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सोमवार, 27 फ़रवरी 2012

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अविराम का ब्लॉग :  वर्ष : ०१, अंक : ०6, फरवरी २०१२ 


'पत्रिका सृजनात्मक एवं पत्रकारिता पुरस्कार 2011'




भोपाल की ओर से गत 22 जनवरी 2012 (रविवार) को पत्रिका मुख्यालयकेसरगढ़जयपुर में आयोजित पं झाबरमल स्मृति व्याख्यान के अवसर पर उत्तर प्रदेश के राज्यपाल श्री बी एल जोशी के हाथों 'पत्रिका सृजनात्मक एवं पत्रकारिता पुरस्कार 2011' हिन्दी साहित्यकारों एवं पत्रकारों को प्रदान किये गए।कहानी का प्रथम पुरस्कार जोधपुर की  कथाकार  डा ज़ेबा रशीद को 'मौसम और पहली तारीख़परद्वितीय पुरस्कार दिल्ली के कथाकार सुभाष नीरव को उनकी कहानी 'रंग बदलता मौसमपरकविता मे प्रथम पुरस्कार जोधपुर के कवि/ग़ज़लकार बृजेश अम्बर को तथा द्बितीय पुरस्कार रतलाम के कवि अज़हर हाशमी को प्रदान किया गया। इन रचनाओं का चयन वर्ष 2010 में राजस्थान पत्रिका समूह के अखबार में प्रकाशित रचनाओं में से किया गया।  प्रथम पुरस्कार में 11-11 हज़ार रूपये व द्बितीय पुरस्कार में 5-5 हज़ार रुपये तथा प्रशस्तिपत्र दिए गए। इस अवसर पत्रकारिता के क्षेत्र में किए गए उल्लेखनीय कार्य के लिए बहुत से पत्रकारों को भी सम्मानित किया गया। मंच पर भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष मार्कण्डेय काटजूपत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी मौजूद थे। समारोह में पूर्व न्यायाधीश व भारतीय विधि आयोग के सदस्य शिव कुमार शर्माप्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य विजय शंकर व्यासराज्य मानवाधिकार आयोग के पूर्व अध्यक्ष एन के जैनराज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष बी डी कल्लासांसद ज्ञान प्रकाश पिलानियाजयपुर की मेयर सुश्री ज्योति खंडेलवालचीफ़ काज़ी खालिद उस्मानीपंडित झाबरमल शर्मा के पौत्र व छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री सत्यनारायण शर्मा सहित लगभग एक हजार के करीब साहित्य प्रेमीपत्रकार और विशिष्ट जन उपस्थित थे। 



राजस्थान पत्रिका में प्रकाशित इस समारोह की विस्तृत रिपोर्ट के लिए  नीचे दिये गए लिंक पर क्लिक करें-
http://epaper.patrika.com/22979/Rajasthan-Patrika-Jaipur/23-01-2012#page/9/2

(समाचार : सुभाष नीरव)

