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बुधवार, 28 दिसंबर 2011

अविराम विस्तारित


अविराम का ब्लॉग :  वर्ष : १, अंक : ०४, दिसंबर २०११ 


।।क्षणिकाएँ।।



सामग्री :  रतन चन्द्र रत्नेश,  महावीर रवांल्टा एवं  सूर्यनारायण गुप्त ‘सूर्य’ की क्षणिकाएं।



रतन चन्द्र रत्नेश




दो क्षणिकाएं


1. उदासी
एक उदासी जकड़ लेती है
यक-ब-यक
बिना किसी कारण
शायद देह में पैदा हो रहा है
कोई रसायन
रेखांकन : डॉ.  सुरेन्द्र वर्मा 
खुशियों को संभालने के लिए।


2. संतोष
मेरे लिए
बस इतना ही
तन्हाई, संगीत
और थोड़ी-सी नींद।
  • 1859, सैक्टर 7-सी, चण्डीगढ़-160019




महावीर रवांल्टा




तीन क्षणिकाएं 


1.
मैं उसके चेहरे को
अपने से मिलाने लगा
पर वहाँ तो
आँसू ही आँसू थे।
रेखांकन : सिद्धेश्वर 

2.
गुमनाम है जिन्दगी
उसी को
अंधेरा कहूँगा
सरकती आत्मा को खोजूँ
उसी को
सवेरा कहूँगा।

3.
जिन्दगी में
ख्वाब देखकर मैंने
विष घोला
जिसे
मुझे ही पीना था। 
  • ‘संभावना', महरगाँव, पत्रालय: मोल्टाड़ी, पुरोला, उत्तरकाशी-249185 (उत्तराखण्ड)

सूर्यनारायण गुप्त ‘सूर्य’


दो क्षणिकाएं

1. आत्मकथा

लिख गया
हवा का झोंका
तपा मरुथल में रेत कणों से
एक लहरदार लेख
द्रश्य छाया चित्र : उमेश महादोषी 
जिसे-
ढलते सूरज की ओट में
पढ़ने का प्रयास करता हूँ
आत्मकथा की तरह।

2. विज्ञापन

संगमरमरी संसदों से
खुशहाली का वक्तव्य है
अभाव, तनाव, दहशत
देश का द्रष्टव्य है।
  • ग्राम व पोस्ट- पथरहट (गौरीबाजार), जिला- देवरिया (उ.प्र.)


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