आपका परिचय

बुधवार, 14 फ़रवरी 2018

अविराम विस्तारित

।।कविता अनवरत।।



सतीश चन्द्र शर्मा ‘सुधान्शु’




गीत
कर रहा संकोच महुआ

हो गये हैं पत्तियों से
पेड़ सूने से।

दे रहे न पेड़ अब 
ठंडी हवाएँ।
पंछियों ने घोंसले 
तक न बनाए।
दर्द मौसम दे रहा, 
दिन-रात दूने से।।

फूल अपनी सुगन्ध
छायाचित्र :
उमेश महादोषी
 

खोते जा रहे।
तितलियों को अब वे
तनिक न भा रहे।
कर रहे परहेज भौंरे
तलक छूने से।।

अतिक्रमित हैं मार्ग
शूलों से भरे।
कदम कोई कहो
भला कैसे धरे।
कर रहा संकोच महुआ 
नित्य चूने से।।

  • ब्रह्मपुरी, पिन्दारा रोड, बिसौली-243720, जिला बदायूँ, उ.प्र./मो. 9451644006

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