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रविवार, 5 नवंबर 2017

गतिविधियाँ

अविराम  ब्लॉग संकलन,  वर्ष  :  6,   अंक  :  11-12,  जुलाई-अगस्त  2017




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आचार्य देवेंद्र देव के  गीत संग्रह ‘आवाज़ दे रहा महाकाल’ का भव्य लोकार्पण 
 
     विश्व जागृति मिशन के तत्त्वावधान में अन्तर्राष्ट्रीय गणेश-महालक्ष्मी महायज्ञ के अवसर पर परम पूज्य आचार्य श्री सुधांशु जी महाराज के कराम्बुजों से कविवर देवेंद्र देव जी का सद्यः प्रकाशित प्रज्ञा-बोध-गीत-संग्रह ‘आवाज दे रहा महाकाल’ का भव्य लोकार्पण शुक्रवार, अक्टूबर 6, 2017 को आनन्दधाम यज्ञशाला में सम्पन्न हुआ। श्री गणेश लक्ष्मी महायज्ञ के दूसरे दिन गीत संग्रह का विमोचन करने के बाद श्रद्धेय आचार्य सुधांशु जी महाराज ने महाकाल और काव्य की बड़ी सुन्दर व्याख्या की और आचार्य देवेन्द्र देव को विलक्षण कवि बताया। उन्होंने कहा कि यह गीत संग्रह संकल्प, विश्वास, शक्ति, साधना एवं प्रेम की एक अनुपम कृति है, जिससे देश-दुनिया के लोगों को कर्तव्यपथ पर चलने की प्रेरणा मिलेगी। उन्होंने 65वें
जन्मदिन पर देवजी करे उन्हें माला पहनाकर यज्ञ भगवान का आशीर्वाद भी प्रदान किया। 

      विख्यात कवि मदन मोहन वर्मा क्रान्त ने आचार्य देवेन्द्र देव को शुभकामनायें देते हुए कहा कि उनका यह गीत संग्रह मानवीयता, एकता और समरसता का विलक्षण सन्देश देता है। युवा कवि शम्भू ठाकुर ने कहा कि उनके गीत देश एवं समाज की बहुआयामी समस्याओं से परिचित कराते हैं। डॉ. अवनीश सिंह चौहान ने कहा कि आज के गीतों में सामाजिक विषमताओं, विद्रूपताओं को केंद्र में रखकर नकारात्मक भावों को उजागर करने का ट्रेंड चल रहा है, जबकि ‘आवाज़ दे रहा महाकाल’ के गीत सकारात्मक ऊर्जा से ओतप्रोत हैं। इन गीतों में माता, पिता, गुरू, समाज, राष्ट्र, आत्मा, परमात्मा आदि विषयों को करीने से व्यंजित किया गया है ताकि जीव मात्र का कल्याण हो सके।   
      इस काव्य पुस्तक में कवि देवेन्द्र देव के उन सभी गीतों-कविताओं को संकलित किया गया है, जो समय-समय पर अखण्ड ज्योति तथा युग निर्माण योजना में प्रकाशित होती रही हैं। श्री देव ने अपनी एक रचना इस मौक़े पर सबको सुनायी। उन्होंने 108 कुण्डीय यज्ञशाला में हज़ारों यज्ञ-साधकों की मौजूदगी में पुस्तक विमोचन को अपने जीवन का ख़ास अवसर कहा। उप्र सरकार के नगर विकास विभाग में अधिकारी रहे श्री देव एक गायत्री साधक हैं और सम्प्रति संस्कार भारती प्रकोष्ठ में अखिल भारतीय सह-साहित्य-प्रमुख के रूप में राष्ट्रसेवा कर रहे हैं। देवजी 13 अति महत्वपूर्ण विषयों पर महाकाव्यों की रचना करने वाले राष्ट्रीय स्तर के यशस्वी कविता-साधक हैं। उन्होंने गायत्रेय (गायत्रीपुत्र प.पू.
पं.श्रीराम शर्मा आचार्य) बांग्ला-त्राण, युवमन्यु (स्वामी विवेकानन्द) हठयोगी नचिकेता, राष्ट्र-पुत्र यशवन्त, बलि-पथ, इदं राष्ट्राय, अग्नि-ऋचा (डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम), लोक-नायक (जय प्रकाश नारायण), बिरसा मुंडा, शंख महाकाल का, कैप्टन बाना सिंह और बिस्मिल नामक महाकाव्य रचे हैं। इस अवसर पर देश-विदेश के हज़ारों मिशन साधकों के अलावा अमर सोनी, उदितेंदु कुमार व संतोष ठाकुर आदि युवा कवि भी उपस्थित थे। कार्यक्रम का बेहतरीन संचालन-समन्वयन विश्व जागृति मिशन के निदेशक श्री राम महेश मिश्र ने किया। {समाचार प्रस्तुति : डॉ. अवनीश सिंह चौहान}






