आपका परिचय

बुधवार, 6 जनवरी 2016

गतिविधियाँ

अविराम  ब्लॉग संकलन :  वर्ष  : 5,   अंक  : 01- 04,  सितम्बर-दिसम्बर 2015  

{आवश्यक नोट-  कृपया संमाचार/गतिविधियों की रिपोर्ट कृति देव 010 या यूनीकोड फोन्ट में टाइप करके वर्ड या पेजमेकर फाइल में या फिर मेल बाक्स में पेस्ट करके ही भेजें; स्केन करके नहीं। केवल फोटो ही स्केन करके भेजें। स्केन रूप में टेक्स्ट सामग्री/समाचार/ रिपोर्ट को स्वीकार करना संभव नहीं है। ऐसी सामग्री को हमारे स्तर पर टाइप करने की व्यवस्था संभव नहीं है। फोटो भेजने से पूर्व उन्हें इस तरह संपादित कर लें कि उनका लोड लगभग 02 एम.बी. का रहे।}  



नहीं रहे लघुकथा के दो पुरोधा- प्रो. पृथ्वीराज अरोड़ा 

एवं विक्रम सोनी
प्रो. पृथ्वीराज अरोड़ा 


श्री विक्रम सोनी
लघुकथा के लिए 2015 का जाना और 2016 का आना- दोनों ही आघात देने वाले सिद्ध हुए। 2015 के जाते-जाते प्रो. पृथ्वीराज अरोड़ा जी (20 दिसम्बर को) और 2016 के आते ही ‘लघु आघात’ जैसी महत्वपूर्ण और लघुकथा साहित्य में अमर हो चुकी पत्रिका के संपादक श्री विक्रम सोनी जी (04 जनवरी को) अपनी अंतिम यात्रा पर चले गए। लघुकथा साहित्य के सृजन और विकास में इन दोनों का महत्व कभी भुलाया नहीं जा
विक्रम सोनी जी के साथ उमेश महादोषी
(सितम्बर 2015 )
सकता। प्रो. पृथ्वीरज अरोड़ा, यद्यपि पिछले कुछेक वर्षों से बीमार चल रहे थे, लेकिन समकालीन हिन्दी लघुकथा के आन्दोलन के समय से किसी न किसी रूप में जीवन पर्यन्त लघुकथा में सक्रिय रहे। ‘कथा नहीं’, कील आदि जैसी उनकी कई लघुकथाएँ बेहद 
विक्रम सोनी जी के साथ
संतोष सुपेकर व राजेंद्र देवधरे ‘दर्पण’
अविराम के लिए एक मुलाकात के दौरान
 (2012 )
चर्चित हुईं। तीन न तेरह, आओ इन्सान बनाएँ उनके लघुकथा संग्रह हैं। विक्रम सोनी जी एक लम्बे अर्से पूर्व अपना कार्यक्षेत्र बदलने के चलते और बाद में लम्बी अस्वस्थता के चलते लघुकथा के साथ प्रत्यक्ष रूप से जुड़े नहीं रह पाये थे, तदापि लघुकथा में उनके द्वारा किया गया कार्य इतना महत्वपूर्ण था कि लघुकथा जगत ने सदैव उन्हें अपने साथ महसूस किया। लघुकथा आन्दोलन की एक-एक ईंट को रखने और उसकी समग्र विकास यात्रा को ऊर्जा प्रदान करने के साथ उसकी दिशा भी तय की थी ‘लघु आघात’ ने। ‘लघु आघात’ के साथ विक्रम सोनी साहब भी लघुकथा के इतिहास में अमर हो गये। दोनों ही महान विभूतियों को अविराम परिवार की हार्दिक श्रद्धांजलि! (अविराम समाचार डेस्क)



नहीं रहे बरेली के वयोवृद्ध कवि श्री ज्ञान स्वरूप ‘कुमुद’ 



बरेली शहर के चर्चित वयोवृद्ध कवि श्री ज्ञान स्वरूप ‘कुमुद’ जी विगत 22 दिसम्बर को इस लोक से विदा ले गए। 06.06.1939 को जन्मे श्री कुमुद जी मूलतः कवि थे। अनेक प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं एवं 50 से अधिक संकलनों में उनकी काव्य रचनाएँ संकलित हुई हैं। कल्याण कुँज भाग-एक व भाग-दो, कल्याण-काव्य कलश, कल्याण-काव्य कुसुमाँजली, कल्याण-काव्य कदम्ब, कल्याण-काव्य कमलाकर -7 आदि आपकी मौलिक प्रकाशित काव्य कृतियाँ हैं। श्री चेतन दुबे ‘अनिल’ ने स्वसंपादित संकेत-13 का अंक आपके प्रेम गीतों पर केन्द्रित किया था। कुमुद जी कुछ पत्र-पत्रिकाओं व काव्य संकलनों के संपादन से भी संबद्ध रहे। कक्षा पांच के पाठ्यक्रम संबन्धी एक पुस्तक में रचना शामिल। देश भर की कई संस्थाओं द्वारा सम्मानित एवं मानद उपाधियों से अलंकृत। वह ‘कवि गोष्ठी आयोजन समिति’ बरेली के संस्थापक/महामंत्री थे। इस संस्था के माध्यम से वह बरेली में अनेक साहित्यिक गतिविधियों का संचालन करते रहे। कुमुद जी को अविराम परिवार की ओर से श्रद्धांजलि! (अविराम समाचार डेस्क)



