉ.यायावर ने ‘मुगलकाल में हिन्दी’ विषय पर अपना शोधालेख भी प्रस्तुत किया। आयोजन में भारत के अनेक प्रान्तों के प्रतिनिधियों के साथ कई देशों के वरिष्ठ साहित्यकार शामिल हुए। (समाचार सौजन्य : डॉ.रामसनेही लाल शर्मा ‘यायावर’)



वर्तमान में लेखकों की भूमिका महत्वपूर्ण है :  नरेश कुमार ‘उदास’

           विगत दिनों हिन्दी साहित्य निर्झर मंच, पालमपुर के समारोह में वरिष्ठ साहित्यकार नरेश कुमार ‘उदास’ की पुस्तकों ‘यहां तुम्हारा कोई नहीं’, ‘लौटकर नहीं जाऊँगी’ व ‘उदास दिनों की कविताएं’ तथा सुमन शेखर के काव्य संग्रहों ‘बहुत जरूरी है’ व ‘गुम होती लड़कियां’ के विमोचन सम्पन्न हुए। उदास जी की कृतियों पर मीना गुप्ता तथा सुमन शेखर की कृतियों पर नेहा राणा ने अपने विचार रखे। दूसरे सत्र में नरेश कुमार ‘उदास’ की अध्यक्षता में काव्य गोष्ठी भी सम्पन्न हुई। समारोह में कृष्णा अवस्थी, सुमन शेखर, उषा कालिया, मीना गुप्ता, छाया रानी, संगीता नाग, अर्जुन कन्नौजिया, परसराम शर्मा, नेहा राणा, डॉ. शेखर, सत्येन्द्र शर्मा आदि उपस्थित रहे। अध्यक्षीय भाषण में उदास जी ने वर्तमान में लेखकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए संवेदनहीन हो रहे मानुष पर गहरी चिन्ता व्यक्त की। (समाचार सौजन्य : उषा कालिया)


राजेन्द्र परदेसी के साहित्य पर शोध



वरिष्ठ साहित्यकार-चित्रकार राजेन्द्र परदेसी के साहित्य पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के डॉ.बाबूराम के निर्देशन में कैथल की सुश्री गीता द्वारा एम.फिल.की उपाधि हेतु शोध  किया गया है। शोध में परदेसी जी के व्यक्तित्व के साथ उनके कहानीकार, लघुकथाकार एवं कवि रूप की विवेचना की गई है। (समाचार सौजन्य: राजेन्द्र परदेसी)



हरिद्वार में ‘वीथिका’ की लघुकथा गोष्ठी 
   
अलकनंदा शिक्षा न्यास,हरिद्वार की वीथिका ‘लेखनी’ द्वारा पं.ज्वालाप्रसाद शाण्डिल्य ‘दिव्य’ की अध्यक्षता में 30 जून को एक लघुकथा गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी के सूत्रधार थे सूर्यकान्त श्रीवास्तव ‘सूर्य’। गोष्ठी में सुखपाल सिंह, गांगेय कमल, माधवेन्द्र सिंह, माणिक घोषाल, बुद्धि प्रकाश शुक्ल, सूर्यकान्त श्रीवास्तव ‘सूर्य’ तथा पं.ज्वालाप्रसाद शाण्डिल्य ‘दिव्य’ ने अपनी लघुकथाओं का पाठ किया। लघुकथाओं पर चर्चा हुई। अंत में केदारघाटी की आपदा में मृतकों की आत्म-शांति के लिए शांतिपाठ के साथ गोष्ठी संपन्न हुई।(समाचार सौजन्य: सूर्यकान्त श्रीवास्तव ‘सूर्य’)


दिव्य पुरस्कार घोषित

बहुचर्चित अम्बिका पसाद ‘दिव्य’ स्मृति पुरस्कारों की घोषणा कर दी गई है। उपन्यास के लिए मनोज ठक्कर व रश्मि छाजेड़ को, कविता के लिए माताचरण मिश्र को, कहानी के लिए रामेश्वर द्विवेदी को दिव्य पुरस्कार प्रदान किए गए। दिव्य रजत अलंकरण पाने वालों में संतोष परिहार, कुमार सुरेश, ओम प्रकाश शिव, कुशलेन्द्र श्रीवास्तव, बृजवासी लाल दुबे एवं सत्यनारायण ‘सत्य’ शामिल हैं। पुरस्कारों के संयोजक जगदीश किंजल्क के अनुसार आगामी 17वें दिव्य पुरस्कारों के लिए कृतियां 30 जून 2014 तक श्रीमती राजो किंजल्क, 145-ए, साईंनाथ नगर, सी-सेक्टर, कोलार रोड, भोपाल के पते पर आमंत्रित हैं। मोबाइल 09977782777 पर संपर्क किया जा सकता है। (समाचार सौजन्य : जगदीश किंजल्क)



सूर्यनारायण गुप्त ‘सूर्य’ को शब्द भूषण सम्मान




शब्द प्रवाह पत्रिका द्वारा सूर्यनारायण गुप्त ‘सूर्य’ को उनकी कृति ‘अर्थात की बरसात तले सूर्य का दर्द’ के लिए ‘शब्द भूषण’ मानद उपाधि से सम्मानित किया गया है। उनकी उक्त कृति को निर्णायक मण्डल ने तृतीय पुरस्कार के लिए चयनित किया है। (समाचार सौजन्य: सूर्यनारायण गुप्त ‘सूर्य’)





कुंवर प्रेमिल सम्मानित



संपादक-साहित्यकार कुंवर प्रेमिल को निराला साहित्य एवं संस्कृति संस्थान बस्ती(उ.प्र.) द्वारा राष्ट्रीय साहित्य गौरव से सम्मानित किया गया है। जबलपुर की संस्था ‘पाथेय’ द्वारा कहानी संग्रह ‘चिनम्मा’ के लिए ‘स्व.गिरिजा देवी तिवारी स्मृति’ सम्मान से एवं ‘आलराउन्ड’ पत्रिका द्वारा उन्हें ‘श्रेष्ठ संपादक’ की उपाधि से सम्मानित किया गया है।
(समाचार सौजन्य: कुंवर प्रेमिल)





गीत संकलन का प्रकाशन

गीतकार शिवशंकर यजुर्वेदी के संपादन में गीत संकलन ‘प्रेम के झरोखे से’ का प्रकाशन हृदयेश प्रकाशन, बरेली द्वारा किया जायेगा। शामिल होने के इच्छुक गीतकार यजुर्वेदी जी से 517, कटरा चांद खां, बरेली-243005, उ.प्र. (मो. 09319467998) पर संपर्क कर सकते हैं। सामग्री स्वीकार की तिथि 30.09.2013 है। (समाचार सौजन्य :  शिवशंकर यजुर्वेदी)




स्व. पन्नालाल नामदेव स्मृति सम्मान हेतु प्रविष्टियां आमंत्रित

म.प्र.लेखक संघ, टीकमगढ़ द्वारा संचालित स्व.पन्नालाल नामदेव स्मृति सम्मान हेतु प्रविष्टियां भेजने हेतु राजीव नामदेव ‘रानालिधौरी’ से नई चर्च की पीछे, शिवनगर, टीकमगढ़, म.प्र. मो. 09893520965 पर संपर्क कर सकते हैं। प्रविष्टियां स्वीकार की अंतिम तिथि 31 दिसंबर 2013 है। (समाचार सौजन्य: राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’‘)

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