 श्रीनाथद्वारा में हिन्दी लाओ, देश बचाओ समारोह-2017 संपन्न



प्रभु श्रीनाथजी की नगरी श्रीनाथद्वारा स्थित साहित्य मण्डल का ‘हिन्दी लाओ, देश बचाओ समारोह-2017’ विगत 14-16 सितम्बर 2017 को गरिमापूर्वक सम्पन्न हुआ। संस्था के प्रधानमंत्री श्री श्यामप्रकाश देवपुरा के संयोजन-संचालन में सम्पन्न इस समारोह में अनेक कार्यक्रमों सहित देश के अनेक भागों से पधारे हिन्दी-सेवी साहित्यकारों का सम्मान भी किया गया। 
प्रथम दिन प्रातः हिन्दी के पक्ष में जन-जागरण के उद्देश्य से नगर में एक रैली निकाली गई, जिसमें संस्था द्वारा संचालित स्कूल के बच्चों के साथ सहभागी साहित्यकार एवं नगर के गणमान्य नागरिक शामिल हुए। एक अच्छी बात यह देखने को मिली कि नगर के जिस भी हिस्से से यह रैली निकली, जनसमूह विविध क्रियाकलापों के साथ मानसिक रूप से भी रैली को समर्थन देता दिखा।                 
       तीनों दिन के समारोह संस्था द्वारा संचालित स्कूल के बच्चों द्वारा प्रस्तुत नृत्य एवं संगीत के कार्यक्रमों से आरम्भ हुए। रोजाना एक-एक सत्र हिन्दी केन्द्रित आलेख वाचन का रखा गया, जिनमें लगभग तीस विद्वानों ने आलेख पढ़े। तीनों दिनों में आयोजित विभिन्न सत्रों में सात दर्जन से अधिक विद्वानों को मेवाड़ी परम्परा से विभिन्न सम्मानों एवं उपाधियों से सम्मानित किया गया। एक अविस्मरणीय बात यह थी कि सभी सम्मानित अतिथियों को औपचारिक सम्मान अलंकरणों के साथ प्रभु श्रीनाथजी का प्रसाद भी भेंट किया गया। इस प्रकार हिन्दी सेवियों का यह आयोजन भक्तिभाव से परिपूर्ण भी रहा। 



        आयोजन में कई पत्रिकाओं एवं पुस्तकों का लोकार्पण भी किया गया। पहले दिन संस्था के विशाल
पुस्कतालय में प्राप्त विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं एवं पुस्तकोे की प्रदर्शनी भी लगाई गई। ज्ञातव्य है कि साहित्य मण्डल संस्था 1937 में स्थापित हुई थी। हिन्दी के लिए समर्पित इस संस्था के संचालन में जन सहयोग के साथ देवपुरा परिवार का महत्वपूर्ण योगदान है। श्री श्यामप्रकाश देवपुरा से पूर्व उनके यशस्वी पिता स्मृतिशेष श्री भगवतीप्रसादजी देवपुरा संस्था के प्रधानमंत्री होते थे। उनकी स्मृति में भी प्रत्येक वर्ष 6 जनवरी को भव्य समारोह आयोजित किया जाता है। {समाचार प्रस्तुति : अविराम साहित्यिकी प्रतिनिधि}






विज्ञान व्रत को प्रथम मनु ‘स्मृति सम्मान’