धूमधाम से मना डॉ. सतीश दुबे का अमृत महोत्सव


इन्दौर की साहित्यिक संस्था ‘सृजन-संवाद’ द्वारा जीवन के 75 वर्ष पूर्ण होने पर सुप्रसिद्ध साहित्यकार एवं लघुकथा के पुरोधा डॉ. सतीश दुबे का अमृत महोत्सव मनाया गया। प्रीतमलाल दुआ सभागृह में साहित्यकार डॉ. कृष्णा अग्निहोत्री की अध्यक्षता में आयोजित भव्य एवं गरिमामयी समारोह में डॉ. सतीश दुबे को उनके साहित्यिक अवदान के लिए संस्था ‘सृजन-संवाद’’ के द्वारा शॉल, श्रीफल, श्रद्वानिधि, स्मृतिचिन्ह व अभिनंदन पत्र भेंट कर ‘‘अमृत साहित्य सम्मान’’ से सम्मानित किया गया। समारोह में साहित्यकार डॉ. शरद पगारे, श्री चंद्रसेन विराट एवं गांधीवादी विचारक श्री अनिल त्रिवेदी मुख्य अतिथि थे।
इस अवसर पर डॉ. सतीश दुबे की सहधर्मिणी श्रीमती मीना दुबे का अभिनन्दन इंदौर लेखिका संघ की अध्यक्ष प्रेम कुमारी नाहटा, संस्था रंजन कलश की अध्यक्ष रंजना फतेहपुरकर व समावर्तन की फीचर सम्पादिका वाणी दवे द्वारा किया गया। इसके बाद नगर के अनेक साहित्यकारों, समाज और साहित्यिक संस्थाओं के पदाधिकारियों एवं गणमान्य नागरिकों ने भी अपनी-अपनी ओर से शॉल, श्रीफल, स्मृतिचिन्ह, पुष्पहार/पुष्पगुच्छ आदि भेंटकर डॉ. सतीश दुबे का अभिनन्दन किया। 
अभिनन्दन से अभिभूत डॉ. सतीश दुबे ने सम्मान के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान व्यक्ति का नहीं अपितु सृजन और रचनात्मकता का सम्मान है। प्रकारांतर से यह पाठकों या समाज से लेखन की सराहना है, जिससे प्रेरणा और ऊर्जा मिलती है। मैं सौभाग्यशाली हूँ कि मुझे हर पीढ़ी और उसकी रचनात्मकता से रूबरू होने का अवसर मिला है। पाठकों व मित्रों से मिले प्यार और सम्मान से प्राप्त ताकत लिखने के लिए प्रेरित करती रही है। डॉ. सतीश दुबे ने साहित्यकारों द्वारा लौटाए जा रहे सम्मानों पर चुटकी लेते हुए कहा कि मैं यह सम्मान नहीं लौटाऊँगा।
इससे पूर्व खचाखच भरे सभागृह में श्रोताओं से रूबरू होते हुए मुख्य अतिथि श्री अनिल त्रिवेदी ने कहा कि व्यक्ति का शरीर नहीं, विचार महत्वपूर्ण होते हैं। स्वामी विवेकानंद ने बिना किसी संसाधन के सिर्फ विचार के बल पर ही सनातन धर्म का डंका पूरे विश्व में बजा दिया था। इसी प्रकार डॉ. सतीश दुबे, जिनके पास शरीर की सम्पत्ति नहीं के बराबर है, फिर भी विचार और रचनाधर्मिता से विगत 50 वर्षों से देश के साहित्यिक आकाश में धूमकेतु की भांति चमक रहे हैं। श्री चंद्रसेन विराट ने कहा कि मैं बड़े गर्व व हर्ष के साथ इस बात की ताकीद करता हूँ कि कथा साहित्य में लघुकथा विधा के जनक डॉ. सतीश दुबे हैं। इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि इसका श्रेय लेने की कौन कोशिश कर रहा है। मैं कवि होने के बावजूद एक कथाकार के कार्यक्रम में डॉ. सतीश दुबे के प्रति स्नेह एवं श्रद्वा के कारण आया हूँ। डॉ. शरद पगारे ने विगत कुछ वर्षों से डॉ. सतीश दुबे के शारीरिक स्वास्थ्य ठीक न होने के उपरांत भी लगातार लेखन की प्रशंसा करते हुए कहा कि एक ऋषि की भांति साहित्य साधना कर रहे हैं। उन्होंने डॉ. दुबे में कबीर और तुलसी को भी देखा और यहाँ तक कहा कि डॉ. दुबे में अष्टावक्र का डीएनए है। अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. कृष्णा अग्निहोत्री ने पुराने क्षणों को स्मृत करते हुए कहा कि जब साहित्य समाज में स्त्री साहित्यकार के सृजन को शंका की दृष्टि से देखा जाता था तथा उसकी लेखन क्षमता पर प्रश्नचिन्ह लगाये जाते थे तब डॉ. सतीश दुबे ने न केवल मेरी रचना क्षमता को पहचाना बल्कि मुझे सदैव प्रोत्साहित भी किया। डॉ. दुबे जितने अच्छे साहित्यकार हैं उससे ज्यादा अच्छे इंसान हैं। सकारात्मक दृष्टिकोंण रखते हुए आप सदैव नए साहित्यकारों को प्रोत्साहित करते व प्रेरणा देते रहे हैं।
डॉ. दुबे के इस अमृताभिनंदन समारोह में इन्दौर नगर के संस्थापक रावराजा नन्दलाल के वंशज श्री श्रीकांत जमींदार, अंतर्राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त चित्रकार श्री ईश्वरी रावल, समावर्तन पत्रिका के संपादक श्री श्रीराम दवे, साहित्यकार सर्वश्री सूर्यकांत नागर, राजकुमार कुम्भज, चैतन्य त्रिवेदी, सी. पंछीराज, चकोर चतुर्वेदी सहित भारी संख्या में साहित्यकार, साहित्य प्रेमी व गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
समारोह का आरम्भ अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्ज्वलन एवं श्रीमती रीना पाठक की सरस्वती वन्दना से हुआ। सर्वश्री कांतिलाल ठाकरे, ललित मावर, योगेश केसरवानी, अरुण ठाकरे, मनोज सेवलकर, सतीश पगारे, डॉ. शशि निगम ने शॉल, श्रीफल व तुलसी की माला से अध्यक्ष और मुख्य अतिथियों का स्वागत किया। श्री राज केसरवानी ने स्वागत उद्बोधन के शब्दों से अतिथियों का स्वागत किया। डॉ. सतीश दुबे जी के परिवार की ओर से पुत्र-पुत्रवधू परेश-अंजना व पुत्री नीता व्यास ने अतिथियों को स्नेह चिन्ह भेंट किये। कार्यक्रम का संचालन डॉ. दीपा व्यास ने किया। मनोहर दुबे ने समारोह को अपनी गरिमामयी उपस्थिति से सफल बनाने के लिए सभी उपस्थित जनों का आभार प्रकट किया। (समाचार सौजन्य : मनोहर दुबे, महासचिव, सृजन-संवाद, इन्दौर)



