आपका परिचय

मंगलवार, 20 नवंबर 2012

289. मुकेश मणिकांचन


मुकेश मणिकांचन


शिक्षा :  स्नातकोत्तर एवं पीएचडी जारी। 

लेखन विधाएं :  व्यंग्य गीत, क्षणिका। मंचों पर काव्यपाठ, विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशन एवं संपादन।

संप्रति :  संवाददाता हिन्दुस्तान (आगरा) व निजी व्यवसाय।

संपर्क :  गली रामचरण, सिरसागंज, जिला फिरोजाबाद 
             मोबाइल :  09927013467 /  09411060600
            ईमेल :  sirsaganjht@gmail.com



अविराम में प्रकाशन

ब्लॉग प्रारूप :  जून 2012 अंक में एक काव्य रचना- ‘भाग्य विधाता’।





नोट : १. परिचय के शीर्षक के साथ दी गयी क्रम  संख्या हमारे कंप्यूटर में संयोगवश  आबंटित  आपकी फाइल संख्या है. इसका और कोई अर्थ नहीं है।
२. उपरोक्त परिचय हमें भेजे गए अथवा हमारे द्वारा विभिन्न स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर आधारित है. किसी भी त्रुटि के लिए हम क्षमा प्रार्थी हैं. त्रुटि के बारे में रचनाकार द्वारा हमें सूचित करने पर संशोधन कर दिया जायेगा। यदि रचनाकार अपने परिचय में कुछ अन्य सूचना शामिल करना चाहते हैं, तो इसी पोस्ट के साथ के टिपण्णी कॉलम में दर्ज कर सकते हैं। यदि किसी रचनाकार को अपने परिचय के इस प्रकाशन पर आपत्ति हो, तो हमें सूचित कर दें, हम आपका परिचय हटा देंगे।

288. पुष्पा गुप्ता


पुष्पा गुप्ता





शिक्षा :  राजनीति विज्ञान एवं हिन्दी में स्नातकोत्तर।

लेखन/प्रकाशन/योगदान :  मूलतः कवयित्री। छुटपुट रचनाएं पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित। पुष्पा जी का एक कहानी संग्रह ‘साधना’ एवं एक कविता संग्रह ‘यथार्थ’ प्रकाशित हो चुका है। लेखन के साथ अध्ययन, भ्रमण आदि आपकी अभिरुचियों में शामिल हैं।

संप्रति :  प्राइवेट अध्यापन।

संपर्क :  कटरा बाजार, महमूदाबाद (अवध), सीतापुर-261203 (उ.प्र.) 
                  मोबाइल : 08601168254


अविराम में प्रकाशन 

ब्लॉग प्रारूप :  अक्टूबर 2012 अंक में दो लघु काव्य रचनाएं।




नोट : १. परिचय के शीर्षक के साथ दी गयी क्रम  संख्या हमारे कंप्यूटर में संयोगवश  आबंटित  आपकी फाइल संख्या है. इसका और कोई अर्थ नहीं है।
२. उपरोक्त परिचय हमें भेजे गए अथवा हमारे द्वारा विभिन्न स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर आधारित है. किसी भी त्रुटि के लिए हम क्षमा प्रार्थी हैं. त्रुटि के बारे में रचनाकार द्वारा हमें सूचित करने पर संशोधन कर दिया जायेगा। यदि रचनाकार अपने परिचय में कुछ अन्य सूचना शामिल करना चाहते हैं, तो इसी पोस्ट के साथ के टिपण्णी कॉलम में दर्ज कर सकते हैं। यदि किसी रचनाकार को अपने परिचय के इस प्रकाशन पर आपत्ति हो, तो हमें सूचित कर दें, हम आपका परिचय हटा देंगे।

287. डॉ॰ सुधेश


डॉ॰ सुधेश




जन्म :  6 जून 1933, जगाधरी, ज़िला-अम्बाला (हरियाणा)।

शिक्षा :  एम.ए., पीएच.डी. (हिन्दी)। भाषा ज्ञान-हिंदी, उर्दू, अंग्रेजी, संस्कृत।

लेखन/प्रकाशन/योगदान :  दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में हिन्दी के प्रोफेसर के पद से सेवानिवृत्त सुधेश जी मूलतः कवि एवं आलोचक हैं। आपकी प्रकाशित कृतियाँ में प्रमुख हैं- फिर सुबह होगी ही, घटनाहीनता के विरुद्ध (1988), तेज़ धूप (1993), जिये गये शब्द (1999), गीतायन (2001), कवि सभा, बरगद (खण्ड काव्य-2001), निर्वासन (खण्डकाव्य), जलती शाम (काव्य संग्रह-2007), सप्तपदी (खण्ड-7 दोहा संग्रह), हादसों के समन्दर (ग़ज़ल संग्रह, 2010) (सभी काव्यकृतियाँ); आधुनिक हिन्दी और उर्दू कविता की प्रवृत्तियाँ (1974), साहित्य के विविध आयाम (1983), कविता का सृजन और मूल्यांकन (1993), साहित्य चिन्तन (1995), सहज कविता, स्वरूप और सम्भावनाएँ (1996), भाषा, साहित्य और संस्कृति (2003), राष्ट्रीय एकता के सोपान (2004), सहज कविता की भूमिका (2008), चिंतन अनुचिंतन(2012), हिन्दी की दशा और दिशा (2012) (सभी आलोचनात्मक ग्रन्थ); नई धरती के लोग (यूरोप-यात्रा-वृत्तान्त), पहली दुनिया में (अमेरिका यात्रा-वृत्तान्त), भटकते पाँव (देश-विदेश यात्रा-वृत्तान्त) (सभी यात्रावृत्तान्त); स्मृतियों की धरोहर, यादों के झरोखों से (दोनों संस्मरण)। रेत के टीले (उपन्यास), कब होगा लोकार्पण (व्यंग्य लेख संग्रह) तथा तीन खण्डों में आत्मकथा- रंग बेरंग(प्रथम खण्ड), तना हुआ इन्द्रधनुष (द्वितीय खण्ड), शाम हो गई (तृतीय खण्ड)।