‘‘लोकार्पण-परम्परा पर अनुसंधान की आवश्यकता’’ : नामवर सिंह

हिन्दी का कोई भी रचनाकार उपेक्षित न हो जाये इसके लिए आवश्यक है कि साहित्यिक संस्थाएं आगे बढ़कर अपनी सक्रिय भूमिका अदा करें। यह बात विख्यात आलोचक डॉ. नामवर सिंह ने वरिष्ठ कवि एवं लेखक उद्भ्रांत की तीन नई पुस्तकों, सृजन की भूमि, (संस्मरणात्मक निबंध), आलोचना का वाचिक (वाचिक आलोचना) तथा ब्लैकहोल (काव्य नाटक) तथा कवि उद्भ्रांत के चर्चित महाकाव्य ‘त्रेता’ पर दलित दृष्टि से लिखे गये जानेमाने दलित चिंतक कंवल भारती के आलोचना ग्रंथ ‘त्रेता-विमर्श और दलित-चिंतन’ का लोकार्पण करते हुए कहीं। 
इसी अवसर पर गत 22 फरवरी, 2012 को नई दिल्ली में ‘लोकार्पण की भूमिका और मिथकीय काव्य और नाटक का दलित विमर्श’ विषय पर अपना अध्यक्षीय वक्तव्य देते हुए श्री सिंह ने कहा कि लोकार्पण और उसकी परम्परा पर  आज अनुसंधान आवश्यक लगता है, और इस पर विश्वविद्यालयों में शोध होना चाहिए। उन्होंने कहा कि उद्भ्रांत के भीतर एक आग है जिसे वे निरंतर अपनी रचनात्मक प्रतिभा से साबित करते रहते हैं। उनका यही संघर्ष उनकी कृतियों के माध्यम से मुझे आकर्षित करता है। उन्होंने कहा कि उनका यह स्पष्ट मानना है कि कोइं भी पुस्तक/रचना अपने दम पर चलती है। जिसमें दम नहीं होगा वह इतिहास में चली जाएगी। इसलिए यह भी आवश्यक है कि इस प्रकार की गोष्ठियों को जारी रखना चाहिए ताकि कोई भी पुस्तक अनदेखी न रह जाए। उन्होंने कहा कि साहित्यकारों को अपने उपेक्षित साथी साहित्यकार को मतभेदों के बावजूद आगे बढ़ाने के लिए प्रयास करना चाहिए और इसके लिए उन्हें राजनीतिज्ञों से भी सबक़ लेना चाहिए।
 विचारोत्तेजक गोष्ठी को आगे बढ़ाते हुई दिल्ली विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रो. डॉ0 बली सिंह ने कहा कि लोकार्पण में शामिल पुस्तकों की समग्रता को ध्यान से देखने पर यह स्पष्ट हो जाता है कि उद्भ्रांत का व्यक्तित्व बहुआयामी है। इसके मूल में उनके चिंतन का फैलाव है जो ‘त्रेता’ से शुरू होकर ‘सृजन की भूमि’ तक अपना विस्तार लिए हुए है। ‘ब्लैकहोल’ के व्यापक फ़लक की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि इस जटिल काव्यनाटक में यद्यपि समूची सृष्टि की कथा स्त्री-पुरुष के माध्यम से व्यक्त हो गई है तथापि इसका सामाजिक दृष्टिकोण और अंतर्निहित संदर्भ इसमें अपनी पूर्णता के साथ मौजूद हैं।
जामिया मिलिया विश्वविद्यालय की प्रो. डॉ. हेमलता महिश्वर ने कंवल भारती की पुस्तक ‘त्रेता-विमर्श और दलित चिंतन’ के शीर्षक को औचित्यहीन तथा अप्रासंगिक बताते हुए एक सिरे से खारिज कर दिया। अपनी आपत्ति दर्ज करते हुए उन्होंने कहा कि यह विषय ही उन्हें समझ में नहीं आया। उनका स्पष्ट मानना था कि त्रेता के मिथकीय संदर्भों को दलित चिंतन से कैसे जोड़ा जा सकता है़?
चर्चा को आगे बढ़ाते हुए केन्द्रीय विश्वविद्यालय, हैदराबाद के पूर्व उपकुलपति प्रो. अभय मौर्य ने डॉ. हेमलता महिश्वर के दलित चिंतन विषय की स्थापना से अपनी असहमति व्यक्त करते हुए कहा कि किसी भी महाकाव्य के मूलस्वरूप के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ उचित नहीं है। उद्भ्रांत जी ने पुनर्सृजन करते समय विषय के मूल स्वरूप को उसके अदृश्य सामर्थ्य के साथ ‘त्रेता’ मंे प्रस्तुत करते हुए कुछ विशिष्ट चरित्रों को, जो कि मूल महाकाव्य में नेपथ्य में थे, महत्वपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया है।
