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गुरुवार, 22 नवंबर 2012

गतिविधियाँ


अविराम  ब्लॉग संकलन :  वर्ष :  02, अंक :  02,  अक्टूबर  2012


21वां अन्तर्राज्यीय लघुकथा सम्मेलन सम्पन्न

                                    डॉ बलराम अग्रवाल  व सतीश राठी सम्मानित 


डॉ. बलराम अग्रवाल का सम्मान
फोटो सौजन्य : सुभाष नीरव  
विगत 27 अक्तूबर 2012 को सरकारी सीनियर सेकेण्डरी स्कूल बनीखेत (डल्हौजी), हिमाचल के सभागार में 21वां अन्तर्राज्यीय लघुकथा सम्मेलन सम्पन्न हुआ।  इस अवसर पर हमेशा की भांति लघुकथा पर चिन्तन-मनन, लघुकथा पाठ, प्रमुख पत्रिकाओं एवं पुस्तकों के विमोचन तथा सम्मान समारोह के सत्रों का आयोजन किया गया। इस वर्ष लघुकथा का ‘माता शरबती देवी स्मृति सम्मान ‘ सतीश राठी ( इन्दौर) को , माता महादेवी कौशिक स्मृति सम्मान बलराम अग्रवाल को दिया गया। डॉ कुलदीप सिंह ‘दीप’ , हरप्रीत राणा , जसबीर ढण्ड भी सम्मानित किए गए। 
सतीश राठी का सम्मान 
 फोटो सौजन्य : सुभाष नीरव 
    ‘पंजाबी साहित्य  अकादमी लुधियाना’ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं हिन्दी पंजाबी लघुकथा के समर्थ समालोचक डॉ अनूप सिंह ने इक्कीसवें अन्तर्राज्यीय लघुकथा सम्मेलन के अवसर पर हिन्दी चेतना त्रैमासिक (मुख्य सम्पादक श्याम त्रिपाठी-कनाडा,  सम्पादक-डॉ सुधा ओम ढींगरा- यू एस ए) के लघुकथा विशेषांक का विमोचन किया। इस अवसर पर इस विशेषांक के सम्पादक द्वय सुकेश साहनी - रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु, हिन्दी पंजाबी के सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ श्याम सुन्दर दीप्ति (प्रो मैडिकल कॉलेज अमृतसर एवं सम्पादक मिन्नी त्रैमासिक पंजाबी) एवं डॉ सूर्यकान्त नागर (इन्दौर) भी उपस्थित थे। इसी सत्र में हिन्दी के सुप्रसिद्ध कथाकार - सुभाष नीरव के लघुकथा-संग्रह ‘सफ़र में आदमी’ का विमोचन हिन्दी के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ सूर्यकान्त नागर ने किया।
सम्मलेन का दृश्य 
फोटो सौजन्य : सुभाष नीरव 
      इसी अवसर पर मिन्नी त्रैमासिक और अनियतकालीन क्षितिज के लघुकथा विशेषांक के अलावा कुछ पुस्तकों का भी विमोचन भी किया गया ; जिनमें -बेहतर हैं हम,  गैर हाज़िर रिश्ता ( डॉ दीप्ति),चानण ( हरभजन सिंह खेमकरणी), एक लोटा पानी ( श्याम सुन्दर अग्रवाल),यादों के पाखी, अलसाई चाँदनी ( हिमांशु, डॉ भावना कुँअर और डॉ हरदीप कौर सन्धु),झरे हरसिंगार (हिमांशु) प्रमुख हैं।
     पंजाबी के समालोचक डॉ अनूप सिंह ने पंजाबी लघुकथा के ‘दहाके दा सफ़ररूइक परतवीं झात’ आलेख का वाचन किया । इस आलेख के बारे में कुलदीप सिंह दीप ने अपने विचार प्रस्तुत किए । 
      मिन्नी कहानी लेखक मंच की ओर से हर वर्ष की तरह इस बार भी कराई गई लघुकथा प्रतियोगिता के विजेताओं को हरभजन सिंह खेमकरणी ने पुरस्कृत किया । अन्तिम सत्र में हिन्दी -पंजाबी लघुकथाओं का पाठ कराया गया एवं प्रत्येक रचना पर समीक्षकों ने अपनी राय प्रकट की ।इस कार्यक्रम का आयोजन अशोक दर्द ने किया ।सुचारू व्यवस्था के लिए यू एस छेत्रिय (उप प्रबन्धक , सिविल , एन एच पी सी) तथा स्कूल के प्राचार्य उमेश शर्मा का योगदान सराहनीय रहा । (समाचार सौजन्य : लघुकथा डाट काम)