'मैथिली संस्कार गीतों के विविध आयाम’ विषयक 

परिसंवाद

      ’साहित्य अकादमी’ नई दिल्ली और एमएलटी महाविद्यालय, सहरसा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ’मैथिली संस्कार गीतों के विविध आयाम’ विषयक परिसंवाद एवं ’युवा साहिती’ कार्यक्रम में डा. देवेन्द्र कु. देवेश, विशेष कार्याधिकारी, साहित्य अकादमी ने कहा कि ’साहित्य अकादमी’ एक ऐसी संस्था है जिसका सरकार द्वारा वित्त पोषण तो किया जाता है लेकिन अपनी कार्य शैली में इसे स्वायत्तता है। यह स्वायत्तशासी संस्था के रूप में अपनी जिम्मेवारी निभा रही है। अकादमी द्वारा
प्रतिवर्ष सौ पुरस्कार प्रदान किए जाते हैं। विभिन्न राष्ट्रीय संगोष्ठी, बहुभाषी सम्मेलन आदि में 24 भाषी लेखक एक साथ मौजूद होते हैं। साहित्यिक संगोष्ठी को सुदूर गांवों तक ले जाने का प्रयास होता है। एक वर्ष में लगभग साढे चार सौ आयोजन किए जा रहे हैं। अकादमी द्वारा प्रतिवर्ष चार से साढे चार सौ पुस्तकें प्रकाशित की जा रही हैं। पुस्तक प्रदर्शनी लागाये जा रहे हैं। डा. देवेश ने कहा कि मैथिली का दायरा बढ़ता जा रहा है। मैथिली भाषा परामर्श मंडल के संयोजक डा. वीणा ठाकुर ने कहा
कि ’साहित्य अकादेमी’ को जो प्रतिष्ठा मिली है उसके अधिकारी आप लोग हैं। आयोजन के विषय ’मैथिली संस्कार गीतों के विविध आयाम’ पर उन्होंने कहा कि ’संस्कार’ का जीवन में महत्वपूर्ण स्थान है। जब मनुष्य की उत्पति हुई होगी तभी गीत भी सामने आया होगा। मनुष्य ने अपने सुख-दुख अथवा आनंद की अभिव्यक्ति को वाणी दी, फिर उसे शास्त्रीयता में बांधा..। मैथिली साहित्य का मध्यकाल मैथिली साहित्य के लिए स्वर्ण युग था। उन्होंने आगे कहा कि लोक गीतों की कोई सीमा नहीं होती। यह स्वतंत्र है, इसकी भाषा सरल व सुबोध होती है। लोक गीतों का भौतिकीकरण नहीं किया जा सकता। समारोह के शुभारंभ में अतिथियों का स्वागत पाग एवं अंगवस्त्र के साथ किया गया।
      इस सत्र का बीज वक्तव्य कुलानंद झा ने दिया। उन्होंने इस विषय को वटवृक्ष की संज्ञा
दी। अध्यक्षता करते हुए साहित्यकार धीरेन्द्र नारायण धीर ने कहा कि संस्कार गीत अथाह है, समुद्र है, हमारे मिथिलांचल में जन्म से मृत्यु तक संस्कार जुड़े हैं। विद्यापति के गीतों में संस्कार है, रस है। हमें अपने संस्कार नहीं छोड़ने चाहिए। प्रधानाचार्य डा. के पी यादव नें धन्यवाद ज्ञापन करते हुए संस्कार गीतों पर समग्र रूप से प्रकाश डाला। इस सत्र में आलेख पाठ करते हुए रामनरेश सिंह ने कहा कि संस्कार से जीवन के चार आश्रमों की पूर्णता होती है। रंजीत कुमार सिंह ने कहा कि संस्कार गीत से मनुष्य जीवन दैदिव्य और महान होता है। हरिवंश झा ने कहा कि संस्कार गीत लोक जीवन की आत्मा है।
श्री जगदीश प्रसाद ने कहा कि संस्कार गीत लोकगीत का मेरुदंड है। यह मंगलगीत है. हमारे यहाँ 16 संस्कार गीत हैं, अंतिम संस्कार गीत मृत्यु गीत है। हम लोग मंगलकारी हैं अतः मृत्यु गीत पर अधिक विमर्श नहीं करते। उन्होंने अंक 16 के महत्व को रेखांकित किया।
      समारोह का द्वितीय सत्र ’युवा साहिती’ का था जिसकी अध्यक्षता सुभाष चंद्र यादव ने