भारतीय जनसंचार संस्थान के प्रोफेसर तथा प्रसिद्ध मीडिया समालोचक डॉ. हेमंत जोशी ने कहा कि ‘आलोचना का वाचिक’ विगत 15 वर्ष की अवधि में विभिन्न गोष्ठियों में हिन्दी के शीर्ष विद्वानों के मौखिक विचारों का प्रथम महत्वपूर्ण दस्तावेज है, जबकि ‘सृजन की भूमि’ किसी भी रचनाकार की भूमिकाओं का पहला ऐसा संकलन है जिसमें लेखक ने साहित्य, समाज और जीवन को केन्द्र में रखकर अपनी बात रखी है। यह भी हिन्दी साहित्य में अपने आप में की गई विशिष्ट पहल है। उन्होंने कहा कि साहित्यिक विमर्श को खांचों में बांटकर देखने से बचना चाहिए। 
‘युद्धरत आम आदमी’ त्रैमासिक पत्रिका की सम्पादक तथा स्त्री एवं दलित चिंतन की महत्वपूर्ण हस्ताक्षर सुश्री रमणिका गुप्ता ने उद्भ्रांत के प्रति सम्मान प्रकट करते हुए कहा कि आज के जनतांत्रिक मूल्यों को शम्बूक की जननी, सूर्पनखा और धोबिन जैसे दलित स्त्री-चरित्रों के माध्यम से उन्होंने ‘त्रेता’ में प्रभावी ढंग से उठाया है। उन्होंने कहा कि दलित चिंतन की दृष्टि से उद्भ्रांत ने अपनी पुस्तक में ऐसे चरित्रों को उकेरा है जो पाठकों को नई सोच के लिए पूरी पृष्ठभूमि देते हैं।
जानेमाने आलोचक डॉ. कर्ण सिंह चौहान ने कहा कि ‘आलोचना का वाचिक’ की विस्तृत भूमिका में उद्भ्रांत ने लोकार्पण समारोहों की आवश्यकता के सम्बन्ध में अपने जो तर्क रखे हैं वे अनुभव की कसौटी पर अकाट्य हैं। उन्होंने कहा कि रचनाकार अपनी तार्किक और बौद्धिक टकराव को कभी भी नहीं बचा सकते और इसी कारण सम्भवतः नई-नई साहित्यिक संस्थाएं हमें अपने इर्द-गिर्द दिखाई दे रही हैं और आगे भी दिखाई देती रहेंगी। उन्होंने इस बात की आवश्यकता पर जोर दिया कि आलोचकों को रचनाकार की पृष्ठभूमि और उसके द्वारा किये गये कार्यों का तार्किक और व्यावहारिक मूल्यांकन करना चाहिए-बावजूद इसके कि वे अपने गुट के चंद रचनाकारों के अल्प सृजन कर्म पर ही उन्हें महत्वपूर्ण अलंकारों से विभूषित करते हुए शीर्ष की ओर ढकेलने का यत्न करें।
कवि उद्भ्रांत ने काव्यनाटक ‘ब्लैकहोल’ के महत्वपूर्ण अंशों का प्रभावशाली पाठ करते हुए विमर्श के अंत में विमर्शकर्ताओं के प्रति अपना हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए तीनों कृतियों के सृजन-संदर्भों को स्पष्ट किया और इस बात पर अफसोस व्यक्त किया कि मौजूदा समय में हिन्दी आलोचना का बहुलांश जेनुइन रचनात्मकता पर ठीक प्रकार से ध्यान नहीं दे रहा है। 
प्रारंभ में कवि उद्भ्रांत द्वारा ‘आलोचना का वाचिक’ ग्रंथ की प्रथम प्रति नामवर जी को, ‘सृजन की भूमि’ की प्रथम दो प्रतियां वरिष्ठ आलोचकों डॉ. आनंद प्रकाश दीक्षित व डॉ. शिवकुमार मिश्र की अनुपस्थिति में उनके प्रतिनिधि के रूप में क्रमशः दीक्षित जी के जमाता एवं पूर्व निदेशक (वित्त), बीएसएनएल श्री एस. डी. सक्सेना एवं डॉ. बली सिंह, काव्यनाटक ‘ब्लैकहोल’ की प्रथम प्रति कथाकार ज्ञानरंजन की अनुपस्थिति में उनके प्रतिनिधि के रूप में श्री हीरालाल नागर को तथा ‘त्रेता-विमर्श एवं दलित चिंतन’ की प्रथम प्रति लेखक कंवल भारती की अनुपस्थिति में स्वराज प्रकाशन के स्वत्वाधिकारी श्री अजय मिश्र द्वारा डॉ. हेमलता महिश्वर को प्रदान की गयीं। 
इसके पूर्व विशिष्ट तथा आमंत्रित अतिथियों का स्वागत स्वराज प्रकाशन के स्वत्वाधिकारी श्री अजय मिश्र द्वारा किया गया। ‘आलोचना का वाचिक’ पुस्तक के ब्लर्व का प्रभावशाली पाठ दूरदर्शन के कार्यक्रम अधिशासी अखिलेश मिश्र द्वारा तथा कार्यक्रम का सफल संचालन दूरदर्शन के सहायक निदेशक (कार्यक्रम) श्री पुरुषोत्तम नारायण सिंह ने किया। (अखिलेश मिश्र, कार्यक्रम अधिशासी, कक्ष सं. २०५, दूरदर्शन महानिदेशालय, मंडी हाउस, कॉपरनिकस मार्ग, नई दिल्ली-१)


