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शुक्रवार, 21 अक्तूबर 2011

विभिन्न क्षेत्रों में साहित्यिक हलचल

{यहां साहित्यिक-सांस्कृतिक गतिविधियों के प्राप्त समाचार पूर्ण रूप में दिये जा रहे हैं। मुद्रित अंक में स्थान की उपलब्धता के अनुसार चयनित समाचारों को संक्षिप्त रूप में दिया जायेगा। कृपया समाचार यथासम्भव संक्षिप्त रूप में ही भेजें।}



‘बीसवाँ अंतर्राज्यीय लघुकथा सम्मेलन’ अमृतसर में सम्पन्न
 

पंजाबी त्रैमासिक पत्रिका ‘मिन्नी’, ‘पंजाबी साहित्य अकादमी, लुधियाना’ व ‘पिंगलवाड़ा चौरिटेबल सोसायटी, अमृतसर’ के संयुक्त तत्त्वाधान में ‘बीसवाँ अंतर्राज्यीय लघुकथा सम्मेलन’ 8 अक्तूबर, 2011 को पिंगलवाडा काम्प्लैक्स, अमृतसर(पंजाब) में सम्पन्न हुआ। सम्मेलन की अध्यक्षता डॉ. इंदरजीत कौर(अध्यक्षा, पिंगलवाड़ा सोसायटी), डॉ. सुखदेव सिंह खाहरा, डॉ. इकबाल कौर, डॉ. अनूप सिंह(उपाध्यक्ष, पंजाबी साहित्य अकादमी) व बलराम अग्रवाल (दिल्ली) ने की।
पत्रिका ‘मिन्नी’ के संपादक-मंडल के सदस्य श्याम सुन्दर अग्रवाल ने पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश मध्य प्रदेश व दिल्ली से सम्मेलन में पधारे अतिथियों का स्वागत करते हुए इस सम्मेलन के उद्देश्य संबंधी जानकारी दी।
कार्यक्रम के प्रारंभ में पंजाबी-आलोचक डॉ. दरिया ने आपना आलेख ‘इक्कीवीं सदी दे पहिले दहाके दी मिन्नी कहाणी, समाजिक ते सभ्याचारक संदर्भ’ पढ़ा। उन्होंने कहा कि किसी भी सामाजिक परिवर्तन पर प्रतिकर्म सबसे पहले लघुकथा में ही व्यक्त होता है।
श्री भगीरथ परिहार ने अपने आलेख ‘मुठ्ठीभर आसमान के लिएरू लघुकथा में स्त्री विमर्श’ में लघुकथा-साहित्य में प्रस्तुत स्त्री की विभिन्न सामाजिक परिस्थितियों का वर्णन किया।
दोनों आलेखों पर डॉ. अनूप सिंह, सुभाष नीरव व डॉ. बलदेव सिंह खाहरा ने अपने विचार व्यक्त किए।