सम्मान :  भारत सरकार के सूचना प्रसारण मन्त्रालय का वर्ष 2000 का भारतेन्दु हरिश्चन्द्र पुरस्कार (प्रथम श्रेणी), गाज़ियाबाद के युवा साहित्य मण्डल द्वारा 2001 में समानित, आगरा की नागरी प्रचारिणी सभा द्वारा सन् 2003 में सार्वजनिक अभिनन्दन, अखिल भारतीय कवि सभा, दिल्ली द्वारा क्षेमचन्द्र सुमन पुरस्कार, स्वर्गीय मेघा सिंह चौहान स्मारक साहित्य पुरस्कार, म॰प्र॰ की साहित्य अकादमी का अ॰भा॰ कविता पुरस्कार (2006) एवं राष्ट्रधर्म प्रकाशन, लखनऊ द्वारा राष्ट्रधर्म गौरव पुरस्कार (2008) आदि।

संप्रति :  दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में प्रोफेसर (हिन्दी) के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद समर्पित लेखन।

संपर्क :  314, सरल अपार्टमेन्ट, द्वारका सेक्टर-10, नई दिल्ली-110075
            फोन : 011-25084987 /  मोबाइल :  09350974120
             ई-मेल  :  drsudhesh@gmail.com



अविराम में प्रकाशन 

मुद्रित प्रारूप :  अप्रैल-जून 2012 अंक में एक ग़ज़ल।

ब्लॉग प्रारूप :  अक्टूबर  2012 अंक में एक ग़ज़ल। 





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286. डॉ. देवेन्द्र कुमार मिश्रा


डॉ. देवेन्द्र कुमार मिश्रा





जन्म :  21.03.1973, दमोह (म.प्र.) 

शिक्षा :  एम.ए. (समाज शास्त्र), एम.फिल., पी-एच.डी.।

लेखन/प्रकाशन/योगदान :  कथा, कविता तथा ग़ज़ल में लेखन। लेखन के साथ पत्रकारिता में भी सक्रिय। ये कौन सी दुनिया में, हम सब गधे हैं, खरी-खरी, अन्तर्द्वन्द्व, आखिर क्यों?, मेरी हास्य-व्यंग्य कवितायें, मुखौटों की दुनिया, प्रजातन्त्र का फ्लॉप शो, कल तुम्हारा होगा, रोटी के छाले, कुछ ऐसे लोग भी होते हैं, जन्म-मरण के मध्य (सभी कविता संग्रह); खाली आसमान, बदलते रंग, श्रद्धा और समर्पण, लड़की भाग गई एवं उनका मन (सभी कथा संग्रह) प्रकाशित कृतियां।

सम्प्रति :  ग्लोबल वर्ल्ड में साहित्य संपादक।

सम्मान :  अनकों संस्थाओं से सम्मानित।

सम्पर्क :  पाटनी कालोनी, भरत नगर, चन्दनगांव, छिन्दवाड़ा (म0प्र0) 480001 
                       मोबाइल : 09425405022



अविराम में प्रकाशन 

मुद्रित प्रारूप :  अप्रैल-जून 2012 अंक में लघुकथा- ‘अन्ना के आन्दोलन के बीच एक छोटा सा भ्रष्टाचार’।





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285. निर्मला सिंह


निर्मला सिंह





जन्म :  9 अप्रैल 1943, बरेली (उ.प्र.) में।

शिक्षा :  एम.ए., एल.टी.।

लेखन/प्रकाशन/योगदान :  कविता, कथा साहित्य एवं बाल साहित्य में योगदान। प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित। आकाशवाणी एवं दूरदर्शन के विभिन्न केन्द्रों से प्रसारण। नृत्य कला में भी योगदान। पिंजरा खुल गया, क्षितिज के पार, धुएँ की बंद इमारत, धुएं के पहाड़, सन-सेट-व्यू, मुट्ठी में बन्द खुश्बू, संजीवनी बूटी, वक्त की करवट (सभी कहानी संग्रह); पिघलता सीसा, अक्षम्य, आज की शकुन्तला, सरोरूह, मैं अनीष नहीं (सभी उपन्यास); साँप और शहर, बबूल का पेड़, 71 लघुकथायें (सभी लघुकथा संग्रह); वाह!वाह! बड़े तीरंदाज हैं, अरे! आसमान से रुई गिर रही है, पापा पिकनिक चलो न, सॉरी मम्मी, थैंक्यू पापा, सी ऑफ टैथीज (सभी बाल कहानी संग्रह), रुको नहीं कुसुम, चले गाँव की ओर, चुनमुन और ऐनी (बाल उपन्यास); तपती रेत की शिलायें, वक्त की खूँटी, धूप के टुकड़े (कविता संग्रह) आदि प्रकाशित कृतियां। कई कृतियां प्रकाशनाधीन। कई सामाजिक व साहित्यिक संस्थाओं में सक्रिय भागीदारी।

