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शुक्रवार, 29 अगस्त 2014

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अविराम  ब्लॉग संकलन :  वर्ष  : 3,   अंक  : 11-12,  जुलाई-अगस्त  2014 

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डॉ अरुण को संस्कृति मंत्रालय की वरिष्ठ शोधवृत्ति मिली
   


भारत सरकार की ओर से प्रतिवर्ष ‘फ़ेलोशिप फॉर आउट स्टैंडिंग पर्सन्स’ योजना के अंतर्गत प्रदान की जाने वाली ‘वरिष्ठ शोध वृत्ति’ वर्ष 2012- 2013 के लिए निर्णय की घोषणा कर दी गई है, जिस के अनुसार रूडकी के निवासी डॉ योगेन्द्र नाथ शर्मा ‘अरुण’ को भी राष्ट्रीय स्तर की इस प्रतिष्ठित शोधवृत्ति के लिए चुना गया है!
     भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की तरफ से प्रतिवर्ष वरिष्ठ और कनिष्ठ शोध वृत्तियाँ दी जाती हैं! वर्ष 2012-13 के लिए इस बार ‘ऑनलाइन’ आवेदन मांगे गए थे! पूरे देश से आए हुए आवेदनों में से हिंदी साहित्य में वरिष्ठ शोध वृत्ति प्रदान करने के लिए मात्र बाईस विद्वानों के आवेदन-पत्रों को चुन कर उनसे विस्तृत ‘शोध-योजना’ संस्कृति मंत्रालय द्वारा माँगी गई थी!
     विशेषज्ञों की समिति में इन बाईस विस्तृत शोध-परियोजनाओं पर विचार के बाद कुल ग्यारह शोध परियोजनाओं को अंतिम रूप से संस्कृति मंत्रालय ने अपनी स्वीकृति प्रदान करने की सूचना दी है! इन में रूड़की के पूर्व प्राचार्य और प्रतिष्ठित कवि डॉ. योगेन्द्र नाथ शर्मा ‘अरुण’ की वह शोध परियोजना भी स्वीकृत हो गई है, जो अपभ्रंश भाषा में रची गई ‘जैन कृष्ण कथा के महाकाव्य’ से जुड़ी हुई है!
     डॉ. ‘अरुण’ की शोध परियोजना का शीर्षक ‘‘जैन कृष्ण कथा पर ‘महाभारत’ का प्रभाव: महाकवि स्वयंभू देव प्रणीत ‘रिठ्नेमी चरिउ’ के विशेष सन्दर्भ में’’ है, जिसके अन्तरगत डॉ. ‘अरुण’ वास्तव में दसवीं शताब्दी के जैन कवि पुष्पदंत द्वारा रचे गए महाकाव्य ‘रिठ्नेमी चरिउ’ को आधार बना कर जैन कृष्ण कथा पर महाभारत के प्रभाव का आकलन करेंगे! इस शोध वृत्ति के अंतर्गत डॉ. ‘अरुण’ को संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से प्रति माह बीस हज़ार रूपए मानदेय के साथ यात्रा-व्यय तथा अनुशांगिक व्यय आगामी तीन वर्षों तक दिए जाएँगे!
      डॉ. योगेन्द्र नाथ शर्मा ‘अरुण’ को मिली यह वरिष्ठ शोध वृत्ति उत्तराखंड के किसी विद्वान को मिली ‘प्रथम’ शोध वृत्ति है, जिसके लिए डॉ. ‘अरुण’ को उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ.रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ के साथ ही दिगंबर जैन समिति, श्री महावीरजी, जयपुर के अध्यक्ष पूर्व न्यायमूर्ति श्री एन. के. जैन, सचिव श्री नरेन्द्र कुमार पाटनी, अपभ्रंश साहित्य अकादमी, जयपुर के निदेशक और प्रख्यात विद्वान डॉ. कोमल चाँद जैन आदि ने बधाइयाँ दी हैं! (समाचार सौजन्य :  डॉ. योगेन्द्र नाथ शर्मा ‘अरुण’) 