की। संचालन करते हुए डा. देवेश ने युवा रचनाकारों की रचनात्मकता में अकादमी की सहभागिता को रेखांकित किया। इस सत्र में स्वाति शाकंभरी अपनी कविता का पाठ किया। मधुबनी से पधारे अमित कुमार मिश्र ने अपने गीत-ग़ज़ल से श्रोताओं का ध्यान खींचा। युवा कवि उमेश मंडल ने चलू फिल्म चलू तथा बाधा शीर्षक कविताओं को सुनाया। कवि उमेश पासवान ने अपनी कविता में पर्यावरण प्रदूषण को रेखांकित किया। रंगमंच और क्षेत्रीय इतिहास से जुड़े कवि रघुनाथ मुखिया ने ’अन्हरजाल’ तथा ’बीजमंत्र जपैत’ शीर्षक कविता द्वारा वर्तमान विश्व व्यवस्था से जुड़ी कई समस्याओं से श्रोताओं को झकझोरा। निक्की प्रियदर्शनी ने ’उपन्यास में कथ्य’ तथा ’प्रकृति की बात कहु’ शीर्षक कविता से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। अकादमी द्वारा- युवा कविता पुरस्कार से सम्मानित कवि नारायण झा ने ’हंसी हरयलै’ व ’अप्पन हिस्सा’ शीर्षक कविता से प्रभावित किया। सत्र की अध्यक्षता करते हुए सुभाष चंद्र यादव ने कहा
कि समकालीन कविता परिवर्तन की उपज है। कविता विभिन्न रूपों मे लिखी जा रही है। ये अमूर्त वस्तु हैं, हृदय से निकले विचार हैं, युवा कवियों में अकूत संभावनाएं दबी है, उसे तराशने की जरूरत है।
      इस यादगार आयोजन का धन्यवाद ज्ञापन कुलानंद झा ने साहित्य अकादमी एवं एमएलटी महाविधालय का आभार व्यक्त किया। आयोजन में डा. देवनारायण साहा की पुस्तक ’मिथिलाक साहित्य-संस्कृतिक उत्कर्षमें संतकवि लोकनिक अवदान’ का साहित्यकारों द्वारा लोकार्पण, साहित्य अकादमी द्वार पुस्तक प्रदर्शनी एवं बिक्री स्टाल लगाना एवं बिजली प्रकाश व उनके सहयोगियों द्वारा स्वागत गान गायन भी था। (समाचार प्रस्तुति : अरविन्द श्रीवास्तव, सहरसा, मोबा. 09431080862)



कानपुर में डॉ. राष्ट्र बन्धु की स्मृति में बाल साहित्य 

संवर्धन संस्थान की स्थापना

सुप्रसिद्ध बाल साहित्यकार 
स्व. (डॉ.) श्रीकृष्ण तिवारी ‘राष्ट्र बन्धु’ 
     विगत 19 नवम्बर 2015 को नौबस्ता, कानपुर में सुप्रसिद्ध बाल साहित्यकार डॉ. श्री कृष्ण तिवारी ‘राष्ट्र बन्धु’ की समृति में बाल साहित्य के विकास, प्रोत्साहन एवं संवर्द्धन के उद्देश्य से ‘‘बाल साहित्य संवर्धन संस्थान’’ नाम से एक संस्था की स्थापना की गई। सर्व सम्मति से लिए गए निर्णयानुसार श्री अनिल अवस्थी को संस्थापक, सुरेन्द्र गुप्त ‘सीकर’ को अध्यक्ष, श्री चक्रधर शुक्ल व श्री उपेन्द्र नाथ शुक्ल को उपाध्यक्ष तथा श्री रमेश मिश्र ‘आनन्द’ को महामंत्री चुना गया। कार्यकारिणी के अन्य पदाधिकारियों में सर्वश्री गोविन्द नारायण ‘साँडिल्य’, सुरेश गुप्त ‘राजहंस’, राम सिंह ‘विकल’, अजीत सिंह राठौर, अविनाश अवस्थी, सुशील पाण्डेय एवं श्री अशोक गुप्त ‘अशोक’ शामिल हैं। कार्यकारिणी के गठन के बाद सभी पदाधिकारियों ने संस्थान की ओर से डॉ. भेरु लाल गर्ग (सम्पादक बाल वाटिका, भीलवाड़ा, राजस्थान) को रु. 5001/- का सम्मान प्रदान करने हेतु चयनित किया गया। साथ ही एक स्थानीय प्रतिभाशाली बालक/बालिका साहित्यकार को भी सम्मानित करने का निर्णय लिया गया। श्री अनिल अवस्थी के द्वारा उसे रु. 501/- का नकद पुरस्कार भी दिये जाने की घोषणा की गयी। (समाचार प्रस्तुति : रमेश मिश्र ‘आनन्द)



शिवना सम्मानों की घोषणा 

      शिवना प्रकाशन द्वारा प्रति वर्ष दिये जाने वाले तीन सम्मानों की घोषणा कर दी गई है। इस वर्ष के सम्मानों की चयन समिति (साहित्यकार श्री नीरज गोस्वामी, डॉ. सुधा ओम ढींगरा, श्रीमती इस्मत ज़ैदी, तथा पत्रकार श्री चंद्रकांत दासवानी) ने सर्वसम्मति से ‘रमेश हठीला स्मृति शिवना सम्मान’ हेतु साहित्यकार श्री सौरभ पाण्डेय को उनकी पुस्तक ‘छंद मंजरी’ हेतु, ‘मोहन राय स्मृति शिवना सम्मान’ हेतु साहित्यकार डॉ. लालित्घ्य ललित को पुस्तक ‘मुखौटे के पीछे का सच’ हेतु तथा ‘अम्बादत्त भारतीय स्मृति शिवना सम्मान’ हेतु पत्रकार श्री ब्रजेश राजपूत को उनकी पुस्तक ‘चुनाव, राजनीति और रिपोर्टिंग’ हेतु चयनित किया है। शहरयार खान ने जानकारी देते हुए बताया कि शिवना प्रकाशन द्वारा नई दिल्ली के प्रगति मैदान पर आयोजित विश्व पुस्घ्तक मेले में दिनांक 13 जनवरी को 12.30 बजे आयोजित शिवना सम्मान समारोह में ये सम्मान प्रदान किये जाएंगे। (समाचार प्रस्तुति :  sehore.news@gmail.com)



डॉ. यायावर को इमिरेट्स फैलोशिप

      विश्वविद्यालय अनुदान आयोग दिल्ली द्वारा डॉ. रामसनेही लाल शर्मा ‘यायावर’ को उनके द्वारा प्रस्तुत ‘नवगीत कोश तैयार करने हेतु शोध प्रकल्प’’ पर इमिरेट्स रिसर्च फैलोशिप प्रदान की गई है। आयोग द्वारा यह प्रतिष्ठित फैलोशिप अनेक विषयों में केवल सेवामुक्त प्राध्यापक श्रेणी के 100 विद्वानों को दी जाती है। नवगीतकार इस शोध प्रकल्प में सहयोग एवं सन्दर्भ हेतु अपना परिचय एवं प्रकाशित कृतियाँ तथा नवगीत की जानकारी रखने वाले सुधीजन अपने पास उपलब्ध नवगीत विषयक कोई भी सूचना/जानकारी डॉ. यायावर को ‘‘86, तिलकनगर, बाईपास रोड, फीरोजाबाद-283203, उ.प्र./मोबाइल 09412316779’’ के पते पर उपलब्ध करवा सकते हैं। (समाचार सौजन्य : डॉ. रामसनेही लाल शर्मा ‘यायावर’) 


प्राची मासिक का ‘युवा लेखन कहानी विशेषांक

साहित्यिक मासिक पत्रिका ‘प्राची’ ने 35 वर्ष तक आयु वाले युवा कथाकारों के कहानी लेखन पर केन्द्रित ‘‘युवा लेखन कहानी विशेषांक’’ के प्रकाशन की योजना बनाई है। पात्र युवा कथाकार अपनी अप्रकाशित/अप्रसारित मौलिक हिन्दी कहानियाँ ‘‘प्राची मासिक, 7, श्री होम्स, कंचन विहार, बचपन स्कूल के पास, लामटी, विजय नगर, जबलपुर-482002 (म.प्र.) के पते पर 31 मार्च 2016 से पूर्व भेज सकते हैं। रचना के साथ कहानीकारों से अपना संक्षिप्त परिचय एवं नवीनतम फोटो भेजने की अपेक्षा भी की गई है। (समाचार प्रस्तुति : संपादक, प्राची)



खुर्शीद शेख ‘खुर्शीद’ के ग़ज़ल संग्रह का लोकार्पण

      उदयपुर के वरिष्ठ साहित्यकार खुर्शीद शेख ‘खुर्शीद’ के ग़ज़ल संग्रह ‘हौसलों की उड़ान’ का लोकार्पण नेहरू हॉस्टल, उदयपुर के तिलक सभागार में राजस्थान के गृहमंत्री श्री गुलाबचन्द कटारिया जी के मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुआ। श्री कटारिया ने श्री खुर्शीद के साहित्य और उनके कार्यों की प्रशंसा करते हुए उनके साथ अपनी पुरानी मित्रता को याद किया। समारोह की अध्यक्षता उदयपुर के महापौर श्री चन्द्र सिंह कोठारी ने करते हुए कहा कि इस छोटी पुस्तक में गहरे भाव समाहित हैं। श्री खुर्शीद नवाब साहब ने खुर्शीद शेख की इस पुस्तक की साफ-सुथरी समीक्षा की। समारोह में विशिष्ट अतिथि शब्बीर के. मुस्तफा, उदयपुर ग्रामीण क्षेत्र के विधायक श्री फूल चन्द जी मीणा की उपस्थिति भी उल्लेखनीय थी। डॉ. इकबाल सागर ने अतिथियों का स्वागत किया। संचालन श्री मुस्ताक चंचल ने किया। मनमोहन मधुकर ने समारोह को सफल बनाने के लिए सभी उपस्थित जनों का धन्यवाद किया। इस अवसर पर चित्तौड़गढ़ के शायर अब्दुल जब्बार की अध्यक्षता में काव्य गोष्ठी का आयोजन भी किया गया। (समाचार सौजन्य : मनमोहन मधुकर, अध्यक्ष - युगधारा, उदयपुर)



