आपका परिचय

बुधवार, 4 मार्च 2015

अविराम विस्तारित

अविराम  ब्लॉग संकलन :  वर्ष  : 4,   अंक  : 05-06,   जनवरी-फ़रवरी  2015



।।हाइकु।।

सामग्री :  इस अंक में ‘क़ाफ़िले रोशनी के’ संग्रह से डॉ. गोपाल बाबू शर्मा व ‘साँसों की सरगम’ संग्रह से डॉ. रमा द्विवेदी के हाइकु। 


डॉ. गोपाल बाबू शर्मा




{डॉ. गोपाल बाबू शर्मा का हाइकु संग्रह ‘क़ाफ़िले रोशनी के’ गत वर्ष प्रकाशित हुआ है। प्रस्तुत हैं उनके इस संग्रह से उनके पन्द्रह प्रतिनिधि हाइकु।}

पन्द्रह हाइकु

01.
मिले अक्सर 
मुसकानों में छुपे,
खूनी ख़ंजर।

02.
कहीं बबूल
कहीं देते खुशबू,
छाया चित्र : उमेश महादोषी 

जूही के फूल।

03.
उड़ा दुपट्टा
उन्मुक्त प्रदर्शन,
नई सभ्यता।

04.
लिखना है तो,
मृत्यु के पृष्ठों पर,
ज़िन्दगी लिखो।

05.
शब्दों की भीड़
दीख नहीं पड़ते,
कहीं भी अर्थ।

06.
धूल-बबूल
कागों की काँव-काँव,
कोकिला मौन।

07.
नीले नभ में,
खरबूजे की फाँक,
ताकते बच्चे।

08.
उन्मन मन,
दहकता है जैसे,
ढाक का वन।

09.
जीवन ऐसे
पानी पर बहता,
फूल हो जैसे

10.
ज़िन्दगानी है
छाया चित्र : उमेश महादोषी 

इसके सिवा क्या कि,
आग-पानी है।

11.
वही आदमी,
रखे औरों के लिए,
आँखों में नमी।

12.
निगोड़ी यादें
फूल बन दुलारें,
शूल-सी चुभें।

13.
किससे कहे
शाख से टूटा पत्ता,
मन की बात।

14.
रेशमी जाल,
फँसती मछलियाँ,
छूटता ताल।

15.
लाया फागुन,
मस्ती भरी चिट्ठियाँ,
बाँचती हवा।

  • 46, गोपाल विहार कॉलोनी, देवरी रोड, आगरा-282001 (उ.प्र.) / मोबाइल :  09259267929 




डॉ. रमा द्विवेदी




{डॉ. रमा द्विवेदी का हाइकु संग्रह ‘साँसों की सरगम’ वर्ष 2013 में प्रकाशित हुआ था। प्रस्तुत हैं उनके इस संग्रह से उनके पन्द्रह प्रतिनिधि हाइकु।}


पन्द्रह हाइकु

01.
अनूठा प्यार
नदी समंदर का
कभी न घटे।

02.
आया सैलाब
देहरी लाँघ गई
घर की लाज।

03.
चाँद के आँसू
ओस बन बिखरे
ऊषा ने पोंछे।

04.
माँ नैन-ज्योति
माँ कोटि-सूर्य आभा
माँ चाँद-तारे।

05.
सूरज फीका
चाँद पीला-पीला-सा
चाँदनी रोई।

06.
चाँदनी सोई
देख न पाया कोई
कान्हा का जन्म

07.
खिलता मन
छाया चित्र  : डॉ. बलराम अग्रवाल 

नई कोपलें देख
विस्मृत ग़म।

08.
ब़र्फीला मन
ठिठुरते सपने
ऊष्मा रहित।

09.
प्यास बेताब
ख़ुशबुएँ पी-पी के
मिटी न प्यास।

10.
खिलते पुष्प
मंदिर बयार में
झूमे बसंत।

11.
आँखों की झील
सागर से गहरी
छाया चित्र :
उमेश महादोषी 
डूबने वास्ते

12.
वाष्पित जल
उत्सर्जित कविता
धुएँ-सी उड़े।

13.
कैसी बेढंगी
15.
सपने बुने
अलगनी में पड़े
सूखते रहे।

  • फ़्लैट नं.102, इम्पीरिअल मनोर अपार्टमेंट, बेगमपेट, हैदराबाद-500016 / मोबाइल : 09849021742 

कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें