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मंगलवार, 31 जुलाई 2012

गतिविधियाँ

 अविराम  ब्लॉग संकलन :  वर्ष : 1, अंक : 11, जुलाई   2012







‘‘प्रेरणा‘‘ पत्रिका के लघु उपन्यास अंक का लोकार्पण व
लघु उपन्यास विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी
 

नई दिल्ली । 18 फरवरी 2012 को हरियाणा साहित्य अकादमी तथा अखिल भारतीय अणुव्रत न्यास के संयुक्त तत्वावधान में नई दिल्ली स्थित अणुव्रत सभागार में आयोजित लघुउपन्यास विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी के अवसर पर समकालीन आलोचना के षिखर पुरूष तथा महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विष्वविद्यालय के कुलाघिपति डाॅÛ नामवर सिंह ने भोपाल से अरूण तिवारी के संपादन में प्रकाषित होने वाली त्रैमासिक पत्रिका ‘‘प्रेरणा‘‘ के लघु उपन्यास अंक का लोकार्पण किया।
         इस अवसर पर अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रख्यात आलोचक व चिंतक डॉÛ नामवर सिंह नें लेखकों को सम्बोधित करते हुए कहा कि आप लोगों  का काम लिखना है। आप निश्चिंत होकर लिखते रहें, आपकी रचना लम्बी कहानी है या लघु उपन्यास इसका फैसला आलोचकों को करने दें। रचनाकार को अपनी उर्जा लेखन में खर्च करनी चाहिए । उन्होंने कहा कि यह रहस्य तो रचनाकार ही बता सकता है कि कभी कभी वह कम से कम शब्दों में असरदार बात कह जाता है जबकि कभी कभी उसी बात को प्रभावी ढ़ंग से कहने के लिए उसे लम्बी चैड़ी भूमिका की जरूरत पड़ती है। लम्बी कहानी बनाम लघु उपन्यास के मसले पर श्री सिंह ने कहा कि जिस तरह पद्य विधा में मुक्तक , गजल , खंण्ड काव्य तथा प्रबंध काव्य को साफ-साफ परिभाषित किया गया है इस तरह का कोई वस्तुनिष्ट वर्गीकरण या सीमांकन गद्य साहित्य में नहीं है। उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ किस तरह लोग मूल विधा आख्यान, आख्यायिका, गल्फ तथा कथा शब्दों को भूलते जा रहें है तथा ‘शॉट स्टोरी‘ के लिए कहानी शब्द का प्रयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह जानना भी बहुत आवष्यक है कि आजादी के बाद हिंदी कहानी कितनी आगे बढ़ी है। उन्होंने माना कि दलित तथा महिला लेखन ने कहानी को बहुत हद तक प्रभावित किया है अब तो पत्रों तथा डायरी के द्वारा भी कहानियां  लिखी जा रही हैं। अब कहानी का परिदृष्य काफी कुछ बदल चुका है।हमें यह भी देखना है कि कहानी अपने समय की विद्रूपताओं तथा विसंगतियों से किस हद तक मुठभेड़ कर रही है।इस संदर्भ में श्री सिंह नें ‘‘प्रेरणा‘‘ के प्रयास कि प्रषंसा की।  अंत में उन्होंने संतोष प्रकट करते हुए कहा कि अणुव्रत सभागार में आयोजित आज कि यह संगोष्ठी अपने स्वरूप में अहिंसात्मक रही क्योंकि वैचारिक घात -प्रतिघात से आज यहाँ कोई मुर्छित नहीं हुआ।
        संगोष्ठी का संचालन करते हुए रचनाकार शैलेन्द्र चैहान ने कहा कि वर्तमान उपभोक्तावादी युग में साहित्य आम पाठकों से दूर होते जा रहा है। व्यावसायिक पत्र-पत्रिकाओं में साहित्य का स्थान सीमित होते जा रहा है। ऐसे प्रतिकुल माहौल में ‘‘प्रेरणा‘‘ जैसी सार्थक लघु पत्रिकाओं के माध्यम से साहित्य को जन-जन तक पहुंचाया जा सकता है। इस अवसर पर वरिष्ठ कथाकार तथा ‘लोकायत‘ के संपादक बलराम ने अमेरिकी लेखिका हेलेन हैंफ के द्वारा इंग्लैण्ड स्थित मार्क एण्ड कंÛ के मालिक फंैक ड्वेल को लिखे 81 पत्रों  के माध्यम से सृजित एक लघुउपन्यास का रागात्मक वर्णन किया है। उन्होंनें