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रविवार, 30 सितंबर 2012

गतिविधियाँ

अविराम  ब्लॉग संकलन :  वर्ष :  02, अंक :  01,  सितम्बर   2012

अविनाश वाचस्पति को ‘प्रगतिशील ब्लॉडग लेखक संघ 

चिट्ठाकारिता शिखर सम्मान’ 


          नवाबों की नगरी और उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बीते सप्ता्ह चर्चित व्यंसग्यिकार,स्तंभ लेखक, न्यू मीडिया विशेषज्ञ और मशहूर हिन्दी ब्लॉेगर अविनाश वाचस्पति की व्यंग्य कृति ‘व्यंग्य का शून्यकाल’ का सजिल्द संस्करण ब्लॉगार्पित किया गया। ब्लॉ गार्पित इस मायने में कहा जा रहा है क्योंकि पुस्तक अर्पण का यह समारोह अंतरराष्ट्रीय हिन्दी ब्लॉगर सम्मेलन सूचना का उल्लेखनीय हिस्सा रहा।  इस अवसर पर अविनाश वाचस्पकति को उनकी पिछले वर्ष प्रकाशित न्यू मीडिया पर हिन्दी् की पहली प्रामाणिक पुस्तक ‘हिन्दी ब्लॉगिंग : अभिव्यक्ति की नई क्रांति’ के लिए ‘प्रगतिशील ब्लॉग लेखक संघ चिट्ठाकारिता शिखर सम्मान’ से भी नवाजा गया। हिन्दी ब्लॉगरों के भव्य अंतरराष्ट्रीय आयोजन में पुस्तक का लोकार्पण वरिष्ठ साहित्यकार उद्भ्रांत, कथाक्रम के संपादक शैलेन्द्र सागर, डॉ. सुभाष राय, डॉ् अरविन्द मिश्रा, व्यंयग्यकार गिरीश पंकज, रवीन्द्र प्रभात, सुश्री शिखा वार्ष्णेय, डॉ. हरीश अरोड़ा के सुखद सान्निध्य में संपन्न हुआ।
        इस संबंध में उल्लेखनीय है कि फरवरी 2012 में विश्व पुस्तक मेले के अवसर पर प्रख्यात साहित्य्कार एवं व्यंग्येकार डॉ. शेरजंग गर्ग द्वारा लोकार्पित ‘व्यंग्य का शून्ययकाल’ का पैपरबैक संस्कंरण प्रकाशित होकर चर्चित हो चुका है और अब अनुपलब्ध है। इस अवसर पर उन्होंने सबका आभार व्यंक्त करते हुए कहा कि सरकार को न्यू मीडिया सेंसर करने की जरूरत नहीं है अपितु इंटरनेट पर कोई भी खाता खोलने के लिए कोई भी सरकारी पहचान पत्र की अनिवार्यता लागू कर देनी चाहिए।
        अंतर्जाल पर हिन्दीक के लिए किया गया उनका कार्य किसी परिचय का मोहताज नहीं है। अविनाश जी साहित्य शिल्पी से भी लम्बे समय से जुडे हुए हैं इसके अलावा सामूहिक वेबसाइट नुक्कड़ (http://nukkadh.blogspot.com) के मॉडरेटर हैं, जिससे विश्व-भर के एक सौ प्रतिष्ठित हिन्दी लेखक जुड़े हुए हैं। इसके अतिरिक्त उनके ब्लॉग पिताजी, बगीची, झकाझक टाइम्स, तेताला अंतर्जाल जगत में अपनी विशिष्ट पहचान रखते हैं। उन्हें देश भर में नेशनल और इंटरनेशनल ब्लॉगर सम्मेलन आयोजन कराने का श्रेय दिया जाता है। मुंबई, दिल्ली, जयपुर, आगरा इत्यादि शहरों में कराए गए उनके आयोजन अविस्मरणीय और हिन्दी के प्रचार/प्रसार में सहायक बने हैं। इंटरनेट पर हिन्दी् के उनके निस्वार्थ सेवाभाव के कारण विश्वभर में उनके करोड़ों प्रशंसक मौजूद हैं।