सम्मान :  उ.प्र. हिन्दी संस्थान लखनऊ से 1999 का सर्जक पुरस्कार, धूप के टुकड़े (कविता संग्रह) पर म.प्र. हिन्दी साहित्य सम्मेलन के सम्मान, चतुर्थ अ.भा. भाषा विकास सम्मेलन में लघुकथा शिल्पी सम्मान एवं अ.भा. साहित्य सम्मेलन से श्रेष्ठ साधना सम्मान सहित देश की अनेकों संस्थाओं तथा विदेश की कुछ संस्थाओं से सम्मानित व पुरस्कृत।

सम्पर्क : 185-ए, सिविल लाइन्स, बरेली-243001 (उ.प्र.)।
                      मोबाइल : 09412821608 / 09258035247



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मुद्रित प्रारूप :  अप्रैल-जून 2012 अंक में लघुकथा- ‘नाटक’।






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284. कृष्णचन्द महादेविया


कृष्णचन्द महादेविया





जन्म :  23 जून 1960।

लेखन/प्रकाशन/योगदान :  मूलतः लघुकथा एवं नाट्य लेखन। हिन्दी के साथ हिमाचली भाषा में लेखन। देश की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में अनेकों रचनाएं प्रकाशित। ‘पहाड़ों की ओट में’ तथा चार स्मारिकाओं का संपादन। आकाशवाणी एवं दूरदर्शन से रचनाएं प्रसारित। ‘ढेका नंगारा’ व ‘स्योंध्याड़े गए’ (हिमाचली एकांकी संग्रह), उग्रवादी (लघुकथा संग्रह), ‘गहराते हुए जख्म’ (आत्मकथा), ‘हिमाचली लोकोक्तियां’ (लोक संस्कृति), ‘बुढड़ा लड्ड घिंघा’ (लोकनाट्य) आपकी प्रकाशित कृतियां हैं। राष्ट्रहित कार्यों, साहित्यिक आयोजनों, अभिनय, निर्देशन आदि में सहभागिता। प्रतिभाओं के प्रोत्साहन हेतु ‘श्री रूलदु राम जी चौहान स्मृति सम्मान’ का संचालन। पर्यावरण की सुरक्षा हेतु निरन्तर प्रयासरत।

संपर्क : पत्रालय- महादेव, सुन्दरनगर, जिला मण्डी-175018 (हि.प्र.) 
                  मोबाइल : 08988152163



अविराम में प्रकाशन


मुद्रित प्रारूप :  अप्रेल-जून 2012 अंक में लघुकथा- ‘समर्पण की कीमत’।






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२. उपरोक्त परिचय हमें भेजे गए अथवा हमारे द्वारा विभिन्न स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर आधारित है. किसी भी त्रुटि के लिए हम क्षमा प्रार्थी हैं. त्रुटि के बारे में रचनाकार द्वारा हमें सूचित करने पर संशोधन कर दिया जायेगा। यदि रचनाकार अपने परिचय में कुछ अन्य सूचना शामिल करना चाहते हैं, तो इसी पोस्ट के साथ के टिपण्णी कॉलम में दर्ज कर सकते हैं। यदि किसी रचनाकार को अपने परिचय के इस प्रकाशन पर आपत्ति हो, तो हमें सूचित कर दें, हम आपका परिचय हटा देंगे।

283. मुकेश नौटियाल


मुकेश नौटियाल




जन्म :  04.07.1971, ग्राम पुनाड़, जिला रुद्रप्रयाग (उत्तराखण्ड) में।

शिक्षा :   एम.ए. (अंग्रेजी व हिन्दी साहित्य), बी.एड., एशोसिएटशिप (इंश्यो. इंस्टी. ऑफ इण्डिया, मुम्बई) एवं मॉस कॉम (इग्नू)।

लेखन/प्रकाशन/योगदान :  मूलतः कहानीकार, कविता एवं बाल साहित्य में भी योगदान। अनेकों पत्र-पत्रिकाओं एवं संकलनों में रचनाएं प्रकाशित। कहानियों का अन्य भाषाओं में लिप्यांतरण तथा कुछ पर नाट्य-प्रस्तुति। पहली कहानी चौदह वर्ष की अल्पायु में प्रकाशित। विगत दस वर्षों से आकाशवाणी से रचनाओं का निरन्तर प्रसारण। साहित्यिक पत्रकारिता, पेंटिंग्स एवं रेखांकन के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय योगदान। दर्जन भर चित्रात्मक बाल-साहित्य की पुस्तकें यूनीसेफ एवं रूम टु रीड द्वारा प्रकाशित। कहानी संकलन ‘चमकता रहेगा स्वीली धाम’ प्रकाशित। साहित्यिक पत्रिका लोकगंगा के साहित्य सम्पादक। यूनेस्को के कार्यक्रम ‘घुमक्कड़ नारायण’ में कहानियों का पाठ।