यह भी बताया कि विगत दिनों ‘‘प्रेरणा‘‘ ने ‘स्त्री विमर्ष‘ के स्थान पर ‘नारी अस्मिता अंक‘ निकाल कर एक नई शुरूआत की। बलराम ने ‘‘प्रेरणा‘‘ के वर्तमान अकं में प्रकाषित राजेन्द्र लहरिया के ‘एक डायरीःला दिनांक‘ तथा डॉÛष्याम सखा  श्याम के  ‘कोई फायदा नहीं‘ नामक लघु उपन्यासों के कथ्य एवं षिल्प की प्रषंसा की। रचनाकार  डॉÛपल्लव ने लघु उपन्यास के स्वरूप और सरोकार पर प्रकाष डालते हुए कहा कि लम्बी कहानी तथा लघु उपन्यास के आकार को लेकर विभ्रम बना रहता है। उन्होंने इस अवसर पर कहा कि जब वे चितौड़ में स्कूल के छात्र थे तभी से वे अपने षिक्षक के यहां से ‘‘प्रेरणा‘‘ पत्रिका लेकर पढ़ा करते थे। उन्होंने यह स्वीकार किया कि मेरे जैसे अनेक विद्यार्थियों को ऐसी पत्रिकाओं से दिषा एवं दृष्टि मिलती है। नवभारत टाइम्स के सम्पादकीय विभाग से जुड़े महेष दर्पण ने लघु उपन्यास की परिभाषा , स्वरूप निर्धारण तथा सीमांकन को लेकर अपना मन्तव्य प्रकट किया। साहित्य के प्रचार-प्रसार में ‘‘प्रेरणा‘‘ की भूमिका की उन्होंनें प्रषंसा की।  प्रकृति  तथा आदिवासी की प्रषंसा करते हुए उन्होंनें कहा कि ये धरती के सच्चे वारिष हैं। कथाकार राजेन्द्र लहरिया नेे लघु उपन्यास में कथ्य एवं शिल्प  के सनातन द्वंद्व की चर्चा करते हुए उनके समानुपातिक प्रयोग की सलाह दी। ‘इंडिया न्यूज‘ से जुड़े अशोक  मिश्र ने  कहा कि लघु पत्रिकाओं को आपसी गुटबाजी से बचते हुए सार्थक, सोद्देश्य  परन्तु प्रासंगिक साहित्य के सृृजन में लगे रहना चाहिए। इस दिशा में ‘प्रेरणा’ का योगदान सराहनीय है।
          इस अवसर पर ‘‘प्रेरणा‘‘ के संपादक अरूण तिवारी ने कहा कि ‘‘प्रेरणा‘‘ का प्रकाशन  मेरे लिए जुनून एवं मिशन है। मैं हर प्रतिकूलताओं का सामना करते हुए भी इसका प्रकाषन जारी रखने के लिए प्रतिबद्व हूँ। उन्होंने लम्बी कहानी को लघु उपन्यास तथा लघु उपन्यास को लम्बी कहानी समझे जाने वाले भ्रम को रेखंाकित किया जिस पर नामवर सिंह ने अध्यक्षीय वक्तव्य दिया। इस अवसर पर श्री तिवारी ने संगोष्ठी में उपस्थित लोगों के प्रति आभार ज्ञापित किया। हरियाणा साहित्य अकादमी के निदेशक  श्री 
श्याम  सखा श्याम ने वक्ताओं को पुष्पगुच्छ के साथ शॉल ओढ़ाकर स्वागत एवं सम्मानित किया। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को अपने हास्य-व्यंग पूर्ण टिप्पणियों से खूब हंसाते हुए सबके प्रति आभार ज्ञापित किया। इस अवसर पर संगोष्ठी में उपस्थित जिन रचनाकारों ने कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई उनमें राम कुमार कृषक, उद्भ्रांत , प्रदीप पन्त , डाॅ. कमल किशोर गोयनका , हरे राम समीप , विजय मोहन शर्मा , सुरेन्द्र कुमार श्लेष, राज कुमार गौतम, डॉÛ श्रीमती कमल कुमार, डॉÛ करूणा शर्मा, डॉÛ जसविन्द्र कौर विंद्रा , डॉÛ रूपा सिहं, राजेष शर्मा, रवि प्रताप शुक्ल ,रामनारायण स्वामी, राजेष जैन, विजय वर्धन डागा, महेन्द्र शर्मा, संदीप हरियाणवी, सुधीर कुमार सिहं, उर्मिअरूण, अनिमेष, अनु, रमेश खंडपाल, विजेन्द्र तथा राजीव रजंन के नाम विषेष उल्लेखनीय हैं। अतं में अखिल भारतीय अणुव्रत संस्था के प्रबंध न्यासी घनष्याम बोथरा ने संगोष्ठी में उपस्थित लोगों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि आज मैं स्वंय को सौभाग्यषाली मान रहा हूँ कि इतने लब्धप्रतिष्ठीत व मूर्धन्य साहित्यकारों के बीच बैठ कर साहित्यिक विमर्ष कर रहा हूं यह क्षण मेरे जीवन में न केवल यादगार बल्कि ऐतिहासिक भी रहेगा। 