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कथाशिल्पी शैलेश मटियानी का भावपूर्ण स्मरण एवं संगोष्ठी 

शैलेश मटियानी का साहित्य पूरे पहाड़ की पीड़ा है :  प्रेम मटियानी


संबोधित करते मुख्य अतिथि प्रेम मटियानी
कुमाऊँ विश्वविद्यालय की महादेवी वर्मा सृजन पीठ द्वारा कथा शिल्पी शैलेश मटियानी के जन्मदिन के अवसर पर पिछले दिनों (13 अक्टूबर, 2012) उनके जन्मस्थान बाड़ेछीना (अल्मोड़ा) में ‘शैलेश मटियानी: स्मृतियाँ और प्रासंगिकता’ विषयक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि गीत एवं नाटक प्रभाग तथा फिल्म एवं टेलीविजन इंस्टीटयूट के पूर्व निदेशक प्रेम मटियानी ने कहा कि शैलेश मटियानी का साहित्य पूरे पहाड़ की पीड़ा है। उन्होंने अपने साहित्य में पहली बार पहाड़ी जीवन के अंतर्विरोधों को प्रस्तुत किया।
        संगोष्ठी को प्रो. दिवा भट्ट, डॉ. दीपा गोबाड़ी, डॉ. विवेकानंद पाठक, डॉ. हेमा सेलाकोटी, डॉ. महेन्द्र महरा ‘मधु’, जी.सी. टम्टा आदि ने संबोधित किया। ब्लाक प्रमुख हेमा चम्याल ने राजकीय इण्टर कालेज, बाड़ेछीना का नाम स्व. शैलेश मटियानी के नाम पर रखने का प्रस्ताव शासन को भेजने की बात कही। अध्यक्षता करते हुए एस.एस.जे. परिसर, अल्मोड़ा के हिन्दी विभागाध्यक्ष प्रो. शेर सिंह बिष्ट ने शैलेश मटियानी की स्मृति में कुमाऊँ विश्वविद्यालय के अंतर्गत पीठ तथा अल्मोड़ा व बाड़ेछीना में उनकी मूर्तियों की स्थापना पर बल दिया।
मंचासीन अतिथि
        अपने स्वागत संबोधन में महादेवी वर्मा सृजन पीठ के निदेशक प्रो. देव सिंह पोखरिया ने सृजन पीठ के कार्यकलापों की जानकारी दी। शैलेश मटियानी के पुत्र राकेश मटियानी तथा उनके निकट संपर्क में रहे जुगल किशोर पेटशाली और डॉ. जीवन सिंह मेहता ने भावपूर्ण व अंतरंग संस्मरणों के जरिए उन्हें याद किया। इस अवसर पर डॉ. शांति चंद ने शैलेश मटियानी की कहानी ‘मैमूद’, युवा कथाकार मुकेश नौटियाल ने अपनी कहानी ‘हौरन दा’ तथा दिनेश चन्द्र जोशी ने ‘खेत’ कहानी का पाठ किया।
संगोष्ठी का प्रारम्भ गणमान्य अतिथियों द्वारा स्व. शैलेश मटियानी के चित्र पर माल्यार्पण तथा दीप प्रज्वलन से हुआ। कार्यक्रम में शैलेश मटियानी के कहानी संग्रह ‘मैमूद’, उपन्यास ‘सवित्तरी’ तथा डॉ. दीपा गोबाड़ी की आलोचना पुस्तक ‘शैलेश मटियानी की कहानियों में ग्रामीण जीवन की अभिव्यक्ति’ का लोकार्पण गणमान्य अतिथियों ने किया। संचालन-संयोजन महादेवी वर्मा सृजन पीठ के शोध अधिकारी मोहन सिंह रावत ने किया।
हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. शेर सिंह बिष्ट
सृजन पीठ द्वारा शैलेश मटियानी की स्मृति में आयोजित अन्तरविद्यालयी मौलिक कहानी लेखन प्रतियोगिता में प्रथम मेघा बनौला, द्वितीय कनुप्रिया तथा तृतीय स्थान प्राप्त विक्रम सिंह रौतेला को मुख्य अतिथि ने पुरस्कृत किया। इस अवसर पर स्व. शैलेश मटियानी की पत्नी नीला मटियानी सहित प्रो. एस.के. सिंह, गोपाल मटियानी, बीना वर्मा, पुष्पलता मेहरा, राजेश विश्वकर्मा, मनीषा पाण्डेय, पुष्पा सिंह, त्रिलोक सिंह, देवकी पोखरिया, हरीप्रकाश खत्री, उमेश चन्द, मनवर सिंह, डॉ. बचन लाल, पवनेश ठकुराठी, वन्दना चन्द, रीता तिवारी, सुनीता भंडारी, नवीन बिष्ट, सतीश मिश्र, प्रदीप तिवारी, भूपेन्द्र प्रसाद, पूरन गैलाकोटी, नरेन्द्र बनौला, जे.एस. बिष्ट, दीवान कनवाल, चंदन मेहरा, कैप्टन पूरन सुप्याल, धर्म सिंह मेहरा, कमल बिष्ट, डॉ. ममता पंत, गितेश त्रिपाठी, डॉ. हयात सिंह रावत, हरीश भंडारी, निर्मल पंत, विपिन कुमार, भीम सिंह बगडवाल, प्रीति कर्नाटक, पूरन मठपाल ‘सौम्य’, निर्मल उप्रेती, ललित पाण्डे, प्रमोद रैखोला, उमेश जोशी आदि उपस्थित थे।