सम्मान :  सृजनधर्मिता के लिए ‘यूथ आइकन लिटररी एवॉर्ड।

सम्प्रति :  एक बीमा कम्पनी में अधिकारी संवर्ग में सेवारत।
सम्पर्क :  नारायण विला, जागृति विहार, पोस्ट-नेहरू ग्राम, रिंग रोड, देहरादून-248001 (उत्तराखण्ड)
मोबाइल :  09412438208
ई मेल :  mukesh_punar@yahoo.com



अविराम में प्रकाशन

मुद्रित प्रारूप :  अप्रैल-जून 2012 अंक में कहानी- ‘दुल्ली चूड़ियारिन’।





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२. उपरोक्त परिचय हमें भेजे गए अथवा हमारे द्वारा विभिन्न स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर आधारित है. किसी भी त्रुटि के लिए हम क्षमा प्रार्थी हैं. त्रुटि के बारे में रचनाकार द्वारा हमें सूचित करने पर संशोधन कर दिया जायेगा। यदि रचनाकार अपने परिचय में कुछ अन्य सूचना शामिल करना चाहते हैं, तो इसी पोस्ट के साथ के टिपण्णी कॉलम में दर्ज कर सकते हैं। यदि किसी रचनाकार को अपने परिचय के इस प्रकाशन पर आपत्ति हो, तो हमें सूचित कर दें, हम आपका परिचय हटा देंगे।

282. कैलाश गिरि गोस्वामी


कैलाश गिरि गोस्वामी





जन्म :  15.10.1969।

शिक्षा : एम.ए. (हिन्दी), बी.एड.।

लेखन/प्रकाशन/योगदान  :   गीत, ग़ज़ल, कविता, दोहे, जनक छन्द, मुक्तक, क्षणिकाएँ, लघुकथा, आलेख आदि विधाओं में योगदान। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं एवं संकलनों में रचनाएं प्रकाशित। स्थानीय केवल पी.बी. केवल टी.वी. पर प्रसारण। 

सम्मान  :  शिव संकल्प साहित्य परिषद होशंगाबाद एवं ऋचा रचनाकार परिषद, कटनी द्वारा क्रमशः ‘काव्य दीप’ व ‘साहित्य श्री’ मानद उपाधियों से सम्मानित।

सम्प्रति  :  अध्यापक।

सम्पर्क  :  मु0 बोदिया, पो0 मादलदा-327034, तह0 गढ़ी, जिला-बाँसवाड़ा (राज.)
                       मोबाइल : 09982505957



अविराम में प्रकाशन

मुद्रित प्रारूप :  अप्रैल-जून 2012 अंक में चार जनक छन्द।




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२. उपरोक्त परिचय हमें भेजे गए अथवा हमारे द्वारा विभिन्न स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर आधारित है. किसी भी त्रुटि के लिए हम क्षमा प्रार्थी हैं. त्रुटि के बारे में रचनाकार द्वारा हमें सूचित करने पर संशोधन कर दिया जायेगा। यदि रचनाकार अपने परिचय में कुछ अन्य सूचना शामिल करना चाहते हैं, तो इसी पोस्ट के साथ के टिपण्णी कॉलम में दर्ज कर सकते हैं। यदि किसी रचनाकार को अपने परिचय के इस प्रकाशन पर आपत्ति हो, तो हमें सूचित कर दें, हम आपका परिचय हटा देंगे।

281. किशन लाल शर्मा


किशन लाल शर्मा




जन्म : 18.07.1950। 

शिक्षा : बी.ए., डिप्लोमा कहानी, पटकथा।

लेखन/प्रकाशन/योगदान :  लघुकथा, कहानी, कविता, एवं लेख आदि विधाओं में लेखन। सन् 1978 से निरन्तर लेखन। तीन संकलन प्रकाशित। पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित।

सम्मान  :  म.प्र. लघुकथाकार परिषद, जबलपुर द्वारा 2012 में डॉ. श्रीराम ठाकुर दादा समृति कथा सम्मान सहित कुछ सम्मानों से विभूषित।

सम्प्रति  :  मंडल वाणिज्य निरीक्षक (मुख्या.) आगरा के पद से सेवानिवृति के बाद लेखन को समर्पित।

सम्पर्क  :  103 रामस्वरूप कॉलोनी, आगरा-282010 (उ.प्र.)
                 मोबाइल  :  09760617001



अविराम में प्रकाशन

मुद्रित प्रारूप :  अप्रैल-जून 2012 अंक में लघुकथा- ‘कलयुग की माँ’।

ब्लॉग प्रारूप :  जून 2012 अंक में लघुकथा- ‘रोटी’।





नोट : १. परिचय के शीर्षक के साथ दी गयी क्रम  संख्या हमारे कंप्यूटर में संयोगवश  आबंटित  आपकी फाइल संख्या है. इसका और कोई अर्थ नहीं है।
२. उपरोक्त परिचय हमें भेजे गए अथवा हमारे द्वारा विभिन्न स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर आधारित है. किसी भी त्रुटि के लिए हम क्षमा प्रार्थी हैं. त्रुटि के बारे में रचनाकार द्वारा हमें सूचित करने पर संशोधन कर दिया जायेगा। यदि रचनाकार अपने परिचय में कुछ अन्य सूचना शामिल करना चाहते हैं, तो इसी पोस्ट के साथ के टिपण्णी कॉलम में दर्ज कर सकते हैं। यदि किसी रचनाकार को अपने परिचय के इस प्रकाशन पर आपत्ति हो, तो हमें सूचित कर दें, हम आपका परिचय हटा देंगे।