संपर्क अर्जुन प्रसाद सिंह
जवाहर नवोदय विद्यालय,
पाटन सीकर राज0 332718
मो0-   09413070837
ईमेल- arjunprasadsinghjnv@gmail.com






‘एक और अन्तरीप’ की संवाद श्रंखला संगोष्ठी 


      सुप्रसिद्ध साहित्यिक त्रैमासिकी ‘एक और अन्तरीप’ द्वारा संवाद श्रंखला के अन्तर्गत 27 मई 12, रविवार को जयपुर स्थित देराश्री शिक्षक सदन, राजस्थान विश्वविद्यालय जयपुर में साहित्यिक पत्रकारिता पर एक दिवसीय संगोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें प्रदेश भर की साहित्यिक पत्रिकाओं के संपादक, लेखक व पत्रकार ने भाग लिया। 
     डॉ. हेतु भारद्वाज (अक्सर) की अध्यक्षता में सम्पन्न प्रथम सत्र में ‘साहित्यिक पत्रकारिता की अवधारणा’ पर चर्चा हुई। मुख्य अतिथि, मुख्य वक्ता व विशिष्ट अतिथि क्रमशः श्री कमर मेवाड़ी (सम्बोधन), श्री राजाराम भादू (संस्कृति मीमांशा) एवं हरिनारायण (कथादेश) थे। डॉ. हेतु भारद्वाज जी ने कहा कि साहित्यिक पत्रिकाएँ जीवन के वास्तविक परिदृश्य को चित्रित कर रही हैं तथा साहित्यिक पत्रकारिता प्रतिरोध की संस्कृति पत्रकारिता प्रतिरोध की संस्कृति का निर्माण कर रही हैं। उन्होंने आगे कहा कि साहित्यिक पत्रकारिता के माध्यम से विद्रूपता पर चोट करने की जो परम्परा शुरू हुई थी, वह निरन्तर बनी रहनी चाहिए। डॉ. कमर मेवाड़ी जी ने कहा कि छोटी पत्रिकाएँ साहित्यिक पत्रकारिता को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, इसलिए छोटी पत्रिकाओं के महत्व को कमतर नहीं आंका जा सकता है। उन्होंने हिन्दी की साहित्यिक पत्रिकाओं के संपादकों का साझा मंच बनाने का भी सुझाव दिया, ताकि उनके निर्बाध प्रकाशन, मुद्रण, वितरण, विज्ञापन, प्रसारण तथा लेखकीय पारिश्रमिक जैसे मसलों पर भी कोई नीति बनायी जा सके। इस अवसर पर श्री राजाराम भादू जी ने कहा कि वतग्मान समय लघु पत्रिकाओं का स्वर्ण युग है। इन दिनों लघु पत्रिकाओं का कलेवर जितने वैविध्यपूर्ण तथा विस्तृत रूप में प्रकाशित हो रहा है, उसे देखते हुए लघु पत्रिकाओं की महत्ता और बढ़ जाती है। उन्होंने आगे कहा कि जनसंघर्ष को उभारने में ये पत्रिकाएँ महती भूमिका निभाती हैं। संगोष्ठी के इस सत्र में ईशमधु तलवार, हरीश काम चंदानी, प्रेमचंद गाँधी, डॉ. दुष्यंत आदि ने भी अपने विचार रखे।
     संगोष्ठी के द्वितीय सत्र में श्री प्रेम कृष्ण शर्मा (एक और अन्तरीप) की अध्यक्षता में ‘साहित्यिक पत्रकारिता तथा मुख्यधारा पत्रकारिता के अन्तः सम्बन्धों’ पर चर्चा हुई। मुख्य अतिथि, मुख्य वक्ता व विशिष्ट अतिथि क्रमशः डॉ. दुर्गाप्रसाद अग्रवाल, डॉ. माधव हाडा एवं भारतरत्न भार्गव थे। इस सत्र में बोलते हुए डॉ. दुर्गाप्रसाद अग्रवाल ने कहा कि मुख्यधारा पत्रकारिता का उजला पक्ष यह है कि वह समाज में बदलाव लाने की कोशिश कर रहा है। साहित्यिक पत्रकारिता तथा मुख्य धारा की पत्रकारिता के मुद्दे समान होते हैं अतः दोनों को सकारात्मक ढंग से लेना चाहिए। ‘एक और अन्तरीप’ के प्रधान संपादक प्रेम कृष्ण शर्मा ने कहा कि साहित्यिक पत्रकाओं को निकालने वाले अपने श्रम व धन का त्याग करते हैं। इन पत्रिकाओं के संरक्षण हेतु सरकारी स्तर पर भी प्रयास होने चाहिए। जब दोनों तरह की पत्रकारिता के उद्देश्य समान हैं तो दोनों को प्रथक-प्रथक करके क्यों देखा जाता है? मोहन लाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर के हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. माधव हाडा ने कहा कि हिन्दी के लोगों को आत्मावलोचन की प्रक्रिया से गुजरना चाहिए। आज रचनात्मक लेखन में तथ्य का आग्रह बढ़ रहा है तो सोच में भी तथ्यात्मकता आनी चाहिए। हम लोकप्रिय को घटिया साबित करने पर तुल जाते हैं तथा हमारा बुद्धिजीवी वर्ग सिर्फ प्रतिरोध में खड़ा दिखाई देता है, ऐसा नहीं होना चाहिए। अच्छी बातों को लकर आत्मसातीकरण की क्रिया भी अपनानी चाहिए। इस अवसर पर श्री भारतरत्न भार्गव ने मुख्य धारा की पत्रकारिता के जीवन मूल्यों से सम्बद्व होने पर जोर दिया।
      संगोष्ठी के इस सत्र में डॉ. लक्ष्मी शर्मा, डॉ. शिवचरण कौशिक, रामकुमार सिंह, नवलकिशोर, मायामृग आदि ने भी अपने विचार रखे। ‘एक और अन्तरीप’ के संपादक डॉ. अजय अनुरागी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर ‘शब्द संचार’ पत्रिका एवं संस्था की ओर से साहित्यिक पत्रिकाओं की प्रदर्शनी भी लगायी गयी। संगोष्ठी के अन्त में कवि भगवत रावत एवं गजानन वर्मा को श्रद्धांजलि दी गयी। (समाचार सौजन्य: डॉ. अजय अनुरागी, 1, न्यू कॉलोनी, झोटवाड़ा पंखा, जयपुर)