नागपुर में हाइकु की दो पुस्तकों का लोकार्पण

         विगत 03 अगस्त 2014 को विदर्भ साहित्य सम्मेलन, नागपुर के सभागार में एक भव्य समारोह हाइकु की दो महत्वपूर्ण कृतियों का लोकार्पण सम्पन्न हुआ। ये दोनों कृतियां थीं- सुप्रसिद्ध हाइकुकार उषा अग्रवाल ‘पारस’ का हाइकु संग्रह ‘हाइकुयाना’ एवं उन्हीं के द्वारा संपादित हाइकु संकलन ‘हाइकु व्योम’। दोनों कृतियों का लोकार्पण मंच पर कृतिकार एवं संपादक उषा अग्रवाल ‘पारस’ की उपस्थिति में सुप्रसिद्ध साहित्यकार-समालोचक डॉ.गोविन्द प्रसाद उपाध्याय, वरिष्ठ साहित्यकार एवं चिंतक डॉ. मिथिलेश कुमार अवस्थी, अविराम साहित्यिकी के अंक संपादक डॉ. उमेश महादोषी तथा ‘आधुनिक साहित्य’ पत्रिका के संपादक श्री आशीष कंधवे ने किया। समारोह की अध्यक्षता डॉ. गोविन्द प्रसाद उपाध्याय ने की। डॉ. मिथिलेश कुमार अवस्थी व डॉ. उमेश महादोषी प्रमुख वक्ता तथा श्री आशीष कंधवे विशेष अतिथि थे।
         इस अवसर पर हाइकु व्योम पर प्रमुख वक्ता के रूप में डॉ. मिथिलेश कुमार अवस्थी ने ‘हाइकु व्योंम’ पर विस्तार से अपने समीक्षात्मक विचार रखे। उन्होंने संकलन के कई हाइकुकारों के प्रतिनिधि उदाहरणों के माध्यम से अपनी बात रखी। कुछ कवियों के अच्छे हाइकुओं के मध्य उन्हीं के कमजोर हाइकुओं पर डॉ. अवस्थी ने आश्चर्य व्यक्त किया। डॉ. उमेश महादोषी ने अपने वक्तव्य में उषा अग्रवाल के संग्रह ‘हाइकुयाना’ को रचनात्मकता के स्तर बेहद सफल कृति बताया। उन्होंने कई हाइकुओं के रचनात्मक पक्ष को उजागर करते हुए कहा कि इन हाइकुओं में समुद्र सी गहराई है। श्री आशीष कंधवे ने अपने वक्तव्य में हाइकु जैसी विधा पर हाइकु जैसे ही संक्षिप्त प्रारूप में समीक्षात्मक विचार रखने की सलाह दी। अध्यक्षीय वक्तव्य में डॉ. गोविन्द प्रसाद उपाध्याय ने दोनों कृतियों को सफल बताया लेकिन नई पीढ़ी द्वारा वरिष्ठ पीढ़ी के साहित्यकारों की उपेक्षा पर चिन्ता जाहिर की। उन्होंने नई पीढ़ी का मार्गदर्शन करते हुए उन्हें अपनी धरोहर को सहेजकर रखने की आवश्यकता समझाई।
         सभी मंचासीन एवं अन्य वक्ताओं ने उषा अग्रवाल की रचनात्मकता, साहित्य के प्रति समर्पण एवं नागपुर में साहित्यिक गतिविधियों में उनके योगदान की खुलकर प्रशंसा की। साथ ही उनके पति डॉ. योगेन्द्र अग्रवाल व बच्चों के योगदान को भी रेखांकित किया। इस अवसर पर अनेक स्थानीय साहित्य प्रेमियों एवं कुछ संस्थाओं ने उषा अग्रवाल ‘पारस’ को उनकी उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया। समारोंह में दोनों कृतियों के चित्रकारों श्रीमती कमलेश चौरसिया व श्री सुभाष तुलसिता का भी सम्मान किया गया। ज्ञातव्य है कि दोनों ही पुस्तकों में अनेक भावपूर्ण रेखाचित्रों का भी उपयोग किया गया है। कार्यक्रम का गरिमापूर्ण संचालन श्रीमती रीमा चड्ढा ने किया। समारोह में बड़ी संख्या में स्थानीय साहित्यकार एवं सुधीजन उपस्थित रहे, जिनमें ‘दिवान मेरा’ के संपादक श्री नरेन्द्र परिहार, अविराम साहित्यिकी की प्रधान संपादिका श्रीमती मध्यमा गुप्ता, कवयित्री माधुरी राउलकर, वंदना सहाय, सुश्री इन्द्रा किसलय, श्रीमती कमलेश चौरसिया, चित्रकार श्री सुभाष तुलसिता, वरिष्ठ कवि श्री अहफ़ाज अहमद कुरेशी, विक्रम सोनी आदि की उपस्थिति उल्लेखनीय थी। अन्त में श्री राजेन्द्र देवधरे ने सभी उपस्थित अतिथियों एवं साहित्य प्रेमियों का आभार व्यक्त किया। (समाचार प्रस्तुति : अविराम समाचार डेस्क)