         भारतीय जन संचार संस्थान से ‘संचार परिचय’, तथा ‘हिंदी पत्रकारिता पाठ्यक्रम’ में प्रशिक्षण लिया है। व्यंग्य, कविता एवं फ़िल्म लेखन उनकी प्रमुख उपलब्धियाँ हैं। सैंकड़ों पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित हुई हैं। जिनमें नवभारत टाइम्स, हिन्दुस्तान, जनसत्ता, भास्कर, नई दुनिया, राष्ट्रीय सहारा, अमर उजाला, सन्मार्ग, हरिभूमि, अहा जिंदगी, स्क्रीनवर्ल्ड, मिलाप, वीर अर्जुन, डीएलए, दैनिक नवभारत,  साप्ताहिक हिन्दुस्तान, व्यंग्ययात्रा, आई नैक्स्ट, गगनांचल इत्यादि और जयपुर की अहा जिंदगी मासिक उल्ले़खनीय हैं। सोपानस्टेप मासिक और डीएलए दैनिक में नियमित रूप से व्यंिग्य स्तंभ लिख रहे हैं। वर्ष 2008, 2009 और वर्ष 2010 में यमुनानगर,  हरियाणा में आयोजित हरियाणा अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में फिल्मोत्सव समाचार का तकनीकी संपादन किया है।
        हरियाणवी फ़ीचर फ़िल्मों ‘गुलाबो’, ‘छोटी साली’ और ‘ज़र, जोरू और ज़मीन’ में प्रचार और जन-संपर्क तथा नेत्रदान पर बनी हिंदी टेली फ़िल्म ‘ज्योति संकल्प’ में सहायक निर्देशन किया है। राष्ट्रभाषा नव-साहित्यकार परिषद और हरियाणवी फ़िल्म विकास परिषद के संस्थापकों में से एक। सामयिक साहित्यकार संगठन, दिल्ली तथा साहित्य कला भारती, दिल्ली में उपाध्यक्ष। केंद्रीय सचिवालय हिंदी परिषद के आजीवन सदस्य। ‘साहित्यालंकार’, ‘साहित्य दीप’ उपाधियों और ‘राष्ट्रीय हिंदी सेवी सहस्त्राब्दी सम्मान’ तथा ‘कविता शिल्पीं पुरस्कार’ से सम्मानित। ‘शहर में हैं सभी अंधे’ स्वतरचित काव्य रचनाओं का संकलन। काव्य संकलन ‘तेताला’ तथा ‘नवें दशक के प्रगतिशील कवि’ कविता संकलन का संपादन किया है। हिन्दीन चिट्ठाकारी पर डॉ. हरीश अरोड़ा के साथ ‘ब्लॉग विमर्श’ नामक पुस्तक संपादित। ‘सिनेमाई साक्षात्काार’ पुस्तक की तैयारी और ‘फेसबुक महिमा’ पुस्तक के लेखन में व्यस्त ।
         उन्हें वर्ष 2009 के लिए हास्य-व्यंग्य श्रेणी में ‘संवाद सम्मान’ भी दिया जा चुका है। ‘हिन्दी  साहित्यन निकेतन एवं  परिकल्पना के वर्ष के ‘सर्वात्त्म व्यंग्यकार ’। उत्तर भारतीय समाज एजूकेशनल एंड रिसर्च इंस्टीेच्यू्ट, मुंबई से ‘हिन्दी ब्लॉग भूषण’ सम्मा्न। भारत सरकार के ‘सूचना और प्रसारण मंत्रालय’ से ‘हिन्दी  साहित्य सम्मा्न’। (समाचार प्रस्तुति: संतोष त्रिवेदी, जे ३/७८ ए एफ.एफ. खिड़की एक्स.मालवीयनगर, नई दिल्ली-17/ मोबाइल: 9818010808)



'हिन्‍दीचेतना' का अक्‍टूबर दिसम्‍बर अंक 'लघुकथा विशेषांक'