उदभ्रांत की सक्रियता और विविधता चौंकाती है: केदारनाथ सिंह

नई दिल्ली, 04 जुलाई 2012। ‘‘कवि उदभ्रांत अपनी काव्ययात्रा की विविधता और सक्रियता से लगातार चौंकाते हैं। उनकी कविताओं में जीवन से जुड़ी स्थितियों पर सीधा प्रहार होता है।’’ उक्त विचार वरिष्ठ कवि केदारनाथ सिंह ने साहित्य अकादमी द्वारा आयोजित ‘कवि संधि’ कार्यक्रम में कवि उदभ्रांत के काव्य पाठ के बाद व्यक्त किए। कार्यक्रम में उदभ्रांत ने 30 से ज्यादा कविताएं पढ़ी। ‘स्वाह’ और पहल में प्रकाशित कविता ‘बकरा मंडी’ को श्रोताओं ने बेहद पसंद किया। ‘कठपुतली’, ‘केंचुआ’, ‘नट’, ‘रस्सी का खेल’, ‘प्रेत’, ‘स्वेटर बुनती स्त्री’, ‘पूर्वज’, पतंग’ आदि कविताओं में भूमण्डलीकरण, पड़ोसी देशों से हमारे संबंध पर टिप्पणियों के अतिरिक्त आम आदमी, पशु पक्षियों से जुड़े मार्मिक बिम्ब थे। 
     ‘‘मैं केवल लंबी कविताएं लिखता हूँ’’ के भ्रम को तोड़ते हुए उन्होंने कुछ छोटी कविताएँ भी सुनाईं। कार्यक्रम के अंत में श्रोताओं के अनुरोध पर उन्होंने कुछ नवगीत सस्वर सुनाए। इससे पहले अकादमी के उपसचिव ब्रजेन्द्र त्रिपाठी ने उनका संक्षिप्त परिचय देते हुए कहा कि 1948 में राजस्थान के नवलगढ़ में जन्मे उदभ्रांत जी की पहचान नवगीतकार, गज़लगो, समकालीन कविता के कवि, आलोचक के साथ-साथ प्रबन्धकाव्य रचियता के रूप में है। अभी तक उनकी साठ से ज्यादा कृतियाँ प्रकाशित हैं। आपकी पुस्तकों में त्रेता, राधामाधव, स्वयंप्रभा, ब्लैक होल, शब्द कमल खिला है आदि प्रमुख हैं। आपको हिंदी अकादमी दिल्ली के साहित्य कृति सम्मान, उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के निराला पुरस्कार, शिव मंगल सिंह सुमन पुरस्कार के अतिरिक्त कई अन्य पुरस्कार मिल चुके हैेें।
     कार्यक्रम में प्रदीप पंत, डॉ. वीरेन्द्र सक्सेना, डॉ. मधुकर गंगाधर, डॉ. कर्ण सिंहचौहान, लक्ष्मी शंकर वाजपेयी, डॉ. बली सिंह, हीरालाल नागर, राजेन्द्र उपाध्याय, अनुज, प्रताप सिंह, सुशील कुसमाकर सहित कई गणमान्य लेखक, पत्रकार उपस्थित थे। (प्रस्तुति: अजय कुमार शर्मा मोबा. 9868228620)



