आपका परिचय

मंगलवार, 20 अगस्त 2013

अविराम के अंक

अविराम साहित्यिकी 
(समग्र साहित्य की समकालीन त्रैमासिक पत्रिका)


खंड (वर्ष) : 2 / अंक : 1   / अप्रैल-जून  2013   

प्रधान सम्पादिका : मध्यमा गुप्ता
अंक सम्पादक : डा. उमेश महादोषी 
सम्पादन परामर्श : डॉ. सुरेश सपन
मुद्रण सहयोगी : पवन कुमार


इस अंक में
‘सियाह हाशिये’ 

विभाजन की त्रासद तस्वीरें पेश करती सआदत हसन मंटो की लघुकथाओं की अमर क़िताब अहमद हसन असकरी की यादग़ार भूमिका व संवेदन-तंतुओं को कँपा देने वाले समर्पण पृष्ठ के साथ पूरी की पूरी


                      
सआदत हसन मंटो
(11 मई 1912 - 18 जनवरी 1955 )


अविराम का यह मुद्रित अंक रचनाकारों व सदस्यों को 19 मई 2013 को तथा अन्य सभी सम्बंधित मित्रों-पाठकों को 28 मई 2013 तक भेजा जा चुका है। अंक प्राप्त न होने पर सदस्य एवं अंक के रचनाकार अविलम्ब पुनरू प्रति भेजने का आग्रह करें। अन्य मित्रों को आग्रह करने पर उनके ई मेल पर पीडीऍफ़ प्रति भेजी जा सकती है। पत्रिका पूरी तरह अव्यवसायिक है, किसी भी प्रकाशित रचना एवं अन्य सामग्री पर पारिश्रमिक नहीं दिया जाता है। इस मुद्रित अंक में शामिल रचना सामग्री और रचनाकारों का विवरण निम्न प्रकार है- 


।।सामग्री।।

लघुकथा के स्तम्भ : पारस दासोत (3); मधुदीप (5); एवं सुभाष नीरव (7)

कविता अनवरत-1(काव्य रचनाएँ) : राजकुमार कुम्भज (10); रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’ व शिव शरण सिंह चौहान ‘अंशुमाली’ (11); डॉ. कपिलेश भोज (12); डॉ. रसूल अहमद ‘सागर’ व डॉ. बी.पी. दुबे (13)
मेरी लघुकथा यात्रा : रूपसिंह चन्देल (14)

विमर्श : विष्णु प्रभाकर व चित्रा दी ने लघुकथा को विशेष पहचान दी है / डॉ. सतीश दुबे (16)

आहट : नित्यानन्द गायेन, डॉ. सम्राट सुधा व ज्योति कालड़ा ‘उम्मीद’ की क्षणिकाएँ (18)

बहस : ‘लघुपत्रिकाओं को आर्थिक सहयोग सार्थक या निरर्थक’ विषय पर डॉ. सतीश दुबे (19), शिवानन्द सिंह ‘सहयोगी’ (22), मुकेश कुमार ‘निर्विकार’(22), डा. तारिक असलम ‘तस्नीम’ (24), कुंवर प्रेमिल (25), डॉ. मनोहर शर्मा ‘माया’ (25), गौरी शंकर वैश्य ‘विनम्र’ (26), शरद नारायण खरे (27), डॉ. दिनेश नंदन तिवारी (28), डॉ. चन्द्रजी राव इंगले (28), अरविन्द अवस्थी (29), कृष्ण मोहन ‘अम्भोज’ (30), के विचार।

कविता के हस्ताक्षर : जितेन्द्र जौहर (31); रचना श्रीवास्तव (34)।

सन्दर्भ :  सआदत हसन मंटो : ‘सियाह हाशिये’ की पूर्ण प्रस्तुति: डॉ.बलराम अग्रवाल (36)