कार्यक्रम के अगले चरण की शुरुआत पत्रिका ‘मिन्नी’ के अंक-93 के विमोचन से हुई। इसके साथ ही डा. श्याम सुन्दर दीप्ति व श्याम सुन्दर अग्रवाल द्वारा संपादित दो लघुकथा-संकलनों ‘विगत दशक की पंजाबी लघुकथाएँ’ (हिन्दी) व ‘दहाके दा सफ़र’ (पंजाबी) का विमोचन अध्यक्ष-मंडल की ओर से किया गया। इसी चरण में सुकेश साहनी व रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’ द्वारा संपादित संकलन ‘मानव मूल्यों की लघुकथाएँ’ तथा बलराम अग्रवाल की ओर से संपादित पुस्तक ‘समकालीन लघुकथा और प्रेमचंद’ का विमोचन भी किया गया।
सर्व श्री सूर्यकांत नागर, सुकेश साहनी, हरभजन सिंह खेमकरनी, निरंजन बोहा व श्री सुरिंदर कैले सम्मानित
    लघुकथा सम्मेलन का प्रथम-सत्र का आखरी चरण सम्मान समारोह का रहा। समारोह दौरान श्री सूर्यकांत नागर (इन्दौर) को ‘माता शरबती देवी समृति सम्मान’, श्री सुकेश साहनी (बरेली) को ‘श्री बलदेव कौशिक स्मृति सम्मान’, श्री हरभजन सिंह खेमकरनी (अमृतसर) को ‘लघुकथा डॉट कॉम सम्मान’, श्री निरंजन बोहा (बोहा, पंजाब) को ‘प्रिं. भगत सिंह सेखों समृति सम्मान’ तथा पत्रिका ‘अणु’ के संपादक श्री सुरिंदर कैले (लुधियाना) को ‘गुरमीत हेयर समृति सम्मान’ से नवाजा गया। पुस्तक विमोचन व सम्मान समारोह में
श्रीमती अनवंत कौर, तलविंदर सिंह, अरतिंदर संधू, डॉ. शेर सिंह मरड़ी व हरिकृष्ण मायर ने अध्यक्ष-मंडल के साथ सहयोग किया। अपने अध्यक्षीय भाषण में डॉ. इंदरजीत कौर ने समाज में लेखकों की सकारात्मक भूमिका तथा अच्छे साहित्य की आवश्यकता पर जोर दिया।
   सम्मेलन का दूसरा सत्र ‘जुगनूआँ दे अंग-संग’ अमृतसर से लगभग दस किलोमीटर दूर पिंगलवाड़ा सोसायटी के मानांवाला कम्प्लैक्स में हुआ। देर शाम शुरू हुआ यह सत्र रात के बारह बजे तक चला। इस सत्र में श्री सुरेश शर्मा व सूर्यकांत नागर (इन्दौर), सुभाष नीरव व बलराम अग्रवाल (दिल्ली), ऊषा मेहता दीपा (चंबा), अशोक दर्द (डलहौजी), डॉ. शील कौशिक व डॉ. शक्तिराज कौशिक (सिरसा) व श्याम सुन्दर अग्रवाल (कोटकपूरा) ने हिन्दी में अपनी लघुकथाएँ पढ़ीं। हरप्रीत सिंह राणा व रघबीर सिंह महिमी (पटियाला), जगदीश राय कुलरीआँ व दर्शन सिंह बरेटा (बरेटा), बिक्रमजीत ‘नूर’ (गिद्दड़बाहा), निरंजन बोहा (बोहा), विवेक (कोट ईसे खाँ) रणजीत आज़ाद काँझला (धूरी), अमृत लाल मन्नन, हरभजन खेमकरणी व डॉ. श्याम सुन्दर ‘दीप्ति’(अमृतसर) ने पंजाबी में अपनी रचनाएँ पढ़ीं। पढ़ी गई रचनाओं पर अन्य के साथ भगीरथ परिहार (कोटा), सुकेश साहनी (बरेली) व डॉ.सुखदेव सिंह सेखों (अमृतसर) ने विशेष रूप से अपने विचार व्यक्त किए। (समाचार सौजन्य: श्याम सुन्दर अग्रवाल, ५७५, गली न.५, प्रताप नगर, कोटकपूरा, पंजाब)



 