कथा संगम समारोह सम्पन्न



उज्जैन। साहित्य अकादमी म. प्र. संस्कृति परिषद से संबद्ध प्रेमचंद सृजन पीठ द्वारा मुंशी प्रेमचंद स्मृति सप्ताह के अंतर्गत कथा संगम का विशिष्ट समारोह (5 अगस्त को) विक्रम विश्वविध्यालय के वाकदेवी सभागार में आयोजित किया गया, जिसमे म.प्र. के प्रतिनिधि कथाकारों वेद हिमांशु, संदीप सृजन, नियति सप्रे, गोपाल माहेश्वरी, अनामिका त्रिवि, अनुराग पाठक, स्वामीनाथ पांडे, एवं दिनेश परिहार आदि ने समकालीन संदर्भों पर केन्द्रित सामाजिक सरोकारों की कहानियों तथा लघुकथाओं का पाठ किया।
     प्रस्तुत की गयी रचनाओं पर समीक्षा वक्तव्य डॉ. बी. एल. आच्छा ने दिया। मुख्य अतिथि साहित्य अकादमी भोपाल के निर्देशक प्रो. त्रिभुवन नाथ शुक्ल थे। प्रस्तुत की गई कहानियों पर विचार प्रकट करते हुए कहा कि इन कहानियों में गरीबी, आधुनिक तकनीक से प्रभावित हो रहे विचार तथा पीढियों के अंतराल को रेखांकित किया गया है एवं इन कहानियों ने प्रेमचंद कि परंपरा को आगे बढ़ाया है। समारोह की अध्यक्षता डॉ. प्रेमलता चुटैल ने की। इस अवसर पर सृजन पीठ के अध्यक्ष डॉ. जगदीश तोमर ने भी संबोधित किया। संचालन डॉ. जगदीश शर्मा ने एवं आभार वक्तव्य प्रो. गीता नायक ने दिया। (समाचार प्रस्तुति : वेद हिमांशु/मोबाइल :  94245-86658)



डॉ अरुण को राष्ट्रीय ‘स्वयंभू सम्मान’ 