कथा कहानी :  और रमा लौट आई/डॉ.योगेन्द्र नाथ शर्मा ‘अरुण’(50); कभी न लौट कर आने के लिए/डॉ. प्रद्युम्न भल्ला (54)
कविता अनवरत-2(काव्य रचनाएँ) : शिवानन्द सिंह सहयोगी व सालिग्राम सिंह ‘अशान्त’(58); डॉ.नसीम अख़्तर व डॉ.माया सिंह ‘माया’ (59); दिलीप सिंह ‘दीपक’ व कन्हैयालाल अग्रवाल ‘आदाब’ (60); उदय करण ‘सुमन’ एवं राजमणि राय ‘मणि’ ((61); डॉ. अ.कीर्तिवर्धन ((62)

कथा प्रवाह (लघुकथाएँ) : भगीरथ परिहार व कमलेश भारतीय (63), विधू यादव(64); महावीर रवांल्टा व तपेश भौमिक (65) निधि चतुर्वेदी (66) ; अनामिका शाक्य व दिनेश कुमार छाजेड़(67); गुरप्रीत सिंह व अब्बास खान संगदिल(68); आशीष कुमार (69)
कविता अनवरत-3 (काव्य रचनाएँ) : जगन्नाथ ‘विश्व’ व डॉ. अशोक ‘गुलशन’(70); ज्ञान स्वरूप ‘कुमुद’, सुमन शेखर व चन्द्रकान्त दीक्षित (71); हितेश कुमार शर्मा व विनोद कुमार गुप्ता (72); विशेश्वर शरण चतुर्वेदी व रामेश्वर दयाल शर्मा ‘दयाल’ (73)
किताबें (संक्षिप्त समक्षाएँ) : ‘संन्यास से संसार और संसार से संन्यास’ का समन्वय कराता उपन्यास ‘शून्य से शिखर’/श्री वीरेन्द्र कुमार गुप्त के उपन्यास की डॉ. योगेन्द्र नाथ शर्मा ‘अरुण’ द्वारा (74); ’खोई हरी टेकरी’ के जंगल को गाने दो/डॉ सुधा गुप्ता के हाइकु संग्रह की डॉ. ज्योत्सना शर्मा द्वारा (75); ‘यादों के पाखी’ः एक उपलब्धि /रामेश्वर काम्बोज हिमांशु आदि द्वारा संपादित हाइकु संकलन की डॉ. अर्पिता अग्रवाल द्वारा (76); आजाद भारत की पैंसठ लघुकथाएं/डॉ. रामकुमार घोटड़ संपादित लघुकथा संकलन की महेन्द्र सिंह महलान द्वारा (77)

माइक पर : उमेश महादोषी का सम्पादकीय (आवरण 2)

हमारे आजीवन सदस्य : अविराम साहित्यकी के आजीवन  सदस्यों की सूची (15)

चिट्ठियाँ : विगत अंक पर प्रतिक्रियाएं (79)। 

गतिविधियाँ :  संक्षिप्त साहित्यिक समाचार (81)।

प्राप्ति स्वीकार :  त्रैमास में प्राप्त विविध प्रकाशनों की सूचना (83)

शनिवार, 25 मई 2013

सामग्री एवं सम्पादकीय पृष्ठ : अप्रैल 2013

अविराम  ब्लॉग संकलन :  वर्ष  : 2,   अंक  : 8, अप्रैल  2013

संपादक :  डॉ. उमेश महादोषी (मोबाइल : 09412842467)
संपादन परामर्श :  डॉ. सुरेश सपन  
ई मेल :  aviramsahityaki@gmail.com 

शुल्क, प्रकाशन आदि संबंधी जानकारी इसी ब्लॉग के "अविराम का प्रकाशन" लेवल/खंड में दी गयी है।

।।सामग्री।।

रेखाचित्र : राजेन्द्र परदेसी 




कृपया सम्बंधित सामग्री के पृष्ठ पर जाने के लिए स्तम्भ के साथ कोष्ठक में दिए लिंक पर क्लिक करें।



अविराम विस्तारित : 

काव्य रचनाएँ  {कविता अनवरत:    इस अंक में डॉ. रश्मि बजाज, शेर सिंह,  पूजा भाटिया प्रीत, अमित ‘अहद’, त्रिलोक सिंह ठकुरेला, सजीवन मयंक, धर्मेन्द्र गुप्त ‘साहिल’ एवं अशोक भारती ‘देहलवी’ की काव्य रचनाएँ।