रविवार, 30 सितंबर 2012

सामग्री एवं सम्पादकीय पृष्ठ : सितम्बर 2012

अविराम  ब्लॉग संकलन :  वर्ष  : 2,   अंक  : 1, सितम्बर  2012 


प्रधान संपादिका :  मध्यमा गुप्ता
संपादक :  डॉ. उमेश महादोषी (मोबाइल : 09412842467)
संपादन परामर्श :  डॉ. सुरेश सपन  
ई मेल :  aviramsahityaki@gmail.com 


 ।।सामग्री।।

रेखांकन : के. रविन्द्र 





     कृपया सम्बंधित सामग्री के पृष्ठ पर जाने के लिए स्तम्भ के साथ कोष्ठक में दिए लिंक पर क्लिक करें ।


अविराम विस्तारित : 

काव्य रचनाएँ  {कविता अनवरत} :   इस अंक में डॉ. हरि जोशी, राम मेश्राम, प्रशान्त उपध्याय, शिवानन्द सिंह ‘सहयोगी’, डॉ. गार्गीशरण मिश्र ‘मराल’, सुरेन्द दीप, मीना गुप्ता, निर्मला अनिल सिंह  एवं अशोक भारती ‘देहलवी’ की काव्य  रचनाएं।

लघुकथाएं   {कथा प्रवाह} :   इस अंक में ‘भ्रूण हत्या’ पर डा. रामकुमार घोटड़ सम्पादित  लघुकथा संकलन ‘किसको पुकारूँ’ से सर्व श्री  माधव नागदा, रतन चन्द्र रत्नेश, डा. तारिक असलम ‘तस्नीम’ व  डॉ. रामकुमार घोटड़  की तथा  सर्व श्री संतोष सुपेकर, डॉ. पूरन सिंह, डॉ0 रामशंकर चंचल एवं गोवर्धन यादव की अन्य  लघुकथाएं।

कहानी {कथा कहानी} :  पिछले अंक तक अद्यतन।

क्षणिकाएं  {क्षणिकाएँ} :   इस अंक में महावीर रंवाल्टा  की क्षणिकाएं। 


हाइकु व सम्बंधित विधाएं  {हाइकु व सम्बन्धित विधाएँ}  :  इस अंक  में  डॉ मिथिलेश दीक्षित’ के दो हाइकु नवगीत एवं हरिश्चंद्र के दस  हाइकु।

जनक व अन्य सम्बंधित छंद  {जनक व अन्य सम्बन्धित छन्द} :   इस बार डॉ. ब्रह्मजीत गौतम  के जंक छंद। 

हमारे सरोकार  (सरोकार) :   पिछले अंक तक अद्यतन।

व्यंग्य रचनाएँ  {व्यंग्य वाण} :   इस अंक में  विजय कुमार सत्पथी की व्यंग्य कथा- 'अटेंशन जिंदाबाद !!'।

स्मरण-संस्मरण  {स्मरण-संस्मरण} :  पिछले अंक तक अद्यतन।

अविराम विमर्श {अविराम विमर्श} :   समकालीन लघुकथा  के सन्दर्भ में  प्रेमचंद की लघु कथा रचनाओं पर दो आलेख- 'प्रेमचंद बनाम समकालीन लघुकथा' / डॉ. अशोक भाटिया एवं 'कुछ रचनाएँ अच्छी लघुकथाएँ' / डॉ. वेदप्रकाश अमिताभ।
किताबें   {किताबें} :  इस अंक में डॉ अशोक पांडे 'गुलशन' द्वारा संतोष सुपेकर के काव्य संग्रह 'चेहरों के आर पार' की समीक्षा- 'चेहरों के आर पार : सामाजिक विसंगतियों का आइना'।

लघु पत्रिकाएं   {लघु पत्रिकाएँ} :  इस  अंक में तीन  पत्रिकाओं  ‘अभिनव प्रयास’, 'शब्द प्रवाह'एवं 'कथा सागर'  पर उमेश महादोषी की  परिचयात्मक टिप्पणियां।

हमारे युवा  {हमारे युवा} :   पिछले अंक तक अद्यतन।

गतिविधियाँ   {गतिविधियाँ} : पिछले दिनों प्राप्त साहित्यिक गतिविधियों की सूचनाएं/समाचार।

अविराम के अंक  {अविराम के अंक} :  मुद्रित सस्करण के जुलाई-सितम्बर 2012 अंक तक अद्यतन।

अविराम साहित्यिकी के मुद्रित संस्करण के पाठक सदस्य (हमारे आजीवन पाठक सदस्य) :  अविराम साहित्यिकी के मुद्रित संस्करण के  सितम्बर 2012 के अंत तक बने आजीवन एवं वार्षिक पाठक सदस्यों की सूचना।