अपभ्रंश साहित्य अकादमी, जयपुर की कार्यकारिणी समिति ने राष्ट्रीय साहित्य अकादमी, नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित डॉ. योगेन्द्र नाथ शर्मा ‘अरुण’ की पुस्तक ‘पुष्पदंत’ पर उन्हें वर्ष 2013 का राष्ट्रीय ‘स्वयंभू सम्मान’ प्रदान करने का निर्णय लिया है! इस गौरवशाली सम्मान में अपभ्रंश साहित्य अकादमी, जयपुर इक्यावन हज़ार रूपए के नकद पुरस्कार के साथ प्रशस्ति-पत्र, अंग-वस्त्र आदि एक भव्य समारोह में प्रदान करती है। समारोह किसी उपयुक्त समय पर जयपुर में या श्री महावीरजी में आयोजित होगा! स्मरणीय है कि साहित्य अकादमी, नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित डॉ. अरुण की यह पुस्तक ‘पुष्पदंत’ दसवीं शताब्दी के अपभ्रंश भाषा के महाकवि पुष्पदंत पर शोधपरक विनिबंध है, जो राष्ट्रीय साहित्य अकादमी, नई दिल्ली ने ‘भारतीय साहित्य के निर्माता’ जैसी महत्त्वपूर्ण योजना के अंतर्गत वर्ष 2012 में प्रकाशित की है और जिसे साहित्य अकादमी ने भी महत्त्वपूर्ण माना है!
    महाकवि पुष्पदंत पर लिखी गई इस पुस्तक के समीक्षक हिंदी साहित्य-जगत के प्रकांड विद्वान् डॉ. राममूर्ति त्रिपाठी रहे हैं, जिन्होंने मुक्तकंठ से इस ग्रन्थ की प्रशंसा करते हुए इसे ‘अपभ्रंश साहित्य की मूल्यवान कृति’ माना है! (समाचार सौजन्य :  डॉ. योगेन्द्र नाथ शर्मा ‘अरुण’) 



अंतर्राष्ट्रीय शोध पत्रिका  ‘‘अक्षरवार्ता’’ का विमोचन 



उज्जैन। उज्जैन से प्रकाशित अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका ‘अक्षरवार्ता’ का विमोचन विदिशा में आयोजित राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त समारोह में संपन्न हुआ। साहित्य अकादेमी मध्य प्रदेश संस्कृति परिषद्, भोपाल द्वारा आयोजित दो दिवसीय समारोह के उद्घाटन अवसर पर इस मासिक शोध-पत्रिका का विमोचन अकादेमी के निदेशक एवं वरिष्ठ विद्वान प्रो. त्रिभुवननाथ शुक्ल एवं मंचासीन अतिथियों ने किया। पत्रिका का विमोचन प्रधान सम्पादक प्रो. शैलेंद्रकुमार शर्मा, सम्पादक डॉ. मोहन बैरागी, सम्पादक मंडल सदस्य डॉ. जगदीशचन्द्र शर्मा ने करवाया। इस मौके पर विदिशा के शास. महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. कमल चतुर्वेदी, साहित्यकार डॉ. शीलचंद्र पालीवाल, डॉ. वनिता वाजपेयी, जगदीश श्रीवास्तव (विदिशा), डॉ. तबस्सुम खान (भोपाल), युवा शोधकर्ता पराक्रमसिंह (उज्जैन) आदि सहित अनेक संस्कृतिकर्मी और साहित्यकार उपस्थित थे।
     उज्जैन से प्रकाशित इस आई एस एस एन मान्य अंतरराष्ट्रीय पत्रिका में कला, मानविकी, समाजविज्ञान, जनसंचार, विज्ञान, वैचारिकी से जुड़े मौलिक शोध एवं विमर्शपूर्ण आलेखों का प्रकाशन किया जा रहा है। यह पत्रिका देश-विदेश की विभिन्न अकादमिक संस्थाओं, संगठनों और शोधकर्ताओं के साथ ही इंटरनेट पर भी उपलब्ध रहेगी। (समाचार प्रस्तुति :  डॉ. मोहन बैरागी / प्रो. शैलेन्द्रकुमार शर्मा, अक्षरवार्ता, उज्जैन)