2 सितम्बर 2017 की शाम को नयी दिल्ली के हिन्दी भवन में अयन प्रकाशन द्वारा आयोजित एक भव्य समारोह में ख्यातिप्राप्त ग़ज़लकार श्री विज्ञान व्रत को प्रथम मनु ‘स्मृति सम्मान’ प्रदान किया गया। अयन प्रकाशन की ओर से श्री विज्ञान व्रत को सम्मान स्वरूप शाल, नारियल और ग्यारह हज़ार रुपए भेंट स्वरूप प्रदान किये गये। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रसिद्ध साहित्यकार श्री बालस्वरूप राही ने की। विशिष्ट अतिथि थे ख्याति प्राप्त साहित्यकार/पत्रकार श्री बी. एल. गौड़। प्रसिद्ध व्यंग्यकार श्री हरीश नवल मुख्य वक्ता थे। श्री लक्ष्मीशंकर वाजपेयी और श्री रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’ भी मंचस्थ रहे। इस अवसर पर बोलते हुए श्री भूपाल सिंह सूद अत्यंत भावुक हो गये! सभागार पत्रकारों और साहित्यकारों से खचाखच भरा हुआ था। प्रसिद्ध पत्रकार और ‘अभिनव इमरोज़’ के सम्पादक श्री देवेन्द्र कुमार बहल, ‘आधुनिक साहित्य’ के यशस्वी सम्पादक श्री आशीष कांधवे के अतिरिक्त कासगंज से पधारे लेखक राव मुकुल मानसिंह तथा सहारनपुर से आये श्री आर पी सारस्वत और साहिबाबाद से ब्रजकिशोर वर्मा ‘शैदी’ और फ़रीदाबाद के प्रसिद्ध कवि हरेराम समीप र्कायक्रम में उपस्थित रहे। कानपुर की प्रसिद्ध कवयित्री सुश्री कल्पना मनोरमा, दिल्ली से सुश्री कुसुुम सिहं, सुश्री दिव्या सिंह, सुश्री वाञ्छा, प्रसिद्ध कवयित्री सुश्री रीना अग्रवाल और चित्रकार श्री भगत सिंह ने अपनी उपस्थिति से र्कायक्रम को गरिमा प्रदान की। श्रीमती चन्द्रप्रभा सूद और चिरंजीव पीयूष सूद का कार्यक्रम में सार्थक योगदान रहा। श्री अनिल वर्मा ‘मीत’ ने कार्यक्रम का सफल संचालन किया । (समाचार प्रस्तुति : अनिल वर्मा ‘मीत’)






लघुकथा में लोक मांगलिक चेतना होना जरूरी है : सूर्यकांत नागर

       डॉ. रमेश चंद्र की लघुकथाएं सादगी से भरी हुई है। जैसा उनका सहज जीवन है, वैसी ही उनकी लघुकथाएं हैं। उनका जीवन उनकी लघुकथाओं में प्रतिबिंबित होता है। उनकी लघुकथाएँ जनपक्षधर हैं और लघुकथा में लोक मांगलिक चेतना होना जरूरी है। उसी से जन जागृति आती है। यह बात वरिष्ठ कथाकार सूर्यकांत नागर ने ‘क्षितिज’ संस्था द्वारा आयोजित डॉ. रमेश चंद्र के लघुकथा संग्रह ‘मौत में जिंदगी’ के लोकार्पण प्रसंग पर, अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कही। उन्होंने यह भी कहा कि, लघुकथा को किसी नियमावली में नहीं बाँधा जा सकता। शिल्प के स्तर पर निरंतर प्रयोग हो रहे हैं, और प्रयोग से ही प्रगति होती है।
      कार्यक्रम के अतिथि के रुप में खंडवा से पधारे कवि डॉ. प्रताप राव कदम ने पुस्तक की लघुकथाओं के शिल्प की तारीफ की और कुछ महत्वपूर्ण लघुकथाओं का ज़िक्र भी किया। डॉ. पुरुषोत्तम दुबे ने कहा कि इन लघुकथाओं में प्रतिकात्मक स्तर पर कई बातें कही गई हैं और पौराणिक व्यंजनाओं का सशक्त इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने ‘कबीर का फाइव स्टार होटल’ लघुकथा की विवेचना की। डॉ. योगेंद्रनाथ शुक्ल ने पुस्तक पर चर्चा करने के साथ ही उन साहित्यिक षड्यंत्रों का जिक्र किया जो प्रेमचंद को साहित्य से खारिज करने की बात करते हैं। उन्होंने कहा कि आज के लेखकों ने अपनी लाइन बड़ी करने के लिए इतिहास के साथ छेड़छाड़ नहीं करना चाहिए। पुस्तक पर समीक्षा आलेख में कवि ब्रजेश कानूनगो ने कहा कि रमेश जी सचमुच मानवीय रिश्तों और मानवीय प्रवृतियों से संवेदित होकर सरल रुप से अपनी अनुभूतियों को लघुकथा का स्वरूप देते हैं। उन्होंने कहा कि लेखक एक व्यंग्यकार भी है और जब एक व्यंग्य दृष्टि सम्पन्न लेखक किसी अन्य विधा में अपनी बात कहता है तो वहाँ भी व्यंग्य के उपस्थित होने की अपेक्षा पाठक को हो जाती है। श्रीमती ज्योति जैन ने लघुकथाओं को सांकेतिक बताते हुए कहा कि वह कम शब्दों में पुरअसर तरीके से अपनी बात कहती है। उनकी दो रुपए तथा पेड़ औऱ मनुष्य लघुकथाओं का ज़िक्र करते हुए कहा कि इनमें सांकेतिक माध्यमों का उपयोग किया गया है। डॉ. रमेशचंद्र ने अपनी लघुकथाओं का वाचन किया एवं अध्यक्ष के हाथों पुस्तक का लोकार्पण करवाया। कार्यक्रम का संचालन क्षितिज के अध्यक्ष एवं कथाकार सतीश राठी ने किया। 
       कार्यक्रम में सर्वश्री राकेश शर्मा संपादक वीणा, सुरेश उपाध्याय, प्रदीप मिश्र, रजनी रमण शर्मा, हरेराम वाजपेई, तीरथ सिंह खरबंदा, अशोक शर्मा, कविता वर्मा, अश्विनी कुमार दुबे, अंतरा करवड़े तथा उज्जैन से साहित्य मंथन संस्था के साहित्यकार रमेश चन्द्र शर्मा एवं अन्य साहित्यकार उपस्थित थे। सुरेश बजाज ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया। (समाचार सौजन्य : सतीश राठी)