श्री श्‍याम त्रिपाठी और सुधा ओम ढींगरा के संपादन में कैनेडा से प्रकाशित त्रैमासिक साहित्यिक पत्रिका 'हिन्‍दीचेतना' का अक्‍टूबर-दिसम्‍बर 2012 अंक 'लघुकथा विशेषांक' अब उपलब्‍ध हैजिसमें हैं सौ से भी अधिक लघुकथाएं। अतिथि सम्‍पादक द्वय श्री रामेश्‍वर काम्‍बोज 'हिमांशुतथा श्री सुकेश साहनी द्वारा सम्‍पादित एक संग्रहणीय अंक आधारशिलाअविस्‍मरणीयनई ज़मीनसम्‍पदास्‍वागतम् और मेरी पसंद स्‍तंभों के अंतर्गत प्रेमचंदउपेंद्रनाथअश्‍कहरिशंकर परसाईशरद जोशीराजेंद्र यादवरघुबीर सहायचेखवकाफ्काचार्ली चैपलिनअसगर वजाहत,आनंद हर्षुलचित्रा मुद्गलउदय प्रकाश सहित सौ से भी अधिक कहानीकारों की लघुकथाएं  लघुकथा को लेकरडॉ श्‍यामसुंदर दीप्तिडॉ सतीशराज पुष्‍करणाश्‍याम सुंदर अग्रवालसुभाष नीरवडॉ सतीश दुबेभगीरथ की विशेषपरिचर्चा  लघुकथा की सृजनात्‍मक प्रक्रिया श्री काम्‍बोज का विशेष लेख  लघुकथा पर एक समग्र दस्‍तावेज साथ में पुस्तक समीक्षासाहित्यिक समाचारचित्र काव्यशालाविलोम चित्र काव्यशाला और आख़िरी पन्ना यह लघुकथा विशेषांक अब ऑनलाइन उपलब्‍ध हैपढ़ने के लिये नीचे दिये गये लिंक पर जाएं  ऑन लाइन पढ़ें- http://issuu.com/hindichetna/docs/hindi_chetna_oct_dec_2012 । डाउनलोड करें-
http://www.divshare.com/download/19646010-108 । वेबसाइट से डाउनलोड करें-
http://www.vibhom.com/hindi%20chetna.html । फेस बुक पर-
http://www.facebook.com/people/Hindi-Chetna/100002369866074 । ब्‍लाग पर उपलब्ध- (1.)
(समाचार प्रस्तुति : रामेश्‍वर काम्‍बोज 'हिमांशु', अतिथि सम्‍पादक )





हरिद्वार में राजेन्द्र परदेशी सम्मानित


     विगत दिनों हरिद्वार की प्रमुख साहित्यिक संस्था ‘दीपशिखा साहित्यिक एवं सांस्कृतिक मंच, ज्ञानोदय अकादमी हरिद्वार द्वारा संस्था के संस्थापक अध्यक्ष के. एल. दिवान के संयोजन में आयोजित एक साहित्यिक आयोजन में पंजाब कला अकादमी, जालन्धर के निदेशक व हाइकु क्लब, लखनउ के अध्यक्ष वरिष्ठ साहित्यकार श्री राजेन्द्र परदेशी जी को ‘माँ लक्ष्मी देवी दीपशिखा सम्मान-2012’ से सम्मानित किया गया। लिटिल एंजिल्स प्रीपरेटरी स्कूल के सभागार में साहित्यकार श्रीमती नीरा भारद्वाज की अध्यक्षता में संपन्न इस आयोजन में श्री परदेशी जी का माल्यार्पण से स्वागत करने के बाद प्रतीक चिह्न, दुशाला, पुस्तकें एवं सम्मान-पत्र भेंट आदि भेंट कर सम्मानित किया गया। परदेशी जी को कहानी, कविता, हाइकु, साक्षात्कार, समीक्षा आदि विधाओं में लेखन के लिए देश-भर में जाना जाता है। इस अवसर पर परदेशी ने अपने संदेश में रचनाकारों से कहा कि उनको अपनी रचनाएं पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशनार्थ अवश्य भेजना चाहिए। रचना प्रकाशित होने पर हज़ारों साहित्य-प्रेमी पाठकों तक पहुंचती है।
    इस अवसर पर बलदेव राज बत्रा, प्रतिभा सिंह, रजनी रंजना, सत्यदेव बढेजा, प्राची त्यागी, सुशील कुमार ‘अमित’, राजूकारी, श्रीमती गीता, आचार्य राधेश्याम सेमवाल, माधवेन्द्र सिंह, कमलकान्त बुधकर, आकाश कोरी, शिवानी कोरी, दीपक कोरी, जय प्रकाश यात्री, दादा माणिक, सूर्यकान्त श्रीवास्तव, श्याम बनोधा तालिब, महेश भट्ट, ए. सी. काल, कमल दिवान एवं मनस्वी दिवान सहित अनेक स्थानीय साहित्यकार एवं गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।   (समाचार प्रस्तुति : के. एल. दिवान)