अखिल भारतीय शब्द प्रवाह साहित्य सम्मान 2016 

हेतु पुस्तकें आमंत्रित

उज्जैन की साहित्यिक संस्था शब्द प्रवाह साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक मंच द्वारा कविता (गीत, ग़ज़ल, छन्द, नई कविता), व्यंग्य एवं लघुकथा विधाओं में ‘शब्द प्रवाह साहित्य सम्मान 2016’ हेतु वर्ष 2012 से 2015 के मध्य प्रकाशित पुस्तकें 31 जनवरी 2016 तक आमंत्रित की गई हैं। इसी के साथ स्व. बालशौरि रेड्डी स्मृति बाल साहित्य सम्मान हेतु बाल साहित्य की एवं श्रीमती सत्यभामा सुखदेव त्रिवेदी स्मृति गीतकार सम्मान हेतु गीत काव्य की कृतियाँ भी तीन-तीन प्रतियों में आमंत्रित की गई हैं। विस्तृत विवरण जानने एवं रचनाकार परिचय एवं दो रंगीन फोटो सहित प्रविष्टियाँ प्रेषण हेतु ‘‘शब्द प्रवाह, ए-99, व्ही.डी. मार्केट, उज्जैन-456006 (म.प्र.)/मोबा. 09926061800’’ के पते पर संपर्क किया सकता है। (समाचार सौजन्य : संदीप सृजन, संपादक: शब्द प्रवाह)



राजस्थान साहित्य परिषद ने  

कृष्ण कुमार यादव को किया सम्मानित 

प्रशासन के साथ-साथ हिंदी साहित्य और ब्लॉगिंग के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय सेवाओं के लिए राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र जोधपुर के निदेशक (डाक सेवाएँ) एवं साहित्यकार श्री कृष्ण कुमार यादव को राजस्थान साहित्य परिषद् की ओर से 4 नवंबर को सम्मानित किया गया। श्री यादव को यह सम्मान उनके हनुमानगढ़ प्रवास के दौरान राजस्थान साहित्य परिषद, हनुमानगढ़ की तरफ से इसके संस्थापक एवं अध्यक्ष श्री दीनदयाल शर्मा, वरिष्ठ बाल साहित्यकार और सचिव श्री राजेंद्र ढाल ने शाल ओघकर, नारियल फल देकर एवं प्रशस्ति पत्र देकर अभिनन्दन और सम्मानित किया। श्री शर्मा ने कहा कि श्री कृष्ण कुमार यादव का हनुमानगढ़ में आगमन सिर्फ एक अधिकारी के रूप में ही नहीं बल्कि साहित्यकार, लेखक और ब्लॉगर के रूप में भी हुआ है और उनके कृतित्व से हम सभी अभिभूत हैं। इस दौरान दून महाविद्यालय, हनुमानगढ़ के प्राचार्य श्री लक्ष्मीनारायण कस्वां, श्रीगंगानगर मंडल के डाक अधीक्षक श्री भारत लाल मीणा सहित तमाम अधिकारीगण और साहित्यकार उपस्थित रहे। (समाचार प्रस्तुति : राजेंद्र ढाल, सचिव- राजस्थान साहित्य परिषद, हनुमानगढ़, राजस्थान)



सपना मांगलिक को ‘राष्ट्र गौरव सम्मान’ सम्मान 

विगत 15 नवम्बर को लखनऊ के चारबाग स्थित रवीन्द्रालय ऑडिटोरियम में सीमापुरी टाइम्स, मेहर टाइम्स, आरोग्य दर्पण पत्रिका एवं हमराह फाउंडेशन के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित ‘प्राइड ऑफ नेशन’ सम्मान समारोह में आगरा की प्रसिद्द रचनाकार सपना मांगलिक को साहित्य की हर एक विधा, यथा- संपादन, लेखन, काव्य, पत्रकारिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए ‘राष्ट्र गौरव सम्मान’ से सम्मानित किया गया। उन्हें यह सम्मान असम, उड़ीसा एवं झारखंड के पूर्व राज्यपाल सर सैय्यद शिपते राजिद, भारत सरकार के पूर्व स्वास्थ्य निदेशक डॉ ओ पी सिंह, वरिष्ठ आयकर अधिवक्ता श्री शिवमंगल जोहरी, समाज सेवी मनमोहन तिवारी, अपर स्वास्थ्य महानिदेशक टी.एस. थानवी द्वारा प्रदान किया गया। सुश्री सपना मांगलिक के साथ ही देश-विदेश की अन्य उनतालीस हस्तियों को भी इस सम्मान से नवाजा गया। .कार्यक्रम का संचालन कृषि मंत्रालय के सहायक निदेशक और खरी-खरी फेम किशोर श्रीवास्तव जी ने किया। (समाचार सौजन्य : सपना मांगलिक, मोबा. 09548509508)



