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बुधवार, 6 जनवरी 2016

अविराम विस्तारित

अविराम  ब्लॉग संकलन :  वर्ष  : 5,   अंक  : 01-04सितम्बर-दिसम्बर 2015


।। जनक छंद ।। 

सामग्री :  इस अंक में डॉ. ब्रह्मजीत गौतम के जनक छन्द।



डॉ. ब्रह्मजीत गौतम




जनक छन्द 
01.
कुहरे का विस्तार यों
दसों दिशाओं में हुआ
बढ़ता भ्रष्टाचार ज्यों।
02.
गगन-धरा-दिग्धाम में
गहन घटाएँ छा गयीं
ज्यों रिश्वत हर काम में।
03.
कुर्सी में वह ताप है
गूँगा भी पाकर जिसे
भर उठता आलाप है।
04.
नित्य खेल षणयंत्र के
छायाचित्र : डॉ. बलराम अग्रवाल

नारे भाषण रैलियाँ
चेहरे हैं जनतंत्र के।
05.
आम आदमी आम है
अफ़सर जिसको चूसते
क्या प्रातः क्या शाम है।
06.
डुबकी नहीं लगाइये
चिंता-सागर में कभी
इच्छा-शक्ति जगाइये।
07.
डरो न यों तक़दीर से
कठिन, असंभव काम भी
होते हैं तदवीर से।

  • युक्का 206, पैरामाउन्ट सिम्फनी, क्रासिंग रिपब्लिक, गाजियाबाद-201016(उ.प्र.) / मोबा. 09425102154

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