अविराम के रचनाकार  {अविराम के रचनाकार} : अविराम के चौवन  और रचनाकारों का परिचय।  



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  उमेश महादोषी
।।मेरा पन्ना।।

  • रचनाओं की प्रस्तुति की दृष्टि से अविराम के ब्लाग प्रारूप का पहला वर्ष पूरा हुआ, और हम इस अंक के साथ दूसरे वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं। अन्तर्जाल पर अविराम के ब्लॉग को यूं तो जुलाई 2012 माह में ही तैयार कर लिया गया था तथा मुद्रित अंको में प्रकाशित सामग्री की सूची भी ‘अविराम के अंक’ लेवल के अन्तर्गत पोस्ट कर दी गयी थी, परन्तु एक पूर्ण ब्लॉग पत्रिका के रूप में इसका पहला अंक सितम्बर 2011 माह में ही प्रकाशित किया जा सका था। दरअसल आरम्भ में इसके प्रकाशन के पीछे सीमित उद्देश्य था, जिसे अन्तर्जाल पर बढ़ रही साहित्यिक गतिविधियों  के परिप्रेक्ष्य, मुद्रित प्रारूप में स्थान की सीमित उपलब्धता व सीमित कवरेज एवं अधिकाधिक रचनाकार मित्रों से जुड़ने की भावना आदि कई कारण रहे, जिनके रहते इसे एक पूर्ण ब्लॉग पत्रिका के रूप में आगे बढ़ाने का निश्चय किया गया। मित्रों का सहयोग उत्साहबर्द्धक रहा। उम्मीद है आने वाले समय में यह प्रतिष्टित ब्लॉग पत्रिकाओं में शुमार हो सकेगी और हम अपने रचनाकार मित्रों की  रचनाओं को विश्व भर के हिन्दी भाषा के पाठकों से जोड़ पायेंगे। हम सभी मित्रों का, जिनके रचनात्मक सहयोग से ही हम आगे बढ़ पा रहे हैं, हृदय से आभार प्रकट करते हैं।
  •  इस अवसर पर वरिष्ठ लघुकथाकार एवं चिंतक आदरणीय बलराम अग्रवाल जी का आभार प्रकट करना चाहूंगा, जिन्होंने समय-समय पर मार्गदर्शन तो किया ही, ब्लॉग बनाना एवं उसे विकसित करना भी मुझे सिखाया। इसके साथ ही वरिष्ठ साहित्यकार श्री रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’ का भी समान भावना से आभार प्रकट करता हूं, जिनका सहयोग एवं मार्गदर्शन भी समान रूप से उपयागी रहा है। इन दोनों अग्रजों के सहयोग के बिना अन्तर्जाल पर अविराम की ही नहीं, मेरी भी उपस्थिति शायद सम्भव नहीं हो पाती। 
  • अविराम का यह ब्लॉग अधूरा और अनाकर्षक ही रहता, यदि हमें वरिष्ठ चित्रकार सर्वश्री विज्ञान व्रत, पारस दासोत, बी. मोहन नेगी, डॉ. सुरेन्द्र वर्मा, सिद्धेश्वर आदि का सहयोग नहीं मिला होता। इस अंक तक आते-आते हमें वरिष्ठ चित्रकार श्री के. रविन्द्र जी का सानिध्य भी आद. बलराम अग्रवाल जी के माध्यम से मिला है। सर्वश्री नरेश उदास, शशिभूषण बड़ोनी, राजेन्द्र परदेशी, महावीर रंवाल्टा, किशोर श्रीवास्तव, अनिल सिंह, श्रीगंगानगर के नवोदित चित्रकार राजेन्द्र सिंह एवं हिना फिरदोस (वरिष्ठ साहित्यकार श्री अनवर सुहैल जी की बिटिया) आदि के भी रेखांकनों का योगदान रहा है। इसी के साथ इसकी साज-सज्जा में सर्वश्री रामेश्वर काम्बोज हिमांशु, डॉ. बलराम अग्रवाल, रोहित काम्बोज, आदित्य अग्रवाल, पूनम गुप्ता, डॉ. ज्योत्शना शर्मा, चेतन, रितेश गुप्ता, अभिशक्ति, सुरभि ऐरन आदि के छायाचित्र भी इसे सजाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। इन सबका आभार प्रकट करते हुए मैं यह बात जोर देकर कहना चाहूंगा कि किसी भी पत्रिका की साज-सज्जा में चित्रकारों एवं छायाकारों की भूमिका हमें सदैव याद रखनी चाहिए।
  • उम्मीद है सभी रचनाकारों, चित्रकारों एवं मार्गदशकों का सहयोग हमें सतत रूप से मिलता रहेगा। दर्ज होने वाली पाठकीय प्रतिक्रियाओं के रूप में हमें अब तक उतना सहयोग नहीं मिल पाया है, जितना पाठकों की संख्या की तुलना में मिलना चाहिए था। निःसंदेह इसके कुछ तकनीकी कारण हैं तो कुछ मेरे संपर्कों एवं अन्य ब्लॉगों पर सक्रियता में कमी से संबन्धित कारण भी हैं। पाठक मित्रों से अनुरोध है, साहित्यिक रचनाओं पर स्वस्थ चर्चा अवश्य करें। भविष्य में हम भी प्रयास करेंगे कि ब्लॉग पर चर्चा में पाठकीय साझेदारी हेतु हमारे स्टार पर जो भी किया जाना जरूरी है, हम कर सकें।
  • जिन मित्रों के पास जलाई-सितम्बर 2012 का मुद्रित अंक पहुंचा होगा, उन्हें मुद्रित प्रारूप में पाठको की साझेदारी के उद्देश्य से शुरू किए जा रहे ‘बहस’ स्तम्भ की जानकारी मिली होगी। हमारा ब्लॉग प्रारूप के पाठक मित्रों से भी अनुरोध है कि आप भी इस बहस में शामिल होइए। बहस की संपूर्ण सामग्री मुद्रत अंक के बाद वाले ब्लॉग के अंक में भी शामिल की जाएगी। ‘बहस’ के पहले बिषय की जानकारी इसी पृष्ठ पर आगे दी जा रही है।