नागार्जुन की जन्मशती पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन
  प्रगतिशील विचारधारा के आधार कवि नागार्जुन हिन्दी साहित्य की अमूल्य निधि हैं। शोषित-असहाय जनता के प्रति संवेदनशील तथा पीड़ित जनता के कष्टों से व्यथित नागार्जुन ने अपनी प्रभावशाली कविताओं के माध्यम से समाज के दबे-कुचले तबके को जागरूक करने का काम किया। आम बोलचाल की भाषा में लिखी उनकी रचनाएँँ जहाँँ सामाजिक बदलाव का पर्याय बनीं, वहीं जनकवि के रूप में उन्हें विशष ख्याति मिली। उक्त विचार कवि, आलोचक, सम्पादक तथा इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो. राजेन्द्र कुमार ने रामगढ़ में महादेवी वर्मा सृजन पीठ द्वारा 5-6 जून, 2011 को आयोजित ‘नागार्जुन और समकालीन हिन्दी लेखन’ विषयक द्वि-दिवसीय संगोष्ठी में बतौर मुख्य वक्ता आधार व्याख्यान देते हुए व्यक्त किए।
   संगोष्ठी का उद्घाटन करते हुए कुमाऊँ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वी.एस. अरोरा ने कहा कि विश्वविद्यालय की महादेवी वर्मा सृजन पीठ साहियकारों को रचनात्मक माहौल उपलब्ध कराने की दृष्टि से महत्वपूर्ण कार्य कर रही है। संगोष्ठी को सम्बोधित करते हुए कथाकार, उपन्यासकार एवं समयान्तर के सम्पादक पंकज बिष्ट ने कहा कि नागार्जुन हिन्दी साहित्य परम्परा में ऋषि की भांति हैं। उनकी कविताएँ आदमी की दम तोड़ती उम्मीदों, उसके जीवन-संघर्षों और तकलीफों का संवेदनात्मक पक्ष जाहिर करती हैं।
   वरिष्ठ साहित्यकार वाचस्पति ने कहा कि आजादी के पहले व बाद भी उत्तराखण्ड के सुदूर अंचलों में नागार्जुन भ्रमण करते रहे। वे मूलतः ग्रामीण संस्कारों के कवि हैं। उनका मानवतावाद समाज के अन्तर्विरोधों के खिलाफ एक सजग रचनाकार की भूमिका निभाता है। उत्तराखण्ड भाषा संस्थान की निदेशिका डॉ. सविता मोहन ने कहा कि यह आयोजन  नागार्जुन के बहाने अपने समय और समाज की पहचान का अवसर हमें प्रदान करता है।
   संगोष्ठी के प्रथम सत्र में नागार्जुन एवं समकालीन हिन्दी लेखन को लेकर प्रतिभागियों के बीच गहन एवं अन्तरंग चर्चा हुई। द्वितीय सत्र में नागार्जुन को उनसे जुड़े संस्मरणों के जरिए याद किया गया। दूसरे दिन समापन सत्र में उत्तराखण्डी साहित्यकारों ने अपने समाज और रचनात्मक परिवेश से जुड़ी साहित्यिक-सांस्कृतिक समस्याओं पर व्यापक विचार-विमर्श किया।
   इससे पूर्व कुलपति प्रो. वी. एस. अरोरा द्वारा दीप प्रज्वलन तथा अतिथियों द्वारा नागार्जुन के चित्र पर माल्यार्पण के साथ संगोष्ठी का शुभारम्भ हुआ। पीठ के निदेशक प्रो. एल.एस. विष्ट ‘बटरोही’ ने अपने स्वागत संबोधन में पीठ की वर्तमान में संचालित गतिविधियों तथा भावी योजनाओं की जानकारी दी।इस अवसर पर कवि राजेश सकलानी के कविता संग्रह ‘पुस्तों का बयान’ का विमोचन कुलपति तथा वरिष्ठ साहित्यकारों ने किया। डॉ. राजेन्द्र कैड़ा ने नागार्जुन की कविताओं का पाठ तथा संचालन कवि सिद्धेश्वर सिंह ने किया।
   इस अवसर पर पूर्व विदेश सचिव शशांक, रंगकर्मी इदरीश मलिक, अनिल घिल्डियाल, एच.एस.राणा, राजेश आर्य, महेश जोशी, जितेन्द्र भट्ट, दिनेश चन्द्र जोशी, मुकेश नौटियाल, शैलेय, नवीन नैथानी, विजय गौड़, महेश पुनेठा, चन्द्रशेखर तिवारी, महावीर रंवाल्टा, सुरेन्द्र पुण्डीर, त्रेपन सिंह चौहान, गीता गैरोला, रानू बिष्ट, स्वाति मेलकानी, शीला रजवार, चंद्रकला रावत, प्रभा पंत, विनीता जोशी, दीपा काण्डपाल, मन्नू ढोडियाल, बीना जोशी, बसन्ती पाठक, सुनीता भट्ट, भावना कनवाल, अंबरीश कुमार, खेमकरण सोमन, विक्रम सिंह, भस्कर उप्रेती, रोहित जोशी आदि अनेक रचनाकर्मी मौजूद थे। (समाचार सौजन्य: मोहन सिंह रावत, बर्ड्स आई व्यू, इम्पयर होटल परिसर, तल्लीताल, नैनीताल-263 002, उत्तराखण्ड)