पं. दामोदरदास चतुर्वेदी स्मृति सम्मान व रानी लक्ष्मीबाई बलिदान 


दिवस समारोह का आयोजन


नई दिल्ली। गत् 16 एवं 17 जून को यहां भारतीय सांस्कृतिक परिषद के सौजन्य से व सर्वभाषा संस्कृति समन्वय समिति एवं बुन्देलखंड विकास परिषद के संयुक्त तत्वावधान में दिल्ली स्थित आजाद भवन में दामोदर दास चतुर्वेदी स्मृति सम्मान एवं महारानी लक्ष्मीबाई बलिदान दिवस समारोह का अत्यन्त सफल व प्रेरक आयोजन किया गया। दोनों दिन विभिन्न कार्यक्रमों का शुभारम्भ क्रमशः श्री दामोदर दास एवं महारानी लक्ष्मीबाई के चित्र पर पुष्प अर्पण, दीप प्रज्जवलन एवं किशोर श्रीवास्तव व साथियों के भाईचारा गीत के साथ हुआ। 
         पहले दिन के साहित्यिक समारोह में जहां अनेक कवियों ने समां बांधा वहीं दूसरे दिन के समारोह का मुख्य आकर्षण रहा अंकित जैन एंड पार्टी द्वारा श्री प्रदीप जैन द्वारा लिखित गीत ‘हम बुंदेले, हम बुंदेले’ का मंचन व साहित्य कला परिषद के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत रानी झांसी पर आधारित नृत्य नाटिका। इन कार्यक्रमों ने दर्शकों का खूब मन मोहा। पहले दिन के विभिन्न कार्यक्रमों का कुशल संचालन जहाँ सर्वभाषा संस्कृति समन्वय समिति के स्थानीय प्रमुख श्री सुरेश नीरव व अरविन्द पथिक ने किया वहीं दूसरे दिन के कार्यक्रम का संचालन बुन्देलखंड विकास परिषद के पदाधिकारी श्री अवधेश चौबे ने किया। पहले दिन के समारोह के मुख्य अतिथि सांसद सत्यव्रत चतुर्वेदी एवं दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष डा० योगानंद शास्त्री ने भाषाओं के माध्यम से देश को जोडने पर बल दिया एवं दूसरे दिन के समारोह के मुख्य अतिथि ग्रामीण विकास राज्य मंत्री श्री प्रदीप जैन एवं समाजवादी नेता रघुठाकुर, पूर्व सांसद श्री उदय प्रताप सिंह व विधायक डॉ. एस. सी. एल. गुप्ता ने अपने भाषणों में रानी झांसी की स्मृति को ताजा करते हुए राष्ट्रीय एकता का आवाह्न करके श्रोताओं का खूब दिल जीता। 
        दोनों अवसरों पर शिक्षा, प्रशासन, फिल्म, चिकित्सा, साहित्य एवं कला आदि क्षेत्रों की अनेक जानी-मानी हस्तियों को सम्मानित भी किया गया। जिनमें पहले दिन दामोदर दास स्मृति सम्मान से सर्वश्री  बी. एल. गौड, सुभाष जैन, राजकुमार सचान होरी, प्रशांत योगी, डा. प्रदीप चतुर्वेदी, प्रवीण चौहान, अशोक शर्मा, डा. लक्ष्मी शंकर वाजपेयी, शरददत्त, रिंद सागरी, डा. जया बंसल, कुंवर जावेद, ब्रजेंद्र त्रिपाठी, विजय आईदासानी, डा० रिचा सूद, अरूण सागर, जय कुमार रूसवा को नवाजा गया। इसी प्रकार से बुंदेलखंड विकास परिषद के प्रतिभा सम्मान से सर्वश्री डॉ. वी. के अग्रवाल, डॉ. ओ. पी. रावत, इंजि. वी. के. शर्मा, अरूण खरे, राजीव दुबे, डॉ. बी. एल. जैन, डॉ. वी. के. जैन, कामिनी बघेल एवं डॉ. अनिल जैन आदि को सम्मानित किया गया। 
          दो दिनों तक चले इस समारोह में श्री किशोर श्रीवास्तव की जन चेतना कार्टून पोस्टर प्रदर्शनी ‘खरी-खरी’ भी दर्शकों के आकर्षण का केंद्र बनी रही। (समाचार सौजन्य: हम सब साथ साथ डेस्क, नई दिल्ली मो. 9868709348)


साहित्यिक पत्रकारिता दिवस पर संगोष्ठी


     1 जून की शाम गांधी शांति प्रतिष्ठान सभागार, नई दिल्ली में अ.भा.सा.प.संपा.संघ एवं यू.एस.एम. पत्रिका के तत्वावधान में 10वें साहित्यिक पत्रकारिता दिवस का आयोजन किया गया। इस अवसर पर ‘पत्रकारिता का साहित्यिक, सांस्कृतिक स्वरूप और इसकी सामाजिक महत्ता’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी में डॉ. रत्नाकर पाण्डे, डॉ. मृदुला सिन्हा, ज्ञानेन्द पाण्डेय, राजकुमार सचान ‘होरी’ तथा श्री लक्ष्मीशंकर बाजपेयी ने अपने अनुभवपरक विचार प्रस्तुत किये। इस अवसर पर श्री उमाशंकर मिश्र को ‘मृगेश स्मृति सम्मान’ से सम्मानित तथा विकास मिश्र सम्पादित ‘बस, इसी एक आस में’ का लोकार्पण किया गया। संगोष्ठी का संचालन उमाशंकर मिश्र ने किया। (समाचार सौजन्य : विकास मिश्र)

कादम्बरी द्वारा सम्मान समारोह हेतु प्रविष्टियाँ आमन्त्रित

जबलपुर की साहित्यिक संस्था ‘कादम्बरी’ के वर्ष 2012 के सम्मान समारोह के अन्तर्गत विभिन्न सम्मानों हेतु साहित्यकारों/पत्रकारों से 30 सितम्बर 2012 तक प्रविष्टियां आमन्त्रित की गई हैं। इस सम्बन्ध में विस्त्रत सूचना डॉ. गार्गीशरण मिश्र ‘मराल’ (1436/बी, सरस्वती कॉलोनी, चेरीताल वार्ड, जबलपुर-482002, मोबा. 09425899232) से की जा सकती है। (समाचार सौजन्य: आचार्य भगवत दुबे)