जनक छन्द पर वृहत् संकलन

जनक छन्द पर श्री शिवशरण सिंह चौहान ‘अंशुमाली’ के संपादन में सहयोगी आधार पर एक वृहत् संकलन प्रकाशित किया जा रहा है। इस संकलन हेतु कविगण अपने 20 श्रेष्ठ जनक छन्द, अपने परिचय एवं एक फोटो तथा एक प्रति के मूल्य रु. 100/- के साथ श्री शिवशरण सिंह चौहान ‘अंशुमाली’, 253, ई.डब्ल्यू.एस., स्टेट बैंक के पीछे, आवास विकास, फतेहपुर-212601(उ.प्र.) के पते पर प्रेषित कर सकते हैं। अधिक जानकारी हेतु अंशुमाली जी से मोबाइल: 9236584625 पर सम्पर्क कर सकते हैं। सामग्री दिसम्बर 2012 के अन्त तक मांगी गई है। 
(समाचार सौजन्य: महावीर उत्तरांचली, बी-4/79, पर्यटन विहार, बसुन्धरा एंक्लेव, नई दिल्ली-110096)


बहुप्रतीक्षित हाइकु संकलन ‘यादों के पांखी’ प्रकाशित 


    बहुप्रतीक्षित हाइकु संकलन ‘यादों के पांखी’ प्रकाशित हो चुका है। श्री रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’, डॉ.भावना कुँअर एवं डॉ.हरदीप कौर सन्धु के सम्पादन में प्रकाशित इस संकलन का संयोजन सुश्री रचना श्रीवास्तव ने किया है। इसमें देश-विदेश के 48 कवियों के यादों पर आधारित चुने हुए 793 हाइकु संकलित हैं। सम्मिलित रचनाकार हैं- 1- डॉ.भगवतशरण अग्रवाल, 2-डॉ.सुधा गुप्ता, 3-डॉ.मिथिलेश दीक्षित, 4-डॉ. रमाकान्त श्रीवास्तव, 5- डॉ.गोपाल बाबू शर्मा, 6-डॉ. उर्मिला अग्रवाल, 7-रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’, 8-डॉ.भावना कुँअर, 9-डॉ.हरदीप कौर सन्धु, 10-सतीष राज पुष्करणा, 11-चन्द्र बली शर्मा, 12-प्रगीत कुँअर, 13-रचना श्रीवास्तव, 14-कमला निखुर्पा, 15-डॉ.जेन्नी शबनम, 16-सुशीला शिवराण, 17-प्रियंका गुप्ता, 18-डॉ.अनीता कपूर, 19-डॉ. श्याम सुन्दर ‘दीप्ति’, 20-डॉ.ज्योत्स्ना शर्मा, 21-रेखा रोहतगी, 22-श्याम सुन्दर अग्रवाल, 23-सुदर्शन रत्नाकर, 24-सुभाष नीरव, 25-मंजु मिश्रा, 26-राजेन्द्र मोहन त्रिवेदी ‘बन्धु’, 27-स्वाति भालोटिया, 28-डॉ सरस्वती माथुर, 29-प्रो. दविंद्र कौर सिद्धू, 30-वरिन्दरजीत सिंह बराड़, 31-डॉ.मिथिलेश कुमारी मिश्र, 32-डॉ.रमा द्विवेदी, 33-संगीता स्वरूप, 34-मुमताज टी एच खान, 35.डॉ.उमेश महादोषी, 36-अमिता कौण्डल, 37- ऋता शेखर ‘मधु’, 38-सीमा स्मृति, 39-भावना सक्सेना, 40-कृष्णा वर्मा, 41-तुहिना रंजन, 42-सारिका मुकेश, 43-ज्योतिर्मयी पन्त, 44-दिलबाग विर्क, 45-पुष्पा जमुआर, 46-उमेश मोहन धवन, 47.अनुमपा त्रिपाठी एवं 48-कृष्ण कुमार कायत। (समाचार सौजन्य: रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’, नई दिल्ली)