लघुकथाएँ   {कथा प्रवाह} : इस अंक में श्री सिमर सदोष, डॉ. रमाकांत श्रीवास्तव, श्री माधव नागदा, सुश्री आशा शैली ‘हिमाचली’, डॉ. पुरुषोत्तम दुबे, पुरुषोत्तम कुमार शर्मा, सूर्यकान्त श्रीवास्तव, गांगेय कमल एवं सुजीत आर. कर की लघुकथाएं।

कहानी {कथा कहानी  पिछले अंक तक अद्यतन।

क्षणिकाएँ  {क्षणिकाएँ:   इस अंक में नित्यानंद गायेन  की क्षणिकाएँ।

हाइकु व सम्बंधित विधाएँ  {हाइकु व सम्बन्धित विधाएँ}  : इस अंक में सर्वश्री राजेन्द्र परदेशी, सिद्धेश्वर व वंशस्थ गौतम के हाइकु

जनक व अन्य सम्बंधित छंद  {जनक व अन्य सम्बन्धित छन्द:  महावीर उत्तरांचली  के पाँच जनक छंद।

बाल अविराम {बाल अविराम:  इस अंक में श्यामसुन्दर अग्रवाल  की बाल-कहानी 'प्यार का फल' एवं डॉ. महेन्द्र प्रताप पाण्डेय ‘‘नन्द’’ की दो बाल कविताएँ ।

हमारे सरोकार  (सरोकार) :   पिछले अंक तक अद्यतन।

व्यंग्य रचनाएँ  {व्यंग्य वाण:    पिछले अंक तक अद्यतन।

संभावना  {सम्भावना:    पिछले अंक तक अद्यतन।

स्मरण-संस्मरण  {स्मरण-संस्मरण:  पिछले अंक तक अद्यतन।

अविराम विमर्श {अविराम विमर्श} : इस अंक में डॉ. सुरेन्द्र वर्मा का हाइकु विषयक आलेख 'हिंदी हाइकु का सामाजिक सरोकार'।

किताबें   {किताबें} :  इस अंक में डॉ. रश्मि बजाज के काव्य संग्रह ‘‘स्वयं सिद्धा’’ की वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. योगेन्द्र नाथ शर्मा ‘अरुण’ द्वारा एवं पुरुषोत्तम कुमार शर्मा के लघुकथा संग्रह ‘छोटे कदम’ की डा. शरद नारायण खरे द्वारा लिखित समीक्षा। 

लघु पत्रिकाएँ   {लघु पत्रिकाएँ} :  पिछले अंक तक अद्यतन।

हमारे युवा  {हमारे युवा} :   पिछले अंक तक अद्यतन।

गतिविधियाँ   {गतिविधियाँ} : पिछले दिनों प्राप्त साहित्यिक गतिविधियों की सूचनाएं/समाचार।
अविराम की समीक्षा (अविराम की समीक्षा) : पिछले अंक तक अद्यतन।

अविराम के अंक  {अविराम के अंक} :   पिछले अंक तक अद्यतन।

अविराम साहित्यिकी के मुद्रित संस्करण के पाठक सदस्य (हमारे आजीवन पाठक सदस्य) :  अविराम साहित्यिकी के मुद्रित संस्करण के 14 मई 2013  तक अद्यतन आजीवन एवं वार्षिक पाठक सदस्यों की सूची।