तेजपुर में साहित्य सम्मलेन संपन्न  
तेजपुर से रीता सिंह 'सर्जना' की रपटतेजपुर । प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था 'हिंदी साहित्य सम्मलेन', असम) ने अपना 19 वाँ वार्षिक अधिवेशल गत २५25 दिसम्बर को तेजपुर महाविद्यालय के सभागार में मनाया l सम्मलेन की अध्यक्षता तेजपुर विश्वविध्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष तथा सम्मलेन के अध्यक्ष डॉ. अनंत कुमार नाथ ने किया l मुख्य अथिति थे शोणितपुर जिले के पुलिस अधीक्षक श्री आनंद प्रकाश तिवारी l तत्पश्चात सुधाकंठ भूपेन हजारिका,साहित्य कोकिला मामोनी रायसोम गोस्वामी तथा तेजपुर की कवयित्री तथा समाज सेविका उषा टिबडेवाल की स्मृति में श्रद्धांजलि देते हुए दो मिनट का मौन रखा गया l
सचिव श्री सुभाष चन्द्र प्रसाद ने 22 दिसंबर 1992 में स्थापित हिंदी साहित्य सम्मलेन का नीव रखने वाले स्वर्गीय बूटाराम,स्वर्गीय राम प्रसाद महेश्वरी,स्वर्गीय उषा टिबड़ेवाल,स्वर्गीय कन्हैया लाल बोथरा, देवी शरण शर्मा और नरेन्द्र बोथरा को याद किया ।
इस अवसर पर हिंदी साहित्य और पूर्वोत्तर में हिंदी भाषा की महत्ता पर पंजाब कला साहित्य अकादमी,जालंधर के निदेशक व वरिष्ठ साहित्यकार राजेंद्र परदेसी ने कहा कि अहिन्दी प्रदेश,खास करके नोर्थ-ईस्ट के हिंदी लेखन के क्षेत्र में प्रतिभाओ की कोई कमी नहीं हैं l यहाँ लिखने के लिए बहुत संबल हैं बशर्ते कि वे डर को अपने मन के अन्दर से बाहर निकाल कर निसंकोच लिखे l निरंतर लिखते-लिखते लेखन में अपने आप सुधार आ जाएगी l आपलोग लिखे,छपेंगे या नहीं इसकी चिंता न करे l उन्होंने आश्वस्त किया की उनके लेखन को राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृति दिलाने की उनकी जिम्मेदारी हैं l
इस अवसर पर सम्मलेन पत्रिका उषा ज्योति का लोकार्पण सामाजिक कार्यकर्त्ता एवं नोर्थ असम चेंबर के पूर्व अध्यक्ष मदन मोहन सिंह द्वारा किया गया l हिंदी साहित्य सम्मलेन के कार्यकारी अध्यक्ष नथमल टिबड़ेवाल ने कहा कि हिंदी भाषा भारतीय संविधान में स्वीकृत राजभाषा के रूप में स्वीकृत होने के बावजूद अंग्रेजी का बोलबाला हैं l पर यह भी सच हैं कि आज हिंदी ने साहित्यिक भाषा के रूप में अपना परिचय दिया हैं l सम्मलेन के अध्यक्ष अनंत कुमार नाथ ने सभा में उपस्थित हए सभी व्यक्ति का स्वागत करते हुए कहा की हिंदी भाषा से किसी भारतीय भाषा का बैर नहीं हैं l क्योंकि हिंदी सभी भारतीय भाषाओं को विकसित रूप में देखना चाहती हैं l
सम्मलेन के अंत में बहुभाषी कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया था जिसमें राज्य भर से आये हिंदी, असमिया, बंगला, राजस्थानी, नेपाली, भोजपुरी और संस्कृत भाषाओ के कवियों ने अपना काव्य पाठ किया l कवि गोष्ठी में उषा ज्योति के संपादक डॉ. दिनेश कुमार वर्मा ने स्वागत भाषण दिया । संचालन गुवाहाटी की हिंदी और नेपाली कवयित्री मैना थापा 'आशा' ने किया l काव्य पाठ में गुवाहाटी के लोकप्रिय कवि चंद्रप्रकाश पोद्धार (हिंदी,राजस्थानी), कल्पना कलिता (असमिया), रीता सिंह 'सर्जना' (हिंदी), रुमा देवी (असमिया), देवकी तिम्सिना (नेपाली),विचित्र नारायण महंत (असमिया) केशव प्रसाद तिवारी (भोजपुरी व् हिंदी ), हरिशंकर चक्रवर्ती (बंगाली), चंद्रमणि उपाध्याय (नेपाली, संस्कृत), रेनू देवी (असमिया), कमला देवी (नेपाली) और तेजपुर महाविद्यालय के प्राचार्या चारू सहरिया नाथ (असमिया) ने भाग लिया । कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. अनंत कुमार नाथ, डॉ.कृष्ण कान्त झा, सुभाष च. प्रसाद, बालकृष्ण उपाध्याय, धीरज कुमार पांडे, रीता सिंह, शिव कुमार सिंह, धीरेन्द्र यादव, अर्जुन जैन का सराहनीय योगदान रहा है l  
(प्रस्तुति - डॉ रीता सिंह सर्जना, तेजपुर, आसाम)                                                 