जोधपुर एयरपोर्ट में आयोजित हिंदी पखवाड़ा समारोह का डाक निदेशक के. के. यादव किया शुभारम्भ 


      हिन्दी सिर्फ एक भाषा ही नहीं बल्कि हम सबकी पहचान है, यह हर हिंदुस्तानी का हृदय है। हिन्दी को राष्ट्रभाषा किसी सत्ता ने  नहीं बनाया, बल्कि भारतीय भाषाओं और बोलियों के बीच संपर्क भाषा के रूप में जनता ने इसे चुना। उक्त उद्गार राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर के निदेशक डाक सेवाएं एवं चर्चित ब्लॉगर व साहित्यकार श्री कृष्ण कुमार यादव ने जोधपुर एयरपोर्ट के तत्वाधान में आयोजित हिंदी पखवाड़ा समारोह का बतौर मुख्य अतिथि शुभारम्भ करते हुए व्यक्त किये। कार्यक्रम की अध्यक्षता जोधपुर एयरपोर्ट के निदेशक श्री जी. के. खरे ने की। 

      डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि हिन्दी में विश्व भाषा बनने की क्षमता है। जैसे-जैसे विश्व में भारत के प्रति दिलचस्पी बढ़ रही है, वैसे-वैसे हिन्दी के प्रति भी रुझान बढ़ रहा है। आज परिवर्तन और विकास की भाषा के रूप में हिन्दी के महत्व को नये सिरे से रेखांकित किया जा रहा है। श्री यादव ने कहा कि हिन्दी आज सिर्फ साहित्य और बोलचाल की ही भाषा नहीं, बल्कि विज्ञान-प्रौद्योगिकी से लेकर संचार-क्रांति और सूचना-प्रौद्योगिकी से लेकर व्यापार की भाषा भी बनने की ओर अग्रसर है। डिजिटल क्रान्ति के इस युग में वेबसाइट्स, ब्लॉग और फेसबुक व टविटर जैसे सोशल मीडिया ने तो हिन्दी का दायरा और भी बढ़ा दिया है। 


      कार्यक्रम की  अध्यक्षता करते हुए जोधपुर एयरपोर्ट के निदेशक श्री जी. के. खरे ने कहा कि संविधान में वर्णित सभी प्रांतीय भाषाओं का पूर्ण आदर करते हुए इस विशाल बहुभाषी राष्ट्र को एक सूत्र में बांधने में भी हिन्दी की एक महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में हिन्दी भाषा के प्रयोग पर हमें गर्व महसूस करना चाहिए। राजभाषा वरिष्ठ सहायक रवि प्रकाश टाक ने पावर प्वाइंट प्रजेंटेशन द्वारा जोधपुर हवाई अड्डा कार्यालय में चल रही हिंदी गतिविधियों की जानकारी दी। 
      कार्यक्रम का आरम्भ दीप प्रज्वलन और मां सरस्वती पर पुष्पहार अर्पित कर हुआ। कार्यक्रम के अंत में  मुख्य अतिथि डाक निदेशक श्री कृष्ण कुमार यादव  को जोधपुर एयरपोर्ट  निदेशक श्री जी. के. खरे ने स्मृति चिन्ह भेंट कर आभार व्यक्त किया। (समाचार प्रस्तुति :  रवि प्रकाश टाक) 