‘राना लिधौरी’ को मिला 

‘साहित्य सृजन सम्मान-2015’  

टीकमगढ के साहित्यकार एवं म.प्र.लेखक संघ के जिलाध्यक्ष राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ को उनकी रचनाधर्मिता एवं सतत् सृजन शीलता के लिए मध्यप्रदेश लेखक संघ की जिला इकाई अशोकनगर द्वारा 35 वें आंचलिक साहित्यकार सम्मान समारोह 2015 में ‘’साहित्य सृजन सम्मान 2015 से सम्मानित किया। राना लिधौरी को स्मृति चिह्न श्रीफल,श्री शाल एवं सम्मान पत्र भेंट किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि भोपाल से श्री राधावल्लभ आचार्य प्रदेशाध्यक्ष, योगेश शर्मा, अरविन्द्र चतुर्वेदी, राकेश वर्मा ‘हेरत’ मंचासीन थे। (समाचार सौजन्य : राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’)




कक्का के काव्य संग्रह ‘सब ठीक-ठाक हौ’ का लोकार्पण



हास्य-व्यंग्य के सशक्त कवि-लेखक और समीक्षक  अजय चतुर्वेदी ‘कक्का’ के भोजपुरी हास्य-व्यंग्य काव्य संग्रह ‘सब ठीक-ठाक हौ’ का लोकार्पण अवधूत भगवान राम स्नातकोत्तर महाविद्यालय अनपरा (सोनभद्र) के सभागार में देश के जाने माने गजलकार डॉ. मधुर नज़्मी और बी एच यू के प्रोफेसर एवं लब्ध प्रतिष्ठित गीत-गजलकार डॉ. वशिष्ठ अनूप द्वारा 19 दिसम्बर 2015 को किया गया। इस अवसर पर डॉ. मधुर नज़्मी ने कक्का की प्रशंसा करते हुए कहा- ‘अजय चतुर्वेदी कक्का का हास्य-व्यंग्य समय संदर्भ की वाजिब अक्काशी है। समय के रूहानी दर्द पर नस्तरी चाकू की तरह इनके व्यंग्य चलते हैं और खुभते हैं। इनकी रचनाओं के संदर्भ में महेश अश्क का यह शेर सटीक बैठता है -‘इन्हें छेड़ो जहॉं से बोलती हैं, किताबें आदमी को खोलती हैं।’ डॉ. वशिष्ठ अनूप ने कक्का की सराहना करते हुए कहा- समाज और राजनीति के तल्ख यथार्थ को लोकभाषा और लोकछंदों में खूबसूरत ढंग से प्रस्तुत करने वाले श्री अजय चतुर्वेदी ‘कक्का’ श्रेष्ठ रचनाकारों में एक हैं। (समाचार प्रस्तुति : अजय चतुर्वेदी ‘कक्का’) 



नारायणी साहित्य अकादमी का 

सम्मान समारोह बरेली में सम्पन्न

      नारायणी साहित्य अकादमी शाखा उ.प्र. के तत्वावधान में सम्मान समारोह व काव्य संध्या का आयोजन अकादमी अध्यक्षा निरुपमा अग्रवाल के प्रभात नगर, बरेली स्थित आवास पर वरिष्ठ शाइर विनय साग़र जायसवाल की अध्यक्षता में आयोजित किया गया। मुख्य अतिथि डॉ. हसन ज़ैदी व विशिष्ट अतिथि व्यापारी नीरज अग्रवाल रहे। डॉ रंजन विशद की वाणी वंदना से प्रारंभ हुए कार्यक्रम का संचालन युवा कवि रोहित राकेश ने सफलता पूर्वक किया। 
      इस अवसर पर डॉ भावना शर्मा (नई दिल्ली) व डॉ मोनिका अग्रवाल (बरेली) का सारस्वत सम्मान किया गया। काव्य संध्या पी एफ कमिश्नर आलोक यादव, डॉ सतेन्द्र सिंह, सिया सचदेव, आनंद गौतम, शिवशंकर यजुर्वेदी, कृष्णा खन्डेलवाल, डॉ राकेश यदुवंशी, अजय भटनागर, नगमा बरेलवी, नीलम सक्सेना, संजय शर्मा (नई दिल्ली), जीतेश राज (पीलीभीत), सुधीर चंदन आदि ने अपनी बेहतरीन रचनाओं से अंत तक समाँ बाँधे रखा। नगर विधायक डॉ. अरुन कुमार व युवा समीक्षक डॉ. नितिन सेठी सहित अन्य गणमान्य नागरिक अंत तक काव्य संध्या का आनंद लेते रहे। शाइरा सिया सचदेव ने सहभागी बनने के लिए सभी उपस्थित जनों का आभार प्रकट किया। (समाचार प्रस्तुति : विनय साग़र जायसवाल, बरेली)