इसी अवसर पर संगोष्ठी को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए गीत एवं नाटक प्रभाग तथा फिल्म एवं टेलीविजन इंस्टीट्यूट के पूर्व निदेशक प्रेम मटियानी ने कहा- ''शैलेश मटियानी का साहित्य पूरे पहाड़ की पीड़ा है। उन्होंने अपने साहित्य में पहली बार पहाड़ी जीवन के अंतर्विरोधों को प्रस्तुत किया। प्रकृति के बीच निवास करने वाले एक आम उपेक्षित आदमी को लोकोन्मुख कथाशिल्पी शैलेश मटियानी ने पहली बार अपना कथानायक बनाया तथा उसे रेखांकित किया।"  उन्होंने यह भी कहा कि शैलेश मटियानी भारतीय साहित्यकारों में उन गिने-जुने लेखकों में थे जो मानो लेखक बनने के लिए ही पैदा हुए थे।
          संगोष्ठी को संबोधित करते हुए प्रो. दिवा भट्ट ने कहा कि शैलेश मटियानी के साहित्य में उत्तराखण्ड अपनी समग्रता के साथ दुनिया के सामने उदघाटित हुआ है। सुकुमार प्रकृति के संसर्ग ने उनकी अनुभूति को इतना विराट और संवेदनशील बना दिया कि आम आदमी की पीड़ा को वह अपनी रचनाओं में जैसी जीवंत और सशक्त अभिव्यक्ति दे पाए, वैसा न उनसे पहले कभी हुआ और न ही उनके बाद।
          डॉ. दीपा गोबाड़ी ने कहा कि शैलेश मटियानी उन पात्रों और जीवन परिस्थितियों के कथाकार थे जो तथाकथित सभ्य समाज में कलंक माने जाते हैं। वह अपनी कहानियों के माध्यम से उन्हें मानवीय गरिमा प्रदान करने के साथ ही उन स्थितियों तक पहुँचा देने वाले सामाजिक विश्वासों पर निरंतर प्रहार कर रहे थे। इस मायने में वह अपनी तरह के अकेले कथाकार थे।
         डॉ. विवेकानंद पाठक ने कहा कि मटियानी के अलावा शायद ही कोई ऐसा लेखक हो जिसने समाज के गरीब, शोषित और निचले वर्गों की पीड़ा को इतनी ईमानदार अभिव्यक्ति दी। उन्होंने जो कुछ भी सोचा, समझा, उसके पीछे उनके जीवन का अनुभव था। उनके साहित्य में जो कुछ भी है, वह नितांत उनका अपना है। वह उनके अनुभव का, उनके जीवन-दर्शन का साहित्य है।
डॉ. हेमा सेलाकोटी ने कहा कि उस दौर में नई कहानी मूलतः शहरी मध्य वर्ग पर केंद्रित थी। समानांतर धारा में शहरी परिवेश भी था और ग्रामीण अंचल भी। शैलेश मटियानी इन दोनों धाराओं से बिल्कुल अलग ऐसे पात्र, परिवेश, स्थितियाँ और जीवन के चित्रण में संलग्न थे जहाँ संवेदनाओं की गहनता और संप्रेषण के औजार भी अलग तरह के थे।
         ब्लाक प्रमुख हेमा चम्याल ने कहा कि अभावों के रहकर भी मटियानी जी ने जो साहित्य रचा, वह उनके जीवन अनुभवों का सार है। युवा रचनाकारों को उनके संघर्षशील व्यक्तित्व से प्रेरणा लेनी चाहिए। जिन विषम परिस्थितियों में मटियानी जी जैसे बड़े साहित्यकार ने जीवन यापन किया, उसके लिए हमारा समाज और व्यवस्था उत्तरदायी है। उन्होंने राजकीय इण्टर कालेज, बाड़ेछीना का नाम स्व. शैलेश मटियानी के नाम पर रखने का प्रस्ताव शासन को भेजने की बात कही।
संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए कुमाऊँ विश्वविद्यालय एस.एस.जे. परिसर, अल्मोड़ा के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. शेर सिंह बिष्ट ने कहा कि शैलेश मटियानी के व्यक्तित्व में साधारण लोगों के प्रति जो आत्मीयता थी, वह आज दुर्लभ है। वे अपने लेखन और व्यंिक्तत्व में एक समान थे। उनके साहित्य में कहीें भी हताशा नहीं है। हिंदी साहित्य में उत्तराखण्ड की वर्तमान पीढ़ी एक प्रकार से उन्हीं के साहित्य का विस्तार है। उन्होंने शैलेश मटियानी की स्मृति में कुमाऊँ विश्वविद्यालय के अंतर्गत पीठ तथा अल्मोड़ा व बाडे़छीना में उनकी मूर्तियों की स्थापना पर बल दिया। 
         अपने स्वागत संबोधन में महादेवी वर्मा सृजन पीठ के निदेशक प्रो. देव सिंह पोखरिया ने सृजन पीठ के कार्यकलापों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पीठ कार्यकारिणी द्वारा निर्धारित वार्षिक कैलेण्डर के अनुसार प्रमुख साहित्यकारों के जन्मदिन पर समय-समय पर साहित्य से जुड़े ज्वलंत प्रश्नों पर साहित्यिक गोष्ठियाँ तथा रचना-पाठ के कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं जिनसे विद्यार्थियों, युवाओं तथा साहित्य के क्षेत्र में संभावनाशील रचनात्मक प्रतिभाओं को जोड़ने का प्रयास किया गया है। इस अवसर पर डॉ. शांति चंद ने शैलेश मटियानी की चर्चित कहानी ‘मैमूद’ का पाठ किया। युवा कथाकार मुकेश नौटियाल ने अपनी कहानी ‘हौरन दा’ तथा दिनेश चन्द्र जोशी ने ‘खेत’ कहानी का पाठ किया।
 डॉ. दीपा गोबाड़ी की पुस्तक का लोकार्पण करते अतिथि
           संगोष्ठी का प्रारम्भ गणमान्य अतिथियों द्वारा स्व. शैलेश मटियानी के चित्र पर माल्यार्पण तथा दीप प्रज्वलन से हुआ। शैलेश मटियानी के पुत्र राकेश मटियानी तथा उनके निकट संपर्क में रहे संस्कृतिकर्मी जुगल किशोर पेटशाली तथा रिटायर्ड डी.एफ.ओ. डॉ. जे.एस. मेहता ने भावपूर्ण तथा अंतरंग संस्मरणों के जरिए उन्हें याद किया। कार्यक्रम में शैलेश मटियानी के कहानी संग्रह ‘मैमूद’,  उपन्यास ‘सवित्तरी’ तथा डॉ. दीपा गोबाड़ी की आलोचना पुस्तक ‘शैलेश मटियानी की कहानियों में ग्रामीण जीवन की अभिव्यक्ति’ का लोकार्पण गणमान्य अतिथियों ने किया। संगोष्ठी को डॉ. महेन्द्र महरा ‘मधु’, के.एन. पंत, रा.इ.का. बाड़ेछीना के प्रधानाचार्य जी.सी. टम्टा ने भी संबोधित किया। संचालन-संयोजन महादेवी वर्मा सृजन पीठ के शोध अधिकारी मोहन सिंह रावत ने किया।
            सृजन पीठ द्वारा शैलेश मटियानी की स्मृति में अन्तरविद्यालयी मौलिक कहानी लेखन प्रतियोगिता में प्रथम जी.जी.आई.सी. बाड़ेछीना की छात्रा मेघा बनौला, द्वितीय जी.आई.सी. बाड़ेछीना की कनुप्रिया तथा तृतीय स्थान प्राप्त चितई इण्टर कालेज के छात्र विक्रम सिंह रौतेला को मुख्य अतिथि ने पुरस्कृत किया। 
इस अवसर पर स्व. शैलेश मटियानी की पत्नी नीला मटियानी सहित प्रो. एस.के. सिंह, गोपाल मटियानी, बीना वर्मा, पुष्पलता मेहरा, राजेश विश्वकर्मा, मनीषा पाण्डेय, पुष्पा सिंह, त्रिलोक सिंह, देवकी पोखरिया, हरीप्रकाश खत्री, उमेश चन्द, मनवर सिंह, डॉ. बचन लाल, पवनेश ठकुराठी, वन्दना चन्द, रीता तिवारी, सुनीता भंडारी, नवीन बिष्ट, सतीश मिश्र, प्रदीप तिवारी, भूपेन्द्र प्रसाद, पूरन गैलाकोटी, नरेन्द्र बनौला, जे.एस. बिष्ट, दीवान कनवाल, चंदन मेहरा, कैप्टन पूरन सुप्याल, धर्म सिंह मेहरा, कमल बिष्ट, डॉ. ममता पंत, गितेश त्रिपाठी, डॉ. हयात सिंह रावत, हरीश भंडारी, निर्मल पंत, विपिन कुमार, भीम सिंह बगडवाल, प्रीति कर्नाटक, पूरन मठपाल ‘सौम्य’, निर्मल उप्रेती, ललित पाण्डे, प्रमोद रैखोला, उमेश जोशी आदि उपस्थित थे।  (समाचार प्रस्तुति : मोहन सिंह रावत, शोध अधिकारी, महादेवी वर्मा सृजन पीठ )