राधेश्याम भारतीय के लघुकथा संग्रह का लोकार्पण



हरियाणा साहित्य अकादमी के सौजन्य से प्रकाशित राधेश्याम भारतीय के लघुकथा संग्रह ‘अभी बुरा समय नहीं आया है’ का लोकार्पण समारोह दिनांक 16 अगस्त 2014 को राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय घरौंडा (करनाल) के प्रांगण में आयोजित हुआ।  लोकार्पण करने वाले साहित्यकारों में- डॉ.सुभाष रस्तोगी, डॉ.अशोक भाटिया, नरेश कुमार उदास, डॉ. ओमप्रकाश करुणेश, रामकुुमार आत्रेय, सुभाष शर्मा, ओमसिंह अशफाक, कमलेश चौधरी, छाया उदास, अरुण कुमार, रामकुमार भारतीय आदि प्रमुख थे।
           इस अवसर पर मुख्यअतिथि नरेश कुमार उदास ने अपने वक्तव्य में कहा कि आज का युवा इंटरनेट और दूरदर्शन की वजह से  साहित्य से दूर भाग रहा है। यदि वह सहित्य से जुड़ जाएं, तो समाज का चेहरा कुछ और ही होगा। मुख्य वक्ता के तौर पर डॉ. अशोक भाटिया ने इस विधा पर विस्तार से चर्चा की और अनेक लघुकथाएं सुनाकर इस विधा के सशक्त होने के प्रमाण दिए।
          अध्यक्ष सुभाष रस्तोगी ने राधेश्याम भारतीय के लघुकथा संग्रह पर कहा कि इन लघुकथाओं में समाज का यथार्थ चित्रण है और प्रथम कृति होने पर अच्छी लघुकथाएं पढ़ने को मिली। सुभाष शर्मा ने अपनी देशभक्ति कविता सुना कर सभी को ईमानदारी से काम करने को प्रेरित किया। रामकुमार आत्रेय ने राधेश्याम भारतीय के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डाला। कमलेश चौधरी ने कई लघुकथाओं पर अपनी राय दी। रामकुमार भारतीय ने इस संग्रह कई लघुकथाओं की चर्चा की, जो पाठक को शीघ्र आकर्षित करती हैं। अंत में जयभगवान पत्रकार ने सभी का आभार प्रकट किया। मंच संचालन मदन लाल ‘शिरशववाल’ ने किया। (समाचार प्रस्तुति :  सुभाष शर्मा, घरौंडा करनाल)



नरेश कुमार उदास के कहानी संग्रह का लोकार्पण




विगत दिनों पालमपुर, हिमाचल प्रदेश में कवि-कथाकार श्री नरेश कुमार ‘उदास’ के कहानी संग्रह ‘रोशनी चिन्ता हुआ शब्द’ का विमोचन सुश्री छाया रानी, डॉ. कालिया एवं डॉ. लेख राज के द्वारा किया गया। इस अवसर पर कई स्थानीय साहित्यकार एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे। (समाचार सौजन्य :  नरेश कुमार उदास)



पंचतंत्र कथा की एकल नाट्यभिनय प्रस्तुति 



इन्दौर। मालवी बोली के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु प्रतिबद्ध रचनाकारों के समूह मालवी जाजम के तत्वावधान में (7 अगस्त को) हिन्दी साहित्य समिति मे पंचतंत्र कथा पर आधारित वेद हिमांशु के मालवी आलेख पर केन्द्रित एकल नाट्यभिनय की प्रस्तुति वरिष्ठ रंगकर्मी / अभिनेता संतोष जोशी ने दी।
इस अवसर पर आयोजित इस मालवी समागम में  नरहरि पटेल, वेद हिमांशु, हरमोहन नेमा, रेणु मेहता, कुसुम मंडलोई ,एवं मुकेश इन्दोरी आदि रचनाकरों ने काव्य पाठ किया। (समाचार प्रस्तुति :  वेद हिमांशु, मालवी जाजम/मोबाइल :  94245-86658)



‘गाय, गुरु और गंगा’ पर काव्य संकलन की योजना


कानपुर की साहित्यिक संस्था बटोही द्वारा ‘गाय, गुरु और गंगा’ विषयक कविताओं के एक काव्य संकलन के प्रकाशन की योजना है। जो कवि बन्धु इस संकलन में शामिल होना चाहते हैं, अपनी अधिकतम तीस पंक्तियों की कविताएं 31 दिसम्बर 2014 से पूर्व डॉ. अशोक कुमार गुप्त ‘अशोक’ को 124/15, संजय गांधी नगर, नौबस्ता, कानपुर-208021, उ.प्र. के पते पर भेज सकते हैं। सभी प्रकाशित रचनाकारों को प्रकाशनोपरांत संकलन की निःशुल्क लेखकीय प्रति भेजी जायेगी। (समाचार सौजन्य :  डॉ. अशोक कुमार गुप्त ‘अशोक’/मोबाइल :  09956126487)