अविराम के रचनाकार  {अविराम के रचनाकार} : पिछले अंक तक अद्यतन।

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मेरा पन्ना 
  • यह अंक कुछ अधिक ही बिलम्ब से आ सका। मेरी व्यक्तिगत व्यस्तताओं के चलते अगले कुछ और अंकों में भी विलम्ब संभावित है। क्षमा करें!
  • क्षणिका विशेषांक के लिए सामग्री भेजने का आग्रह एक बार पुन: दोहरा रहा हूँ। जिन मित्रों न सूचना न पढ़ी हो, वे निम्न लिंक पर क्लिक करके पिछले माह के सम्पादकीय पृष्ठ पर जाकर जानकारी ले सकते हैं-http://aviramsahitya.blogspot.in/2013/02/2013.html
  • कृपया ई मेल से सामग्री हर हाल में कृतिदेव 010 या यूनीकोड फोन्ट में ही भेजें।
  • पत्रिका का सदस्यता शुल्क कृपया रुड़की पर देय  सी टी एस चेक या बैंक ड्राफ्ट द्वारा ही भेजें, धनादेश (मनिआर्डर) द्वारा न भेजें।
  • कल यानी 18.05.2013 की सुबह श्री मनोहर शर्मा ‘माया’ जी ने फोन पर वरिष्ठ शायर श्री साज जबलपुरी जी के निधन का दुःखद समाचार दिया। साहित्य जगत के लिए यह एक बड़ी छति है। साज साहब ने ‘मिजराब’, ‘किरचें’ एवं ‘शरम मगर इनको आती नहीं’ जैसी महत्वपूर्ण कृतियां दी।  हम पूरे अविराम परिवार की ओर से वरिष्ठ शायर को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।

अविराम विस्तारित

विराम का ब्लॉग :  वर्ष : 2, अंक : 8,  अप्रैल 2013

।।कविता अनवरत।।

सामग्री :  इस अंक में डॉ. रश्मि बजाज, शेर सिंह,  पूजा भाटिया प्रीत, अमित ‘अहद’, त्रिलोक सिंह ठकुरेला, सजीवन मयंक, धर्मेन्द्र गुप्त ‘साहिल’ एवं अशोक भारती ‘देहलवी’ की काव्य रचनाएँ।



डॉ. रश्मि बजाज




{सुप्रसिद्ध कवयित्री डॉ. रश्मि बजाज का कविता संग्रह ‘स्वयं सिद्धा’ इसी वर्ष प्रकाशित हुआ है। स्त्री विमर्श के सन्दर्भ में बाह्य जगत की क्रियायें हों या परिवेशगत अन्तर्विरोध, संग्रह की अधिकांश कविताओं में उन्होंने स्त्री की वास्तविक पहचान को कुरेदकर अभिव्यक्ति देने का प्रयास किया है। संग्रह से प्रस्तुत हैं उनकी कुछ प्रतिनिधि कविताएँ।}


सीता नाम सत्य है

सीता नाम भी
सत्य है उतना
रेखाचित्र : के. रविन्द्र 

राम नाम
सच है जितना
सच जानो तो
सीता नाम ही
सदा सत्य है-
जाँचा, परखा
तपा, मंजा
अग्नि-परीक्षा
से गुज़रा
धरती के
आँचल से जुड़ा....

एक अज़ान

जोड़ोगे जब
अपने साथ
औरत की भी
एक अज़ान
सच जानो
रेखाचित्र : हिना फिरदोस 

तब ही तुमको
फल पाएंगे
रमज़ान, कुरान

खोलो बंद
किवाड़, हुजूर
आए भीतर
खुदा का नूर!

आदम के बच्चे!
हव्वा की
बच्ची को
कब तक
रख पाएगा
तू अल्लाह
से दूर?

स्वयंसिद्धा

सुन लो
तुम सब
बुद्ध, प्रबुद्ध
उसे न करना
रेखाचित्र : राजेन्द्र सिंह 

‘धम्मपद’ सिद्ध!

तुमने जो
खोजा है
मरण में
स्त्री ने
ढूँढ़ लिया
जीवन में

स्त्री है
नृत्य है
स्त्री संगीत
स्त्री रसधार
है स्त्री
है प्रीत

बँधे वो
शास्त्र में
कैसे भला
स्त्री होती है
स्वयंसिद्धा!

जिंक्सड

इनाम है
पैदा होने पर
इनाम है
शाला जाने पर
रेखाचित्र : बी मोहन नेगी 
इनाम है
ब्याह रचाने पर

इतने ‘इंसैटिव’
दे कर भी
नहीं बढ़ती
मेरी ‘प्रोडक्शन’
मैं हूँ
ईश्वर का
‘जिंक्सड आइटम’....

  • विभागाध्यक्ष, अंग्रेजी विभाग, वैश्य पी.जी.कॉलेज, भिवानी (हरियाणा)




शेर सिंह




नया अंदाज

जुबान में चाशनी
कदमों में ठहराव
फिर कोई नई चाल?
रेखाचित्र : राजेन्द्र परदेशी 

कुशलक्षेम, राम-राम
अचानक गलबांहे डालते
कोई नया पंछी जाल में?