नांदेड़ में संपन्न हुआ अ. भा. हिंदी लेखक सम्मेलन


नांदेड, महाराष्ट्र। दिल्ली सरकार की हिन्दी अकादमी एवं अहिन्दी भाषी हिन्दी लेखक संघ के संयुक्त तत्त्वावधान में महान साहित्यकार, चिंतक, समाज सुधारक गुरु गोविंद सिंह महाराज की कर्मभूमि नांदेड में आयोजित त्रिदिवसीय अखिल भारतीय हिन्दी लेखक सम्मेलन में देशभर से पधारे विद्वानों ने हिन्दी को एकता के सूत्र में बांधने वाली शक्ति बताते हुए इसके अधिकाधिक प्रयोग पर बल दिया गया। स्वामी रामानंद तीर्थ विश्वविद्यालय के 

सायन्स कॉलेज के भव्य सभागार में विभिन्न सत्रों में चर्चाए कवि सम्मेलन, प्रदर्शनी, तथा सम्मान समारोह के दौरान बहुत बड़ी संख्या में स्थानीय लेखक पत्रकार, अध्यापक, राजभाषा अधिकारी, शोध छात्र तथा विभिन्न सरकारी तथा गैर सरकारी कार्यालयों के प्रतिनिधि व हिन्दी प्रेमी लगातार उपस्थित रहे।
        
प्रथम दिवस के उद्घाटन सत्र में गुरुद्वारा हजूर साहिब सचखंड के मुख्यग्रन्थी प्रतापसिंह की उपस्थिति में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य एवं पूर्व सांसद लेखक स. हरविंदर सिंह हंसपालए कालेज अध्यक्ष डाण् व्यंकटेश काब्दे, हिन्दी अकादमी के उपसचिव डाण् हरिसुमन बिष्ट, प्राचार्य डा. जीएम कलमसे तथा संस्था के अध्यक्ष डॉ. हरमहेन्दर सिंह बेदी ने दीप प्रज्वलित कर सम्मेलन का शुभारम्भ किया। स्थानीय संयोजिका सायन्स कालेज हिन्दी विभागाध्यक्ष डा. अरुणा राजेन्द्र शुक्ल ने गुरु गोविंद सिंह के साथ निजाम के अत्याचारी शासन के विरूद्ध संघर्ष करने वाले, क्षेत्र के मुक्तिदाता के रूप में स्थापित स्वामी रामानंद तीर्थ को अपने श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए सभी अतिथियों का स्वागत किया। हजूर साहिब सचखंड के मुख्यग्रन्थी ने गुरुजी की अंतिम कर्मभूमि नांदेड़ के विषय में अनेक ऐतिहासिक तथ्यों की जानकारी दी वहीं स. हंसपाल एवं अन्य सभी वक्ताओं ने हिन्दी और गुरुगोविंद सिंह के साहित्य दर्शन को राष्ट्रीय एकता का पर्याय बताया। संयोजक सुरजीत सिंह जोबन ने देश के विभिन्न भागों से पधारे हिन्दी विद्वानों व हिंदी साहित्यकारों का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की।