मध्य प्रदेश लेखक संघ का ‘वार्षिक उत्सव’ व सम्मान समारोह 


टीकमगढ़/नगर की सर्वाधिक सक्रिय साहित्यिक संस्था ‘म.प्र.लेखक संघ’ जिला ईकाई टीकमगढ़ का ‘वार्षिक उत्सव’ व सम्मान समारोह नगर भवन पैेलेस टीकमगढ़ के सभा कक्ष में होकर सम्पन्न हुआ। इस आयोजन में वरिष्ठ साहित्य मनीषी सम्मान्य पं.श्री सुरेन्द शर्मा ‘शिरीष’ (छतरपुर) अध्यक्ष, सम्मान्य श्री राजेश कुमार गौतम निदेशक आकाशवाणी छतरपुर मुख्य अतिथि श्री नवीन खंड़ेलवाल‘निर्मल’(इंदौर) ने विशिष्ट अतिथि की आसंदी को सुशोभित किया। आयोजन दो चरणों में सम्पन्न हुआ। प्रथम चरण में म.प्र. लेखक संघ की वार्षिक पत्रिका ‘आकांक्षा’ पत्रिका के 9वें अंक का विमोचन तथा शायर हाजी ज़फ़रउल्ला खां ज़फ़र’ के द्वितीय ग़ज़ल संग्रह ‘शगुफ़्ता चमन’ का विमोचन किया जायेगा। इस अवसर पर टीकमगढ़ म.प्र.लेखक संघ के जिलाध्यक्ष राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’ के पूज्य दादाजी स्व.पन्नालाल जी नामदेव की स्मृति के आयोजित कार्यक्रम में श्री नवीन खण्डेलवाल जी (इंदौर) को उनकी कृति ‘‘तुम कहाँ हो? अंर्तमन’’ के लिए रु. 1111/- का प्रथम स्व.पन्नालाल जी नामदेव स्मृति सम्मान 2013 से सम्मानित किया गया। उन्हें सम्मान निधी, आकर्षक सम्मान पत्र, स्मृति चिन्ह् प्रदान किया गया।
          द्वितीय चरण में काव्य संध्या (म.प्र.लेखक संघ की नियमित 185वीं साहित्यिक गोष्ठी) का आयोजन किया गया, जिसका संचालन उमाशंकर मिश्र ने किया। आाभार प्रदर्शन म.प्र.लेखक संघ के जिला अध्यक्ष राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी ने किया। (समाचार प्रस्तुति :  राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’, जिला अध्यक्ष-म.प्र.लेखक संघ)



डॉ. सुनील कुमार परीट को ’मंडल रत्न सम्मान’




 11-08-2014  के गुरु पूर्णिमा के पावन दिन उत्तर प्रदेश के श्री एकरसानंद आश्रम, मैनपुरी में प.पू. श्री श्री श्री स्वामी शारदानंद सरस्वती महाराज जी ने अपने पावन कर कमलों से कर्नाटक के प्रसिध्द साहित्यकार डॉ. सुनील कुमार परीट जी को आश्रम का सर्वाेत्कृष्ट सम्मान ’मंडल रत्न सम्मान’ से अलंकृत किया। 
      इस शुभ अवसर पर स्वामी जी ने डॉ. परीट को सम्मान-पत्र, अंगवस्त्र, किताबें, श्रीगणेश जी की मंगलमूर्ति, रुद्राक्ष मालाएँ, प्रसाद आदि प्रदान करके सम्मानित किया। स्वामी जी का आशीर्वाद अनुग्रह पाकर डॉ. परीट धन्य हो गये। (समाचार सौजन्य :  डॉ. सुनील कुमार परीट, ज्ञानोदय साहित्य संस्था, कर्नाटक)

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