सर्द, गर्म
बदले बोल, व्यवहार
क्या गजब नया अंदाज?

है चतुर खिलाड़ी
सभी समझते, जानते
आंखें होते हुए भी अंधे सब?  


  • के.के.-100 कविनगर, गाजियाबाद-201 001(उ.प्र.)



पूजा भाटिया प्रीत




पुरुष मन

दशरथ की पीर का अनुमान
किसे न था ?
कौशल्या के मन का भान
किसे न था?
राम के बनवास का त्रास
किसे न दिखा?
सीता की वेदना
किसने न महसूस की ?
भरत का घाव
किसने न भोगा ?
रेखाचित्र : डॉ सुरेन्द्र वर्मा 

हनुमान का भक्ति भाव
किस से अनछुआ रहा?
उर्मिला का विरह क्रंदन
किस से छुपा रहा?
यहाँ तक की चंद विराट हृदय लोगो ने
मंथरा और कैकई को भी
समझा या समझने का प्रयत्न किया
सबने सब महसूस किया
अपनी-अपनी सीमा तक
क्या अनछुआ रह गया रामायण में?
क्या किसी ने लक्ष्मण के अथाह मन को समझा?
क्यों अपना संसार मोह छोड़
वो चल दिया राम संग?
उर्मिला को विरह विछोह उपहार में दे?
क्या पाना ध्येय था उसका?
क्या भान था उसे राम के भगवान होने का?
क्या चौदह सालों में एक पल भी
विरह न सहा उसने?
क्यूँ नकार दिया हमने पुरुष में
छिपे स्त्री मन को?
जो तड़पा भी होगा कभी
अपनी उर्मी की याद में?
क्यों अनछुआ, अनकहा रह गया
लक्ष्मण का मन?
क्या इस लिए की लक्ष्मण पुरुष हैं?
क्या पुरुष नहीं होते भावुक?
क्या उन्हें नहीं सताती विरह-वेदना?
सोचिये.....
सोचिये.....  क्यों कि ....
प्रश्न सोचनीय तो है.....


  • 365-बी सूर्यदेव नगर, अन्नपूर्णा रोड, इंदौर 452009







अमित ‘अहद’



ग़ज़ल

कुछ न कुछ तो जरूर होता है
इश्क का जब सरूर होता है

आप से दूर जब भी जाता हूँ
दर्द दिल में हुजूर होता है

बात सच्ची अगर कहे भी तो
छाया चित्र : रामेश्वर कम्बोज हिमांशु 
आइना चूर-चूर होता है

इन्साँ कोई बुरा नहीं होता
वक्त का सब क़ुसूर होता है

जब नज़र से नज़र टकरातीी है
चर्चा फिर दूर-दूर होता है

प्यार उससे खुदा नहीं करता
‘अहद’ जिसको गरूर होता है


  • ग्राम व पोस्ट: मुजफ्फराबाद-247129, जिला: सहारनपुर (उ.प्र.)




त्रिलोक सिंह ठकुरेला



कुंडलियां

1.
अपनी अपनी अहमियत, सूई या  तलवार।
उपयोगी हैं  भूख में, केवल रोटी चार।।
केवल रोटी चार, नहीं खा सकते सोना।
 सूई  का कुछ  काम, न तलवारों से होना।।
‘ठकुरेला’ कविराय , सभी की माला जपनी।
छोटा हो कि लघुरूप , अहमियत सबकी अपनी।।

2.
नहीं समझता मंदमति, समझाओ सौ बार।
मूरख से पाला पड़े, चुप रहने में सार।।
चुप रहने में सार, कठिन इनको समझाना।
जब भी जिद लें ठान , हारता सकल जमाना।।
‘ठकुरेला’ कविराय , समय का डंडा बजता।
करो कोशिशें लाख, मंदमति नहीं समझता।।
छाया चित्र : उमेश महादोषी 

3.
मानव की कीमत तभी, जब हो ठीक चरित्र।
दो कौड़ी का भी नहीं, बिना महक का इत्र।।
बिना महक का इत्र, पूछ सदगुण  की होती।
किस मतलब का यार, चमक जो खोये मोती।।
‘ठकुरेला’ कविराय , गुणों की ही महिमा सब।
गुण, अवगुण अनुसार असुर सुर, मुनि-गण, मानव।।
  • बंगला संख्या-एल-99,रेलवे चिकित्सालय के सामने, आबू रोड-307026 (राज.) 





