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रविवार, 2 फ़रवरी 2014

अविराम विस्तारित

अविराम का ब्लॉग :  वर्ष :  3,  अंक :  03-04,  नवम्बर-दिसम्बर 2013


। ।क्षणिकाएँ। ।


सामग्री :  इस अंक में श्री सुरेश यादव एवं सु-श्री शोभा रस्तोगी की क्षणिकाएं।


सुरेश यादव 




तीन क्षणिकाएं 

01. धूप का दर्द
धूप का भी 
दर्द होता तब
आँखों में
जब-
ताज़गी के नशे में
फैलती-
सब्हा की धूप
और आँखें थकी रात भर की
समेटे कडुवापन
अधखुली रह जाती।

02. किसने
हलकी-हलकी थपकियां देकर
छाया चित्र : डॉ बलराम अग्रवाल 

गहरी नींद का
उपहार दिया- किसने?
महीन धागों से फिर सीं डाले होठ
बदल डाला मौन
स्वीकृत की मोहर में- किसने?

03. पाले नहीं नेवले
चर्चाओं के विषय
बन रहे थे
सांप गलियो के
तब तो पाले नहीं घरों में नेवले

चौखट पर- जब
पटके जा रहे
सांपों के फन
बहस में उलझे हैं बावले।

  • 2/1, एम सी डी फ्लैट्स (एंड्रूजगंज), साउथ एक्सटेंशन(पार्ट-2), नई दिल्ली-110049 




शोभा रस्तोगी शोभा




तीन क्षणिकाएं 

01.
गई रात 
आसमां रोता रहा 
धरती बन गई समंदर 
सुबह 
खिलखिला उठा नभ 
धरा अब भी.....
वैसी ही.....
सम्हाले खड़ी है 
पराया दर्द।

02.
हुए हैं कई क़त्ल
रेखा चित्र : शशि भूषण बड़ोनी 

सरेआम यहाँ 
गवाह है नैनों की 
रिसती कोर 
दबी पड़ी है लाशें 
सपनों के टुकड़ों की 
गौरतलब है यह 
आज भी उनसे 
खुश्बू-सनी हवाएँ 
उड़ा करती हैं।

03.
उबलते आक्रोश, 
नैन झपकाते जज्बात 
बर्फ बन गए  
तेरे आने से।

  • आर.जेड. एण्ड डी-208-बी, डी.डी.ए. पार्क रोड, राजनगर-2, पालम कालोनी, नई दिल्ली-110077 

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