जगदीश किंजल्क को राष्ट्रीय संवादश्री सम्मान

    अखिल भारतीय भाषा साहित्य सम्मेलन के चौवीसवें राष्ट्रीय अधिवेशन  भोपाल में 15 जुलाई 2012 को साहित्यकार एवं ‘दिव्यालोक‘ के संपादक श्री जगदीश किंजल्क को ‘राष्ट्रीय संवाद श्री‘ सम्मान से अलंकृत किया गया। यह सम्मान साहित्यिक पत्रकारिता के माध्यम से सृजनात्मक प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने, पूर्ववर्ती एवं समकालीन साहित्य के प्रकाशन तथा साहित्यिक प्रवृत्तियों पर राष्ट्रीय स्तर के साहित्यकारों एवं समालोचकों के मध्य सार्थक संवाद स्थापित करने हेतु प्रदान अतिविशिष्ट एवं अविस्मरणीय योगदान हेतु प्रदान किया जाता (समाचार सौजन्य : श्रीमती राजो किंजल्क)

हुड्डा ने किया सप्त सिन्धु का विमोचन

     हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने हरियाणा ग्रन्थ अकादमी की त्रैमासिक पत्रिका ‘सप्त सिन्धु’ के प्रवेशांक का विमोचन अपने कार्यालय करते हुए इस अंक को हरियाणा के लोक साहित्य पर केन्द्रित करने की सराहना की। इस अवसर पर वित्तायुक्त कृष्ण मोहन, अकादमी के कार्य.अध्यक्ष डॉ. के.के. खंडेलवाल, उपाध्यक्ष कमलेश भारतीय, निदेशक डॉ. मुक्ता, संपा. सलाहकार मोहन मैत्रेय, आर.के.राठी आदि उपस्थित हैं।
     उल्लेखनीय है कि हरियाणा ग्रन्थ अकादमी का गठन पिछले वर्ष सितम्बर माह में मुख्यमंत्री श्री हुड्डा के प्रयासों से किया गया था। अकादमी ने सप्त सिंधु का पुनः प्रकाशन शुरु किया है। इसकी प्रकाशन अवधि त्रैमासिक रखी गयी है। प्रवेशांक लोक साहित्य पर केन्द्रित है, जिसमें डॉ. खंडेलवाल का हरियाणवी कहावतें, कमलेश भारतीय का लोक साहित्य को नयी पीढ़ी से परिचित करवाने की चुनौती, धर्मपाल मलिक का हरियाणवी लोक साहित्य में हास्य व्यंग्य, डॉ. पूरणचंद्र शर्मा का हरियाणा का लोक नाट्य सांग तथा डॉ. सुभाषचंद्र, रामफल चहल, महासिंह पूनिया आदि रचनाकारों के आलेख प्रकाशित हैं। अकादमी शीध्र ही कथा पत्रिका को प्रकाशन भी शुरू करेगी। (समाचार सौजन्य : धर्मेन्द्र सिंह, अकादमी भवन, पंचकूला)

परिचर्चा एवं ‘घूंघट’ का लोकार्पण

     विगत 20 मई को ‘हिमाक्षरा राष्ट्रीय साहित्य परिषद, वर्धा (महाराष्ट्र) के तत्वावधान एवं डॉ. रीता सिंह की अध्यक्षता व डॉ. वर्षा पुनवटकर एवं वृन्दावन राय सरल के संचालन में दमन द्वीप के एक होटल में ’वैश्वीकरण के सन्दर्भ में साहित्यकार की भूमिका’ विषय पर परिचर्चा, श्री श्यामशरण शर्मा के गीत संग्रह ‘घूंघट’ का लोकार्पण तथा कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कवि श्री वृन्दावन राय सरल एवं व्यंग्यकार श्री अमर सिंह राजपूत को ‘अष्टक्षेत्रीय गौरव सम्मान’ से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में कई राज्यों के साहित्यकारों ने भाग लिया। हिमाक्षरा के अध्यक्ष डा. इसरार कुरेशी ‘गुनेश’ ने धन्यवाद ज्ञापित किया। (समाचार सौजन्य : वृन्दावन राय सरल, पाटेदार कालोनी, सागर, म.प्र.)

डॉ. ब्रह्मजीत गौतम को ‘डॉ. रमेशचन्द्र चौबे सम्मान’

   




    












       विगत दिनों जबलपुर की संस्था कादम्बरी द्वारा सुप्रसिद्ध साहित्यकार डा. ब्रह्मजीत गौतम को उनकी पुस्तक ‘जनक छन्द: एक शोधपरक अध्ययन’ के लिए डॉ. रमेश चन्द्र चौबे सम्मान से सम्मानित किया गया। सम्मान में उन्हें शॉल, प्रमाणपत्र व रु.2100/- की नकद राशि कई प्रसिद्ध एवं अनेक स्थानीय साहित्यकारों की उपस्थिति में प्रदान की गयी। (समाचार सौजन्य : वंशस्थ गौतम)