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डॉ. माहेश्वर तिवारी को साहित्यादित्य सम्मान


    विगत दिनों मुरादाबाद की सात साहित्यिक संस्थाओं- अक्षरा, विप्रा कला साहित्य मंच, परमार्थ, अंतरा, हिन्दी साहित्य संगम, हिन्दी साहित्य सदन एवं राष्ट्रभाषा हिन्दी प्रचार समिति के संयुक्त तत्वावधान में कंपनी बाग मुरादाबाद स्थित प्रेस क्लब सभागार में आयोजित एक समारोह में सुप्रसिद्ध नवगीतकार डॉ. माहेश्वर तिवारी को ‘साहित्यादित्य सम्मान’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान श्री तिवारी जी को उनकी नवगीत साधना एवं आकाशवाणी के केन्द्रीय संग्रहालय हेतु ‘आर्काइव’ के रूप में विशेष उपलब्धि के परिप्रेक्ष्य में दिया गया है। प्रत्येक संस्था ने श्री तिवारी को सम्मानस्वरूप अंगवस्त्र, मान-पत्र, प्रतीक चिह्न एवं श्रीफल भेंट किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ट गीतकार श्री शचीन्द्र भटनागर ने की। मुख्य अतिथि थे देहरादून से पधारे प्रख्यात गीतकार डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र एवं विशिष्ट अतिििथ थी डॉ. बीनर अवस्थी (अमरोहा)। संचालन श्री आनंद कुमार गौरव ने किया। इस अवसर पर डॉ. माहेश्वर तिवारी के व्यक्तित्व व कृतित्व पर डॉ. ओम आचार्य, डॉ. अजम ‘अनुपम’, योगेन्द्रपाल विश्नोई, कृष्ण कुमार ‘नाज’, विवेक निर्मल, आनंद गौरव, डॉ. ओम राज, डॉ. ऋचा पाठक, सुरेन्द्र राजेश्वरी, मनीष मिश्र, ब्रजभूषण सिंह गौतम अनुराग आदि ने प्रकाश डालते हुए तिवारी जी के समूचे रचनाकर्म को स्तुत्य बताया।
    इस अवसर पर नगर के अनेक साहित्यकार एवं गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। अन्त में अक्षरा संस्था के सचिव योगेन्द्र वर्मा ‘व्योम’ ने सभी का आभार व्यक्त किया। (समाचार सौजन्य: योगेन्द्र वर्मा ‘व्योम’, सचिव: अक्षरा, मुरादाबाद)