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              ‘बहस’ हेतु आमंत्रण 
मुद्रित प्रारूप में हम एक नये स्तम्भ ‘बहस’ का आरम्भ कर रहे हैं। इसमें एक दिये गये विषय पर अपने विचारों के साथ पाठकों की सीधी सहभागिता होगी। जनवरी-मार्च 2013 अंक के लिए विषय है- ‘‘साहित्य और भाषा की शुद्धता व संस्कार’’। पाठकों से उनके यथासंक्षिप्त विचार निम्न प्रश्नों के परिप्रेक्ष में 15 दिसम्बर 2012 तक आमन्त्रित हैं। पाठक अपने विचार संक्षिप्त आलेख के रूप में भी भेज सकते हैं। मुद्रित अंक में स्थान की उपलब्धता के अनुसार चुने हुए विचार प्रकाशित होंगे। ब्लॉग प्रारूप में प्राप्त सभी विचार प्रकाशित किये जायेंगे।
1. साहित्य में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण क्या है, भाषा की शुद्धता और संस्कार या सम्प्रेषण?
2. क्या एक लेखक के लिए भाषाई स्तर पर समृद्ध एवं चैतन्य होना जरूरी है?
3. क्या संस्कारित भाषा साहित्य की जरूरी शर्त है? यदि हाँ तो किस स्तर तक? 
4. हिन्दी में जानबूझकर अन्य भाषाओं के शब्दों का प्रयोग करना क्या उचित है? इसी सन्दर्भ में रचनाकारों के द्वारा कई शब्दों को अपनी सुविधा या रचना की मांग के नाम पर परिवर्तित करके उपयोग करने की प्रवृत्ति पर आप क्या कहना चाहेंगे?
5. सामान्यतः बोलचाल की हिन्दी भाषा में दूसरी भाषाओं, यथा उर्दू, अंग्रेजी आदि के शब्दों का मिश्रण होता है। क्या साहित्य लेखन में इसे जस का तस उपयोग करना ठीक है? 
6. भाषाई उत्तरदायित्व को आप कैसे परिभाषित करेंगे? क्या लेखक को भाषाई उत्तरदायित्वों की समझ अनिवार्यतः होनी चाहिए?
7.भाषा के परिष्कार को लेखक का अनिवार्य उत्तरदायित्व मानने एवं उसके निर्वाह से साहित्य और आम-जन के रिश्तों पर क्या प्रभाव पड़ता है? 
8. भाषाई स्तर पर यदि कोई रचनाकार कमजोर है तथा जैसी  भाषा वह लिखना-पढ़ना जानता है, उसी में सृजन करता है। इसे किस दृष्टि से देखा जाए?
9. यदि लेखक की बात पाठक की समझ में आ रही है/सम्प्रेषित हो रही है लेकिन उसकी भाषा व्याकरण की दृष्टि से दोषपूर्ण है और अपनी भाषाई अक्षमताओं के कारण अपनी रचनाओं में भाषा सम्बन्धी दोषों को चाहते हुए भी दूर न कर पाए तो क्या उसके लेखन को हतोत्साहित किया जाना चाहिए? और क्या ऐसा करने पर बहुत से अच्छे विचारों और उसकी अभिव्यक्ति से साहित्य व पाठकों को वंचित करना उचित होगा?
10. एक सामान्य पाठक के रूप में आपको कैसा साहित्य प्रभावित करता है- आम बोलचाल की भाषा में लिखा गया या व्याकरण की दृष्टि से शुद्ध और संस्कारित भाषा में लिखा गया?
11. यदि आप एक रचनाकार भी हैं तो साहित्य और भाषा के सन्दर्भ में एक पाठक के रूप में आप अपने को आम व्यक्ति के करीब पाते हैं या उससे कुछ अलग? 