चायकाल के बाद जानेमाने कवि महेन्द्र शर्मा द्वारा संचालित कवि सम्मेलन का आगाज देवबंद के डा. महेन्द्रपाल काम्बोज के ओजस्वी स्वर में गुरुजी की यशोगान से हुआ।  देर रात तक चले कवि सम्मेलन में सर्वश्री हर्षकुमार, नरेन्द्रसिंह होशियार पुरी, मनोहर देहलवी, किशोर श्रीवास्तव, विनोद बब्बर, डा. रामनिवास मानव, डा. कीर्तिवर्द्धन, अतुल त्रिपाठी, ओमप्रकाश हयारण दर्द, डा. अहिल्या मिश्र, डा. अरुणा शुक्ल, संतोष टेलवीकर, ज्योति मुंगल, संगमलाल भंवर, डा. हरिसुमन बिष्ट आदि कवियों ने राष्ट्रीय एकता के विभिन्न रंग बिखेरे।

द्वितीय दिवस के प्रथम सत्र में हजूर साहिब के मुख्य कथाकार ज्ञानी अमरसिंह की उपस्थिति में ‘गुरु गोविंदसिंह और उनका हिंदी साहित्य’ विषय पर परिचर्चा के दौरान अमृतसर के नानकदेव विश्वविद्यालय के विभागाध्यक्ष रहे डॉ. हरमेन्दर सिंह बेदी ने गुरुजी रचित ‘विचित्र नाटक’ को प्रथम आत्मकथा बताया। अन्य वक्ताओं में अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दी शिक्षण केन्द्र शिमला की अध्यक्षा प्रो. जोगेश कौर, इन्दौर के डॉ. प्रताप सिंह सोढ़ी, हैदराबाद की अहिल्या मिश्र, नांदेड़ की छात्रा श्रीमती पूनम शुक्ल तथा डा. परमेन्दर कौर भी शामिल थे। इसी सत्र में स. सुरजीत सिंह जोबन के अभिनंदन ग्रन्थ ‘खुश्बु बन कर जिऊंगा’ एवं डा. अरुणा राजेन्द्र शुक्ल के शोधग्रन्थ ‘नरेश मेहता के उपन्यासों में व्यक्त अवदान’ का लोकार्पण किया गया। इस सत्र का संचालन राष्ट्रकिंकर के संपादक श्री विनोद बब्बर ने किया। अध्यक्षता रामनिवास मानव ने की।
    
भोजनोपरान्त द्वितीय सत्र में ‘अहिन्दीभाषी प्रदेशों का हिन्दी लेखन’ विषय पर परिचर्चा में मुख्य वक्ता विनोद बब्बर ने हिन्दुस्तान की आजादी के 65 वर्ष बाद भी यहाँ  अहिन्दीभाषी शब्द के प्रयोग को अपमानजनक और दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने मातृभाषा और राष्ट्रभाषा को दोनों आंखें बताते हुए इनमें संतुलन की आवश्यकता बताई। इस सत्र में डा. हरि सिंह पाल, डा. शहाबुद्दीन शेख, डा. रेखा मोरे, डा.ज्योति टेलवेकर ने भी अपने विचार प्रस्तुत किये। 

तीसरे दिन के प्रथम सत्र में क्षेत्र के लोकप्रिय विधायक श्री ओमप्रकाश पोकार्णा ने नांदेड की पवित्र भूमि पर सभी का स्वागत करते हुए सम्मेलन को राष्ट्रीय एकता का महाकुम्भ घोषित किया। विधायक महोदय ने हिन्दी के प्रति समर्पण के लिए स. सुरजीत सिंह जोबन तथा विनोद बब्बर को सम्मानित करते हुए उनके साहित्यिक अवदान की प्रशंसा की। इसी सत्र में ‘अंतर्राज्यीय भाषायी संवाद’ विषय पर हिन्दी अकादमी के उपसचिव डा. हरिसुमन बिष्ट ने मुख्य वक्ता के रूप में आदिकाल से आधुनिक काल तक के इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम व बाद में राष्ट्रभाषा बनने तक हिन्दी की राष्ट्रीय पहचान को रेखांकित करते हुए आज के वैश्वीकरण के दौर में हिन्दी को सम्पूर्ण राष्ट्र की आवश्यकता बताया। डा. रामनिवास मानव की अध्यक्षता एवं डा. अरूणा के संचालन में डॉ. बेदी, आकाशवाणी दिल्ली के पूर्व राजभाषा निदेशक डा. कृष्ण नारायण पाण्डेय, डा. मान, डा. रमा येवले प्रमुख वक्ता थे। 