लघुकथा लेखक कोश

     श्री सुरेश जांगिड़ उदय ने एक राष्ट्र स्तरीय वृहद लघुकथा लेखक कोश की योजना बनाई है। लघुकथा लेखकों के पूर्ण परिचय, फोटो एवं लघुकथा के सम्बन्ध में उनके कार्यों/योगदान की विस्त्रत जानकारी 30 सितम्बर 2012 तक कोश में निशुल्क प्रकाशन हेतु सुरेश जांडिल उदय, डी.सी. निवास के सामने, करनाल रोड, कैथल-136027 (हरि.) के पते पर आमंत्रित है। (समाचार सौजन्य : सुरेश जांडिल उदय, कैथल)

पन्द्रहवें दिव्य पुरस्कार घोषित

     बहुचर्चित अम्बिका प्रसाद दिव्य स्मृति प्रतिष्ठा पुरस्कारों की घोषणा गत 20 अप्रैल को साहित्य सदन, भोपाल में आयोजित समारोह में की गई। वेद प्रकाश कंवर (दिल्ली) को ‘सेरीना’ उपन्यास पर, डॉ. सुधा ओम ढींगरा (यूएसए) को कहानी संग्रह ‘कौन सी ज़मीन अपनी’ एवं कैलाश पचौरी (बैरसिया) को काव्य संग्रह ‘सन्नाटे की सुराही में’ पर दिव्य पुरस्कारों के साथ नौ अन्य रचनाकारों को दिव्य रजत अलंकरण प्रदान किये जायेंगे, जिनमें डॉ. नताशा अरोड़ा, कुमार शर्मा अनिल, कुँवर किशोर टण्डन, राजेन्द्र शर्मा ‘अक्षर’, डॉ. अशोक गुजराती, डॉ. एम.एल.खरे, श्रीमती आशमा कौल, संतोष सुपेकर एवं श्याम त्रिपाठी शामिल हैं। निर्णायक मण्डल में सर्वश्री मोती सिंह (अध्यक्ष), प्रो. त्रिभुवन नाथ शुक्ल, प्रो. विजय कुमार अग्रवाल, प्रो. एच.एस. त्रिपाठी, हरिकृष्ण तैलंग, प्रियदर्शी खैरा, प्रभुदयाल मिश्र, आनन्द त्रिपाठी, मयंक श्रीवास्तव, संतोष खरे, अनिल माथुर, राजेन्द्र नागदेव, कैलाश नारायण शर्मा, रमेश चन्द्र खरे एवं श्रीमती विजय लक्ष्मी विभा शामिल रहे। इसी के साथ 16वें दिव्य पुरस्कारों हेतु 30 नवम्बर 2012 तक प्रविष्टियां आमन्त्रित की गयी हैं। जानकारी हेतु श्रीमती राजो किंजल्क, 145-ए, सांईनाथ नगर, सी-सेक्टर, कोलार, भोपाल-42 (मोबा. 09977782777 ईमेल: jagdishkinjalk@gmail.com) पर सम्पर्क करें। (समाचार सौजन्य : जगदीश किंजल्क, संयोजक: दिव्य पुरस्कार)

शब्द प्रवाह साहित्य सम्मान 2013 हेतु पुस्तकें आमन्त्रित

     उज्जैन की साहित्यिक संस्था ‘शब्द प्रवाह साहित्य मंच’ द्वारा आयोजित ‘शब्द प्रवाह साहित्य सम्मान’ हेतु करव्य संग्रह, व्यंग्य संग्रह एवं लघुकथा संग्रह की प्रविष्टियां 31 दिसम्बर 2012 तक आमन्त्रित की गई हैं। विवरण हेतु संदीप सृजन, ए-99, व्ही.डी. मार्केट, उज्जैन-6 (मोबा. 09926061800 व 09406880599) पर सम्पर्क किया जा सकता है। (समाचार सौजन्य : संदीप सृजन)

प्रज्ञा कहानी पुरस्कार-2012 हेतु आमन्त्रण

     प्रज्ञा प्रकाशन, रायबरेली के सौजन्य से द्वितीय प्रज्ञा कहानी पुरस्कार-2012 हेतु प्रविष्टियां (मौलिक/अप्रकाशित कहानी) 31.10.2012 तक प्रज्ञा प्रकाशन, 24, जगदीशपुरम्, लखनऊ मार्ग, निकट त्रिपुला चौराहा, रायबरेली-229001 (उ.प्र.) के पते पर आमन्त्रित की गई हैं। विशेष विवरण उक्त पते या मोबाइल 09425323193 पर प्राप्त किया जा सकता है। (समाचार सौजन्य : किरण वर्मा)