ग्रन्थ अकादमी की ‘ब्रह्मानंद ग्रन्थावली’ का लोकार्पण किया हुड्डा ने

पंचकूला। हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने हरियाणा ग्रन्थ अकादमी द्वारा प्रकाषित ‘संत ब्रह्मानंद सरस्वती ग्रन्थावली’ का लोकार्पण करनाल के निकट अंजनथली स्थित ब्रह्मानंद कन्या महाविद्यालय के उद्घाटन के अवसर पर आयोजित समारोह में किया। श्री हुड्डा ने अकादमी के इस प्रकाषन की सराहना की। उल्लेखनीय है कि संत ब्रह्मानंद के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में यह समारोह आयोजित किया गया था। इस अवसर पर हरियाणा ग्रन्थ अकादमी के उपाध्यक्ष कमलेष भारतीय, निदेषक डा. मुक्ता व ग्रन्थावली के संपादक कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के अध्यक्ष डा. बाबूराम भी मौजूद थे। 
 इनके अतिरिक्त मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार प्रो. वीरेंद्र, करनाल के सांसद अरविंद षर्मा, विधायक सुमिता सिंह, साध्वी मैत्रेयी आनंद व ब्रह्मानंद षिक्षा समिति के अध्यक्ष रतिराम आदि मौजूद थे। लगभग दो सौ पृश्ठों में प्रकाषित इस ग्रन्थ में संत ब्रह्मानंद की नीति विचार व ब्रह्मानंद पचासा सहित सभी पंाच पुस्तकों को एक स्थान पर संकलित किया गया है। इसमें संत ब्रह्मानंद से संबंधित चित्र व उनकी हस्तलिपि में काव्य भी सम्मिलित है। पुस्तक के आवरण पर संत ब्रह्मानंद का चित्र अंकित है। 
(समाचार प्रस्तुति: धर्मेंद्र सिंह, हरियाणा ग्रनथ अकादमी।)     


शब्द प्रवाह साहित्य मंच की दो योजनाओं हेतु आमन्त्रण

‘शब्द सागर’ काव्य संकलन

   सहयोगी आधार पर 200 पृष्ठों से अधिक के इस संकलन का सम्पादन श्री कमलेश व्यास ‘कमल’ द्वारा किय जायेगा। भागीदारी हेतु रचनाकार अपनी कम्प्यूटर टंकित श्रेष्ठतम 20 रचनाएँ सम्पादक को 20/7, कांकरिया परिसर, अंकपात मार्ग, उज्जैन (म.प्र.) के पते पर अपने पूर्ण परिचय व फोटो एवं 10-10 रुपये के दो लिफाफों सहित 30 अक्टूबर 2012 तक भेज सकते हैं। प्रत्येक चयनित रचनाकार को ग्यारह पृष्ठ आबंटित किए जायेंगे। रचनाओं के चयन की सूचना मिलने पर रचनाकार को निर्धारित सहयोग राशि भेजनी होगी। प्रकाशित होने के बाद प्रत्येक रचनाकार को 20-20 प्रतियाँ प्रदान की जायेंगी। अधिक जानकारी के लिए श्री कमल जी से रात्रि 8.30 से 10.30 के मध्य मो. 09893009932 पर सम्पर्क कर सकते हैं।