बीसवें अम्बिकाप्रसाद दिव्य पुरस्कारों हेतु पुस्तकें आमंत्रित

‘साहित्य सदन’ भोपाल द्वारा राष्ट्रीय ख्याति के बीसवें अम्बिकाप्रसाद दिव्य स्मृति प्रतिष्ठा पुरस्कारों हेतु साहित्य की अनेक विधाओं में पुस्तकें आमंत्रित की गई हैं। उपन्यास, कहानी, कविता, व्यंग, निबन्ध एवं बाल साहित्य विधाओं पर प्रत्येक के लिए इक्कीस सौ रुपये राशि के पुरस्कार प्रदान किये जायेंगे। दिव्य पुरस्कारों हेतु पुस्तकों की दो प्रतियाँ, लेखक के दो चित्र एवं प्रत्येक विधा की प्रविष्टि प्रवेश शुल्क के साथ भेजना होगा। हिन्दी में प्रकाशित पुस्तकों की मुद्रण अवधि 01 जनवरी 2015 से लेकर 31 दिसम्बर 2017 के मध्य होना चाहिये। राष्ट्रीय ख्याति के इन प्रतिष्ठापूर्ण चर्चित दिव्य पुरस्कारों हेतु प्राप्त पुस्तकों पर गुणवत्ता के क्रम में दूसरे स्थान पर आने वाली पुस्तकों को दिव्य प्रशस्ति पत्रों से सम्मानित किया जायेगा। अन्य जानकारी हेतु मोबाइल नं. 09977782777 और दूरभाष रू 0755-2494777 एवं ईमेल : jagdishkinjalk@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता  है । पुस्तकें ‘श्रीमती राजो किंजल्क, साहित्य सदन, 145-ए, सांईनाथ नगर, सी सेक्टर, कोलार रोड, भोपाल-462042, म.प्र.’ पते पर 30 दिसम्बर 2017 तक प्राप्त हो जानी चाहिए। कृपया प्रेषित पुस्तकों पर पेन से कोई भी शब्द न लिखें। (समाचार सौजन्य : जगदीश किंजल्क)




ज्योत्स्ना कपिल के कहानीसंग्रह का लोकार्पण संपन्न


      

बरेली की युवा कथाकार ज्योत्स्ना कपिल के कहानी संग्रह ‘प्यासी नदी बहती रही’ का लोकार्पण विगत दिनों नयी दिल्ली के हिन्दी भवन में अयन प्रकाशन द्वारा आयोजित एक भव्य समारोह में मंचस्थ अतिथियों द्वारा किया गया। प्रसिद्ध साहित्यकार श्री बालस्वरूप राही की अध्यक्षता में संपन्न कार्यक्रम में मंचस्थ अतिथियों में ख्याति प्राप्त साहित्यकार/पत्रकार श्री बी. एल. गौड़, प्रसिद्ध व्यंग्यकार श्री हरीश नवल, कवि श्री लक्ष्मीशंकर वाजपेयी और श्री रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’ प्रमुख रूप से शामिल थे। 
        अतिथियों के साथ अयन प्रकाशन के श्री भूपाल सिंह सूद व श्रीमती चन्द्रप्रभा सूद ने लेखिका को आशीर्वाद प्रदान किया। अन्य अतिथियों में सर्वश्री देवेन्द्र कुमार बहल, आशीष कांधवे, राव मुकुल मानसिंह, आर पी सारस्वत, ब्रजकिशोर वर्मा ‘शैदी’, हरेराम समीप, भगत सिंह, पीयूष सूद तथा सर्व सुश्री कल्पना मनोरमा, कुसुुम सिहं, दिव्या सिंह, वाञ्छा, रीना अग्रवाल आदि के नाम उल्लेखनीय थे। संग्रह का प्रकाशन अयन प्रकाशन द्वारा ही किया गया है। (समाचार प्रस्तुति: ज्योत्स्ना कपिल)

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