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अविराम के दोनों प्रारूपों से सम्बंधित सूचना 

  • जो चित्रकार एवं फोटोग्राफी करने वाले मित्र अविराम में प्रकाशनार्थ अपने रेखांकन एवं छाया चित्र भेजना चाहते हैं, उनका स्वागत है। साथ में अपना परिचय एवं फोटो भी भेजें।
  • जिन रचनाकार मित्रों की कोई रचना अविराम के मुद्रित या ब्लॉग संस्करण में प्रकाशित हुई है और उन्होंने अपना फोटो व परिचय अभी तक हमें उपलब्ध नहीं कराया है, उनसे अनुरोध हैं की शीघ्रातिशीघ्र अपना  फोटो व परिचय  भेजने का कष्ट करें। भविष्य में पहली बार रचना भेजते समय फोटो  व अद्यतन परिचय अवश्य भेजें। 
  • प्रत्येक रचना के साथ अपना नाम एवं पता अवश्य लिखें। ऐसी रचनाएं, जिनके साथ रचनाकार का नाम व पता नहीं लिखा होगा, हम भविष्य में उपयोग नहीं कर पायेंगे। 
  • किसी भी प्रकाशित सामग्री पर हम किसी भी रूप में पारिश्रमिक देने की स्थिति में नहीं हैं। अत: पारिश्रमिक के इच्छुक मित्र क्षमा करें।
  •  अविराम साहित्यिकी के  दिसम्बर 2012 मुद्रित अंक (लघुकथा विशेषांक), हेतु सामग्री का चयन लगभग पूरा हो चुका है। अतः जिन मित्रों से किसी विशेष समग्री का अनुरोध किया गया है, को छोड़कर शेष मित्र अतिथि संपादक डॉ. बलराम अग्रवाल जी को और सामग्री न भेजें। सामान्य अंकों हेतु लघुकथा विषयक सामग्री हमें सीधे रुड़की के पते पर भेजना कृपया जारी रखें।
  •     अविराम के नियमित स्तम्भों के लिए क्षणिकाएं एवं जनक छंद की स्तरीय रचनाएं बहुत कम मिल पा रही हैं। क्षणिका पर हमारी एक और योजना भी विचाराघीन है। रचनाकारों से अपील है कि स्तरीय क्षणिकाएं अधिकाधिक संख्या में भेजकर सहयोग करें। 
  • प्राप्त पुस्तकों के प्रकाशन सम्बन्धी सूचना सहयोग की भावना से मुद्रित अंक में प्रकाशित की जाती है। कुछ प्राप्त पुस्तकों की चर्चा हम ब्लॉग प्रारूप पर पुस्तक से कुछ रचनाएं पाठकों के समक्ष रखकर भी करने का प्रयास करते हैं। ब्लॉग एवं मुद्रित प्रारूप में यद्यपि हम अधिकाधिक पुस्तकों की समीक्षा/संक्षिप्त समीक्षा/पुस्तक परिचय भी देने का प्रयास करते हैं, तदापि यह कार्य पूरी तरह स्थान की उपलब्धता एवं हमारी सुविधा पर निर्भर करता है। इस संबन्ध में किसी मित्र से हमारा कोई आश्वासन नहीं है।
  • कृपया  अविराम साहित्यिकी का शुल्क ‘अविराम साहित्यिकी’ के नाम ही धनादेश, चेक  या मांग ड्राफ्ट द्वारा भेजें, व्यक्तिगत नाम में नहीं। हमारे बार-बार अनुरोध के बावजूद कुछ मित्र अविराम साहित्यिकी का शुल्क ‘अविराम साहित्यिकी’ के नाम भेजने की बजाय उमेश महादोषी या प्रधान सम्पादिका के पक्ष में इस तरह से चैक बनाकर भेज देते हैं, कि उन चैकों का भुगतान हमारे लिए प्राप्त करना सम्भव नहीं होता है। इस तरह के चैकों को वापस करना भी हमारे लिए बेहद खर्चीला होता है, अतः हम ऐसे चैक वापस कर पाने में असमर्थ हैं।  उन्हें अपने स्तर पर नष्ट कर देने के अलावा हमारे पास कोई विकल्प नहीं है। 
  • अविराम साहित्यिकी  के सामान्य मुद्रित अंकों में जुलाई-सितम्बर 2012 अंक से पृष्ठों की संख्या बढ़ाकर 72+04=76 कर दी गयी है। बढ़े हुए पृष्ठों के दृष्टिगत वार्षिक एवं आजीवन सदस्यता शुल्क में कुछ माह बाद बृद्धि की जायेगी, अत: जो मित्र आजीवन सदस्य बनना चाहते हैं, फ़िलहाल पुराना शुल्क (रुपये 750/-) ही भेजकर आजीवन  सदस्य बन सकते हैं। 
  •     यदि वास्तव में आप इस लघु पत्रिका की आर्थिक सहायता करना चाहते हैं तो किसी भी माध्यम से राशि केवल ‘अविराम साहित्यिकी’ के ही पक्ष में एफ-488/2, गली संख्या-11, राजेन्द्रनगर, रुड़की-247667, जिला हरिद्वार, उत्तराखंड के पते पर भेजें और जहां तक सम्भव हो एकमुश्त रु.750/- की राशि भेजकर आजीवन सदस्यता लेने को प्राथमिकता दें। आपकी आजीवन सदस्यता से प्राप्त राशि पत्रिका के दीर्घकालीन प्रकाशन एवं भविष्य में पृष्ठ संख्या बढ़ाने की दृष्टि से एक स्थाई निधि की स्थापना हेतु निवेश की जायेगी। कम से कम अगले दो-तीन वर्ष तक इस निधि से कोई भी राशि पत्रिका के प्रकाशन-व्यय सहित किसी भी मद पर व्यय न करने का प्रयास किया जायेगा।