 डॉ. मानव को मिला वर्ष 2011 का ‘डॉ. प्रतीक मिश्र स्मृति सम्मान’
  साहित्य, बाल-साहित्य एवं शोध के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के दृष्टिगत वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. रामनिवास ‘मानव’ को वर्ष 2011 का ‘डॉ. प्रतीक मिश्र स्मृति सम्मान’ प्रदान किया गया है। डॉ. प्रतीक मिश्र स्मृति शोध-संस्थान, कानपुर (उ.प्र.) द्वारा प्रसिद्ध इतिहासकर श्री रामकृष्ण तैलंग की अध्यक्षता  में आयोजित एक भव्य राष्ट्रीय समारोह में, केन्द्रीय कोयला मन्त्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने शॉल, स्मृति-चिह्न, सम्मान-पत्र और ग्यारह हजार की नकद राशि भेंट कर डॉ. ‘मानव’ को सम्मानित किया। प्रख्यात साहित्यकार, पत्रकार, श्क्षिाविद् और समाजसेवी डॉ. प्रतीक मिश्र की स्मृति में प्रतिवर्ष दिया जाने वाला यह सम्मान इससे पूर्व पद्मश्री डॉ. श्याम सिंह ‘शशि’ (2009) तथा डॉ. राष्ट्रबन्धु (2010) को प्रदान किया जा चुका है।
   श्री अणु मिश्र के कुशल संयोजन में सम्पन्न हुए इस समारोह में डॉ. यतीन्द्र तिवारी, डॉ. राष्ट्रबन्धु, डॉ. विमल द्विवेदी, डॉ. सत्यकाम ‘शिरीष’, डॉ. शशि मिश्र, श्री अशोक शास्त्री, डॉ. अनुज स्वामी, श्री रामनाथ ‘महेन्द्र’ आदि प्रमुख साहित्यकारों के अतिरिक्त ‘राष्ट्रीय सहारा’ के स्थानीय सम्पादक श्री नवोदित ने भी डॉ. प्रतीक मिश्र के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला तथा सम्मानित होने पर डॉ. मानव को बधाई दी। इस अवसर पर संस्थान के तत्वावधान में ‘कविता की शाम: डॉ. मानव के नाम’ कार्यक्रम भी आयोजित किया गया।
    साहित्य, सम्पादन, शोध आदि के क्षेत्र में बहुमूल्य एवं विशिष्ट योगदान के लिए डॉ. मानव को अनेकों बार प्रमुख साहित्यिक-सांस्कृतिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया जर चुका है।(समाचार सौजन्य: डॉ. कान्ता भारती, 706, सै.-13,हिसार)


कमलेश भारतीय हरियाणा ग्रन्थ अकादमी के उपाध्यक्ष बने
   हरियाणा सरकार द्वारा नवस्थापित हरियाणा ग्रन्थ अकादमी के उपाध्यक्ष पद पर कथाकार कमलेश भारतीय को नियुक्त किया गया। उन्होंने अपना कार्यभार संभाल लिया है। कमलेश भारतीय लम्बे समय से पत्रिकारिता से जुड़े रहे। इसके बावजूद साहित्य में उनकी रुचि बरकरार रही। भाषा विभाग, पंजाब द्वारा उनकी पहली कथा-कृति ‘महक से ऊपर’ को वर्ष की सर्वोत्तम कथाकृति का पुरस्कार मिला था। श्री कमलेश भारतीय को इससे पूर्व भी केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय, हरियााणा साहित्य अकादमी, चौ. चरण सिंह कृषि वि.वि. आदि के द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। श्री भारतीय ने यह पद दैनिक ट्रिब्यून के प्रमुख संवाददाता के पद से त्यागपत्र देकर ग्रहण किया है। (समाचार सौजन्य: कमलेश भारतीय, 1034-बी, अर्बन एस्टेट-।।, हिसार)
 

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