शब्द प्रवाह साहित्य सम्मान-2013

    अखिल भारतीय स्तर पर आयोजित इस सम्मान हेतु कविता संग्रह, व्यंग्य संग्रह एवं लघुकथा संग्रह के रूप में प्रविष्टियाँ आमन्त्रित हैं। वर्ष 2009 से 2012 के मध्य प्रकाशित पुस्तकें ही 31.12.2012 तक तीन प्रतियों, रचनाकार के पूर्ण परिचय, दो रंगीन फोटो तथा धनादेश द्वारा रु. तीन सौ रुपये प्रविष्टि शुल्क सहित भेजी जा सकती हैं। प्रत्येक विधा में प्रथम पुरस्कार के अन्तर्गत रु 1100/- नकद राशि, आकर्षक सम्मानोपाधि प्रशस्ति-पत्र, स्मृति चिह्न के साथ सारस्वत सम्मान, द्वितीय व तृतीय पुरस्कार स्वरूप आकर्षक सम्मानोपाधि प्रशस्ति-पत्र, स्मृति चिह्न के साथ सारस्वत सम्मान पदान किया जायेगा। अन्य कृतियों के रचनाकारों को भी सम्मानोपाधि प्रशस्ति पत्र भेजे जायेंगे। सभी प्रविष्टि प्रेषकों को त्रैमासिक पत्रिका ‘शब्द प्रवाह’ एक वर्ष तक निःशुल्क प्रेषित की जायेगी। प्रविष्टियाँ शब्द प्रवाह साहित्य मंच, ए-99, व्ही.डी. मार्केट, उज्जैन-456006 (म.प्र.) के पते पर आमन्त्रित की गई हैं। विस्त्रत जानकारी मोबाइल संख्या 09926061800 एवं 09406880599 पर सम्पर्क कर ली जा सकती है। (समाचार प्रस्तुति: संदीप सृजन, संपादक: शब्द प्रवाह)


शिव संकल्प साहित्य परिषद का साहित्यिक आयोजन

    होशंगाबाद की साहित्यिक संस्था शिव संकल्प साहित्य परिषद द्वारा विगत दिनों एक काव्याभिनंदनम् एवं लोकार्पणम् कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस आयोजन में साहित्यकार प्रो. (डॉ.) शरद नारायण खरे मण्डला, नपाध्यक्ष श्रीमती माया नारोलिया एवं प्रखर समीक्षक डॉ. रघुनंदन प्रसाद सीठा ने शिक्षक-कवि श्री विनोद परसाई की कृति ‘प्रबोध गीता’ का लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर श्री खरे सहित अनेक साहित्यकार शिक्षकों को परिषद की मानद उपाधियों से सम्मानित भी किया गया। आयोजन के दूसरे सत्र में एक काव्य गोष्ठी संपन्न हुई, जिसमें सर्व श्री गिरिजा शंकर शर्मा, आचार्य विकल, जगदीश बाजपेयी, पं. गिरिमोहन गुरु, बृजमोहन पाण्डे, करम होशंगाबादी, अशोक गंगराड़े, बाबूलाल खण्डेलवाल, देवदत्त हंगामी आदि अनेक कवियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन पं. गिरिमोहन गुरु ने किया। बृजमोहन पाण्डे ने सभी का आभार प्रकट किया। (समाचार प्रस्तुति: पं. गिरिमोहन गुरु) 


तस्लीम एवं परिकल्पना डॉट कॉम का संयुक्त आयोजन : ब्लॉगरों का अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन


   आज से 75 साल पहले सन 1936 में लखनऊ शहर प्रगतिशील लेखक संघ के प्रथम अधिवेशन का गवाह बना था, जिसकी गूंज आज तक सुनाई पड़ रही है। उसी प्रकार आज जो लखनऊ में ब्लॉग लेखकों का अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित हो रहा है, इसकी गूंज भी आने वाले 75 सालों तक सुनाई पड़ेगी।
    उपरोक्त विचार बली प्रेक्षागृह, कैसरबाग, लखनऊ में आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दी ब्लॉगर सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए प्रतिश्ठित कवि उद्भ्रांत ने व्यक्त किये। सकारात्मक लेखन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह सम्मेलन तस्लीम एवं परिकल्पना समूह द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में पूर्णिमा वर्मन (शारजाह), रवि रतलामी (भोपाल), शिखा वार्श्णेय (लंदन), डॉ0 अरविंद मिश्र (वाराणसी), अविनाश वाचस्पति (दिल्ली), मनीष मिश्र (पुणे), इस्मत जैदी (गोवा), आदि ब्लॉगरों ने अपने उद्गार व्यक्त किये। कार्यक्रम को मुद्राराक्षस, शैलेन्द्र सागर, वीरेन्द्र यादव, राकेश, शकील सिद्दीकी, शहंशाह आलम, डॉ. सुभाष राय, डॉ. सुधाकर अदीब, विनय दास आदि वरिष्ठ साहित्यकारों ने भी सम्बोधित किया। वक्ताओं ने अपनी बात रखते हुए कहा कि इंटरनेट एक ऐसी तकनीक है, जो व्यक्ति को अभिव्यक्ति का जबरदस्त साधन उपलब्ध कराती है, लोगों में सकारात्मक भावना का विकास करती है, दुनिया के कोने-कोने में बैठे लोगों को एक दूसरे से जोड़ने का अवसर उपलब्ध कराती है और सामाजिक समस्याओं और कुरीतियों के विरूद्ध जागरूक करने का जरिया भी बनती है। इसकी पहुँच और प्रभाव इतना जबरदस्त है कि यह दूरियों को पाट देता है, संवाद को सरल बना देता है और संचार के उत्कृष्ट साधन के रूप में उभर कर सामने आता है। लेकिन इसके साथ ही साथ जब यह अभिव्यक्ति के विस्फोट के रूप में सामने आती है, तो उसके कुछ नकारात्मक परिणाम भी देखने को मिलते हैं। ये परिणाम हमें दंगों और पलायन के रूप में झेलने पड़ते हैं। यही कारण है कि जब तक यह सकारात्मक रूप में उपयोग में लाया जाता है, तो समाज के लिए अलादीन के चिराग की तरह काम करता है, लेकिन जब यही अवसर नकारात्मक स्वरूप अख्तियार कर लेता है, तो समाज में विद्वेष और घृणा की भावना पनपने लगती है और नतजीतन सरकारें बंदिशों का हंटर सामने लेकर सामने आ जाती हैं। लेकिन यदि रचनाकार अथवा लेखक सामाजिक सरोकारों को ध्यान में रखते हुए इंटरनेट के इस साधन का उपयोग करे, तो कोई कारण नहीं कि उसके सामने किसी तरह का खतरा मंडराए। इससे समाज में प्रेम और सौहार्द्र का विकास भी होगा और देश तरक्की की सढ़ियाँ भी चढ़ सकेगा।  
इस अवसर पर देश के कोने-कोने से आए 200 से अधिक ब्लॉगर, लेखक, संस्कृतिकर्मी और विज्ञान संचारक भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में तीन चर्चा सत्रों (न्यू मीडिया की भाशाई चुनौतियाँ, न्यू मीडिया के सामाजिक सरोकार, हिन्दी ब्लॉगिंगः दशा, दिशा एवं दृष्टि) में रचनाकारों ने अपने विचार रखे। इस अवसर पर कार्यक्रम के संयोजक रवीन्द्र प्रभात ने ब्लॉगरों की सर्वसम्मति से सरकार से ब्लॉग अकादमी के गठन की मांग की, जिससे ब्लॉगरों को संरक्षण प्राप्त हो सके और वे समाज के विकास में सकारात्मक योगदान दे सकें।
    इस अवसर पर ‘वटवृक्ष‘ पत्रिका के ब्लॉगर दशक विशेषांक का लोकार्पण किया गया, जिसमें हिन्दी के सभी महत्वपूर्ण ब्लॉगरों के योगदान को रेखांकित किया गया है। इसके साथ ही साथ कार्यक्रम के सह संयोजक डॉ0 जाकिर अली रजनीश की पुस्तक ‘भारत के महान वैज्ञानिक‘ एवं अल्का सैनी के कहानी संग्रह ‘लाक्षागृह‘ तथा मनीष मिश्र द्वारा सम्पादित पुस्तक ‘हिन्दी ब्लॉगिंग: स्वरूप व्याप्ति और संभावनाएं‘ का भी लोकार्पण इस अवसर पर किया गया।
     कार्यक्रम के दौरान ब्लॉग जगत में उल्लेखनीय योगदान के लिए पूर्णिमा वर्मन, रवि रतलामी, बी एस पावला, रचना, डॉ अरविंद मिश्र, समीर लाल समीर, कृष्ण कुमार यादव और आकांक्षा यादव को ‘परिकल्पना ब्लॉग दशक सम्मान‘ से विभूषित किया गया। इसके साथ ही साथ अविनाश वाचस्पति को प्रब्लेस चिट्ठाकारिता शिखर सम्मान, रश्मि प्रभा को शमशेर जन्मशती काव्य सम्मान, डॉ सुभाष राय को अज्ञेय जन्मशती पत्रकारिता सम्मान, अरविंद श्रीवास्तव को केदारनाथ अग्रवाल जन्मशती साहित्य सम्मान, शहंशाह आलम को गोपाल सिंह नेपाली जन्मशती काव्य सम्मान, शिखा वार्ष्णेय को जानकी बल्लभ शास्त्री स्मृति साहित्य सम्मान, गिरीश पंकज को श्रीलाल शुक्ल व्यंग्य सम्मान, डॉ. जाकिर अली रजनीश को फैज अहमद फैज जन्मशती सम्मान तथा 51 अन्य ब्लॉगरों को ‘तस्लीम-परिकल्पना सम्मान‘ प्रदान किये गये।
{ समाचार सौजन्य :  डॉ0 ज़ाकिर अली रजनीष (मो0: 9935923334द्ध, ईमेल : zakirlko@gmail.com /वेबपेज : http://ts.samwaad.com/?m=1
श्री रवीन्द्र प्रभात  (मो 9415272608 /  ईमेल : parikalpanaa@gmail.com / वेबपेज :www.parikalpnaa.com }




सतीश चन्द्र शर्मा ‘सुधांशु’ एवं डॉ. वीरेन्द्र कुमार दुबे को ‘‘आलराऊँड कवि’’ की उपाधि

      अंग्रेजी, हिन्दी एवं पंजाबी साहित्य के विकास व प्रचार में रत फरीदकोट की संस्था ‘आलराऊँड अकादमी’ द्वारा मैनपुरी, उ.प्र.निवासी कवि सतीश चन्द्र शर्मा एवं जबलपुर निवासी कवि डॉ. वीरेन्द्र कुमार दुबे को ‘‘आलराऊँड कवि’’ की उपाधि से सम्मानित किया गया है। यह उपाधि इन कवियों को उनके बहुमुखी व्यक्तित्व एवं काव्य साहित्य में उनके योगदान के लिए प्रदान की गई है। (समाचार प्रस्तुति: अमित कुमार लाड़ी, अध्यक्ष: ‘आलराऊँड अकादमी’, फरीदकोट, पंजाब)


अमित कुमार लाड़ी सम्मानित
   





अंग्रेजी, हिन्दी एवं पंजाबी साहित्य के विकास व प्रचार में रत फरीदकोट की संस्था ‘आलराऊँड अकादमी’ के अध्यक्ष एवं मासिक पत्रिका ‘आलराऊँड’ के संपादक श्री अमित कुमार लाड़ी को ग्वालियर की साहित्यिक संस्था ग्वालियर साहित्य एवं कला परिषद द्वारा ‘उत्कृष्ट हिन्दी सेवी सम्मान’ से सम्मानित किया गया। विभिन्न प्रान्तों से आये अनेकों साहित्यकारों की उपस्थिति में ग्वालियर के माधव महाविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में श्री लाड़ी को शाल, पुस्तकें, स्मृति चिह्न व प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। श्री लाड़ी ‘आलराऊँड’ पत्रिका को हिन्दी, अंग्रेजी एवं पंजाबी तीन भाषाओं में संपादित/प्रकाशित करते हैं। (समाचार प्रस्तुति: अमित कुमार लाड़ी, अध्यक्ष: ‘आलराऊँड अकादमी’, फरीदकोट, पंजाब)

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