अंतिम सत्र में स. हंसपाल, डा. बेदी नांदेड़ एजुकेशन सो. के उपाध्यक्ष श्री सदाशिवराव पाटिल, प्राचार्य डा. कलमसे ने देश भर से पधारे विभिन्न हिंदी विद्वानों को ‘भाषा रत्न’ सम्मान प्रदान कर उनके प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की। सम्मेलन के दौरान दिल्ली के श्री किशोर श्रीवास्तव की राष्ट्रभाषा हिंदी के प्रेरक स्लोगनों एवं सामाजिक, सांप्रदायिक विसंगतियों व सद्भाव पर निर्मित कार्टूनों, लघु रचनाओं  की पोस्टर प्रदर्शनी ष्खरी.खरीष् का आयोजन भी किया गया, जिसे अपार जनसमूह ने काफी सराहा।

(रपटः इरफान राही, पत्रकार, नई दिल्ली Hum Sab Sath Sath Desk, Mo. ९८६८७०९३४८)


हिन्दी त्रैमासिक ‘कल के लिए’ का अदम गोंडवी विशेषांक (मार्च-जून 2012)
कल के लिए’ का अदम गोंडवी विशेषांक (मार्च-जून 2012) प्रकाशित हो रहा है इस महत्वपूर्ण विशेषांक के संभावित लेखक श्री विश्वनाथ त्रिपाठीमैनेजर पाण्डेयराजेश जोशीविजय बहादुर सिंहकौशल किशोरआदियोगडा वशिष्ठ अनूपअलका सिंहमनोज पाण्डेयबुद्धिनाथ मिश्र ,डा  के अरुण सईद अयूब प्रो ईश मिश्रा डा राजेश मल्ल कुमार अनुपम डा सुरेश सलिलडा अमरनाथ यू के एस चौहान रवि नंदन सिंह ,जितेन्द्र बिसारिया,डा अशोक चौहान ,अष्टभुजा शुक्ल ,अनिल सिंह ,दयानंद पाण्डेयविमल कुमारमहेश पुनेठाशिक्षा सक्सेना,सोनू उपाध्यायकामरेड बादल सरोज....। जो पाठक/साहित्यकार इस विशेषांक में रूचि लेना चाहें, वे अविलम्ब संपर्क करे। विशेषांक के संपादक – डा. जयनारायण एवं  कार्यकारी संपादक - अशोक कुमार पाण्डेय हैं
संपर्क - डा जयनारायण, 'अनुभूति', विकास भवन के पीछेसिविल लाइन्सबहराइच, 271801 (उत्तर प्रदेश) फोन - 09415036571, अशोक कुमार पाण्डेय, 508 भावना रेसीडेंसी, सत्यदेवनगर, गाँधी रोड, ग्वालियर (मध्य प्रदेश) फोन- 09425787930 
ई मेल - budhwarjainarain@gmail.com, ashokk34@gmail.com (समाचार : 
अशोक कुमार पाण्डेय)
 सम्मान हेतु नाम प्रस्ताव आमंत्रित 

विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ भागलपुर प्रत्येक वर्ष चुने हुए साहित्य सर्जकों को विभिन्न मानद उपाधियों से अलंकृत करता है. विद्यापीठ के विद्वत परिषद् के सदस्य के रूप में मैं अहिन्दी क्षेत्र के रचनाकारों का नाम मानद उपाधि हेतु प्रस्तावित करना चाहता हूँ . अतः अहिन्दी क्षेत्र के सर्जकों से नाम आमंत्रित है. अपना संक्षिप्त परिचय निम्न पते पर भेज दे
राजेंद्र परदेसी भारतीय पब्लिक अकादेमी
चांदन रोड फरिदीनगर लखनऊ 226015 (समाचार : राजेंद्र परदेशी)




प्रब्लेस शिखर सम्मान की उद्घोषणा.....

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सतीश चन्द्र शर्मा सुधांशु को ^आलराउंड कवि* की उपाधि








फरीदकोट अंग्रेज़ी] हिन्दी और पंजाबी साहित्य के विकास व प्रसार के लिए तत्पर एकमात्र ग़ैर सरकारी साहित्यिक संस्था ^आलराउंड अकादमी* की ओर से मैनपुरी के सतीश चन्द्र शर्मा सुधांशु को ^आलराउंड कवि* की उपाधि दी गई है। पंजाब में स्थापित आलराउंड अकादमी के अध्यक्ष श्री अमित कुमार लाडी ने इस उपाधि के लिए श्री सतीश चन्द्र शर्मा सुधांशु को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। गौर हो कि उन्हें यह उपाधि उनके बहुमुखी व्यक्तित्व व उनके काव्य साहित्य को ध्यान में रखते हुए दी गई है।  (समाचार : अमित कुमार लाडी) 

बसंतोत्सव पर आनंदम द्वारा काव्यगोष्टी समपन्न
नई दिल्लीः कला,संगीत एवं संस्कृति पर आधारित संस्था आनंदम द्वारा मैक्स प्रुडेशियल के हिमालय भवन स्थित शाखा के सभागार में बसंतोत्सव के अवसर पर एक सरस काव्यगोष्टी का आयोजन किया गया। 
       इस कार्यक्रम को मनमोहक एवं सरस बनाने में कवि एवं गजलकारों ने अपनी-अपनी कविता एवं गजल से वातावरण को वसंतमयी बना दिया।इनमें मों उमर फनीफ ,
श्री शैलेश सक्सेना,डा राणा गन्नौरी, ,मों.सैफ शहरी,मों उमर कच्छुआई ने। मों दर्द देहल्वी ने भारत की गंगा एवं मुना रुपी सभ्यता एवं संस्कृतिक विरासत पर कुछ यूं कहा-
दरिया है हम हमारी दरियादिली न पूछ।
जिससे मिले है उसको समुन्दर बना दिया।
वही मों माशूम गाजियाबादी ने मानव की वर्तमान हालात पर कहा-
दरिया को यह गुमान की दरिया बना दिया।
कतरे को ये मलाल कि कतरा नहीं रहा।।
देश की स्थिति पर सटीक ब्यान करते हुए दिल्ली रत्न लाल बिहारी लाल ने कहा-
मेरा हिनदुस्तान से रिश्ता ।
जिश्म का जैसे जान से रिश्ता।।
वही नारी की बिगडती हुई दशा एवं दिशा पर नारी की प्यार में क्या ब्यथा होती है इसका भी मार्मिक चित्रण करते हुए श्री लाल ने कहा-
तुम्हारे नाम की मेहन्दी रचाये बैठी हूँ।
तू आ भी जा कि खुद को सजाये बैठी हूँ।।
संचालक श्री जगदीश रोहतगी ने कहा-
एक मर्म है जो रोके हुए है गुनाह को।
उनके हमारे बीच कोई दीवार थोडे ही है।।
श्री आशीष सिन्हा कासिद ने भाईचारे कि मिशाल देते हुए कहा कि-
पैसों से कोई चीज न दादी ने ली कभी
चीजें खरीदती थी वो गेहूँ या धान से
अन्त में आये हुए सभी कवियो को धन्यवाद श्री जगदीश रोहतगी आनंदम की ओर से दिया। (समाचार : लाल बिहारी लाल) 


बस्ती में साहित्यकारों का सम्मान
  
निराला साहित्य एवं संस्कृति संस्थान बस्ती (उत्तर प्रदेश ) के अध्यक्ष डॉ. रामकृष्ण लाल जगमग ने सूचित किया हैं कि आगामी २८ मार्च को एक भव्य सारस्वत सम्मान का आयोजन किया जा रहा हैं l जिसमे देश के अनेक प्रान्तों के साहित्य सर्जक भाग लेंगे l इस अवसर पर पर वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. बाशौरी रेड्डी (चेन्नई ),श्री अजय कुमार गुप्ता (सम्पादक गगनांचल ) ,दिल्ली एवं वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. राजेंद्र परदेसी (लखनऊ ) को निराला शिखर सम्मान से सम्मानित किया जाएगा l सम्मान स्वरुप इन्हें स्मृति चिन्ह ,शाल एवं इक्कावन सौ (५१००.०० ) रूपये की राशि भेट किया जाएगा तथा डॉ.कंचन शर्मा (इम्फाल),डॉ.सकीना अख्तर , (श्रीनगर ),डॉ.रीता सिंह 'सर्जना '(तेजपुर ,असम) एवं डॉ. रतिलाल शाहीन (मुंबई ) को निराला सृजन सम्मान से सम्मानित किया जाएगा l सम्मान स्वरुप इन्हें स्मृति चिन्ह,शाल एवं ग्यारह सौ रूपये की नगद राशि भेट किया जाएगा l (समाचार : राजेंद्र परदेशी)

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