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डॉ. लाहा सम्मानित





ग्वालियर के साहित्यकार डॉ. नरेन्द्रनाथ लाहा को ऋषिकेष (उत्तराखंड) की संस्था एन.एम.एफ.आई. द्वारा अपने तृतीय वार्षिकोत्सव एवं सम्मान समारोह में साहित्य एवं लेखन के लिए सम्मानित किया गया। (समाचार सौजन्य: डॉ. नरेन्द्रनाथ लाहा)







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दिलीप भाटिया 'सामाजिक जागृत सम्मान' से विभूषित 




साहित्यकार एवं चर्चित सामाजिक कार्यकर्ता श्री दिलीप भाटिया को विगत 2 अक्टूबर 2012 को समाज धर्म प्रकाशन, ऊना, हिमाचल प्रदेश द्वारा समाज सेवा के 'सामाजिक जागृत सम्मान' से विभूषित किया गया। (समाचार सौजन्य : दिलीप भाटिया )


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हरिद्वार की संस्था ‘लेखनी’ की विचार गोष्ठी

    अलकनंदा शिक्षा न्यास की साहित्यिक वीथिका ‘लेखनी’ द्वारा ‘हिन्दी भाषा’ पर आयोजित विचार गोष्ठी में हिन्दी प्रचार एवं प्रसार के लिए किए जा रहे विभिन्न विकल्पों पर विचार किया गया। गोष्ठी में श्री सूर्यकान्त श्रीवास्तव एवं कमल गांगेय द्वारा वार्णिक छन्द संबन्धी नव्य प्रयोंगों पर भी विचार करते हुए ऐसे प्रयासों का स्वागत किया गया। नए प्रयोगों को हिन्दी के प्रचार-प्रसार से जोड़कर कार्य करने एवं नए-पुराने रचनाकारों को जोड़ने पर जोर दिया गया। नव्य प्रयोगों से संबन्धित सूर्यकान्त श्रीवास्तव  के आलेख प्रकाशित करने के लिए ग्वालियर से प्रकाशित पत्रिका ‘शिक्षा-दर्शन’ (संपा. राजेन्द्र श्रीवास्तव) तथा रुड़की से प्रकाशित ‘अविराम साहित्यिकी’ का धन्यवाद ज्ञापित किया गया। (समाचार सौजन्य : अध्यक्ष - अलकनंदा शिक्षा न्यास)

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अ.भा.सा.परिषद के जिला संयोजक बने राना लिधौरी  





अखिल भारतीय साहित्य परिषद् की जिला इकाई के जिला संयोजक (हाइकु विधा) के पद पर कवि एवं साहित्यिक पत्रिका 'आकांक्षा' के संपादक श्री राजीव नामदेव 'राना  लिधौरी' को नियुक्त किया गया है। राना  लिधौरी जी मध्य प्रदेश लेखक संघ की टीकमगढ़ जिला इकाई के विगत 11 वर्षों से अध्यक्ष पद पर भी कार्यरत हैं। (समाचार सौजन्य : राजीव नामदेव 'राना  लिधौरी' )




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   लाल कला मंच मासिक पत्रिका मैट्रो टच का समारोह 



     नई दिल्ली। लाल कला, सांस्कृतिक एवं सामाजिक चेतना मंच(रजि.),नई दिल्ली द्वारा वरिष्ठ समाजसेवी एवं चिकित्सक डा.के.के.तिवारी की अध्यक्षता में अल्फा शैक्षणिक संस्थान में संस्था की 9 वीं वर्षगांठ मनाया गया। इस अवसर पर संस्था के सचिव श्री लाल बिहारी लाल द्वारा संस्था द्वारा गत दिनों किए गए सामाजिक एवं साहित्यिक कार्यों को भी बताया गया।
    इस अवसर पर संस्था के सचिव पर्यावरणप्रेमी लाल बिहारी लाल का 39 वा वर्षगांठ भी मनाया गया। श्री लाल के ब्यक्तित्व एवं कृतित्व पर मासिक पत्रिका मैट्रो टच के अक्टूवर ,2012 अंक का लोकार्पण भी विशिष्ट अतिथि हमारा मैट्रो हिन्दी दैनिक के संपादक श्री राजकुमार अग्रवाल, अतिथि बल्लवगढ कालेज के पूर्व प्राचार्य प्रों.हवलदार शास्त्री तथा अध्यक्ष डा.के.के.तिवारी द्वारा संयुक्त रुप से किया गया। हमारा मैट्रो के संपादक श्री राजकुमार अग्रवाल एवं अतिथियो द्वारा लाल बिहारी लाल को एक उन्ही की पोटरेट  एवं शाल से सम्मानित किया गया।
   इस अवसर पर एक सरस काव्य गोष्ठी का भी आयोजन किया गया। इस गोष्ठी में भाग लेने वाले कवियो में सर्व श्री शिव कुमार प्रेमी, श्रीमती सोनू गुप्ता,के.पी. सिह कुंवर, सुमित प्रताप सिंह, लाल बिहारी लाल, राकेश कन्नौजी, दीपक शर्मा कुल्लवी, प्रेम सिंह भारती, सुश्री महिमा श्री आदी ने हिस्सा लिया। इसके अलावे लाल कला मंच एवं लाल बिहारी लाल द्वारा किय़े गए सामाजिक एवं साहित्यिक कार्याे पर चर्चा किया गया। इसमें राहूल गांधी फैंन्स एसोशियशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री लोकनाथ शुक्ल ने लाल कला मंच द्वारा किए गए कार्याे का सराहना की,ज्ञान दर्पण वेब पत्रिका के संस्थापक श्री रतन सिंह शेखावत, सिम्पैथी के निदेशक डा. आर कान्त,शिक्षक श्री उमेश चंद्र, श्री चंद्रशेखर यादव, श्री एन.के.सिंह,श्री भवानी शंकर शुक्ल,श्री मनोज सिंह आदी ने भी संस्था द्वारा किए गए सामाजिक काय़ों को अच्छा प्रयास बतलाया।
   इस अवसर पर मासिक पत्रिका गुजरात दर्पण का भी अथियों द्वारा किया गया। अन्त में संस्था के अध्यक्षा श्रीमती सोनू गुप्ता ने सभी अतिथियो एवं आगन्तुकों का हार्दिक आभार ब्यक्त किया। (समाचार प्रस्तुति :  लाल बिहारी लाल, सचिव, लाल कला मंच, दिल्ली )

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