प्रवीण अग्रवाल स्मृति सम्मान एवं काव्य गोष्ठी


मुज़फ्फरनगर। आज अखिल भारतीय भाषा साहित्य समागम (उत्तर प्रदेश) के तत्वाधान में एवं नैनीताल बैंक की ९० वी वर्ष गांठ के अवसर पर बैंक के सहयोग से सम्मान समारोह एवं काव्य गोष्ठी का भव्य आयोजन
किया गया।  कार्य क्रम की अध्यक्षता जाने माने  साहित्यकार डॉ. जे.पी. सविता जी ने की तथा मुख्य अतिथि रहे देवबंद से पधारे वरिष्ठ  साहित्यकार श्री महेंदर कुमार कम्बोज व अतिथि श्री अजय भटनागर, मैनेजर नैनीताल बैंक रहे। काव्य  गोष्ठी एवं सम्मान समारोह का कुशल सञ्चालन डॉ अलका वशिस्थ ने किया।
कार्य क्रम के संयोजक डॉ अ कीर्ति वर्धन ने आज के कार्यक्रम के बारे में बताते हुए कहा की साहित्य व साहित्यकार ही ऐसा है जो जाति,धर्म व क्षेत्रवाद से बढ़ कर राष्ट्र विकास के लिए काम करता है। अपने १३ वर्ष दिल्ली प्रवास के पश्चात अपने नगर मुज़फ्फरनगर में आने के बाद साहित्य परिवार को और अधिक विस्तार देने को आज की काव्य गोष्ठी का उद्देश्य बताते हुए देश के अलग-अलग नगरों से आये कवियों का परिचय कराया। जिसमे श्री अली हसन मकरैंडिया (दादरी, उ.प्र.), श्री गाफिल स्वानी (बुलंदशहर, उ.प्र.),  डॉ ज्वाला प्रसाद कौशिक (मेरठ, उ.प्र.), श्री महेंदर कम्बोज (देवबंद, उ.प्र.), श्री प्रवीण आर्य (दिल्ली),  कुमारी महिमा श्री  (दिल्ली), श्री लाल बिहारी लाल (दिल्ली), श्रीमती सोनू गुप्ता (दिल्ली),  श्री शिव प्रभाकर ओझा (फरीदाबाद, हरियाणा), डॉ. अनिल शर्मा अनिल (धामपुर), श्री बिजेंदर शर्मा (सहारनपुर, उ.प्र.), श्री प्रीतम कुमार प्रीतम (शामली) तथा स्थानीय कवियों में श्री नेम पाल प्रजापति, डॉ सुशीला शर्मा, श्री पवन कुमार पवन, श्री अमित धरम सिंह, डॉ मुकेश दर्पण, श्री अरुण अकेला, डॉ अ कीर्तिवर्धन व अन्य कवियों ने कविता पाठ किया।
बाहर से आये सभी कवियों का पुष्प माला, शाल, प्रमाण पत्र   तथा प्रतीक चिन्ह देकर 'प्रवीण  अग्रवाल स्मृति सम्मान' से अलंकृत किया गया। सभी स्थानीय कवियों को तथा विशिष्ट मेहमानों को भी प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।  मुज़फ्फरनगर के पूर्व नगर अध्यक्ष श्री कपिल देव भी इस अवसर पर उपस्थित रहे। सभागार में १०० से अधिक कवियों एवं श्रोताओं की उपस्थिति ने कार्यक्रम को भव्यता प्रदान की।
कार्यक्रम का प्रारंभ माँ सरस्वती के सम्मुख दीप प्रज्वलन से किया गया। श्री अली हसन मकरैंडिया ने सरस्वती वंदना का पाठ किया। विभिन्न कवियों अपनी सशक्त कविताओं का शानदार कविता पाठ किया और श्रोताओं को  झूमने  पर विवश कर दिया। काव्य गोष्ठी को अंतिम परवान दादरी से आये श्री अली हसन मकरैंडिया ने दिया उन्होंने अनेक रचनाओं का पाठ किया और वेद, पुराणों के सन्दर्भ से राम और राम सेत  की महिमा बखान की। श्री कपिल देव अग्रवाल पूर्व अध्यक्ष नगर पालिका ने इस प्रकार के कार्यकर्मों के बार-बार आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया।
      श्री अजय भटनागर, मैनेजर नैनीताल बैंक ने  उपस्थित सभी लोगों का आभार व्यक्त किया। स्काय  लार्क कोलिज के प्रबधन, ग्रीन कलर लैब, हिंदुस्तान विज्ञापन एजेंसी के मालिक सुधीर जी,वाणी मुज़फ्फरनगर, समर्पण-मुज़फ्फरनगर, भारतीय साहित्यकार परिषद् दिल्ली, समाचार पत्र के संवाद दाताओं व संपादकों के साथ साथ आज के कार्यक्रम की संचालिका डॉ अलका वशिस्थ का हार्दिक आभार व्यक्त किया।  डॉ अ कीर्ति वर्धन ने नैनीताल बैंक व बहार से उनके निमंत्रण पर पधारे सभी साहित्यकारों ,स्थानीय संस्थाओं तथा समारोह में उपस्थित कवियों, श्रोताओं का धन्यवाद् किया। अंत में जलपान के साथ गोष्ठी का समापन किया गया।  (समाचार सौजन्य :  डॉ अ कीर्ति वर्धन मोबाईल ८२६५८२१८००)

देवेन्द्र कुमार मिश्रा को ‘आलराउन्ड कवि’ की उपाधि

     साहित्यकार देवेन्द्र कुमार मिश्रा को फरीदकोट की संस्था आलराऊँड अकादमी द्वारा ‘आलराउन्ड कवि’ की उपाधि से विभूषित किया गया। श्री मिश्रा को यह सम्मान उनके बहुमुखी व्यक्तित्व एवं काव्य साधना को ध्यान में रखते हुए प्रदान किया गया। (समाचार सौजन्य : अमित कुमार लाड़ी)



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