सजीवन मयंक




{वरिष्ठ कवि श्री सजीवन मयंक का ग़ज़ल संग्रह ‘बीमार उजाले दिखते हैं’ हाल ही में प्रकाशित हुआ है। प्रस्तुत हैं उनके इस संग्रह से दो ग़ज़लें।}

दो ग़ज़लें

1. जिसके साथ दुआ चलती है

जिसके साथ दुआ चलती है
उसके साथ हवा चलती है

हर मरीज जिन्दा है तब तक
जब तक साथ दवा चलती है

उम्र कैद का यह मतलब है
जब तक सांस सजा चलती है

सच्चाई हो भले अकेली
सर को सदा उठा चलती है

पूरी बस्ती जान चुकी जब
घर की बात पता चलती है

आंधी के आने पर देखा
बूढ़े पेड़ गिरा चलती है

चंदन की खुश्बू तो हरदम
छायाचित्र : रोहित काम्बोज 
उसके साथ सदा चलती है

2. पक्के रिश्ते कच्चे घर में

पक्के रिश्ते कच्चे घर में
अपनापन बूढ़े छप्पर में

जीवन भर का साथ मिल गया
अनायास ही किसी सफर में

जिसको तुम सागर कहते हो
रहता है मेरी गागर में

प्रेम कहानी लिखी हुई है
किसी पहाड़ी के पत्थर में

दुनियां भर के लिये उजाला
है सूरज की एक नज़र में

मिली एक नवजात बालिका
सड़क किनारे कचरे-घर में
  • 251, शनिचरा वार्ड-1, नरसिंह गली, होशंगाबाद-461001 (म.प्र.)



धर्मेन्द्र गुप्त ‘साहिल’




ग़ज़ल

क्यूँ न काँपें फूस की ये बस्तियाँ
तेज़ बारिश और तड़पती बिजलियाँ

इक कसक-सी दिल में उठती है मेरे
देखता हूँ जब गुलों पर तितलियाँ

भर गयी सब्ज़ों से घर की हर दरार
छाया चित्र : पूनम गुप्ता 

अबके यूँ सावन में बरसी बदलियाँ

एक ईश्वर और कितने धर्म हैं
एक साहिल और कितनी कश्तियाँ

लिख रहा था ख़त में ‘साहलि’ सच उसे
काँपती जाती थीं मेरी उँगलियाँ


  • के 3/10 ए, माँ शीतला भवन, गायघाट, वाराणसी-221001(उ.प्र.)



अशोक भारती ‘देहलवी’




किसको पता


फिर तेरे रहने गुजर जाने का है किसको पता!
ये अलाव हुई बस्तियाँ यूं उजड़ेंगी किसको पता!

इन दरख्तों पर लटके हैं ढेरों दुपट्टे आज तक,
ऐसी भी सूली चढेंगी बेटियाँ किसको पता!

बहला-फुसला कर हवाएँ ले गई मजलूम को,
इस तरह मछली फंसेगी जाल में किसको पता!

आज भी बस धूप के रस्ते में दहशत बड़ी,
कब झुलस दे ज़िन्दगी सूरज ही किसको पता!
छायाचित्र : डॉ बलराम अग्रवाल 


आशियां हमने बनाने में लगा दी ज़िन्दगी,
पूछती फिरती है फिर से आंधियाँ घर का पता!

जब मिला वो मुस्करा कर ही गले मेरे लगा,
दर्द इक बहता था उसके अन्दर भी किसको पता!

ना जाने क्या फितूर में कह गया अच्छी बुरी,
कि जहर से भी तेज है बातों का असर किसको पता!
  • 562, पॉकेट-2, सेक्टर-4, निकट बालकराम अस्पताल, तिमारपुर, दिल्ली-110054