पं. हरप्रसाद पाठक-स्मृति 

बाल साहित्य पुरस्कार घोषित


पं. हरप्रसाद पाठक-स्मृति बाल साहित्य पुरस्कार समिति, मथुरा के तत्वावधान में आयोजित वर्ष-2014 के पुरस्कार हेतु श्री रमेशचंद पंत (अल्मोड़ा) के बाल काव्यसंग्रह-‘‘44 बाल कविताएॅं’’ को तथा वर्ष-2015 के लिए श्रीमती नीरजा द्विवेदी (लखनउ) के बाल कहानी संग्रह- ‘‘आलसी गीदड़’’ को चुना गया है। पुरस्कार वितरण समारोह दिसम्बर-15 के अंतिम सप्ताह में सम्पन्न होगा। पुरस्कृत कृतियों के अतिरिक्त भी जिन पुस्तकों को श्रेष्ठ पाया गया है उनके रचनाकारों के लिए सम्मान-पत्र डाक द्वारा दिसम्बर-15 के द्वितीय सप्ताह में भेज दिए जायेंगे। वर्ष-2014 के लिए बालकहानी संग्रह-‘‘पेड़ नहीं कटेगा’’ के लेखक डॉ. देशबन्धु शाहजहॉंपुर को एवं वर्ष-2015 के लिए बालकहानी संग्रह-‘‘चॉकलेट’’ के लेखक डॉ. मौ. साजिदखान फैजाबाद को, बालकहानी संग्रह-‘‘बिल्ली मौसी बड़ी सयानी’’ के लेखक श्री गोविन्द शर्मा अजमेर को, तथा बाल-उपन्यास-‘‘जंगल का लोकतंत्र’’ के लेखक श्री कमलेश भट्ट ‘कमल’ गाजियाबाद को शामिल किया गया है। वर्ष-2015 के डॉं रमनदास पंड्या-स्मृति बालसाहित्यकार पुरस्कार हेतु श्री अनुज चतुर्वेदी मथुरा को एवं श्री शिवनारायण रावत-स्मृति युवा साहित्यकार पुरस्कार हेतु भीलवाड़ा राज. के श्री सत्यनारायण‘सत्य’ को चुना गया है। (डॉ. दिनेश पाठक शशि, सचिव, पं0हरप्रसाद पाठक-स्मृति बाल साहित्य पुरस्कार समिति,मथुरा, उ.प्र.)



डॉ. रमेश कटारिया ‘पारस’ सम्मानित



      विगत दिनों कोटा (राज.) में भारतेन्दु हरिश्चंद्र की 165 वीं जयंती के अवसर पर आयोजित साहित्य सम्मेलन में देश भर के 19 अन्य साहित्यकारों के साथ कवि श्री रमेश कटारिया ‘पारस’ को भारतेन्दु हरिश्चंद्र समिति कोटा द्वारा सम्मानित किया गया। समिति की ओर से श्री पारस को सम्मानस्वरूप सुप्रसिद्ध कवि श्री रामेश्वर शर्मा (रामू भैया) द्वारा शॉल, श्रीफल, साहित्य श्री सम्मान, प्रतीक चिन्ह एवं रु. 1100/- नकद राशि प्रदान की गई। (समाचार प्रस्तुति : रमेश कटारिया ‘पारस’)



टीकमगढ़ के ‘हनुमानगढ़ी’ क्षेत्र में हुआ 

हास्य कवि सम्मेलन

टीकमगढ़ नगर की साहित्यिक संस्था ‘म.प्र.लेखक संघ’, अ.भा.साहित्य परिषद, अ.भा. बुन्देलखण्ड साहित्य एवं संस्कृति परिषद, बज़्मे अदब, राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, कवि संगम सहित अनेक साहित्यिक संस्थाओं ने मिलकर ग्राम महाराजपुरा में हनुमानगढ़ी सिद्ध क्षेत्र पर एक ‘हास्य कवि सम्मेलन’ का आयोजन किया जिसमें जमकर ठहाके लगाये गये। सभी को अपनी रचनाएँ सुनाने से पूर्व एक पर्ची उठाकर उसमें लिखे अनुसार कार्य करना था। इस हास्य कवि सम्मेलन की अध्यक्षता ‘म.प्र.लेखक संघ’ के जिलाध्यक्ष राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ ने की जबकि मुख्य अतिथि के रूप में डॉ.जे.पी.रावत रहे एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में वरिष्ठ गीतकार पं.मनमोहन पाण्डेय उपस्थित रहे। सर्वश्री पं.मनमोहन पाण्डेय, सीताराम राय, योगेन्द तिवारी ‘योगी’, राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’, रामगोपाल रेैकवार, गुलाब सिंह यादव ‘भाऊ’, पूरनचन्द्र गुप्ता, उमाशंकर मिश्र तन्हा, डॉ.जे. पी. रावत, चाँद मोहम्मद ‘आखिर’, गणेशी पन्नालाल शुक्ला, विजय मेहरा, सियाराम अहिरवार, दीनदयाल तिवारी, शांति कुमार जैन, भारत विजय बगेरिया, अभिनंदन गोइल, परमेश्वरीदास तिवारी, संतोष कठैल, हरेन्द्रपाल सिंह, राजेन्द्र विदुआ आदि कवियों ने काव्य पाठ किया। संचालन उमाशंकर मिश्र’ एवं पूरनचन्द्र गुप्ता ने तथा उपस्थित जनों का आभार व्यक्त किया परमेश्वरीदास तिवारी ने। (समाचार प्रस्तुति : राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’)

कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें